आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

सत्संग — योगी गुरु जी के प्रश्नोत्तर

इस पृष्ठ पर “सत्संग” विषय से जुड़े 144 प्रश्न हैं, जो जिज्ञासुओं ने सत्संग में योगी गुरु जी से पूछे। किसी प्रश्न पर क्लिक करके योगी गुरु जी का पूरा उत्तर उनके अपने शब्दों में पढ़ें, वीडियो के साथ।

← सभी विषय · PDF पुस्तकें

  1. सत्संग सुनने के बाद समझदारी तो बहुत बढ़ गई, लेकिन समाज और परिवार से कनेक्ट होना मुश्किल हो रहा है। (P1-0004)
  2. गुरु जी, मुझे आपका सत्संग बहुत अच्छा लगता है और मैं उसे अपने चरित्र में उतारना चाहती हूं। (P1-0041)
  3. गुरुदेव, जैसे नाली का कीड़ा बार-बार नाली में ही जाता है, वैसे ही आपका सत्संग सुनते रहने के बाद भी मैं बार-बार संसार के भोगों में फंस जाता हूं। खुद को कैसे सुधारूं, यह कैसे पक्का करूं? (P1-0044)
  4. योगी जी, सभी लोगों से लगाव छूट रहा है; केवल आपका सत्संग सुनने और आपके साथ रहने की इच्छा रहती है। यह क्यों हो रहा है? लेकिन मुझ पर तीन बेटियों की जिम्मेदारी है। क्या करूं? (P1-0050)
  5. गुरु जी, मैं आपका लाइव सत्संग नहीं सुन पाता, इसलिए चिंता होती है। लगता है मुझसे कोई गलती हुई है, इसलिए ईश्वर नाराज है। (P1-0108)
  6. यह भी देखा गया है कि जो हमसे कमजोर होते हैं, उन्हें हम नहीं जांचते। (आपके सत्संग से समझ आया कि मुझे अपनी जरूरत देखनी चाहिए, दूसरों से तुलना में ऊर्जा बर्बाद नहीं करनी चाहिए।) (P1-0176)
  7. मैं इतना मूर्ख हूं कि सत्संग से सब कुछ पता चला, अध्यात्म में अच्छा-खासा लग भी गया, लेकिन साल भर से मन वापस संसार में लग गया। अब लगता है संतों की कृपा के बिना मैं अध्यात्म में नहीं चल सकता। (P2-0009)
  8. गुरु जी, अगर कोई 30 दिनों में 30 रुपये कमाता है और आपके सत्संग व ऊर्जा का लाभ लेता है, तो उसे उसमें से आपको कितना सहयोग करना चाहिए? (P2-0080)
  9. गुरु जी, आपका लाइव सत्संग किस चैनल पर आता है? (P2-0094)
  10. मेरा होश बना रहे — आपके सत्संग में ‘सत्कर्म’ का मतलब क्या है? (P2-0118)
  11. प्रणाम योगी जी। क्या ध्यान का अभ्यास करना चाहिए, या ईमानदारी, सत्कर्म और सत्संग ही मूल है और फिर ध्यान अपने आप घटने लगेगा? (P2-0130)
  12. क्या लाइव सत्संग का कोई निर्धारित दिन है? कृपया बताएं। (P2-0156)
  13. गुरु जी, प्रणाम। आपके सत्संग से ईमानदारी और सत्कर्म ने जीवन बदल दिया, पर मन में विचार बना रहता है कि पहले जो पाप हो गए, उनका क्या? (P2-0158)
  14. (जया बहन का पत्र:) गुरु जी, न मैं मीरा हूं जो घर में रहकर भजन करूं और गलियों में निकल पड़ूं, न शबरी जो एक जगह कुटिया बनाकर इंतजार करूं। आपका बताया सत्संग, ईमानदारी और सत्कर्म कर रही हूं। जिम्मेदारियों ने घेर लिया है — न अपनों की कुटिया में आ पाती हूं, न घर पर रह पाती हूं; जीना बहुत मुश्किल हो गया है। कर्तव्य कैसे पूरे करूं, कब निकलकर हमेशा के लिए आपके चरणों में आ सकूं? मैं क्या करूं? (P2-0169)
  15. जिज्ञासु किसे कहते हैं — क्या वही जिसको बहुत हो गया और मूल में स्थिर होना चाहता है? वैराग्य कोई सत्संग दिला सकता है या वैराग्य स्वतः आता है? क्या आप किसी को याद दिला सकते हो? (P3-0001)
  16. सत्संग सुनते हुए समझ आती है, गिरने पर भी महसूस होता है; फिर भी समझ छोटी अवधि की लगती है और ऑटोमेटिक गिरना पक्का हो चुका है। समझ को कैसे पक्का करूं कि मार्ग से न भटकूं — उठना भी गिरने जितना पक्का हो जाए? (P3-0010)
  17. सामर्थ्यवान परिचय नहीं बनाता; कमजोर बनाता है। सेवा में उम्मीद? सत्संग निशुल्क बनाम खर्च? (P3-0024)
