पाप और पुण्य — योगी गुरु जी के प्रश्नोत्तर
इस पृष्ठ पर “पाप और पुण्य” विषय से जुड़े 70 प्रश्न हैं, जो जिज्ञासुओं ने सत्संग में योगी गुरु जी से पूछे। किसी प्रश्न पर क्लिक करके योगी गुरु जी का पूरा उत्तर उनके अपने शब्दों में पढ़ें, वीडियो के साथ।
- गुरु जी, अगर भजन करने से पाप कट जाते हैं, तो जिसके साथ गलत हुआ, उसे इंसाफ कैसे मिलेगा? (P2-0037)
- क्या दान-पुण्य का कोई आध्यात्मिक लाभ मिलता है? (P2-0044)
- गुरुदेव, प्रणाम। होली पर तो सबसे ज्यादा पाप किया जा रहा है — सबसे ज्यादा मांस-भक्षण, शराब। इस पर क्या करना चाहिए? (P2-0131)
- गुरु जी, प्रणाम। आपके सत्संग से ईमानदारी और सत्कर्म ने जीवन बदल दिया, पर मन में विचार बना रहता है कि पहले जो पाप हो गए, उनका क्या? (P2-0158)
- अज्ञान में फोटो पूजा सालों — पाप/कर्म से गुरु मिलेगा? अपराध के बाद गुरु मिलेगा? गुरु क्या करेगा? (P3-0059)
- एक धारणा है जिसका आप जवाब दें — सद्गुरु या गुरु कर लिया तो हमारी पाप की गठरी सब सद्गुरु धो देगा, उठा लेगा। क्या यह समझ सही है? (P3-0129)
- आपने कहा लेनदेन का हिसाब खत्म होगा तभी मोक्ष होगा। तो अगर ज्यादा पुण्य कर लिए तो भी पार नहीं हो पाएंगे? यह कम-ज्यादा मैं कैसे समझूं? (P3-0136)
- (लाइव) क्या गंगा आदि नदियों में स्नान करने से पूर्व में किए हुए पाप-दुष्कर्म नष्ट होते हैं? स्नान के लिए इतनी भीड़ होती है। अगर ऐसा होता तो भीष्म पितामह को इतने जन्मों का पाप क्यों भोगना पड़ा — वे तो गंगा पुत्र थे, उनका पाप क्यों नहीं धुला? (P3-0138)
- गुरु जी, इसमें नियम बीच में आ रहे हैं — जो नियम हम पर थोपे गए, बांध दिए गए थे, उनका क्या करें? और पाप-पुण्य से कैसे निकलें? (P3-0139)
- पुण्य क्या है और पुण्य किस हिसाब से करना चाहिए? क्या पुण्य करने से भी बंधन में बंधते हैं? (P3-0144)
- (लाइव) गुरुदेव, मुझे लगता है मेरा मन, माइंड और शरीर पर कोई नियंत्रण नहीं है। जिस चीज को भूलना चाहता हूं, वही चीज बार-बार याद आती है और बेचैन करती है, जबकि मैं किसी के साथ कोई पाप कर्म भी नहीं करता। (P4-0048)
- (वही साधिका) आपको लोगों से हेल्प मिली — तो क्या दूसरों से लेने पर हमारे पिछले पुण्य कर्मों का 'एटीएम' क्षीण नहीं हो जाता? और अगर सही काम में लगाते हुए भी मन में लगे कि यह गलत है, तो? (P4-0191)
- (आशु) क्या मैं आपकी लाइव को लेटकर देख सकता हूँ या बैठकर ही देखना पड़ेगा? पाप तो नहीं लगेगा? (P5-0052)
- आत्मज्ञान के बाद भी कर्म/पाप-पुण्य भोग बाकी रहता है क्या? ईमानदारी क्या है कैसे करें? साधना कैसे करें? योग्यता से अधिक का मतलब? (P5-0117)
- गलत काम पता होने पर भी कंट्रोल क्यों नहीं कर पाते? बेईमान की हत्या पाप? (P5-0127)
- वासना में मानसिक पाप और शरीर को नुकसान — क्या पाप लगता है? अपने शरीर को नुकसान देना पाप क्यों? (P5-0168)
