आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

क्रोध — योगी गुरु जी के प्रश्नोत्तर

इस पृष्ठ पर “क्रोध” विषय से जुड़े 64 प्रश्न हैं, जो जिज्ञासुओं ने सत्संग में योगी गुरु जी से पूछे। किसी प्रश्न पर क्लिक करके योगी गुरु जी का पूरा उत्तर उनके अपने शब्दों में पढ़ें, वीडियो के साथ।

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  1. गुरु जी, आज तो आप दुर्वासा ऋषि हो गए (बहुत क्रोध में बोले)। (P1-0032)
  2. मैं पढ़ने बैठता हूं और हॉर्न की आवाज आ जाए या कोई खांस दे, तो पढ़ाई से मन हट जाता है और गुस्सा आ जाता है। उपाय बताएं। (P1-0068)
  3. कोई व्यक्ति कुछ गलत बोलता है तो मुझे बहुत गुस्सा आता है। मुझे क्या करना चाहिए? (P1-0095)
  4. गुरुदेव, मैं काम, क्रोध, मद, लोभ — इन चारों में फंसा हूं। निकलने का प्रयास कर रहा हूं, लेकिन निकल नहीं पा रहा। (P1-0126)
  5. गुरुदेव, आपको इतना गुस्सा क्यों आता है? (P2-0049)
  6. (लाइव) गुरु जी, आज घर पर दो जने भंडारे के लिए चंदा मांगने आए; घरवाली ने कहा हम चंदा नहीं देते, तुम झूठ बोलकर लेते हो, पता नहीं कहां लगा देते हो। फिर उन्होंने 20 रुपए दे दिए, मगर गुस्से के भाव में। मैंने कहा — या तो खुश होकर दिया करो या मना कर दिया करो। क्या यह गलत है? (P3-0130)
  7. गुरु जी, दो-तीन महीने साधना से लग रहा है कि मैं काम-क्रोध से दूर जा रहा हूं; अकेले में लगता है मैं कंट्रोल कर सकता हूं, लेकिन जैसे ही उस परिस्थिति के बीच आते हैं, कंट्रोल नहीं रहता, हम उसके वश में चले जाते हैं — अपने आप कुछ घटित हो जाता है। उस समय क्या करें? मन (माइंड) को कैसे कंट्रोल करें, और काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह से कैसे छूटें? (P3-0152)
  8. (लाइव) प्रणाम गुरु जी। अगर कोई लगातार गलत करता रहे तो बहुत बार न चाहते हुए भी क्रोध आ ही जाता है। उस क्रोध से कैसे मुक्ति पाई जाए? (P4-0102)
  9. मलिन विचार आते हैं, साधना-पूजा में तकलीफ — क्या करें? डर का सामना, क्रोध निवारण, प्रेम कैसे आए? (P5-0098)
  10. गुस्सा कैसे खत्म करें? (P5-0116)
  11. परिवार/लोग विवश-परेशान करें तो क्या? बंधन कैसे बनता है? उकसाने पर क्रोध क्यों? (P5-0121)
  12. सेवा में गुस्सा आ जाए / गलती हो जाए तो क्या? (P5-0138)
  13. जब एक मिनट के लिए चुपचाप बैठ जाता हूं और शरीर से कोई कर्म नहीं कर रहा, तब भी विचार अपने आप अतीत में चले जाते हैं या भविष्य की कल्पना में। किसी ने गुस्सा दिलाया या चोट पहुंचाने की कोशिश की, एक मिनट में वह अतीत हो गया, और विचार अपने आप बनते चले जाते हैं। मैं कुछ नहीं कर रहा, मन क्रिया कर रहा है। अगर मैं कहूं कि मैं इसका दृष्टा हूं, तो यह भी धोखा लगता है, क्योंकि प्रश्न भी मन उठा रहा है और उत्तर भी मन दे रहा है। मन निमित्त है, तो प्रश्न कौन उठा रहा है? कई बार साइलेंट में बैठने पर अनुभव सा होने लगता है, फिर लगता है यह भी धोखा है, मन बार बार धोखा देता है। सृष्टि में आने के बाद से हम अपने आप को भूल गए, ऐसा लगता है। बोलने को शब्द नहीं मिलते। क्या शब्दों का सहारा लिया जाए, और बोला क्या जाए? (P6-0040)
  14. योगी जी नमन। जब मैं सत्संग सुनता हूं तो मेरी पत्नी मेरे पास आकर बच्चों को आवाज देती है, तो मुझे गुस्सा आ जाता है। मैं उससे कैसे बचूं? (P6-0056)
  15. मुझे गुस्सा बहुत आता है। क्या करूं? (P6-0091)