  18. सत्संग बुलाने का खर्च / डिपॉजिट — सहयोग कैसे? (P3-0027)
  19. सत्संग में सुना कि हमसे जो गलत कर्म हुए उनका फल अलग मिलेगा और अच्छे कर्मों का अलग — अच्छा कर्म बुरे को काटता नहीं। तो फिर सेवा से मिला आशीर्वाद श्राप को कैसे काटेगा? और यह पूरी तरह खत्म कब होगा? किसी ने बड़ा अभिशाप दिया हो जो हमें पता भी नहीं, तो क्या करें? (P3-0095)
  20. एक माता जी: मैं दिल्ली-गुड़गांव में अपने यहां भी आपका सत्संग कराना चाहती हूं — उसके लिए क्या व्यवस्था और कितना खर्च लगता है (साउंड, टेंट आदि)? और आप सत्संग के छह लाख क्यों लेते हैं? (P3-0096)
  21. एक साधक ने अनुभव बताया: दीपावली पर पूजा के लिए रखी नए नोटों की गड्डी सत्संग सुनकर निकाली और एक जरूरतमंद को नया नोट दिया, तो देने और लेने दोनों में भाव बहुत पवित्र हुए। फिर प्रश्न — घर या आश्रम में जाकर दान लिखवा आते हैं, तो वह सत्कर्म में आता है या किस कर्म में? (हमारा किराने का बिजनेस है, ज्यादातर ऐसी जगह अनाज भेज देते हैं।) (P3-0107)
  22. गुरु जी, अगर हम अगले महीने आएं और आपसे सत्संग करना हो, तो कैसे मिल सकते हैं? (P3-0120)
  23. (लाइव) गुरुदेव नमन। मैं होली के दिन ही आपसे मिला था और तीन दिन के बाद ईमानदारी, सत्कर्म और जरूरत में जीने का गुरु मंत्र लेकर वापस चला। अब घर पर ही आपका सत्संग देखता हूं और इस मार्ग पर चलने की कोशिश करता हूं। (P3-0173)
  24. (कुटिया में साधक) आप तो भगवान के पद को प्राप्त हुए; आपने वीडियो में बताया कि उस स्थिति में आने के लिए आपने कितनी मेहनत की। बाकी सबने वेदों के पठन आदि से ज्ञान लिया, पर आपके यहां तो खाली प्रत्यक्ष ज्ञान का मूल — ईमानदारी, सत्कर्म और सत्संग — है। क्या इतने से हो जाएगा, और जीवन में गुरु की कितनी जरूरत है? (P3-0181)
  25. (कुटिया में साधक) गुरु जी, कल के सत्संग में आपने बताया कि जो समय चल रहा है, उस समय से पीछे आना है — एक सेकंड, आधा सेकंड पीछे। उसके बारे में थोड़ा बताइए। क्या कुछ नहीं चाहिए में आएंगे तभी होगा, या इसमें कुछ रहस्य है? (P3-0190)
  26. (कुटिया में साधक) आपने एक सत्संग में बोला था कि अध्यात्म में नर्क मांग लो — नर्क की लाइन में लग गए तो धुलना शुरू हो जाओगे। इसका अर्थ समझाइए। (P3-0196)
  27. (लाइव) गुरु जी, मैं कई दिनों से आपके सत्संग सुन रहा हूं। मैंने अनुभव किया है कि पहले वाले सत्संग सीधे दिल में उतरते थे और अब वाले सत्संग सिर्फ मेरे दिमाग से ही वापस लौट जाते हैं। ऐसा क्यों? (P4-0001)
  28. (लाइव) गुरु जी प्रणाम। दिल्ली में आपके तीन दिन के सत्संग का बहुत ज्यादा लाभ लिया। आपकी प्रेरणा से आज यहां भंडारा भी किया है। आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। (P4-0008)
  29. (लाइव) प्रणाम योगी जी। मैं नवंबर 2024 से आपका सत्संग सुन रहा हूं और आपके ज्ञान पर चल रहा हूं; बहुत कुछ समझ में भी आ रहा है। पर अब घर पर मन नहीं लग रहा, सारा दिन उदासी में बीतता है। मार्गदर्शन दीजिए। (P4-0033)
  30. (कुटिया में साधक) श्री कृष्णा गुरु जी। आपने एक प्रसंग में बोला था कि आत्मज्ञान के बाद फिर परमात्मा की यात्रा शुरू हुई; हम तो अभी तक यही समझते थे कि आत्मज्ञान के बाद सब खत्म हो जाता है। (ओशो ने भी एक सत्संग में यह बोला है।) क्या इसका भी कोई टाइम पीरियड है? (P4-0050)
  31. (कुटिया में, एक शिक्षक साधक) आप (किसी शहर में) तीन दिन — रोज दो घंटा — सत्संग के लिए आ सकते हैं? (गोयल जी ने 6 लाख देकर सत्संग कराया था।) मन तो है कि मैं भी करवाऊं, लेकिन इतनी ताकत नहीं — 1 लाख पगार है, पर साथ में 10 लाख का कर्जा है। और हम (घर-परिवार से) अलग में हैं, इसलिए भगवान का भाग निकालना समझ में आता है। (P4-0067)
