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प्रश्नोत्तर P6-0083 · भाग 6

सात्विक, राजसी और तामसी, तीनों गुणों में रहते हुए हर जगह युद्ध क्यों बना रहता है? परिवार में रोज इल्जाम लगते हों, तो साधक को क्या करना चाहिए?

हर जगह युद्ध है। आप युद्ध के मैदान में पूरी तरह खड़े हो। आप कुछ भी हो, चाहे सात्विक हो, तामसी हो, राजसी हो। तीन गुण हैं, तीन प्रवृत्तियां हैं। आप कहीं भी खड़े हो, युद्ध के मैदान में हो। चाहे आप सात्विक हो, तो भी। तामसी हो, तो भी। राजसी हो, तो भी। और तीन में से एक गुण में तो रहना ही पड़ेगा। इससे बाहर भी नहीं रह सकते। जिस गुण में रहोगे, एक गुण में रहे, तो दो तैयार, तुम्हारे दुश्मन। सात्विक में रहे, तो राजसी और तामसी दुश्मन नजर आएंगे। राजसी में रहे, तो सात्विक और तामसी। तामसी में रहे, तो वे दोनों। दुश्मन ही नजर आएंगे। मैंने देखा कि ये तीन गुण हैं, और आपके अंदर तीनों हैं। तीन में से एक में जीना पड़ेगा। तीन में से एक गुण अपनाना पड़ेगा। तो सात्विक गुण अपनाकर निकल लो। राजसी वाला भी ठीक नहीं है। तामसी वाला भी ठीक नहीं है। अब सात्विक अपनाना पड़ेगा, निकलने के लिए। नहीं तो मैं उसको भी छोड़ देता और सीधा निकल ही लेता। लेकिन निकलने वाली स्थिति में है नहीं। तो सात्विक गुण अपना लो, और निकल लो। कभी तौलिया, कभी बांसुरी, कभी इसी में फंसे रहोगे। परिवार भी तो इल्जाम लगा रहा है। तुमने मेरे बारे में क्या बोला? तुमने क्या सोचा? तुम मेरे बारे में क्या सोच रहे हो? आप हर जगह देखो। परिवार में रोज किचकिच हो रही है। एक-दूसरे पर इल्जाम ही तो लगा रहे हो। इल्जाम पर इल्जाम ठोका जा रहा है तुम्हारे ऊपर। लेकिन तुम हो कि भाग नहीं रहे हो। काश भाग जाते। और हमारी तरह, उपलब्ध होकर, फिर उस तौलिया वाले के पास जाते, कि भैया, बता, तौलिया किसने लिया। काश तुम भी घर से निकलकर, उपलब्ध होने के बाद जाते, कि भैया, अब इल्जाम लगाओ। क्योंकि अब मैं इल्जाम के लायक भी नहीं रहा। लगा रहे हैं कि नहीं लगा रहे? लेकिन देखो, आप हो कि निकल ही नहीं रहे हो। तुम्हारे लिए तो एक स्थान भी है। बुला रहा है। आप कितने सौभाग्यशाली हो कि परमात्मा ने आपके लिए एक इंतजाम भी करा दिया है। हमें तो शाम हुई। दिन भर नहीं बोला। उसी के साथ हूं। बोला, यहीं रहो, आराम से। कल चलेंगे। एक गुफा है, वहां आराम से साधना करना। रात होते ही बोल रहा है कि तुम यहां नहीं रह सकते। और आपको बताऊं, उसकी जगह ऐसी थी कि बांस भी मार रहा था। उसे बात पूछने की भी नहीं। दो-चार वरदान मांगता हुआ। दो-चार कपड़े थे। एक ऐसी छोटी सी कुटिया थी, सड़ी हुई। बांस मार रही थी। रात तो बितानी थी, क्योंकि उसने आश्वासन दिया था, गुफा दिखाऊंगा। लेकिन उसमें भी नहीं रुकने दिया। बोला, रात को अकेले अंधेरे में गुफा ढूंढ। तो मैंने यही कहा, आज दिन में बोल दिया होता। आपको तो एक जगह पुकार रही है। जिसे आप गुरु समझ रहे हो, वह पुकार रहा है। मेरे जीवन में यह दोनों नहीं थे। मेरे सामने मुझे कोई पुकार ही नहीं रहा था। सिर्फ भगा रहा था। मुझे पुकारने वाला सिर्फ मैं एक था। मैंने अपना साथ दिया। तो तुम्हें तो एक जगह पुकार रही है। तुम क्यों सह रहे हो? तुम जिसे गुरु समझते हो, वह पुकार रहा है। लेकिन पता नहीं, उसकी पुकार तुम्हें सुनाई नहीं दे रही है। सब लेकर खड़ा है, कि तू आ, अपना आत्मिक कल्याण कर। मैं हूं न। आत्मिक कल्याण की सारी व्यवस्था यहां है। लेकिन तुम हो कि यह पुकार सुन ही नहीं रहे हो। और मैंने सोचा, कोई पुकारे। मुझे कोई पुकारने वाला मिला नहीं।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 31 मई 2026 #योगी · 2026-05-31