  16. समाज पर लोग बहुत अत्याचार करते हैं। बड़े लोग कमजोर लोगों को दबाकर अपनी मनमानी चाहते हैं। इन चीजों को देखकर बहुत गुस्सा आता है। मार्गदर्शन करें। (P6-0132)
  17. समाज और परिवार के लिए व्यक्ति सब कुछ करता है। खाना हो तो पहले परिवार खाए, कपड़ा हो तो पहले परिवार पहने, और फिर भी सहना उसे खुद पड़ता है। उस समय गुस्सा आता है, उसे पीना और कंट्रोल करना पड़ता है। क्या ये गुस्सा हमारा स्वभाव है? गुस्सा क्यों आता है, जब हम कुछ कर रहे होते हैं और परिणाम नहीं आ रहा? परिवार को सौ प्रतिशत देते हैं, हमसे अच्छा खाने और पहनने को देते हैं, पर कहते हैं वो काम मत करना जो बहुत दुखाता है। तब गुस्सा होता है, नाराजगी होती है। कितनी बार कोई ये सहेगा? एक दिन टूट जाएगा, रोते हुए कहेगा, जैसे जीना है जियो। न अलग हो सकता है, न हिला सकता है। अगर समझाने के बाद भी कोई छत से कूदने की बात करता है, जानकर खतरा मोल लेता है, तो उस स्थिति में क्या करना चाहिए? (P7-0078)
  18. घर पर थोड़ा बोलो तो गुस्सा आ जाता है। बाहर कोई बोल दे तो टाल देते हैं। ऑफिस में अफसर डांटते थे तो हंसते हुए निकल आता था। घर पर इधर उधर घूमकर समय बरबाद करते हैं, इससे अच्छा कोई बुनियादी काम करो, यह कहने पर बुरा लग जाता है। मैं समय का पक्का हूं। बाहर खा पीकर आते हैं। आप कहते हो खिलाने वाले बनो, तो कोई कह देता है हम क्यों खाएं। इस गुस्से और इस समय को कैसे देखें? (P7-0099)
  19. जब मैं अपनी स्थिति में कार्य को सही तरीके से कर रहा हूँ, और वहाँ कोई मुझे रोकता है, तो मुझे क्रोध आ जाता है, बहस हो जाती है। मैं अपनी स्थिति को कैसे बनाए रखूँ? (P7-0115)
  20. दूसरा संदेह यह है कि आपने मिस्त्री को डांटा। डांटने से मेरे अंदर संदेह पैदा हो गया कि गुरु ऐसे डांटते हैं। वह अच्छा नहीं लगा। गुरु को ऐसा क्रोध क्यों करना पड़ता है? (P7-0146)
  21. अहम भाव को पूरी तरह कैसे खत्म करें? आपने कहा था कि दूसरों से अपने हिसाब से काम लेने की उम्मीद छोड़ दो, उससे आधी समस्या हल हुई। पूरी तरह अहम कैसे मिटे? काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह में काम किसे कहते हैं, कामना को या वासना को? मोह और लोभ किस स्थिति में होते हैं? इन्हीं दो पर सबसे ज्यादा संदेह रहता है। (P7-0152)
  22. बोलने की आदत बहुत थी, अब कम हुई है। फिर भी ऊंचा बोलता हूं, तो साथ वालों को लगता है कि गुस्से में हूं। अंदर से दबाव डालने का भाव नहीं है, बस आवाज ऊंची है। क्या यह गुस्सा है? (P7-0160)
  23. मैं अपने आप पर काम कर रही हूं। आपका वीडियो देखकर जीवन में परिवर्तन आया है, लेकिन क्रोध एकदम से नहीं गया। गलत जगह ज्यादा बोल देती हूं, फिर पता चलता है, दिमाग शांत हो जाता है। क्या करें? (P8-0082)
  24. गुरु जी, क्या आप जैसे मुक्त पुरुषों को भी काम, क्रोध, लोभ सताते हैं? (P10-0076)
  25. गुरुदेव, डॉक्टर ने कहा कि हकलाहट कम करने के लिए बोलना शुरू करना होगा। क्या मैं लोगों के विचारों पर तर्क-वितर्क कर सकता हूं, ताकि वे मुझे गुस्से में हकला कहें और धीरे-धीरे मेरी हकलाहट खत्म हो जाए? (P10-0088)
  26. क्या क्रोध में प्रतिक्रिया देना जरूरी है या नहीं? (P11-0042)
  27. घर-परिवार या ग्रुप में किसी को बार-बार बोलते हैं, वह समझता नहीं, और उसे हटा भी नहीं सकते। बहुत गुस्सा आता है। क्या करें? (P11-0086)
  28. जिनको आत्मज्ञान हो चुका है, क्या उन्हें भी क्रोध आता है? (P11-0090)
  29. काम और क्रोध का आपस में क्या संबंध है? (P11-0114)