  32. (लाइव) प्रणाम गुरु जी। अगर हम (कहीं और) सत्संग भी जाते हैं और आपका भी सत्संग सुनते हैं, तो क्या यह सही है? क्या करें, मार्ग दिखाएं। (P4-0090)
  33. (लाइव) प्रणाम गुरु जी, चरण स्पर्श। आपका सत्संग सुनते हैं और आपके बताए गए मार्ग पर चलना शुरू कर दिया है। क्या मैं आपको गुरु मान सकता हूं? (P4-0106)
  34. (लाइव) सद्गुरु जी नमन। पिछले सत्संग में आपने पूछा था कि आपको क्या चाहिए, तय करो। तो मुझे आत्मज्ञान चाहिए। मार्गदर्शन करें, मैं क्या करूं जिसके कारण मुझे आत्म साक्षात्कार हो जाए? (P4-0117)
  35. (कुटिया में साधक, पेंशनर) मैं जहां रहता था वहां धन से सेवा करता था — खाने-पीने के अलावा बाकी पैसे मैं रखता नहीं था, सेवा-सत्संग में लगा देता था। परिवार से विवाद हुआ तो निकल गया, आठ महीने बागेश्वर में रहा, वहीं आपका वीडियो मिला और तुरंत सब समझ में आ गया। अब यहां आ गया तो मेरा पैसा किसी काम में नहीं आ रहा; परिवार वाले उसे खा जाएंगे। मैं चाहता हूं कि वह पैसा यहां सेवा में लगा दूं — किसको, कैसे दूं? (P4-0132)
  36. (वही साधक, पेंशनर) मैंने निरंतर नाम जाप भी किया, 18–20 घंटे सीताराम जपता था, फिर भी विचार नहीं बदले। फिर किसी के सत्संग से सांस पर ध्यान करना सीखा — वो कुछ समय के लिए काम करता है, शरीर के विकार भी सुधरते हैं, लेकिन परमानेंट नहीं। और आत्मिक चिंतन में आंख बंद करके क्या करना है? (P4-0134)
  37. (वही साधक, पेंशनर) इस सत्संग को जब हम दूसरों को देते हैं तो वो भाग निकलते हैं, क्योंकि इसमें रस है ही नहीं। तो क्या हम लोग इसका प्रचार कर सकते हैं — लोगों को कह सकते हैं कि चलिए वहां? (P4-0141)
  38. बहुत किताबें-सत्संग सुने, लगता ज्ञान इकट्ठा हो गया पर दिल नहीं बदला। कैसे जानूं आत्मिक कल्याण हो रहा है? (P5-0076)
  39. प्रपंच में रहकर प्रत्यक्ष ज्ञान/आत्मज्ञान कैसे? पुस्तक है? नाम-दम लिया पर आपका सत्संग अच्छा — रास्ता? सांस/मंत्र ही ध्यान? (P5-0143)
  40. स्त्री शरीर में सत्संग मार्ग पर चलना चाहे और शादी न करना चाहे तो अपराध/पाप तो नहीं? (P5-0185)
  41. सत्संग में व्यवधान हो तो रोक सकते हैं? गुरु मौजूद हो तो? (P6-0037)
  42. योगी जी नमन। जब मैं सत्संग सुनता हूं तो मेरी पत्नी मेरे पास आकर बच्चों को आवाज देती है, तो मुझे गुस्सा आ जाता है। मैं उससे कैसे बचूं? (P6-0056)
  43. गुरु जी प्रणाम। गड धरत बाटी से। आपका सत्संग बराबर सुनता हूं और आदत में सुधार भी हो रहा है। अब हमारा शरीर और मन सुस्त होने लगा है। यह किस तरह का लक्षण है? (P6-0057)
  44. भोपाल से इंदौर जनरल टिकट पर आया। बोगी भरी थी और इम्प्लांट की वजह से नीचे नहीं बैठ सकता था, इसलिए स्लीपर में जगह देखकर बैठ गया। क्या यह बेईमानी हुई? दुकान पर तंबाकू बेचता हूं, खुद नहीं खाता, क्योंकि उसे गलत मानता हूं। ग्राहक दूसरी दुकान चले जाएंगे तो क्या करूं? शादी नहीं की, बच्चे नहीं हैं। घर वाले उम्र और गर्मी कहकर रोकते हैं। आध्यात्म में बीस-पच्चीस साल हो गए, स्वामी राम के सत्संग में भी रहा, फिर भी वह जगह नहीं छूटती। दुकान का सामान पिछले साल भी पड़ा था। बात करने से मना है, जरूरत में बोल सकता हूं क्या? दुकान पर मच्छर आते हैं, अहिंसा नहीं रहती। कमाई के लिए दुकान जरूरी लगती है। हैंडीकैप की पेंशन एक हजार मिलती है। दो महीने से ज्यादा बाहर रहूं तो रद्द करने की बात होती है। गायों को खाना देता हूं तो पड़ोसी परेशान होते हैं। मुझे क्या करना चाहिए? (P6-0074)
