प्रश्नोत्तर P24-0194 · भाग 24
गुरु जी, तब अंतर्मुखी होकर बस पड़े रहेंगे?
हां, सत्संग के साथ, समझ के पड़े रहो — कि राग, द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, मेरा, कर्ता, समर्पण, श्रद्धा ये सब क्या है। पूरी समझ के साथ जब आप रहेंगे, तभी आपकी अंतर्मुखी यात्रा होगी। अगर बिना समझे ही सब बंद कर दिया, तो आप एकदम घुटन में जिएंगे। सत्संग जीवन में बहुत जरूरी है। सत्संग सुनो और पड़े रहो। बस पड़े रहने के लिए पूरी व्यवस्था कर लो — व्यवस्था हो ही जाती है। आप जैसी यात्रा करोगे, वैसे लोग मिलने लगेंगे।
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वीडियो: अंतर्मुखी कैसे हो ?अंतर्मुखी होने का रहस्य । #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-27