JY-0014 · सेवा
जयेश भाई के दो लाख और सहयोग राशि से गाड़ी नहीं
3 सितंबर 2026 · अपनी दिव्य ऊर्जा को कैसे बढ़ाएं? · 2:45:41 से
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मुख्य बातें
- अमेरिका से आए जयेश भाई के दो लाख नकद सुरक्षित रखवाए और जाते वक्त लौटा दिए।
- पर्सनल गाड़ी के लिए 10 लाख का प्रस्ताव आया तो कहा — अभी सोचूंगा; सहयोग राशि समाज-हित के लिए है।
- “मेरा भी भाव घूमने का है, इसलिए सहयोग के पैसे से गाड़ी नहीं ले सकता।”
लौटाया हुआ पैसा
मैं इतनी ईमानदारी से जीता हूं, मैं बता रहा हूं आपको। अभी जयेश जी अमेरिका से दो लाख कैश लेकर आए थे। हमने कहा, हम नहीं लेंगे। वे यहां एक महीना रहे; उनका पैसा मैंने सुरक्षित रखवा दिया और जाते वक्त वापस दे दिया — कि यहां तो नहीं ले सकते, एक सार्वजनिक नंबर दिया गया है, उस पर फोन करना। मैंने तो उस पैसे को कभी खोलकर भी नहीं देखा।
गाड़ी
अभी एक दिन रात को गाड़ी की चर्चा हुई, तो दूसरे दिन एक महिला का फोन आया कि गाड़ी के लिए 10 लाख देना है। मैंने कहा, बोल दो, अभी सोचूंगा, अभी कुछ नहीं बोल सकता। उनके भाव का सम्मान है, लेकिन वो गाड़ी मैं अपने लिए, पर्सनल यूज़ के लिए ले रहा हूं। अगर यह काम के लिए होता, ईमानदारी का पैसा होता, तो 10 लाख क्या, एक करोड़ दो — 100 कमरे बनेंगे, लगेंगे ही।
लोगों ने कहा, सहयोग का पैसा आता है, इससे गाड़ी ले लो। मैंने कहा, ना भैया, उस गाड़ी में हम कदम ही नहीं रख पाएंगे, क्योंकि वो पैसा लोग समाज-सेवा के लिए दे रहे हैं। बोले, आप इसी काम के लिए तो ले रहे हो। मैंने कहा, काम तो है, लेकिन मेरे अंदर एक बार भाव था घूमने का — सत्संग तो करूंगा घूम के, लेकिन मेरा भी भाव घूमने का है, इसलिए सहयोग के पैसे से मैं गाड़ी नहीं ले सकता। मैं उसमें बैठ ही नहीं पाऊंगा, घुटन होने लगेगी।
मेरा पर्सनल खर्चा — कपड़े से लेकर खाट तक — अलग से आता है: या मेरा चैनल चलता है उससे, या कुछ लोग मेरे खर्च के लिए पैसा देते हैं। सहयोग राशि आती है तो मैं समाज-हित में लगाता हूं। एक कपड़े में, एक-एक, दो-दो साल एक कपड़ा पहनता हूं, जितने में जी सकूं उतना भोजन करता हूं — यही मेरा जीवन है।