  45. आपने कहा था, संसार में ग्रस्त हो, विश्राम चाहिए। शुरुआत में एक-दो साल अध्यात्म में पड़े रहो, सत्संग सुनो, फिर अपने आप आध्यात्म में जीने लगोगे। यह क्यों कहा था? किससे कहा था? (P6-0117)
  46. मैं अपने भीतर आना चाहता हूं, लेकिन एक मिनट में बाहर चला जाता हूं और उलझ जाता हूं। सत्संग सुनने के लिए कुछ समय अंदर आया था, फिर बाहर चला जाता हूं। चाबी अपने पास रखूं या महापुरुष को दे दूं? साधक और सेवक में क्या फर्क है? जिसे चाबी देनी है, उसकी जांच कैसे करें? (P6-0144)
  47. कुछ नहीं चाहिए, तो कुछ नहीं चाहिए में कैसे जिएँ? हम किसमें उलझे हैं? बचपन से लगता है सब मैं कर रही हूँ, पर अब सत्संग सुनकर लग रहा है कि इंद्रियाँ निमित्त हैं और करने वाला मैं हूँ। इस गड़बड़ी से कैसे निकलें? (P6-0149)
  48. ज्योतिर्लिंग और देवताओं में क्या संबंध है? दोनों एक ही श्रेणी में हैं या अलग अलग? दर्शन के बाद लाभ कब होता है, और यहाँ सत्संग या गुरु के शरण में किस हालत में आना चाहिए? (P6-0151)
  49. प्रशांत कुलकर्णी पूछते हैं, सत्संग का मतलब क्या है? सद्गुरु और अवधूत में क्या अंतर है? (P6-0183)
  50. आपका आश्रम, सत्संग कुटिया, कौन से गाँव में है? कृपा करके बताना। (P6-0192)
  51. आप कहते हो जरूरत में जियो, फिर लघुशंका होने पर सत्संग में रोकने की बात क्यों करते हो? यह स्वास्थ्य के लिए सही नहीं। इस शंका को दूर करें। (P7-0028)
  52. जब आपका लाइव सत्संग देखता हूँ तो शांत हो जाता हूँ, और उसके बाद फिर मैं अशांत हो जाता हूँ। ऐसा क्यों? (P7-0135)
  53. एक बार गुरु मिल जाए, तो रुक ही जाना चाहिए क्या? श्रीलंका में आपने कहा था कि ईमानदारी, सत्कर्म, सत्संग, और भ्रमण भी जरूरी है। क्या भ्रमण करना जरूरी है? भ्रमण की इच्छा घुटन से होने लगती है, कुछ समझ में नहीं आता। (P7-0163)
  54. सेवा देने की हैसियत नहीं है, तो क्या हम आपका सत्संग नहीं सुन सकते? (P7-0169)
  55. सत्संग करना चाहिए, या सत्संग सुनना चाहिए? (P7-0184)
  56. आपका सत्संग सुनता हूं, तो आत्मज्ञान का अनुभव होने लगा है। आपके बताए अनुसार ध्यान में कुछ समय बैठने के बाद अलग-अलग क्रियाएं धीरे-धीरे खुलने लगती हैं। तब क्या करें? अगर बर्दाश्त नहीं हो रहा, तो? (P7-0188)
  57. एक साधक पूछता है, पिछले सत्संग सुनकर लगता है कहीं मैं भगोड़ा तो नहीं हूं। माता-पिता अस्सी के ऊपर हैं, पैतृक संपत्ति अभी अपने जिम्मे रखी है, हमें कुछ नहीं दिया। चार भाई हैं, दो बड़े भाइयों को कुछ नहीं दिया, छोटे भाइयों को दिया है। मेरे दो बेटे और एक बेटी हैं, सबसे छोटा पच्चीस पार कर गया, पढ़े-लिखे हैं, बड़े बेटे की नौकरी और शादी हो गई, दो की शादी बाकी है। पत्नी, छोटा बेटा और बेटी कहते हैं जब तक शादी ना हो जाए तब तक मत जाओ। नौ साल कमाई मां को दी। क्या मैं भगोड़ा हूं? (P8-0014)
  58. अगर सत्संग सुनते रहे, तब भी कल्याण हो जाएगा? (P8-0105)
  59. इतनी गर्मी में आपको कष्ट हो रहा है। कृपया रात को सत्संग लिया करें। (P8-0114)
  60. दिल्ली वाले सत्संग में कहा था कि तंत्र और मंत्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। ऐसा क्यों? (P8-0127)
  61. मैं आत्मचिंतन नहीं कर पाती। बस लगातार सत्संग सुनती हूं और उस पर चिंतन नहीं करती। क्या मैं ठीक कर रही हूं? प्रगति तो बहुत महसूस हो रही है। (P8-0197)
  62. आपने कल के सत्संग में बताया था कि बाप का गलत कर्म बच्चे भोगते हैं। इसे थोड़ा विस्तार से बताइए। (P9-0013)
  63. उसी घर में पत्नी भी रिश्ते के कहने की वजह से अप्रत्यक्ष रूप से पिता को कंट्रोल करती है। बच्चे सिर्फ डर से जीते हैं। उन बच्चों में मैं एक बच्चा हूं, सत्संग सुनता हूं, और उन्हें यह पसंद नहीं। वह बच्चा क्या करे? (P9-0030)
