आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

पूजा और धर्म — योगी गुरु जी के प्रश्नोत्तर

इस पृष्ठ पर “पूजा और धर्म” विषय से जुड़े 70 प्रश्न हैं, जो जिज्ञासुओं ने सत्संग में योगी गुरु जी से पूछे। किसी प्रश्न पर क्लिक करके योगी गुरु जी का पूरा उत्तर उनके अपने शब्दों में पढ़ें, वीडियो के साथ।

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  1. निंदा करने वालों के बीच कैसे बचे रहें, जबकि कर्म-धर्म उन्हीं के साथ निभाना है? (P1-0114)
  2. गुरुदेव, मां के साक्षात्कार के लिए क्या मुझे अलग से पूजा-पाठ, कर्मकांड, साधना आदि करने होंगे, जैसे आपने किए? या केवल आपके बताए मार्ग पर चलते रहने से ही मुक्ति हो जाएगी? (P2-0078)
  3. धार्मिक भी और गृहस्थी भी अच्छे से निभाना चाहने वाला व्यक्ति कई बार धर्मसंकट में फंस जाता है — वह ऐसा निर्णय चाहता है जो सबके हित में हो, जिसमें उसका निजी स्वार्थ न हो, वह निर्लेप भी रहे और कर्तव्य भी निभ जाए; पर तय नहीं कर पाता कि क्या सही है। अच्छे सलाहकार भी आजकल मिलते नहीं — या चापलूसी करते हैं। ऐसे व्यक्ति को निर्णय कैसे लेना चाहिए? (P2-0189)
  4. असली-नकली जरूरतमंद पहचान मुश्किल; धर्म का डर — दान न करूं तो भगवान नाराज / करूं तो फंसूं। डर कैसे निकाले? (P3-0033)
  5. साधक गुरु के प्रेम-ज्ञान से भरकर कुछ अर्पण करना चाहे — कंबल आदि वस्तु या भाव — तो गुरु को क्या दे कि वह भाव पूजा बन जाए? व्यक्तिगत गुरु को क्या चाहिए? (P3-0035)
  6. अज्ञान में फोटो पूजा सालों — पाप/कर्म से गुरु मिलेगा? अपराध के बाद गुरु मिलेगा? गुरु क्या करेगा? (P3-0059)
  7. अदृश्य/पुराने गुरु की फोटो-मूर्ति से पूजा — क्या काफ़ी? जीवंत गुरु क्यों चाहिए? (P3-0063)
  8. एक साधक ने अनुभव बताया: दीपावली पर पूजा के लिए रखी नए नोटों की गड्डी सत्संग सुनकर निकाली और एक जरूरतमंद को नया नोट दिया, तो देने और लेने दोनों में भाव बहुत पवित्र हुए। फिर प्रश्न — घर या आश्रम में जाकर दान लिखवा आते हैं, तो वह सत्कर्म में आता है या किस कर्म में? (हमारा किराने का बिजनेस है, ज्यादातर ऐसी जगह अनाज भेज देते हैं।) (P3-0107)
  9. (लाइव) क्या मंदिर जाना, घर पर पूजा करना या हनुमान चालीसा पढ़ना — ये सब कर्म करने से जीवन में कुछ घटित होगा? (P3-0137)
  10. जब सब तुम में ही है तो क्या चाहिए? अगर मैं सीधा अपने आप में आ सकता हूं तो इतनी विधियां क्यों? और एक व्यक्ति रोज दो घंटे ध्यान-पूजा-पाठ करता है, दूसरा ईमानदारी से कर्म करते हुए वे दो घंटे जरूरतमंद की सेवा में लगाता है — दोनों ईमानदार हैं, तो पहले कौन पहुंचेगा? (P3-0153)
