आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

डर और भय — योगी गुरु जी के प्रश्नोत्तर

इस पृष्ठ पर “डर और भय” विषय से जुड़े 112 प्रश्न हैं, जो जिज्ञासुओं ने सत्संग में योगी गुरु जी से पूछे। किसी प्रश्न पर क्लिक करके योगी गुरु जी का पूरा उत्तर उनके अपने शब्दों में पढ़ें, वीडियो के साथ।

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  1. गुरुदेव, अज्ञात के रास्ते पर भय क्यों लगता है? क्या अज्ञात रास्ते पर चलने के लिए समर्पण और श्रद्धा से बल मिलता है और भय का नाश होता है? (P1-0015)
  2. मैं क्या करूं? भय और चिंता में फंस गया हूं। (P1-0028)
  3. गुरु जी, मुझे मानसिक कमजोरी, हर बात का डर और अति-विचार (ओवरथिंकिंग) से बहुत तकलीफ होती है; लगता है कुछ हो जाएगा। कोई एक उपाय बता दीजिए। (P1-0062)
  4. गुरु जी, डर किसे होता है — मन को या शरीर को? (P1-0067)
  5. गुरु जी, मुझे डर लग रहा है कि यह सब मैंने क्या कर लिया — अब मैं अंदर से देख पा रहा हूं कि फंस गया हूं। (P1-0082)
  6. गुरु जी, भविष्य में कुछ बुरा या नुकसान होने का डर बना रहता है। क्यों? (P1-0112)
  7. गुरु जी, ईमानदारी से काम तो करता हूं, पर साहस की कमी है, बहुत डरपोक हूं। क्या करूं? (P1-0134)
  8. गुरु जी, (निर्माण में) बिजली के साथ लोहा लगा है, करंट का डर रहेगा। (P1-0183)
  9. गुरु जी, खुद की ताकत और मन की शक्ति कैसे बढ़ाएं, जिससे कोई और हम पर प्रभाव न डाल पाए और डर भी न हो? (P2-0064)
  10. नमस्ते गुरु जी। मैं ईमानदारी से रहने का प्रयास करता हूं, पर कभी-कभी उलझन और स्पष्टता की कमी के कारण डर जाता हूं, मुरझा जाता हूं। (P2-0147)
  11. ज्ञान होने तक तो ये घाव बार-बार हरे हो जाते हैं; याद आते ही मन घृणा से भर जाता है और न चाहते हुए भी उनके लिए बद्दुआएं निकल जाती हैं। फिर डर लगता है कि इस द्वेष से मैंने फिर कर्म-बंधन बांध लिया। अगर ज्ञान से पहले शरीर छूट गया, तो क्या इस द्वेष के कारण मैं फिर उन्हीं के इर्द-गिर्द, उनके परिवार में पैदा हो जाऊंगा — वही चक्र, जिसे मैं तोड़ना चाहता हूं? (P2-0184)
  12. क्या मैं इसे ऐसे पैमाने की तरह समझ सकती हूं कि अगर मैं लक्ष्य की तरफ जा रही हूं तो शांति, उत्साह बढ़ेगा और निडर होती जाऊंगी; और लक्ष्य के विपरीत जा रही हूं तो घुटन, अशांति, असुरक्षा और डर बढ़ेगा? (P2-0195)
  13. तो यह अपने को जांचने का पैमाना हो सकता है। मैं डरा हुआ इंसान हूं और डर निकालना चाहता हूं — लक्ष्य की ओर अपनी यात्रा तेज कैसे करूं? (P2-0196)
  14. गृहस्थ जीवन में डर और असुरक्षा सताती रहती है — कल मेरा क्या होगा। जवानी में दौड़कर पैसे, घर, बैंक बैलेंस, जानकारियां और सोशल सर्कल इकट्ठे किए ताकि सुरक्षित महसूस हो, फिर भी एकांत या दुख में लगता है कोई किसी का नहीं। आपकी व्यक्तित्व में जो निश्चितता-स्थिरता आई है, वह मैं अपने अंदर कैसे लाऊं? अपूर्णता से पूर्णता की तरफ जल्दी कैसे बढ़ूं? अध्यात्म में बाहर जैसी प्रगति नहीं दिखती, तो डर लगता है कहीं मैं नई दुनिया तो नहीं बसा ली — मार्गदर्शन करें। (P2-0199)
