प्रश्नोत्तर P31-0020 · भाग 31
गुरु जी, मुझे बताइए — किस तरह से जीवन जीना चाहिए? जीवन जीने की कला क्या है?
जीवन जीने की कला यही है कि हम कुछ करें तो हमारे कुछ करने से किसी को तकलीफ नहीं हो — इसका विशेष ध्यान रखें। इतना अगर आपने ध्यान रखा तो आप जीवन उचित तरीके से जिएंगे, ईमानदारी से जीवन जीते हुए निकल लेंगे। अगर आपने ये भाव रख लिया तो ये आपको कुछ ऐसा करने ही नहीं देगा जो आपके विपरीत हो, समाज के विपरीत हो, परिस्थिति के विपरीत हो; ये भाव ही आपको हमेशा अपने आप में, स्वयं में बना के रखेगा। इस तरीके से अगर आपने जीना चालू किया तो मुक्ति से मोक्ष तक, उस परम सत्ता तक, स्वयं तक आप अपने आप पहुंच जाएंगे — फिर अलग से साधना करने की जरूरत नहीं, आपका जीवन ही साधना हो जाएगा। मुझे वह काम करना है जिसमें मैं जी सकूं, और मेरे काम से अगर मैं किसी को लाभ दे सकूं तो वह भी ठीक है; अगर नहीं दे सकूं तो दुख तो ना दूं। क्योंकि ज्यादातर हम दुख और सुख के चक्कर में परेशान हैं — अपने लिए सुख, दूसरों के लिए दुख। हमारे करने से, बोलचाल से, उठने-बैठने से कितने लोगों को तकलीफ होती है, उसका हम ध्यान ही नहीं रखते।
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वीडियो: जीवन जीने की कला क्या है ? #योगीजी_का_सत्संग #aadhyatmik_satsang #live_satsang · 2024-12-03