नाम और जप — योगी गुरु जी के प्रश्नोत्तर
इस पृष्ठ पर “नाम और जप” विषय से जुड़े 52 प्रश्न हैं, जो जिज्ञासुओं ने सत्संग में योगी गुरु जी से पूछे। किसी प्रश्न पर क्लिक करके योगी गुरु जी का पूरा उत्तर उनके अपने शब्दों में पढ़ें, वीडियो के साथ।
- गुरु जी, मैं सद्गुरु के कहे अनुसार दिन में 14–20 माला जप करता हूं, लेकिन मन अभी भी अशांत है। (P1-0182)
- गुरु जी, प्रणाम। गुरु की सेवा करते हुए नाम जप नहीं हो पाता; उस स्थिति में दोनों का फल एक ही है या फर्क है? (P2-0148)
- (लाइव) गुरुदेव प्रणाम। जैसे नाम जप वाले कहते हैं कि पूरे दिन नाम जप करो तो एक दिन परमात्मा से मिलन हो जाएगा — तो गुरु जी, आपका क्या मार्ग है जो पूरे दिन किया जा सके और मुक्ति मिल जाए? (P4-0044)
- (वही साधक) गुरुदेव, एक श्लोक में कहा गया है — 'कोटि नाम संसार में, ताते मुक्ति न होय; आदि नाम जो गुप्त जपे, बूझे बिरला कोय।' इसका मतलब — वो आदि नाम क्या है? (P4-0133)
- (वही साधक, पेंशनर) मैंने निरंतर नाम जाप भी किया, 18–20 घंटे सीताराम जपता था, फिर भी विचार नहीं बदले। फिर किसी के सत्संग से सांस पर ध्यान करना सीखा — वो कुछ समय के लिए काम करता है, शरीर के विकार भी सुधरते हैं, लेकिन परमानेंट नहीं। और आत्मिक चिंतन में आंख बंद करके क्या करना है? (P4-0134)
- (वही साधिका) एक ज्ञान मार्ग है, एक भक्ति मार्ग। भक्ति मार्ग के लोग अंधविश्वास में पड़ते हैं, ज्ञान मार्ग में पूजा-पाठ, मंत्र-जप, टीका कुछ नहीं। पर विवेकानंद ज्ञानी थे, रामकृष्ण परमहंस भक्ति मार्ग के — दोनों में भेदभाव नहीं था। हम इसी उलझन में पड़ते हैं कि कौन श्रेष्ठ है; मेरा तो भक्ति मार्ग से भरोसा ही उठ गया है। (P4-0197)
- प्रत्यक्ष ज्ञान क्या है? यह किस प्रकार सबके लिए सरल है? क्या इसे अपनाने के बाद किसी गुरु मंत्र, नाम, जप या योग की जरूरत नहीं रहती? (P6-0071)
- अगर एक व्यक्ति केवल फोटो लगाकर माला जपे और दूसरा काम में हाथ बंटाए, तो प्रसन्नता किस पर होगी? शरीर मिल जाने से ही क्या मनुष्य हो गए? मानव और जानवर में क्या अंतर है, और बेईमानी से फंसे हुए को छुटकारा कैसे मिलता है? (P6-0079)
- बिना गुरु के नाम जप सफल होगा कि नहीं? गुरु किया नहीं है, तो पहले यह समझना है कि गुरु आखिर है कौन। मैं गृहस्थ जीवन में हूँ। क्या स्त्री को गुरु दीक्षा और मंत्र की जरूरत है? गुरु किए बिना मंत्र कौन सा लूँ? कृष्ण को जगतगुरु मानती हूँ। क्या ऐसा भी है कि जब कुछ नहीं चाहिए, तभी गुरु मिलता है? (P6-0147)
- नाम जप एक प्रकार का ध्यान ही है। इसे क्यों करना चाहिए? (P7-0048)
- नाम जप साधक के लिए क्या काम करता है? मैंने पढ़ा है, अनुभव नहीं है। क्या नाम जप गलत कामों से बचाता है? संतों ने कहा है कि आत्मा नीचे धंसी पड़ी है, ऊपर आकर तीसरे तिल, आज्ञा चक्र पर आती है, और वहां परमात्मा में लीन हो जाते हैं। गुरु नानक देव जी बार-बार नाम जपने को कहते हैं। नाम, शब्द क्या है? (P7-0144)
- भक्ति मार्ग में भी सत्कर्म और अच्छाई करनी पड़ती है, नाम जप के साथ? (P8-0102)
- मुझे अपने गुरुदेव द्वारा दिए गए मंत्र और नाम से त्रुटि का भाव हो गया है, और मैं स्वप्न में किसी संत द्वारा दिए गए नाम को जपता हूं। क्या मुझे गुरुद्रोह का पाप लगेगा? (P9-0051)