  15. स्वास्थ्य बिगाड़ने वाला खाना (शुगर वाले को मीठा) — जिम्मेदारी? डर कि नेगलेक्ट कर दिया? (P3-0032)
  16. असली-नकली जरूरतमंद पहचान मुश्किल; धर्म का डर — दान न करूं तो भगवान नाराज / करूं तो फंसूं। डर कैसे निकाले? (P3-0033)
  17. समझ आती है पर दृढ़ता/स्ट्रॉन्ग पावर नहीं — परिवार बैकग्राउंड आध्यात्मिक नहीं। क्या करें? गिरने का डर? (P3-0049)
  18. समाज छोड़ अकेले खड़ी — अध्यात्म में पूरी तरह आने में डर कि फिर कलंक लगे। सुरक्षा? (P3-0050)
  19. ऑफिस में काम करवाने के लिए थोड़ा झूठ (सीनियर ने कहा urgent) — गलत? नौकरी छूटने का डर? (P3-0060)
  20. एक साधिका: मैंने चार दिन तक दृश्य देखा कि विष्णु जी बाहर निकल रहे हैं और उनका सुदर्शन चक्र बहुत तीव्र गति से चल रहा है; मैंने कहा मुझे अपने अंदर कर लो, तो उनका दायरा बढ़ गया और चक्र से मेरी गर्दन कटकर अलग हो गई, मुझे डर लगा। फिर ऊपर बहुत ऊंचाई पर ओम दिखा और तीव्र किरणें निकलीं। इसका अर्थ क्या है? मैंने सोचा कि क्या अंतर्मन में कोई सूक्ष्म विकार — शायद पूर्व जन्म का — था जिसे उन्होंने सुदर्शन चक्र से काट दिया? क्या यह चिंतन सही है? (P3-0089)
  21. (उसी साधिका का प्रश्न) गर्दन कटते समय मुझे जो डर लगा, वह कहां से था? मुझे लगता है इस जन्म में तो कोई विकार हुआ नहीं, तो सूक्ष्म रूप में विकार कब हुआ? (P3-0093)
  22. (लाइव) योगी जी प्रणाम। सत्कर्म और कृतज्ञता क्या है? क्या दया-एहसान, लालच और डर इन्हीं से आते हैं? (P4-0021)
  23. (कुटिया में साधक, उज्जैन से) मैं 2017 में घर से एक साल के लिए निकल गया था। ओशो की विधियां (डायनामिक मेडिटेशन आदि) बहुत ऊर्जा देती थीं, उसमें मैं घबरा गया, एकांत में डर भी लगता था, फिर वापस संसार में लौटा — ना संसार का रहा, ना सन्यास का। बेचैनी, चिंता, तनाव, अनिद्रा, फिर सिगरेट-शराब भी लगी; डॉक्टर की दवाइयों के बाद मेरा दिमाग सुन्न हो गया। बहुत प्रयास किए, कई जगह पूछा। अब दिमाग सुन्न पड़ा है, कोई भावना ही नहीं उठती, शरीर में ताकत भी नहीं बची — अब क्या करूं? (P4-0079)
  24. (लाइव) प्रणाम गुरु जी। आपने बोला था कि सब हम सोचते हैं, लेकिन मैं तो डरावना नहीं सोचता — डर के विचार मुझे क्यों आते हैं? इसका मतलब तो यह हुआ कि सोचता मैं हूं, परंतु विचार खुद आते हैं। विचार का स्रोत कौन है? यह कहां से आते हैं? (P4-0089)
  25. (लाइव) गुरु जी प्रणाम। आपने कहा कि जानने से मुक्त होना है, लेकिन खुद को तो समझना है ना — 'मैं' क्या है, कामना, भय, राग-द्वेष, तुलना — यह सब तो समझना पड़ेगा ना, तभी तो इससे छुटकारा होगा। ऐसा ही है क्या? (P4-0126)