  30. गुरु जी, पहले नाम जप करते थे, सिमरन-वाणी पढ़ते थे, तो अहंकार आ जाता था; काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार उसके अंदर ही चलते थे। लेकिन आपके ज्ञान को अपनाते हैं तो इनका बल क्षीण होने लगता है — यह मैंने महसूस किया; स्वभाव बदलने की कोई कोशिश भी नहीं करनी पड़ती। (P13-0039)
  31. (एक साधक, परिवार के साथ) गुरु जी, मैं सत्संग भी समझता हूं, और गुटखा का सेवन भी करता हूं — यही चूक हो रही है। (पत्नी:) हम दो-तीन साल से बोल रहे थे पर बात नहीं सुनते थे; ज्यादा बोला तो गुस्सा करते थे, इसलिए छह महीने से यह टॉपिक ही बंद कर दिया। (P13-0068)
  32. गुरु जी, क्या मात्र अंतर्मुख होकर अपने विचारों को देखने से आसक्ति, द्वेष, काम, क्रोध, अहंकार समाप्त हो सकते हैं, या साथ में ईमानदारी-सत्कर्म भी हो? (P13-0179)
  33. गुरु जी, "कुछ नहीं चाहिए" की स्थिति में अगर हम किसी व्यक्ति पर क्रोध करते हैं, तो क्या वो भी प्रेम कहा जाता है? (P13-0183)
  34. गुरु जी, ऑफिस में सबको अपना-अपना काम दिया जाता है और हमें दिखता है कि कौन अपना काम नहीं कर रहा। अंदर से मानसिक क्रोध आता है, पर कॉर्पोरेट कल्चर में दिखा नहीं सकते। उस स्थिति में हम उस व्यक्ति के साथ प्रेम से कैसे रहें? और शिकायत करें तो इंक्वायरी में भी बहुत पक्षपात होता है। (P13-0184)
  35. गुरु जी, आपने बताया था कि आत्मज्ञान के बाद क्रोध और काम रहता है, और आत्मज्ञान से ब्रह्म की यात्रा होती है। क्या यात्रा पूरी होने के बाद ये काम-क्रोध भी चला जाता है, या रहता है? (P14-0025)
  36. गुरुदेव, व्यक्ति एक पल में महात्मा और अगले पल में राक्षस कैसे बन जाता है? मैं स्वयं को जहां तक हो सके शांत रखना चाहता हूं, लेकिन अचानक कभी दूसरों की वजह से गुस्सा होने से मैं राक्षस हो जाता हूं। ऐसा क्यों? (P14-0028)
  37. जब कोई उम्र में मुझसे छोटा मुझे ज्ञान देता है या तर्क-वितर्क करता है, तो मुझे अंदर से बहुत गुस्सा आता है — कैसे कंट्रोल करें? (P15-0085)
  38. गुरुदेव, देखा गया है कि बालक में भी, जिसको अभी उतना बोध नहीं है, क्रोध-लालच दिखते हैं; पशुओं में भी। कई बालक बांटने को तैयार होते हैं, कई नहीं होते। यह कहां से आता है? (P15-0116)
  39. गुरु जी, काम, क्रोध, मोह, लोभ — ये सब आत्मज्ञान के बाद खत्म होते हैं या फिर ब्रह्मज्ञान के बाद? (P15-0137)
  40. क्रोध को कैसे शांत करें, गुरु जी? (P15-0155)
  41. काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ की व्याख्या क्या है? (P15-0164)
  42. गुरुदेव, मुझे क्रोध बहुत आता है — लगता है खून कर दूं। समाज में कोई गलत होता है तो मुझे मारने का मन करता है। क्रोध से बाहर कैसे निकलें, क्रोध को कैसे समझें? (P17-0061)
  43. गुरु जी, कई संत जानबूझकर अपने आप को ऐसी स्थिति में डालते हैं कि लोग उन पर क्रोध करें, ताकि देखें कि उनका अपना व्यवहार क्या रहता है — क्या ऐसा होता है? (P17-0124)
  44. गुरु जी, क्रोध और ईर्ष्या पर संयम कैसे प्राप्त करें? (P17-0161)
  45. गुरु जी, आप सालों से लोगों के प्रश्नों के उत्तर दे रहे हैं और एक ही प्रश्न हजारों बार आता होगा — क्या आपको गुस्सा या इरिटेशन नहीं होती? हमें तो तीन बार कोई एक बात पूछे तो झुंझलाहट होती है। (P18-0127)
  46. गुरु जी, गुस्सा बहुत आता है, इसको कैसे कम करूं? (P18-0198)