- जो मंत्र उन्होंने दिया, उसी रूप में, उस मूल मंत्र के मूल स्वरूप में मैं जपता हूं। क्या मैं उचित कर रहा हूं, या यह अपराध है? (P9-0053)
- आप किसका नाम जप करते हो, महाराज जी? (P10-0043)
- गुरु जी, क्या नाम जप करते हुए कर्म करने से अपने आप मान की इच्छा नहीं आएगी? (P10-0080)
- गुरुवर, मैंने एक-दो साल पहले शिव नाम जप शुरू किया था, और आगे बढ़ते-बढ़ते मुझे अपने स्वभाव की असलियत पता चली और मैं डर गया। तब से भाग रहा हूं। अब मैं उलझ चुका हूं। क्या फिर से शुरू करूं? (P10-0136)
- मैं अकेले में विचार देख रहा था, तो देखा कि मैं खुद ही गलत विचार कर रहा था। पता चलते ही मैंने नाम जप किया और ध्यान डायवर्ट हो गया। क्या यह नॉर्मल है? (P11-0132)
- महात्मा कहते हैं कि पत्नी-बच्चे पिछले जन्म के कर्मों के अनुसार मिलते हैं, जिम्मेदारी पूरी करते हुए नाम जप करते रहो। आपका मार्गदर्शन? (P11-0191)
- सत्कर्म-ईमानदारी करते हैं, आपके सत्संग सुनते हैं, ध्यान में बैठते हैं — तो क्या गुरु मंत्र जपना जरूरी है? (P12-0080)
- गुरु जी, मुक्ति के लिए जप जरूरी है क्या? (P12-0195)
- "नाम जपूं ना हरि भजूं, मुख से कहूं ना राम; मेरा साईं मो को भजे, तब पाऊं विश्राम" — गुरुदेव, यह दोहा आप पर सार्थक होता है। (P13-0010)
- गुरु जी, पहले नाम जप करते थे, सिमरन-वाणी पढ़ते थे, तो अहंकार आ जाता था; काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार उसके अंदर ही चलते थे। लेकिन आपके ज्ञान को अपनाते हैं तो इनका बल क्षीण होने लगता है — यह मैंने महसूस किया; स्वभाव बदलने की कोई कोशिश भी नहीं करनी पड़ती। (P13-0039)
- महाराज जी, मैंने आपका एक वीडियो देखा था जिसमें आपने कहा था कि राजा को पकड़ लो — सहस्रार चक्र को — और सबको छोड़ दो। मुझे लगा कि 'मैं' से बंधन है और 'मैं' से ही मुक्ति है। जब अपने 'मैं' को हटा देते हैं और परमात्मा का भाव आ जाता है, तो शुरू-शुरू में थोड़ा अनकंफर्टेबल फील होता है। जब उस तत्व पर, उस परमात्मा वाले में पहुंच जाते हैं, तो क्या उसके बाद नाम जप, मंत्र जप या किसी चीज की जरूरत होती है? (P13-0057)
- गुरु जी, नाम जप नहीं कर पा रहा हूँ, क्या करूँ? (P14-0180)
- नाम जपने की विधि बताने की कृपा करें। (P14-0184)
- गुरु जी, परमात्मा की याद तो हर वक्त बनी रहती है पर नाम जप नहीं कर पा रहा — ज्ञान मार्ग बताएँ। (P14-0185)
- गुरु जी, जप से कुछ असर नहीं होता, इसका मतलब मेन चीज़ कर्म से होती है? (P15-0020)
- नाम जप के ऊपर कुछ दो-चार वाक्य बोलिए। (P15-0089)
- गुरु जी, नाम जप कैसे बढ़ाएं? (P15-0169)
- ना चाहते हुए भी विचार में गड़बड़ होती रहती है। जो चीज आज तक सीखी है उसे छोड़ना चाहते हैं, पर बार-बार आदत से वही आ जाती है — जैसे स्वास पर नाम का सुमिरन मिला था, अब ध्यान में बैठता हूं तो वह अपने आप चालू हो जाता है। यह छूटेगा कैसे? (P15-0190)
- गुरु जी, "दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करे ना कोय; जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय" — वह सुख, वह सुमिरन क्या है? (P16-0009)
- (लाइव) नाम जप की महिमा के बारे में बताइए। (P16-0169)
- (लाइव) भगवान के नाम जप में मन क्यों नहीं लगता? (P16-0173)