  26. (कुटिया में साधिका) योगी जी, आप कहते हो कि सारी समस्या उम्मीद पर टिकी है, उम्मीद छोड़ दो। लेकिन मुझे तो किसी से कोई उम्मीद दिखाई ही नहीं देती, बचपन से मैंने अपने बलबूते पे किया है। मेरा भय यह है कि कभी शरीर में कोई बड़ी बीमारी आ जाए, बुद्धि काम ना करे, या प्रारब्ध इतना तगड़ा हो कि मेरी यात्रा ही ना हो पाए। तो मेरी सूक्ष्म से सूक्ष्म उम्मीद मुझे कैसे पता चले? मुझे तुरंत वाला मार्ग बता दो (वाल्मीकि की तरह बैठ जाऊं), ताकि जब तक मैं स्वस्थ हूं, समय बर्बाद ना हो। (P4-0155)
  27. (वही साधिका) मार्केट में नकली ज्यादा पॉलिश करके बिकता है, चाहे अध्यात्म ही क्यों ना हो; असली थोड़ा डर्टी भी दिख सकता है। असली और नकली (गुरु/ज्ञान) की पहचान कैसे की जाए? (P4-0186)
  28. (वही साधिका) मैं बहुत सी चीजों से मुक्त हो गई — ईर्ष्या, समाज, रीति-रिवाज, अंधी पूजा-पाठ, मां-बाप का मोह। लेकिन आर्थिक डर पर आकर अटक जाती हूं — अगर मेरे पास पैसे नहीं हुए तो जिंदगी कैसी होगी? ईमानदारी से (ज्ञान के) वीडियो बनाती हूं तो लोग सुनते नहीं, कमाई घट गई है। इस डर को कैसे खत्म करूं? (P4-0189)
  29. (वही साधिका) कहते हैं कामना से मुक्त हो जाओ — क्या कामना को पहले प्राप्त कर लो तब मुक्त हो जाएँगे? मैं आर्थिक परेशानी क्लियर करके निडर होकर आना चाहती हूँ; और पीतमपुर का मकान छोड़कर गाँव जाना चाहती हूँ पर डर है कि वहाँ फंस न जाऊँ। (P5-0020)
  30. जरूरत से ज्यादा डरने वाले लोगों के लिए क्या? (P5-0046)
  31. मलिन विचार आते हैं, साधना-पूजा में तकलीफ — क्या करें? डर का सामना, क्रोध निवारण, प्रेम कैसे आए? (P5-0098)
  32. कार्य शुरू करने का भय कैसे दूर करें? मन साधना में लगता है पर पारिवारिक कर्तव्य रुकावट — क्या करें? (P5-0129)
  33. ध्यान में सूक्ष्म शरीर बाहर निकलता है, दिल की धड़कन बढ़ती है, ऊंचाई से डर लगता है, आंखें खुल जाती हैं — मिटने का भय है। क्या करें? (P5-0156)
  34. डर का क्या उपाय है — छोटी चीजों से भी डर लगता है? (P5-0167)
  35. नमन योगी जी। मैं अपनी स्थिति का जायजा कैसे लूं? अगर गहराई से जानना हो और जीवंत गुरु न मिले तो क्या करूं? महिलाएं ऐसा भ्रमण कैसे करेंगी? अगर मैं अपनी स्थिति घर पर ही जांचना चाहूं और कोई ऐसा गुरु न हो कि आज पहले अपने आप को समझूं, तो थोड़ा भी कैसे समझूं? क्या स्त्री शरीर या डर निकलने में बाधा बनता है? (P6-0055)
  36. गुरु से इतना डर क्यों रहता है? गुरु और शिष्य के बीच का दायरा क्या होना चाहिए? कुछ भी पूछना चाहते हैं, खुलकर बोलना चाहते हैं, पर बोल नहीं पाते। चलते हुए भी लगता है कि कहीं कुछ गलत न हो जाए और डांट न सुननी पड़े। यह डर कैसे खत्म हो? मर्यादा कैसी होनी चाहिए? (P6-0064)
