आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0160 · भाग 24

गुरु जी, कहा जाता है कि जो तीनों गुणों — सत, रज, तम — से विचलित नहीं होता और दुख-सुख में समान भाव रखता है, वह आत्मज्ञानी के लक्षण हैं। क्या यह सही है?

हां, वो तीनों से मुक्त हो गया होता है — सात्विक से भी, रजोगुण से भी, तमोगुण से भी — और सुख-दुख में समान भाव है। सात्विक गुण भी कब तक है? जब तक आप निर्विकार नहीं होते। निर्विकार हो गए तो तीनों गुणों से परे हो गए; वो अपने आप में हो गया। उस पर किसी भी गुण का प्रभाव नहीं पड़ता। राग-द्वेष से मुक्त हो गया, बात खत्म हो गई।

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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08