आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0161 · भाग 24

गुरु जी, क्या गुरु की पहचान इस भाव से होती है कि जिसे मिट्टी का ढेला और सोना-धन एक समान नजर आता है?

नहीं, ऐसे नहीं कर सकते आप। गुरु की पहचान बस एक ही है — गुरु ज्ञान का प्रतीक है। आपके प्रश्नों के उत्तर से पता चल जाएगा वो गुरु योग्य है या नहीं। जैसे नल पानी दे रहा है — पानी पी के प्यास बुझ रही है तो पता चल सकता है कि इसका पानी सही है; लेकिन नल को देखकर, मशीन लगा के जांच करके कुछ नहीं किया जा सकता। 'गु' मतलब अंधकार, 'रु' मतलब प्रकाश — जिसके अंदर अंतरात्मा को प्रकाशित करने की क्षमता है, वो गुरु है। गुरु वही होता है जो आपके प्रश्नों के उत्तर दे दे, जो आपके संशय को मिटा दे। वैसे तो हर आदमी कह रहा है 'माया है, छोड़ो' — और कहता है मेरे पास लाओ। त्यागी तो सब बनते हैं, इससे कुछ नहीं होगा। एक पागल को भी सोने से मतलब नहीं है — उसके सामने भोजन रख दो, सोना रख दो, वो भोजन करेगा और चला जाएगा। तो क्या इसका मतलब वो आत्मज्ञानी है? नहीं है।

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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08