  37. राधेश्याम पूछते हैं, ईमानदारी से चलने पर मृत्यु का डर कम लगेगा क्या? (P6-0173)
  38. एक झटके में जीवन के कष्ट कुछ नहीं दिखे, अब बहुत कुछ दिमाग में अपने आप आ रहा है और डर लग रहा है। क्या करें? (P7-0060)
  39. अपनी जिंदगी की क्लैरिटी क्यों नहीं हो पा रही? अंदर गुणों की ताकत नहीं है, शारीरिक बल नहीं है, अधूरापन है, कमियां हैं। जिन पर काम नहीं करना चाहता, उन्हें ढक रहा हूं। भाई कवर कर ले, इधर से कुछ मिल जाए। जहां कमी है, वहां पचहत्तर बार नमस्ते करूंगा, घरवालों की चापलूसी करनी पड़ती है। आज परिवार के साथ, कल पति-पत्नी के साथ, फिर बच्चों के साथ, दादा-दादी बनने तक वही कमजोरी रह जाएगी। जन्म-जन्म डर-डर कर क्यों जी रहे हैं? मैं आपसे डर रही हूं, आप मुझसे डर रहे हो, बात ही नहीं हो रही। कोई किसी को डरा क्यों रहा है? (P7-0083)
  40. लाइव पर प्रश्न है। डर किस स्थिति में खत्म होगा? (P7-0087)
  41. हम दोनों सेंट्रल गवर्नमेंट से रिटायर हैं, दोनों सक्षम हैं। अब क्या करें? परिवार के लिए कितना ईंट पत्थर जोड़ें? पति कहते हैं कहीं अच्छा कार्य में लगा न दूं, सब लुटा दूंगी। कोई भी गेरुआ वस्त्र पहन के आ जाए तो देने का डर है। गेरुआ वाले को कैसे समझें, जरूरत कैसे देखें? (P7-0097)
  42. कुछ भी काम करने से डर लगता है। क्या कारण है? क्या कोई कुछ कर दिया है? (P8-0026)
  43. अचेतन मन में जो डर के विचार हैं, उनसे कैसे ठीक हों? और यह डर के विचार उसमें कैसे बैठे? (P8-0053)
  44. कोई भी उस व्यक्ति से प्रेम नहीं करता जिससे वह डरता है। गुरु जी, यह कितना सही है? (P8-0056)
  45. ध्यान करने का मन होता है, पर एक अजीब सा भय बना रहता है, लगता है कोई है, सर्प है। क्या करें? (P8-0156)
  46. जिसके साथ मैं हूं, उसके अंदर मुझे संभालने का डर है। मैं उस पर इतना आश्रित हूं कि वह जीवन में कुछ नहीं कर पाता। गुलामी से मैं कैसे मुक्त होऊं? (P9-0014)
  47. उसी घर में पत्नी भी रिश्ते के कहने की वजह से अप्रत्यक्ष रूप से पिता को कंट्रोल करती है। बच्चे सिर्फ डर से जीते हैं। उन बच्चों में मैं एक बच्चा हूं, सत्संग सुनता हूं, और उन्हें यह पसंद नहीं। वह बच्चा क्या करे? (P9-0030)
  48. मौत का डर क्यों लगता है? (P9-0033)
  49. मुझे अपने आप से भी डर लगता है, कभी-कभी, कि मुझे कोई गलत काम न हो जाए। (P9-0035)
  50. भविष्य का डर लगता है कि कुछ नहीं होगा, तो क्या होगा? (P9-0040)
  51. गुरु जी, मैं हरियाणा से अकेली आऊंगी। आश्रम दूर होगा, और मुझे डर लगता है। फिर भी मैं आऊंगी। मेरा मार्ग यही है। (P9-0072)
  52. बात तो ठीक है, सर, लेकिन आपके खौफनाक कुत्तों से डर लगता है। (P10-0044)
  53. कोई बड़ा कार्य करने में डर लगता है कि कहीं फेल ना हो जाएं, लोग क्या कहेंगे। ऐसे विचार से कैसे बचें? (P10-0072)