  64. सत्संग सुनकर सुधार नहीं आता। क्या करें? (P9-0107)
  65. गुरु जी, रोज कितने घंटे सत्संग सुनना चाहिए? (P9-0115)
  66. गुरु जी, आपका कहना है कि उम्मीद से मुक्त होना है, उम्मीद ही भटकाव है। फिर आपके सत्संग के द्वारा आत्मज्ञान की उम्मीद भी तो एक उम्मीद है। कृपया मार्गदर्शन करें। (P9-0128)
  67. कुछ गुरु सत्संग के समय बीच में चाय, कॉफी या दूध लेते हैं। आप सात घंटे के सत्संग में भी पानी तक लेने को समय की बर्बादी समझते हैं। क्या आत्मज्ञान के बाद भी शरीर को इतना कष्ट देना चाहिए? (P9-0158)
  68. गुलबर्गा के सत्संग में लोग कह रहे थे कि दो घंटे आप ही बोलिए। आप बीस मिनट से ज्यादा एक बात पर नहीं बोलते, बाकी समय साधकों से बात करते हो। लगातार दो घंटे प्रवचन क्यों नहीं देते? (P9-0184)
  69. पिछले साल के सत्संग और इस साल के सत्संग में बहुत फर्क दिखा। एक दिन में काम नहीं होता, तीन दिन में समझ बनती है। पहले सत्संग में गड़बड़ हुई, गलती मुझसे भी हुई। दौड़ने वाले गिरते हैं, गिरने वाले उठते हैं। आपके साथ दौड़ना पसंद है, चोट भी लगे तो। क्या हम गिरेंगे? (P9-0185)
  70. गुरु जी, आपका सत्संग हर बार सुनने पर अलग तरीके से समझ में क्यों आता है? अपनों की कुटिया में आपको देखकर बहुत खुशी हुई। (P9-0189)
  71. क्या आप मेरे घर आ सकते हैं, हरियाणा, यमुनानगर? सत्संग कैसे करवाएं? (P9-0197)
  72. आपका वीडियो देखता हूं, सत्संग सुनता हूं, और ज्ञानियों की वाणी, संतों के वचन, इन सबसे मन अच्छा हो जाता है, शांत हो जाता है। (P10-0042)
  73. सत्संग में साधु-संतों की वाणी से दिमाग ठीक रहता है, टेंशन नहीं होता। पर सांसारिक व्यवहार में जब लोगों के पास रहता हूं, तो दिमाग बहुत खराब रहता है। क्या करूं? (P10-0053)
  74. आपके सत्संग अनुसार व्यर्थ के सारे काम छोड़ते जाएं, जरूरत में जिएं, सत्कर्म करें, एकांत में रहें और फंसने वाले काम ना करें — क्या यह सही दिशा है? कृपया बताएं। (P10-0077)
  75. मानसिक बंधन से पूरी तरह मुक्ति नहीं मिली है, लेकिन ऐसा लगता है कि 70% हट गया हूं। आपके सत्संग का असर है गुरु जी। बस अब संसार और उसके बंधनों से मुक्त होना है। (P10-0095)
  76. गुरु जी, क्या आत्मज्ञानी होने के बाद हर व्यक्ति सत्संग करता है या मौन हो जाता है? (P10-0096)
  77. गुरु जी, आपका सत्संग सुनती हूं, बहुत अच्छा भी लगता है, लेकिन जीवन में उदासी है। क्या करूं? (P10-0167)
  78. (एक साधक की ओर से) सत्संग समझ में आ जाने के बाद अब घर पर मन नहीं लगता। क्या करें? (P10-0168)
  79. (साधक बीच में बात काटकर बोलने लगे, तब गुरु जी ने सुनने के बारे में समझाया।) सत्संग में कैसे सुनें? (P11-0014)
  80. सत्संग से इतना समझ आ रहा है कि मैं शरीर और मन नहीं हूं — शरीर माता-पिता और पोषण से बना, मन बाहरी जानकारियों से। फिर इनके बिना भी क्या मैं कुछ हूं? इस पर अब जिज्ञासा टिक रही है। (P11-0158)
  81. क्या हम आपका उपदेश आगे दे सकते हैं, जैसे आपने हमें सत्संग सुनाया, वैसे किसी को सुना सकते हैं? (P11-0172)
  82. सत्कर्म-ईमानदारी करते हैं, आपके सत्संग सुनते हैं, ध्यान में बैठते हैं — तो क्या गुरु मंत्र जपना जरूरी है? (P12-0080)
  83. आपके द्वारा सत्संग सुनने के बाद क्या हम आपस में उस पर चर्चा कर सकते हैं? (P12-0095)
  84. जब से आपका सत्संग सुन रहा हूं, तब से व्याकुलता और जिज्ञासा हो रही है। मार्गदर्शन करें। (P12-0101)