- गुरु जी, अब तक माला-जप, ध्यान सब किया, ऋषिकेश, बनारस, अयोध्या, द्वारका, उज्जैन सब तीर्थ और आश्रम घूमे, पर मन नहीं लगा। अब क्या करना है? (P17-0110)
- गुरु जी, मैं ध्यान हटाकर सिर्फ नाम पर केंद्रित होकर निरंतर नाम जप कर रहा हूं और सोच को रोक रहा हूं — क्या यह सही है? इसका क्या परिणाम होगा, या यह भटकाव है? (P18-0046)
- गुरु जी, कहा जाता है कि नाम जप से मन पर ठहराव आता है — क्या नाम जप से विचार रुक जाते हैं और पिछले कर्म कटते हैं? (P18-0047)
- गुरु जी, क्या नाम जप से कर्म जल्दी भोगने को मिलता है? (P18-0050)
- गुरु जी, क्या अगले कर्म और पिछले कर्म होते हैं? और क्या ईमानदारी और नाम जप से प्रेम में रोमांचित होने से पिछले कर्म भस्म हो जाते हैं? (P18-0071)
- गुरु जी, छह वर्षों से गुरु-मंत्र का जप और उपवास कर रहा हूं, एक वक्त सिर्फ शहद-दूध लेता हूं — क्या मैं सही मार्ग पर हूं? (P19-0185)
- गुरु जी, पश्चिम केवल कर्म करके अमीर है पर वहां परिवार और शांति नहीं, और यहां केवल नाम-जप में गरीबी आ रही है — बीच का रास्ता क्या है? (P20-0049)
- गुरु जी, बाहरी दुनिया में बहुत सारी साधनाएं होती हैं — जप, दीक्षा देकर साधना पथ पर चलाना। ईमानदारी और सत्कर्म से साधना कैसे हो सकती है, ये मेरी समझ में नहीं आ रहा — साधना और सत्कर्म दोनों कैसे हैं? (P21-0177)
- महात्मा जी, मैं जब भी परमात्मा का नाम जप करता हूं या ध्यान में होता हूं तो मुझे अपने गुरु के प्रति बुरे विचार आते हैं; ऐसा बार-बार होता है। ऐसा क्यों होता है? मैं इससे मुक्त होना चाहता हूं। (P22-0021)
- गुरु जी, मैं एक साल से रोज 13,000 नाम जप कर रहा हूं; अपना कल्याण कैसे करूं? मुझे मोक्ष प्राप्त करना है, कैसे करूं? (P22-0074)
- गुरु जी, मैं पूजा करती हूं, माला जपती हूं, कॉपी में पेन से राम-राम लिखती हूं — क्या ये लिखना सही है? (P22-0134)
- महाराज जी, वाल्मीकि जी अगर उल्टा ही नाम जप रहे थे, लेकिन कुछ ना कुछ कर तो रहे थे ना — एकाग्रता के साथ कुछ कर रहे थे। (P23-0001)
- तो इसका मतलब महाराज जी, फिर उसके दो पक्ष हो गए — एक तो उन्होंने कर्म को छोड़ दिया, और दूसरा जप को अपनाया? यानी पहले वाले को पूरी तरह करके, उसे अपना आधार बनाकर, तब वे दूसरे वाले की तरफ गए? (P23-0002)
- गुरु जी, क्या सिमरन और ध्यान एक हैं? हम जिस गुरु की शरण में हैं उन्होंने ध्यान करने से मना किया है, केवल सिमरन बताया है — क्या यह सही है? (P23-0070)
- गुरु जी, कहा जाता है कि नाम के समान कुछ नहीं है, नाम से पाप छूट जाते हैं। तो क्या नाम जप ही मूल है? (P23-0166)
- गुरु जी, क्या प्रारब्ध को पूरा भोगना पड़ता है, या कर्मफल भोगे बिना नष्ट भी हो जाते हैं? क्या ईश्वर भक्ति, नाम जप से प्रारब्ध के बुरे कर्मफल को बदला या नष्ट किया जा सकता है? (P24-0034)
- गुरु जी, पहले जानकारी के अभाव में मैंने इच्छा-पूर्ति के लिए पूरी कोशिश से नाम जप किया, धुनों का रसपान किया। अब जब मैं खुद को गहराई से देख रहा हूं, तो वही पुराना प्रयास और वो धुनें बीच-बीच में आकर मुझे भटका रही हैं। इसे कैसे काटूं? (P24-0167)
- गुरु जी, बुरे कर्मों का फल तो किसी भी साधक या मनुष्य के लिए भोगना जरूरी है, वरना प्राप्ति में दूरी हो सकती है? सोच यह भी रहती है कि माला जपेंगे, पूजा-पाठ करेंगे तो जो जोर का पड़ने वाला है वह धीमा पड़ेगा। (P26-0075)