- गीता कहती है जिससे खतरा हो उसे मारने में पाप नहीं — सत्य है? (P5-0181)
- स्त्री शरीर में सत्संग मार्ग पर चलना चाहे और शादी न करना चाहे तो अपराध/पाप तो नहीं? (P5-0185)
- मैं 13 साल का हूं, तीन साइकिल तोड़ी; पापा कहते आप हां बोलोगे तो दिलाएंगे — साइकिल दिलाएं? (P5-0190)
- बहुत पाप कर दिया हो तो आत्मिक कल्याण कैसे? (P6-0006)
- पाप और पुण्य क्या है? (P7-0070)
- बच्चों और बहुओं में तालमेल और शांति के लिए क्या करना चाहिए? बहू कह चुकी है कि पापा जी, इंदौर प्रोग्राम में जाने दो। घर में अभी फंक्शन भी है। (P7-0101)
- पाप से मुक्ति कैसे मिले? (P8-0050)
- किसी जरूरतमंद या पशु-पक्षी की मदद करने पर जो खुशी और संतुष्टि मिलती है, इस पुण्य को क्या कहा गया? (P8-0078)
- हमने जमीन अपनी मेहनत से ले ली है। मां-बाप, मायका, और जहां डेरा है वहां सब जानते हैं। सिर्फ ससुराल के मां-पापा से मजबूरी में झूठ बोला है, क्योंकि बताने पर बवाल हो जाएगा, इसलिए घर से छिपाया है। बताने की हिम्मत नहीं होती। क्या यह झूठ है? (P9-0041)
- पाप और पुण्य क्या है? अच्छा और बुरा कर्म क्या है? (P9-0049)
- मुझे अपने गुरुदेव द्वारा दिए गए मंत्र और नाम से त्रुटि का भाव हो गया है, और मैं स्वप्न में किसी संत द्वारा दिए गए नाम को जपता हूं। क्या मुझे गुरुद्रोह का पाप लगेगा? (P9-0051)
- कृष्ण अर्जुन को कहते हैं, तू मार, क्योंकि ये तो पहले ही मर चुके हैं, तुझे पाप नहीं लगेगा। तो हिटलर ने यहूदियों को जला दिया, वे भी तो पहले ही मर चुके थे, तो हिटलर को भी पाप नहीं लगेगा? लेकिन अर्जुन ने इतनी बात पर मारा नहीं। (P10-0016)
- गुरुदेव, चरण छूना स्वीकार करें। मैं अपने आप को पापी मानता हूं। (P10-0026)
- कोई साधक पहले सब कुछ ठीक से समझकर यहां आया, फिर भी बाद में भ्रमित क्यों होता है? क्या उसके पाप कर्म हैं, या वह अभी कुछ गलत कर रहा है? (P11-0020)
- गुरुदेव की थाली और कपड़े धोते समय "पुण्य मिलेगा" का भाव आता है। क्या यह ठीक है? (P11-0183)
- लाश के ऊपर कफ़न डालना क्या सत्कर्म या पुण्य है? पड़ोस में किसी की मृत्यु हो जाए तो लोग उस पर कफ़न डालना अपना पुण्य समझते हैं। (P12-0070)
- मेरे पापा बोलते हैं कि उनको आत्म-साक्षात्कार हो — ऐसी पागल बात करते हैं। बताओ गुरुदेव। (P13-0105)
- मैं आपकी बात समझता हूं, पर कई बार उस पर पूरी तरह चलना घर में रहकर पॉसिबल नहीं होता। मैंने पापा को बोला कि कोई ईमानदार ढूंढो — मिलेगा नहीं। (P13-0141)
- गुरु जी, पिछले पाप से छुटकारा कैसे पाएं? (P14-0086)
- यजुर्वेद में लिखा है कि परमात्मा सारे पाप नाश कर देता है — अपना किया, पितरों का किया, जाने-अनजाने में हुआ — तो आप कहते हैं भोगना पड़ेगा, इसका भाव क्या है? (P14-0179)
- क्या पाप कर्म से पुण्य कर्मों का नाश होता है? (P15-0040)