  85. मैं गृहस्थ हूं; बरसों से सत्संग सुनता हूं — रोज चार-पांच घंटे रामकृष्ण परमहंस जी को और एक घंटा आपको — इतना ज्ञान भर गया है, पर भीतर की अनुभूति के लिए एकांत चाहिए, जो घर-गृहस्थी में हो ही नहीं पाता। एकांत के लिए जाना चाहता हूं तो पत्नी और परिवार रोक लेते हैं, उन्हें डर रहता है कि कहीं गृहस्थी ना छोड़ दूं। क्या करूं? (P12-0104)
  86. गुरु जी, आपने बोला था कि अगर आप सत्संग का लाभ लेते हो तो आपको मूल्य देना होगा, नहीं तो लाभ लेना बंद कर दो। लेकिन मैं अभी पढ़ाई कर रहा हूं, तो मुझे क्या करना चाहिए? (P13-0021)
  87. गुरु जी, कई बार विचार आता है कि कोई बात नहीं, धीरे-धीरे पार उतर जाएंगे। पूरी ईमानदारी से जीवन जीने में घर-परिवार का भरण-पोषण भी मुश्किल से होगा, दुनियावी तकलीफें सहनी पड़ेंगी, तो मन पीछे हो जाता है कि एक-दो-चार जन्म और लग जाएंगे; ज्ञान तो आ ही गया, ईमानदारी-सत्कर्म-सत्संग पर चलते रहेंगे, धीरे-धीरे कल्याण हो जाएगा। (P13-0042)
  88. (एक साधक, परिवार के साथ) गुरु जी, मैं सत्संग भी समझता हूं, और गुटखा का सेवन भी करता हूं — यही चूक हो रही है। (पत्नी:) हम दो-तीन साल से बोल रहे थे पर बात नहीं सुनते थे; ज्यादा बोला तो गुस्सा करते थे, इसलिए छह महीने से यह टॉपिक ही बंद कर दिया। (P13-0068)
  89. गुरु जी, इस संसार में ईमानदारी इतनी कठिन क्यों है? आपका सत्संग सुनता हूं, अब हर जगह ईमानदारी से काम करता हूं, लेकिन कठिनाई बहुत ज्यादा हो रही है। (P13-0172)
  90. गुरु जी, प्रेम और आनंद में हर पल कैसे जिएं? आजकल प्रेम और आनंद शब्द का बहुत उपयोग होता है, इन्हें बहुत विकृत कर दिया है। सत्संग सुनते-सुनते पता चल गया कि प्रेम और आनंद किसमें होता है, लेकिन हर क्षण उनमें कैसे जी सकते हैं? (P13-0181)
  91. गुरु जी, जैसे युद्ध अर्जुन ने नहीं किया पर हुआ, वैसे बेईमानी भी हम नहीं कर रहे, हो रही है — उसका पता कैसे चले? जैसे किसी दुखी को देख के भी मैं अनदेखा करके सत्संग सुनके चला गया। (P14-0053)
  92. गुरु जी, जो नया आया है, सत्संग भी नहीं जानता, वो पूछता है परमात्मा को कैसे प्राप्त करूं, और आत्मज्ञानी सीधा बोल देता है 'जो प्राप्त है उसको छोड़ दो' — वो तकलीफ में आ जाता है। थोड़ा विस्तार से समझाइए ना? (P14-0065)
  93. गुरु जी, ये ज्ञान लेने के लिए गुरु के पास जाना चाहिए या अपने आप सत्संग सुनते रहें? (P14-0072)
  94. अध्यात्म और सत्संग से जो रस मिलता है, वो अन्य भोगों से कैसे भिन्न है? (P15-0004)
  95. प्रभु जी, जब आप सत्संग नहीं करते, शांत रहते हो, तब आपके मन की स्थिति क्या होती है? (P15-0015)
  96. सत्संग का मतलब समझाइए। (P15-0046)
  97. क्या आत्मज्ञान के लिए आपके पास आना पड़ेगा, या चैनल पर सत्संग सुनने से हो जाएगा? (P15-0109)
  98. गुरु जी, क्या जीवन के सभी रस खत्म होने पर शरीर का भी त्याग करना पड़ता है? हमने कई सत्संग में सुना है कि अंत में शरीर का होना भी बंधन है। (P15-0147)
  99. भगवान, जब सत्संग सुनते हैं तब अपने आप में रहते हैं; जैसे ही सुनना बंद करते हैं, शरीर भाव में आ जाते हैं। क्या करें कि सदैव अपने आप में बने रहें? और एक तरफ खुशी, फिर रोना क्यों आता है? (P15-0172)
  100. जहां भी सत्संग में गए, यही बताया गया कि मन तुमको चला रहा है। क्या सच में मन हमें चलाता है? (P15-0191)
  101. गुरु जी, एक जगह सत्संग में सुना था — भक्त ने पूछा कि ज्यादा से ज्यादा धन कैसे आकर्षित करूं, अमीर कैसे बनूं। महात्मा जी ने कहा कि दरिद्र की ऊर्जा अलग है और पैसे वाले की अलग; अमीर बनना है तो अमीर की संगत करो, उसकी मदद करो, तो वह ऊर्जा आपकी तरफ आकर्षित होगी; और गरीब की मदद करोगे तो दरिद्र की ऊर्जा आकर्षित होगी। क्या यह बात सही है? (P16-0147)