  11. (कुटिया में, 62 वर्षीय साधक) 30-40 साल पूजा-पाठ किया — रोज हनुमान चालीसा, दुर्गा सप्तशती, काली स्तोत्र, चारों धाम घूमा — पर कुछ नहीं मिला। तांत्रिक लाखों रुपए खा गए, कोई झगड़े नहीं सुलझा पाया; 15-20 लाख का कर्जा है, केस चल रहे हैं, बहुओं वाले झगड़ों से घर बिखर गया। हमने जीवन में किसी का बुरा नहीं किया, किसी को परेशान नहीं किया — फिर हमारे साथ ऐसा क्यों हुआ? पत्नी ने ही धक्का देकर यहां भेजा है। (P3-0178)
  12. (लाइव) नर्मदे हर गुरु जी। मैं बंगाल का हूं और मुस्लिम धर्म से बिलॉन्ग करता हूं। क्या मैं अपनों की कुटिया में रह सकता हूं? (P4-0009)
  13. (कुटिया में साधक) जब मैं खोज रहा था तो किसी ने कहा एक फकीर बाबा से मिलो। उन्होंने कहा कि कुरान पढ़ो, वही आखिरी किताब है, उससे ज्ञान की प्राप्ति हो जाएगी। मैंने पूछा कि हमारी किताबों में पुनर्जन्म का कांसेप्ट है, कुरान में नहीं — तो उन्होंने कहा कि हम सिर्फ एक ही बार आए हैं, रूहें एक जगह रहती हैं, कयामत के दिन सब जागेंगे। मैं यह जानना चाहता था कि जिस ज्ञान की आप बार-बार बात करते हैं, क्या अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग तरह का ज्ञान मिलता है, या सबको एक ही तरह का ज्ञान मिलता है? (P4-0091)
  14. (वही साधिका) मैं बहुत सी चीजों से मुक्त हो गई — ईर्ष्या, समाज, रीति-रिवाज, अंधी पूजा-पाठ, मां-बाप का मोह। लेकिन आर्थिक डर पर आकर अटक जाती हूं — अगर मेरे पास पैसे नहीं हुए तो जिंदगी कैसी होगी? ईमानदारी से (ज्ञान के) वीडियो बनाती हूं तो लोग सुनते नहीं, कमाई घट गई है। इस डर को कैसे खत्म करूं? (P4-0189)
  15. (वही साधिका) एक ज्ञान मार्ग है, एक भक्ति मार्ग। भक्ति मार्ग के लोग अंधविश्वास में पड़ते हैं, ज्ञान मार्ग में पूजा-पाठ, मंत्र-जप, टीका कुछ नहीं। पर विवेकानंद ज्ञानी थे, रामकृष्ण परमहंस भक्ति मार्ग के — दोनों में भेदभाव नहीं था। हम इसी उलझन में पड़ते हैं कि कौन श्रेष्ठ है; मेरा तो भक्ति मार्ग से भरोसा ही उठ गया है। (P4-0197)
  16. (पूजा) कैसे सुनिश्चित करें कि मुझ में आध्यात्मिक अहंकार नहीं आ रहा है? मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है? (P5-0042)
  17. मलिन विचार आते हैं, साधना-पूजा में तकलीफ — क्या करें? डर का सामना, क्रोध निवारण, प्रेम कैसे आए? (P5-0098)
  18. साधना में पहले लगा कि कोई बहुत ऊपर ले जा रहा है। फिर दो दिन एक साया दिखा। फिर ईसा मसीह स्पष्ट दिखे और देर तक प्रकाश देते रहे। असीम शांति हुई। सनातन, कुरान और गुरु ग्रंथ साहिब पढ़े हैं, ईसाई धर्म इस जन्म में नहीं पढ़ा। ईसा मसीह कैसे दर्शन दे गए? परिवार का कोई आ जाए तो क्या करूं? (P6-0106)
  19. क्या मूर्ति पूजा हमें परम सत्ता से रूबरू करा सकती है? (P6-0175)
  20. जितने संत-सन्यासी को ज्ञान प्राप्त हुआ, उन सबने पूजा-पाठ और आडंबर का विरोध किया। क्या यह सही है? (P7-0042)
  21. हमारा धर्म क्या है? समझाइए। (P7-0054)