  54. गुरुदेव, मैं लोगों के बीच बोलना चाहता हूं पर डर लगता है। मुझे हकलाहट होती है और डॉक्टर ने बोला है कि लोगों से बात करो। मैं 100 लोगों के बीच बोलना चाहता हूं। कैसे करूं? (P10-0084)
  55. गुरु जी, दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते हैं, इसका डर कैसे खत्म हो? (P10-0110)
  56. गुरुवर, मैंने एक-दो साल पहले शिव नाम जप शुरू किया था, और आगे बढ़ते-बढ़ते मुझे अपने स्वभाव की असलियत पता चली और मैं डर गया। तब से भाग रहा हूं। अब मैं उलझ चुका हूं। क्या फिर से शुरू करूं? (P10-0136)
  57. गुरु जी, आप में डर, डाउट या चिंता नहीं है — क्या यह आत्मज्ञान की वजह से है, या आप पहले भी ऐसे ही थे? (P10-0143)
  58. गुरु जी, मुझे डर लग रहा है कि आप जैसे महापुरुष के होते हुए भी मैं पूरा लाभ नहीं ले पा रहा हूं। फिर कब और कितने सालों बाद मुझे मौका मिलेगा? (P10-0145)
  59. गुरु जी, आप जब दिल्ली आए थे तब मैं आ सकता था, पर पता नहीं क्यों नहीं आया। बहुत डर लग रहा था कि कहीं आप सच में कुछ बदल ना दें, फिर आम जिंदगी में जीना मुश्किल हो जाएगा। (P10-0149)
  60. गुरु जी, मैं आत्म कल्याण के लिए घर से निकल नहीं पा रहा हूं। मुझे अपने मन से डर लग रहा है कि मुझसे कोई गलत काम ना हो जाए। मार्गदर्शन करिए। (P10-0184)
  61. अगर मैं (पुरुष) होती, तो कब का घर छोड़ के भाग जाती। (महिला शरीर में समाज का डर लगता है।) (P11-0005)
  62. अध्यात्म में हमारा पहला कदम है, बहुत डर लगता है — जैसे केजी वन में एडमिशन लेने वाला बालक घबराता है, कि कहीं गलती ना हो जाए। (P11-0018)
  63. मैं सरकारी पशु अस्पताल में काम करता हूं; मेरा काम है गाय-भैंस को कृत्रिम गर्भाधान के समय शिकंजे में नियंत्रित करना, जिससे पशु बहुत डरता है। क्या यह काम सम्यक आजीविका में आ सकता है? (P11-0041)
  64. मैं गृहस्थ हूं; बरसों से सत्संग सुनता हूं — रोज चार-पांच घंटे रामकृष्ण परमहंस जी को और एक घंटा आपको — इतना ज्ञान भर गया है, पर भीतर की अनुभूति के लिए एकांत चाहिए, जो घर-गृहस्थी में हो ही नहीं पाता। एकांत के लिए जाना चाहता हूं तो पत्नी और परिवार रोक लेते हैं, उन्हें डर रहता है कि कहीं गृहस्थी ना छोड़ दूं। क्या करूं? (P12-0104)
  65. पत्नी को हर वक्त डर रहता है कि पति झोला उठाकर चल ना दे। यह भी तो एक प्राणी को कष्ट देना हुआ; क्या ऐसे कोई मोक्ष या मुक्ति पा सकता है? (P12-0107)
  66. (लाइव में) मुझमें एक बुराई है — कई बार मैं जानबूझकर बुरा सोचता हूं और सोचकर खुश हो रहा होता हूं। ये भाव भीतर अक्सर आता है, इस पर ज्यादा सोचूं तो डर लगने लगता है। शायद ये मेरे पिछले संस्कार हैं — इसे ठीक करना है। (P12-0164)
  67. इसी जीवन में करना है — लेकिन जब कर्ता भाव आ जाता है तो भय आता है कि करना है, फिर अधूरा रह जाता है क्योंकि पाने की चाहत हो जाती है; क्या करें? (P13-0092)