- भगवत्-प्राप्त संतों की समाधि के दर्शन करने से क्या पुण्य होता है? (P15-0048)
- गुरु जी, क्या मंदिर में पैसा चढ़ाने पर पाप तो नहीं लगता? (P15-0165)
- बाबा जी, अगर इस जन्म में कोई पाप हुआ हो तो उसका कर्मफल कर्म-विधान से इसी जन्म में चुकाना पड़ता है; फिर क्या अगले जन्म में पीछे के बुरे कर्म का प्रभाव पड़ता है? (P16-0008)
- योगी जी, मैं जो आपको देख रही हूं, सुन रही हूं, बोल रही हूं — इसे जीवात्मा समझूं — तो इस जीवात्मा को आखिर चाहिए क्या? जो चाहिए-चाहिए था वो देकर भी देखा, पर संतुष्टि नहीं, कहीं "द एंड पॉइंट" आता ही नहीं। मेरा हाल खुजली वाले रोगी जैसा है — खुजाने में मजा भी, फिर जलन भी। मंजिल दूर हो तो उसके पीछे भागती हूं, पास पहुंचते ही वो फीकी हो जाती है, और उसके चक्कर में कितने पाप कमाए, कितनों का दिल तोड़ा। अब थक गई हूं — बताइए मुझे क्या चाहिए, कहां पहुंचना है कि उसके बाद कोई दूसरा ऑप्शन न दिखे और परम शांति मिले? (P17-0009)
- गुरु जी, जो ध्यान मार्ग से साधना करते हैं, उनको पूर्व पापों को काटने के लिए क्या नाम या मंत्र जाप करना आवश्यक है? (P17-0033)
- गुरु जी, क्या केवल पापी मन वाली बुद्धि को ही डर लगता है, और जिसके मन में राम और सत्य स्थित हैं उसे कोई भय नहीं लगता? (P17-0169)
- गुरु जी, सत्य वचन सुनकर अगर पीड़ा हो, तो क्या समझ लेना चाहिए कि हमारा मन ही पापी है? (P17-0172)
- गुरु जी, गांव वाले मेरी निंदा करते हैं — क्या इससे मेरे पाप कट जाएंगे? अपनी निंदा सुनना सही है या गलत? (P18-0097)
- गुरु जी, योग्यता से अधिक पाने की लालसा, पाप, दुख और गलत कैसे है? 90% लोग योग्यता से ज्यादा पाकर ही मजे में रहते हैं। (P19-0052)
- गुरु जी, खेत में बिच्छू-सांप निकल आते हैं; मार दें तो पाप, भगाएं और वे दूसरे को नुकसान पहुंचाएं तो भी पाप — क्या करें? (P19-0190)
- गुरु जी, क्या पाप-पुण्य का पूरा भोग लेना ही मोक्ष है? (P20-0014)
- गुरु जी, जो लोग जीवन भर भ्रष्टाचार, लूटपाट, दुष्कर्म करते हैं और मरते समय पुण्य कर देते हैं, क्या उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं? (P20-0030)
- गुरु जी, पाप और पुण्य दोनों जंजीर हैं, तो पुण्य या सत्कर्म क्यों करना? (P20-0040)
- क्या आप सेवा करने वाले को पुण्य या मुक्ति का आश्वासन देते हैं? (P20-0124)
- गुरु जी, कोई हम पर विश्वास करके अपना काम लेकर आता है जो हमसे नहीं, किसी और के द्वारा होना है। स्पष्ट मना करें तो वह टूट जाएगा, इसलिए उसे थोड़ा आश्वासन दे देते हैं — हम तो इसे सत्कर्म समझकर कर रहे हैं, पर काम न हुआ तो क्या हम उसके पाप के भागीदार बनते हैं? (P21-0077)
- महाराज, बीवी कहती है रोज मंदिर जाओ, पूजा-पाठ करो — वो धक्का देकर भेजती है, पर मेरा मन जाने का नहीं करता। क्या मंदिर न जाने से पाप लगेगा? (P21-0087)