  22. अच्छा कर्म करना है, ऐसा कहा गया। कर्म भी अच्छा और बुरा होता है, ये बात समझ में आ रही है। लेकिन धर्म और अधर्म क्या होता है? रास्ते में किसी को खाना दे दिया, तो धर्म लग रहा है। अनदेखा कर दिया, तो अधर्म। अगर उसे अच्छा या बुरा मान लिया, तो अटैचमेंट हो जाएगा, फिर मोह हो जाएगा। क्या उसे अपना कर्तव्य मानकर करना चाहिए, न अच्छा मानें न बुरा, ताकि फंसें नहीं? भाव ये है कि अच्छा-अच्छा कहते हुए मैं भोग में न फंस जाऊं। मुझे मुक्ति का मार्ग चाहिए, बंधन नहीं। मैं मानवता और कर्तव्य से काम करूं, पर अच्छा कहकर वहीं न अटक जाऊं। (P7-0080)
  23. एक श्रोता ने कहा कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को हिंदू धर्म में निराशा हाथ लगी, इसलिए वे दूसरे धर्म में गए। गुरु जी, आप अंबेडकर का प्रसंग किस बात के लिए लाए थे? (P7-0194)
  24. घर में पूजा-पाठ करने से अपने लिए बाधा तो नहीं होती? पूजा-पाठ कर सकते हैं क्या? (P8-0076)
  25. ध्यान करता हूं, लेकिन ध्यान में जी नहीं लगता। पूजा-भक्ति में भी जी नहीं लगता। अच्छा कर्म करने में जी लगता है। तो इससे क्या आत्मज्ञान हो जाएगा? (P8-0186)
  26. क्या धर्म और अध्यात्म अलग-अलग हैं? (P9-0050)
  27. क्या मानवता ही धर्म है? (P9-0065)
  28. सीखना है तो सीधे जुड़ना चाहिए। फोटो रखने और पूजा करने से नहीं होता। इंजीनियरिंग छोड़ दो, डॉक्टर वगैरह सब छोड़ दो। क्या अपनी पढ़ाई और अपना काम छोड़ देना चाहिए? (P9-0187)
  29. आपके प्रवचन सुनकर लगता है कि बाकी सब झंझट, दिखावा, बहकावा है। यहां ना जात है, ना धर्म, ना गरीब-अमीर, कोई भेदभाव नहीं — सिर्फ मानव है। ऐसा क्यों? (P11-0019)
  30. धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष क्या है? (P11-0136)
  31. आश्रम में रहने वालों की तो आप सेवा कराकर समझ खोल देते हैं; पर गृहस्थ तो निरंतर उसी दलदल और माहौल में रहते हैं, जल्दी आ भी नहीं पाते। वे बहुत ईमानदार रहने की कोशिश करते हैं, फिर भी गिर जाते हैं। लोग गुरु की फोटो टांग लेते हैं, पूजा-पाठ करते हैं कि गुरु जी पास हैं — तो वे कैसे समझें कि गिर रहे हैं या उनसे कमी हो रही है, और कैसे सुलझें? (P12-0008)
  32. क्या काया, वेदना, चित्त और धर्म के अनुसार चिंतन करना सही है? (P12-0048)
  33. अपने कुल देवता की पूजा इस भाव से करनी है कि मेरा आत्मिक कल्याण हो जाए — तो क्या कुल देवता इसमें सहयोगी होंगे? (P12-0067)
  34. पूजा के लिए एक इष्ट कैसे चुनें? हम कई की पूजा करते हैं। (P12-0076)
  35. गुरु जी, धर्म क्या है? (P13-0171)
  36. गुरु जी, बहुत लोग गुरु की फोटो रख के घर पे पूजा करते हैं, उसका क्या? (P13-0195)
  37. गुरु जी, मनुष्य में सत्कर्म-ईमानदारी हो, तो उसके साथ पूजा-पाठ कर सकते हैं क्या? (P14-0030)
  38. गुरु जी, पूजा क्या है? क्या रोज सुबह उठ के घंटों जाप, भगवान को चंदन लगाना जरूरी है? (P14-0076)
