प्रश्नोत्तर P30-0199 · भाग 30
गुरु जी, आपने कहा था योग में जाओ — योग किस हिसाब से होता है?
योग का मतलब होता है अपनी बुराइयों को छोड़ना। क्योंकि जब आप अपनी बुराइयों को छोड़ते हो तो बड़ी तकलीफ होती है — चाहे वह नशा हो, चाहे बुरा-भला बोलने की आदत हो, चाहे किसी को नीचा दिखाना हो, चाहे बड़ा बनने की इच्छा हो, चाहे मान की इच्छा हो, इज्जत पाने की इच्छा हो, सम्मान की इच्छा हो — ये सब हमारी बुराइयां हैं। जब आप इसे छोड़ते हो ना तो बड़ा कष्ट होता है, तकलीफ होती है। तो इसी को योग कहते हैं। अपने को सुधारना योग कहते हैं और अपने को बिगाड़ना भोग कहते हैं। तो यही है भोग और योग। अब आप देखो कि आप किस में लगे हो।
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