  102. गुरु जी, कभी लगता है कि यह सत्संग सुनना, यहां बैठना भी कहीं मेरी ही बनाई एक नई दुनिया, एक नई लीला तो नहीं? (P17-0139)
  103. गुरु जी, क्या कभी ट्रेन या फ्लाइट में सत्संग हुआ? लोगों का व्यवहार कहां कैसा होता है? (P18-0067)
  104. गुरु जी, सत्संगों में सत्कर्म के पीछे मुक्ति या मोक्ष जोड़ दिया जाता है — तो मुक्ति के लिए देना भी तो एक भावना/कामना हुई? (P18-0182)
  105. गुरु जी, ऋषि-मुनि और सत्संग कहते हैं कि यह जग मिथ्या है, दुखालय है, मृत्युलोक है, यहां से जल्दी निकलो — तो क्या यह सही है? (P18-0188)
  106. गुरु जी, कृपया आप सत्संग किसी फिक्स टाइम पर किया करें, ताकि पूछने वाले पूछ सकें — यह क्यों नहीं होता? (P18-0195)
  107. गुरु जी, कुछ सत्संगों में कहा जाता है कि अर्जुन को ज्ञान/विराट दर्शन तो हुआ पर मोक्ष नहीं हुआ — क्या यह सही है? (P19-0010)
  108. गुरु जी, सत्संग में 33 लाख ब्रह्मांड की चर्चा होती है, समझ से परे हो जाता है — इसे कैसे समझें? (P19-0042)
  109. गुरु जी, ईमानदारी का सूक्ष्म मतलब क्या है? पुराने सत्संग में दृष्टा बन जा सुनते थे — दृष्टा बनना क्या है? (P19-0058)
  110. गुरु जी, सत्संग के बीच में उठना क्यों मना है? (P19-0104)
  111. गुरु जी, मैं तो मानता हूं कि बाजार में बैठकर भी ध्यान हो सकता है; फिर सत्संग में कोई उठे तो क्या फर्क पड़ता है? (P19-0109)
  112. गुरु जी, आप एक-दो घंटे सत्संग करके आराम कर सकते थे; सुबह से रात तक लगातार क्यों बोलते रहते हो? (P19-0120)
  113. गुरु जी, आप साधकों से घंटों ध्यान या कोई साधना क्यों नहीं करवाते? क्या सिर्फ सत्संग से आत्मज्ञान हो सकता है? (P19-0150)
  114. गुरु जी, सत्संग सुनकर अभ्यास के लिए अलग से समय देना चाहिए? और क्या घर का काम करते हुए साथ-साथ सत्संग सुन सकते हैं? (P19-0151)
  115. गुरु जी, कुछ समय सत्संग में रहकर साधक को लगता है कि उसे बिना भटके आसानी से मिल गया — क्या ऐसा कहना उचित है? (P19-0172)
  116. गुरु जी, सत्संग में आने वाले साधक कितने प्रकार के होते हैं? (P20-0023)
  117. गुरु जी, क्या भगवान को पाने के लिए वेद-पुराण-शास्त्र पढ़ना जरूरी है? पढ़ने में मन नहीं लगता, सत्संग सुनने में आनंद आता है। (P20-0038)
  118. गुरु जी, सत्संग में बार-बार समझाने पर भी संशय पर संशय क्यों उठते रहते हैं? (P20-0046)
  119. गुरु जी, सत्संग की बातें सुनने के बाद आत्म-अनुभूति कैसे होगी? (P20-0055)
  120. गुरु जी, गुरु के सामने सत्संग में बैठकर क्या करना चाहिए? (P20-0096)
  121. आज के सत्संग का सार क्या है — केवल चर्चा से क्या होगा? (P20-0151)
  122. गुरु जी, मैं जामनेर (महाराष्ट्र) से हूं; अपने गुरु जी के परमधाम जाने के बाद सत्संग में रुचि बढ़ी और YouTube से आपका पता मिला — अब आगे क्या करूं, सत्संग में कैसे जियूं? (P21-0049)
  123. गुरु जी, हम इंदौर में सत्संग, लंगर और गुरुद्वारे में सेवा करते हैं — हमें आपका आशीर्वाद चाहिए। (P21-0050)
  124. गुरु जी, ठीक शब्द अपनाने से लोग धीरे-धीरे दूर हो गए, अब अकेलापन सताता है। मन करता है अपने मार्ग के सत्संगियों के साथ बैठकर बातें करूं, जबकि पहुंचा तो कोई भी नहीं है — क्या यह ठीक है? (P21-0059)
  125. गुरु जी, अध्यात्म के रास्ते पर चलते हुए, जब दिन-रात सत्संग ही चल रहा है, तो निर्विचार कैसे हुआ जाए? (P21-0078)
  126. गुरु जी, जीवन में सत्संग भी है, ईमानदारी भी है और आत्मचिंतन भी — इसके अलावा कोई और तप भी करना पड़ेगा, तब उपलब्धि होगी? (P21-0098)
