प्रश्नोत्तर P5-0193 · भाग 5
मां-बाप क्यों याद दिलाते रहते हैं कि हमने तुम्हें पाला — ऋण क्या है?
मां-बाप कैसे-कैसे पाले हैं, सब याद दिलाते रहते हैं। हम भूखे सोए, तुमको खिला के सुलाया। वो सारा क्यों बताते हैं, पता है? क्योंकि दबे रहो। ऐसे तुम दबे रहो। ऋणी रहो तुम। हम उनके ऋणी रहे। फिर शास्त्रों में ऐसा लिख दिया गया कि मां-बाप का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता। ऋण है ही नहीं। क्योंकि उनके मां-बाप ने भी उनको वैसा ही किया। ऋण नहीं है। ऋण किसी का भी नहीं है।
आपके कर्मों से देखो। कितने लोगों का जन्म हुआ, मां मर गई। क्या वो नहीं पलते? तो यहां हमारे कर्मों से मुझे सब कुछ मिला है। मैं किसी का ऋणी नहीं हूं। मेरे कर्मों के आधार पर मुझे सब फिक्स होकर आया है। अगर मैं बेईमानी ना करूं, तो मैं मुक्त हो जाऊं। क्योंकि सब फिक्स होकर आया है, कि मैं कितना भोगूंगा, कौन-कौन मुझे मिलेगा, कौन-कौन अपमान करेगा, क्या-क्या घटनाएं होंगी। सब पक्का है। अगर मैं बेईमानी ना करूं, तो मुझे ईमानदारी की भी अलग से जरूरत नहीं। क्योंकि ईमानदारी तो मेरे कर्म में है ही। तो मैं अपने पीछे के भोग से मुक्त हो जाऊंगा। मैं किसी का ऋणी नहीं हूं। यहां कोई किसी का ऋणी नहीं।
बस अपने पापों का कर्ज है। जितना कर्म किया है, चाहे अच्छा हो, चाहे बुरा हो, दोनों का फल भोग रहे हैं हम। अच्छा किया हो तो भी, बुरा किया हो तो भी, दोनों का फल भोग रहे हैं। राजा से रंक, रंक से राजा। और राजा-रंक से मुक्त होना है, तो फिर वही करो। सत्कर्म अपना लो, ईमानदारी के साथ। तो मुक्त हो जाओगे।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 23 अगस्त 2026 #योगी · 2026-08-23