  39. गुरु जी, अगर जीवन में कोई धर्म-संकट आ जाए, उसमें फंस जाएं, तो क्या करें? (P14-0080)
  40. हम इतनी पूजा-भक्ति करते हैं, इतने भाव से करते हैं, लेकिन हमें दुख क्यों है? (P15-0018)
  41. सनातन धर्म का वास्तविक अर्थ क्या है? (P15-0037)
  42. गुरु जी, क्या अध्यात्म और धर्म दरिद्र और गरीब रहना सिखाता है? (P15-0151)
  43. गुरु जी, सनातन धर्म कहां से शुरू होता है, और कहां पे उसका एंड होता है? (P15-0179)
  44. गुरुदेव, क्या ईश्वर की पूजा आदि ना करते हुए सिर्फ निष्काम कर्म से उस तक पहुंचा जा सकता है? (P16-0052)
  45. गुरु जी, आप हर बात में "मां नर्मदे हर" बोलते हैं, इसका क्या राज है? और क्या आप अभी भी मां काली की भक्ति-पूजा करते हैं? (P16-0054)
  46. आदमी के कर्म और पूजा-पाठ में क्या अंतर है? कर्म सर्वोपरि है या पूजा-पाठ? (P16-0158)
  47. योगी जी, संत तुलसीदास जी अपनी धर्मपत्नी रत्नावली में इतने आसक्त थे कि लाश को नाव और लटकते नाग को रस्सा समझ बैठे। रत्नावली ने कहा कि जितनी प्रीति इस हाड़-मांस से है, उतनी राम जी से होती तो बेड़ा पार हो जाता — और उनकी जिंदगी में यू-टर्न आ गया। ऐसी लोकोक्तियां तो हम भी सुनते हैं, पर हम पर असर नहीं होता, उल्टा कहते हैं "तू अपना देख"। तो यह बदलाव बोलने वाले के प्रभाव से हुआ या सुनने वाले की स्थिति से? बोलने वाले की बातें हम पर असर कब करती हैं? (P16-0175)
  48. गुरु जी, आप कहते हैं कि साधना काल में पूजा-पाठ पर खर्च करते थे और अपने लिए दवाई तक नहीं ली, सभी तीर्थों पर गए — क्या इसी कारण आत्मज्ञान मिला? और क्या अब भी पूजा-पाठ करते हैं? (P17-0164)
  49. गुरु जी, लगभग 350 साल बाद हमें अपनी कुलदेवी का पता चला, पूजा-पाठ करते हैं और घर की हालत अच्छी हो रही है — क्या इससे आत्मज्ञान में सहयोग होगा? कुलदेवी तो कुल की रक्षा करती है। (P17-0200)
  50. गुरु जी, क्या भगवान और देवी-देवता हमारे आत्मिक कल्याण में सहायक हैं? अगर हैं तो कैसी पूजा करें और क्या मांगें? (P18-0082)
  51. गुरु जी, आदमी जब पूजा या सुधार की तरफ जाता है तो उसे विपत्तियों और तकलीफों का सामना क्यों करना पड़ता है? (P18-0139)
  52. गुरु जी, तोतापुरी जी ने अद्वैत के लिए रामकृष्ण परमहंस से काली को "कटवाया", फिर भी परमहंस ज्ञान के बाद भी काली की पूजा करते रहे — यह कन्फ्यूजन कैसा? (P19-0039)
  53. गुरु जी, परम पारंपरिक धर्म और संन्यास — आप जैसा जीवन जी रहे हैं उनके विरोध में तो नहीं है? (P19-0053)
  54. गुरु जी, कुटुंब वालों ने कष्ट दूर करने के लिए कुलदेवी-कुलदेवता की पूजा का उपाय बताया है — यह क्या कॉन्सेप्ट है? (P20-0048)
  55. गुरु जी, क्या पत्थर, पशु और वनस्पति भी कर्म भोगते हैं — किसी को पूजा जाता है, किसी को पीसा जाता है? (P20-0095)