  127. गुरु जी, मैं सोचती हूं यह घर छोड़कर कुटिया चली जाऊं और वहां सत्संग-सेवा करूं; पर वहां अपनी मेहनत का नहीं, दूसरों के दिए अन्न का खाऊंगी और पैरों तले जीव भी मरते हैं — क्या इससे मेरा बंधन बनेगा? आत्म-कल्याण के लिए घर पर रहूं या कुटिया जाऊं? (P21-0099)
  128. गुरु जी, मैं समझा हूं कि बीज में वृक्ष की तरह मेरा कल्याण भी ईमानदारी (100%), सत्कर्म और सत्संग से शुरू होगा, फिर ध्यान और समाधि घटित होंगे — तो धारणा-ध्यान-समाधि कैसे होती है, और सत्य और शिव की स्थिति अलग है या एक? (P21-0108)
  129. गुरु जी, कमरे में बैठकर आपका सत्संग सुनता हूं और कोई बीच में बोल पड़े या आपकी बात में टोक दे तो गुस्सा आता है — ये गुस्सा कहां से आता है? (P21-0113)
  130. गुरु जी, सत्संग कैसे करना चाहिए — किस टाइप के लोगों का संग करूं? (P21-0176)
  131. गुरु जी, मैं अपने गुरु जी के पास रहती हूं, साधना करती हूं; अचानक आपका सत्संग सुना। मुझे कुछ नहीं चाहिए, पर आपकी सेवा में — आपके भ्रमण के लिए — कुछ देना चाहती हूं। (P22-0018)
  132. गुरुदेव, मैं हरियाणा से हूं, श्मशान में सेवा करता हूं और सेवा करते हुए आपका सत्संग सुनता हूं — क्या यह सत्कर्म है? (P22-0019)
  133. गुरु जी, संतों ने नरक, स्वर्ग, अपवर्ग का जैसा वर्णन किया है, वह सुख की श्रेणी में आता है, लेकिन सत्संग आनंद में ले जाता है — तो क्या सुख के त्याग के बाद ही आनंद प्रकट हो सकता है? क्या सत्संग के अलावा भी कोई आनंद है? (P22-0033)
  134. गुरु जी, समझ के स्तर से क्या शरीर का दर्द ओवरलुक हो पाता है? जैसे आज पूरे दो घंटे सत्संग में बैठकर सुनते रहे तो दर्द की उपेक्षा हो गई। मानसिक सहन तो समझ में आता है — विचारों और इच्छाओं की उपेक्षा कर सकते हैं — पर शारीरिक सहन में समस्या है। (P22-0048)
  135. गुरु जी, सत्संग तो बहुत सुनते हैं लेकिन याद नहीं रहता, यहां तक कि सपने में भी आपका सत्संग होता है — याद क्यों नहीं रहता? (P22-0059)
  136. गुरु जी, क्या एकांत में हम सत्संग सुन सकते हैं? या एकांत में बस सत्संग ही होना चाहिए? (P23-0058)
  137. गुरु जी, ईमानदारी, सत्कर्म, सत्संग, अध्यात्म और धर्म बार-बार भार जैसे लगते हैं। ऐसा क्यों? (P23-0133)
  138. गुरु जी, आपका सत्संग सुनने के बाद जब मैं आंख बंद करती हूं तो आपकी ही तस्वीर आंखों में आती है। इसका क्या कारण है? (P23-0144)
  139. गुरु जी, आपका सत्संग सुनते हैं। परिस्थिति तब विपरीत हो जाती है जब हम तो सामने वाले के साथ ईमानदारी और सत्कर्म से चलते हैं, पर सामने वाला व्यक्ति न अध्यात्म को समझता है, न हमारी ईमानदारी और सत्कर्म को। ऐसी स्थिति में क्या करें? (P23-0164)
  140. गुरुजी, आपने एक सत्संग में कहा कि इच्छा का त्याग करना चाहिए, तो क्या आत्मज्ञान की इच्छा का भी त्याग करें? (P24-0066)
  141. गुरु जी, ये सृष्टि कभी खत्म भी हो जाएगी? सत्संगों में बताते हैं कि सृष्टि बहुत बार खत्म हुई है, बहुत बार सृजन हुआ है। (P25-0112)
  142. योगी जी, जब तक आपका सत्संग चल रहा है तब तक आनंद की वर्षा हो रही है, सत्संग खत्म होते ही आनंद खत्म हो जाता है — क्या करें? (P26-0016)
  143. गुरु जी, जब साधक सत्संग में बैठते हैं तो अपने शरीर पर कैसे नियंत्रण रखें? सत्संग चलते समय शरीर में हलचल होती है — कहीं पैर दुखता है, कहीं खुजलाहट होती है — जिससे बाजू वाले भी डिस्टर्ब होते हैं। (P26-0028)
  144. गुरु जी, क्या किताबें पढ़कर, सत्संग वीडियो सुनकर अपने तर्क से पहुंचा जा सकता है? (P26-0048)