  47. गुरु जी, क्या आत्मज्ञानी पुरुष को क्रोध आता है? और क्या ज्ञानी अपने क्रोध को जांचता रहता है कि वह लिमिट से बाहर ना जाए? (P19-0140)
  48. गुरु जी, आप गलती पर डांटते हैं तो गुस्सा आता है, दिल को लगता है, रोना आता है — उससे कैसे बाहर निकलें? (P20-0102)
  49. गुरु जी, हंसने, रोने, गुस्से में हॉर्मोन रिलीज होते हैं — ध्यान में बिना कुछ किए जो गहरा नशा-सा, सिर्फ "हूं" का एहसास होता है, क्या वह भी हॉर्मोन या माइंड का गेम है? (P20-0154)
  50. किसी ने कुछ किया, गुस्सा आया, हॉर्मोन रिलीज हुआ और हाथ उठ गया — गुस्सा अंदर से आता है या बाहर से? (P20-0155)
  51. समझ से गुस्सा छोड़ दिया था, फिर भी दोबारा आ जाता है और बाद में पता चलता है — ऐसा क्यों? (P20-0157)
  52. गुरु जी, कमरे में बैठकर आपका सत्संग सुनता हूं और कोई बीच में बोल पड़े या आपकी बात में टोक दे तो गुस्सा आता है — ये गुस्सा कहां से आता है? (P21-0113)
  53. गुरु जी, मेरे घर में सभी लोगों की भाषा कटु वचन वाली है, जिसके कारण अशांति और क्रोध रहता है — मुझे क्या करना चाहिए? (P22-0023)
  54. गुरु जी, कभी-कभी मन में बहुत लड़ाई — इंटरनल वॉर — होती है; जाना इस तरफ है पर उस तरफ खींचता है, इतना कन्फ्यूजन होता है कि समझ नहीं आता क्या करूं, तो मैं बहुत चिल्लाती हूं; कभी-कभी गुरु से भी गुस्सा आता है। फिर थोड़ी देर बाद अपने को ऑब्जर्व करती हूं तो समाधान मिल जाता है — यह क्या है? (P22-0046)
  55. गुरु जी, गुस्से पर कंट्रोल कैसे करें? (P22-0080)
  56. महात्मा जी, गुस्सा क्या है? (P22-0081)
  57. गुरु जी, आप कहते हैं आत्मज्ञानी में काम-क्रोध होता है — क्रोध का अर्थ तो समझ में आया, पर काम का अर्थ समझ में नहीं आया। (P22-0192)
  58. गुरु जी, जैसे आपने कहा कि अपनी इच्छा के अनुसार कोई चीज नहीं मिलती तो हमें गुस्सा आता है। अब एक परिवार में जैसे पांच लोग हैं, उसका जो मुखिया होगा वह तो चाहेगा ही कि मेरे हिसाब से काम हो — जरूरी भी है, क्योंकि कुछ काम उसके हिसाब से ही सही होते हैं। नहीं होगा तो उसे गुस्सा आएगा। इस परिस्थिति में क्या करें? (P23-0067)
  59. गुरु जी, एक भाषा में कहा जाए तो मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, काम, क्रोध, लोभ — ये सब शरीर में हैं? कुछ लोग अंतःकरण चतुष्टय बताते हैं — मन, बुद्धि, चित्त और आखिर में अहंकार — कि अहंकार नष्ट किए बिना सर्वेश्वर तक नहीं पहुंचोगे। (P23-0103)
  60. गुरु जी, जब माता-पिता के भीतर संतान के लिए प्रेम न होकर केवल धन का लालच और क्रोध रह जाए, तो अपनी मानसिक शांति के लिए उनसे दूरी बनाना सही है या गलत? (P23-0138)
  61. गुरु जी, बच्चे या पत्नी कुछ उल्टा-सीधा बोलते हैं, करते हैं, तो गुस्सा आता है — कृपया मार्गदर्शन करें। (P24-0114)
  62. गुरु जी, बच्चों को अच्छी बातें सिखाते समय बच्चे सीखना नहीं चाहते, टालते रहते हैं, तो क्रोध आता है। क्या करें? (P24-0138)
  63. गुरु जी, अब उस व्यक्ति की नजर से देखें — जिसने पैसा लिया और स्थिति-परिस्थिति के कारण दे नहीं पा रहा, और देने वाला क्रोध में है कि सब काम कर रहे हो, हमारा ही देने के लिए नहीं है। इस सिचुएशन में क्या लेने वाला गलत है? (P24-0184)
  64. गुरु जी, काम-धंधे में तो मैं ही जिम्मेवार हूं, पर परिवार में बच्चे, पत्नी, भाई-बंधु भी जीवन को प्रभावित करते हैं। बच्चा ठीक रास्ते पे नहीं चल रहा, मेहनत या पढ़ाई नहीं कर रहा, तो उसे समझाने के लिए गुस्सा भी आता है। तब क्या करें? (P25-0097)