  56. महाराज, बीवी कहती है रोज मंदिर जाओ, पूजा-पाठ करो — वो धक्का देकर भेजती है, पर मेरा मन जाने का नहीं करता। क्या मंदिर न जाने से पाप लगेगा? (P21-0087)
  57. गुरु जी, मैंने गुरु बनाया, उनका स्वरूप घर में रखकर पूजा भी करती हूं, लेकिन पूरा भरोसा नहीं होता — बाहर जाती हूं तो ताला लगाकर जाती हूं, यानी भरोसा ताले पर है। गुरु पर भरोसा कैसे जमे? (P21-0100)
  58. गुरु जी, यहां बसवेश्वर जी की एक कहावत है "कायकवे कैलास" — काम ही कैलाश है, काम ही पूजा है। अगर हम काम ही न करें तो पूजा कैसे होगी? (P21-0122)
  59. गुरु जी, मेरे साथ भी ऐसा हुआ — आठ-दस अंधे लोगों की टोली 'हरे कृष्ण हरे राम' गाते हुए आई, उन्होंने हरिद्वार पैदल जाने के लिए सबके लिए नए धोती-कुर्ते मांगे। मैं मदद करने लगी, पर उनमें से एक बार-बार अलग नाम बता रहा था और धर्म को लेकर झूठ बोल रहा था। मैंने कहा मैं सीधे 100 नंबर पर फोन करूंगी, तो वे भाग गए। मैंने सही किया या गलत? (P22-0087)
  60. गुरु जी, मैं पूजा करती हूं, माला जपती हूं, कॉपी में पेन से राम-राम लिखती हूं — क्या ये लिखना सही है? (P22-0134)
  61. गुरु जी, सभी धर्मों में अपने-अपने मंदिर-मस्जिद हैं, सब बोलते हैं दर्शन करने जाना — असल में दर्शन का क्या मतलब है? इसका कोई आध्यात्मिक महत्व है? (P22-0136)
  62. गुरु जी, मैंने एक हिंदू लड़के से प्रेम किया था; उसने मेरा धर्म परिवर्तन करके मुझे छोड़ दिया और चला गया। अब मैं क्या करूं? मेरा मार्गदर्शन करें। (P23-0043)
  63. गुरु जी, हिंदू धर्म में जाति प्रथा या छुआछूत क्या सही है? यदि हां तो कैसे, और यदि नहीं तो कहां तक गलत है? (P23-0111)
  64. गुरु जी, ईमानदारी, सत्कर्म, सत्संग, अध्यात्म और धर्म बार-बार भार जैसे लगते हैं। ऐसा क्यों? (P23-0133)
  65. गुरु जी, धर्म बड़ा या देश बड़ा? (P23-0187)
  66. गुरु जी, रामकृष्ण परमहंस उपलब्धि के बाद भी माता की पूजा करते थे — अद्वैत में जाने के बाद वे द्वैत में कैसे आए, जब एक ही है तो किसकी पूजा? (P24-0010)
  67. गुरु जी, मेरे बच्चे हैं — लड़का 14 साल का और लड़की 12 साल की। मैं अपनी धर्मपत्नी को बोल रहा हूं कि इनको या तो (गुरुकुल जैसी) पुरानी पढ़ाई पढ़ाएं, या घर पे रखकर आज वाली पढ़ाई पढ़ाएं — पर ये आज वाली पढ़ाई तो दानव ही बनाती है? (P25-0133)
  68. गुरु जी, ईश्वर तो एक है ना, फिर लोगों ने धर्म के नाम पर उनका विभाजन क्यों कर दिया? (P25-0136)
  69. गुरु जी, बुरे कर्मों का फल तो किसी भी साधक या मनुष्य के लिए भोगना जरूरी है, वरना प्राप्ति में दूरी हो सकती है? सोच यह भी रहती है कि माला जपेंगे, पूजा-पाठ करेंगे तो जो जोर का पड़ने वाला है वह धीमा पड़ेगा। (P26-0075)
  70. गुरु जी, एक क्रॉस क्वेश्चन है — कोई पूजा करता है गाड़ी-बंगला मिलने के लिए, उसका क्या परिणाम होगा? (P26-0077)