- गुरु जी, जरूरतमंद को हम कैसे पहचानें? जैसे भूकंप हो गया, लोग घर-घर आकर कहते हैं उनके लिए कुछ दे दो — हम भरोसे पर दे देते हैं, तो ये सत्कर्म में आता है या पुण्य में? (P21-0186)
- गुरु जी, रावण ने तपस्या करके ब्रह्मा जी और शिव जी से अपनी जरूरत की चीजें ले लीं, बाद में बहुत ताकतवर होकर बहुत पाप किए — पर ब्रह्मा जी और शिव जी को कोई दोष नहीं लगा। उन्होंने तो सेवा कर दी, उपयोग रावण ने गलत किया — तो क्या देने वाले पूरी तरह छूट गए? (P22-0088)
- गुरु जी, क्या हमें दूध पीना चाहिए, जब उसी दूध के लिए गायों और भैंसों को जंजीरों में बांधकर उनका शोषण किया जाता है, और दूध निकालने के बाद जब वही पशु अर्थहीन हो जाते हैं तो कसाईखानों में भेज दिए जाते हैं? भारत गौ-सेवा के लिए जाना जाता था और आज बड़ा बीफ निर्यातक बन चुका है — यह हमारी प्रगति है या पाप? (P22-0116)
- प्रणाम गुरु जी, पाप-पुण्य सब जानते हैं, लेकिन पाप क्रिया लोग बार-बार क्यों करते हैं? (P23-0017)
- गुरु जी, मुझे कैसे पता चलेगा कि मैं कौन हूं? क्योंकि मैं तो निरंतर बदल रहा हूं — कभी अच्छा हूं, कभी बुरा; कभी पापी हूं, तो कभी बहुत पुण्यात्मा। वास्तव में मैं कौन हूं? (P23-0108)
- गुरु जी, जिस जगह पर सिर्फ मांस-मछली ही खाना होता है, उनको पाप नहीं लगता? (P23-0114)
- गुरु जी, कहा जाता है कि नाम के समान कुछ नहीं है, नाम से पाप छूट जाते हैं। तो क्या नाम जप ही मूल है? (P23-0166)
- गुरु जी, कलयुग का सबसे बुरा कर्म क्या है और सबसे पुण्य कर्म क्या है? (P23-0175)
- गुरु जी, आपकी बातें तो बहुत अच्छी लगती हैं, लेकिन इनको लागू नहीं कर पा रहा; बहुत पापी हूं मैं, कृपया माफ कीजिए। (P24-0043)
- गुरु जी, मैं किसान हूं। खेती में फसल करते हुए निर्दोष जीव मर जाते हैं, मारने का भाव नहीं होता — तो क्या पाप लगता है? (P24-0112)
- गुरु जी, क्या सत्य मार्ग पर चलने से पाप नष्ट होते हैं या फिर भुगतना पड़ता है? (P25-0026)
- योगी जी नमन। क्या तीर्थ जाने से पाप कटते हैं? (P25-0130)
- गुरु जी, ऐसा देखा गया है कि जिन्होंने बहुत ज्यादा पाप किया, उन्होंने छोड़ा भी तो तुरंत और पूरी तरह छोड़ा — जैसे अंगुलिमाल? (P25-0148)
- गुरु जी, दुष्कर्म का फल कभी तुरंत मिलता है, कभी बाद में। अगर हम किसी को दुख दे रहे हैं, सता रहे हैं या उसके साथ बेईमानी कर रहे हैं, तो क्या अपना कर्म तो बना ही रहे हैं, साथ में उसका पाप कर्म भी अपने सिर पर ले रहे हैं? (P25-0155)
- क्या ज्यादा कपड़े रखने से पाप लग रहा है? क्या उसका कर्म भोगना पड़ेगा? (P25-0172)
- गुरु जी, घर में मकड़ी का जाला लगता है, उसको तोड़ने पे भी पाप लगेगा? और मच्छर काटे तो मार दिया — उसका क्या? (P25-0180)
- गुरु जी, यदि जीवन में कोई बड़ा पाप हो गया हो, तो उससे कैसे पाप-मुक्त हों? (P26-0090)