JY-0021 · खोज
भगवान के लिए कर्ज — पूरा पर्स खाली कर देना
15 जून 2026 · हर मोड़ पर बदलाव है, वही तो ज़िंदगी है · 9:34 से
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मुख्य बातें
- 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम, गंगासागर, शक्तिपीठ — “जितनी मेरी सामर्थ्य है, जाऊंगा।”
- लोग कपड़े, भोजन, परिवार के लिए कर्ज लेते हैं — मैंने भगवान के लिए कर्ज लिया।
- मंदिर में कोई कहता “और चढ़ाओ”, तो पूरा पर्स खाली कर देता।
खोज की जिज्ञासा
जितनी मुझे जानकारियां थीं, कई तरह की साधनाएं कीं। फिर मैंने कहा, चलो भगवान-परमात्मा का घर — 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम, गंगासागर, 51 शक्तिपीठ (42 भारत में हैं, बाकी दूसरे देशों में) — जितनी मेरी सामर्थ्य है, मैं जाऊंगा; यह न हो कि मैं यहां नहीं गया। आखिर वह कहां है?
जाता गया, जाता गया — अपनी सामर्थ्य से, यहां तक कि कर्जे लेकर भी। इतनी जिज्ञासा मेरी थी कि व्यक्ति अपने कपड़े, भोजन, परिवार के लिए कर्ज लेता है, मैंने भगवान के लिए कर्ज लिया, कि कैसे भी वह मिल जाए।
किसी मंदिर में भी जाता था और वे बोलते, और चढ़ाओ, तो मैं पूरा पर्स ही खाली कर देता था — ये लो, देखो, पर्स में अब कुछ नहीं, और मैं अब जा रहा हूं। मेरा भाव बस इतना था कि यार, कैसे भी मिल जा, तेरे लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं; जितनी मेरी समझ है, जितना लोग बता रहे हैं, वह मैं करूंगा।