  68. गुरु जी, इतना घना जंगल है, आपको डर नहीं लगता? (P13-0099)
  69. मैं आध्यात्म के लिए बनी हूं पर अटकी हुई हूं, क्योंकि मेरे मां-बाप राक्षस प्रवृत्ति के लोग हैं। उनको छोड़ने से डरती हूं। (P13-0108)
  70. गुरु जी, कर्म करते वक्त फेल होने का भय क्यों रहता है? इसका मूल कारण क्या है? (P13-0128)
  71. गुरु जी, जहां सारी बातें प्रैक्टिकल करके समझाई जाती हैं, ऐसी जगह भीड़ कम क्यों रहती है? आखिर लोगों को क्या डर है? (P14-0071)
  72. ध्यान में मौत का डर लगता है, छूटने का भय बना रहता है — मार्गदर्शन करें। (P15-0050)
  73. गुरु जी, बचपन में पिता बहुत मारते थे — 10 साल की उम्र से कॉलेज तक। अब मैं 34 साल का हूं, पर पिता के सामने आने से ही बहुत डर लगता है, ढंग से बात भी नहीं कर पाता। यह डर कैसे दूर करूं? (P15-0131)
  74. गुरु जी, क्या डर से मुक्त होने के लिए जिस काम से डर लगता है, वो काम बार-बार करना चाहिए? (P15-0160)
  75. गुरु जी, क्या आत्मज्ञान होने के बाद डर-भय नहीं लगता? (P16-0017)
  76. आपसे बात करने में डर लगता है। जैसे ही बोलने लगता हूं, रोना आ जाता है, गला भर आता है। लगता है कोई गलती ना हो जाए। (P16-0109)
  77. हर जीव अपने प्राण क्यों बचाना चाहता है? बहुत लोग 100 वर्ष के ऊपर चले जाते हैं; एक बूढ़ी अम्मा कह रही थीं कि अब तो सिर्फ मौत का इंतजार है, बस शरीर जल्दी छूटे और दर्द ना हो — फिर भी मौत का डर है। एक चींटी को भी मारूं तो वह भी प्राणों की रक्षा करती है। आखिर यह डर किस चीज का है? (P16-0135)
  78. "तेरा क्या होगा?" — इस बात ने मुझे जैसे स्टैच्यू बना दिया। मैं तो रस लेने के लिए प्रपंच भरी दुनिया में गई और इतना रायता बिखेर दिया। अब ये डरावना सीन सामने है कि सच में मेरा क्या होगा। मैं ईमानदारी से इस पर काम करना चाहती हूं — कहां से शुरुआत करूं, क्या करूं कि मेरा पक्का इंश्योरेंस हो जाए? (P17-0013)
  79. आपका भाव रहता था कि मैं जो भी कर रहा हूं — खाना, सोना, रोना, बात करना — मैं अपने लक्ष्य की तरफ ही पहुंच रहा हूं। तो अगर हम पथिक भी अपनी पूरी दिनचर्या में, ईमानदारी और सत्कर्म करते हुए, ये भाव रखें कि जो कुछ मेरे शरीर से, मन से, कल्पना में, डर में हो रहा है, उसका निचोड़ यही है कि मैं अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा हूं, कि मेरा गुरु देख रहा है — तो ये मेरे लिए कितना कारगर होगा? (P17-0023)
  80. जब मुझे डर लग रहा हो, उस वक्त मैं क्या भाव बनाऊं? क्या एकांत में चली जाऊं, या रोना आए तो क्या करूं? (P17-0025)
  81. गुरु जी, क्या केवल पापी मन वाली बुद्धि को ही डर लगता है, और जिसके मन में राम और सत्य स्थित हैं उसे कोई भय नहीं लगता? (P17-0169)
  82. गुरु जी, क्या लोग असत्य में जीते हैं, इसीलिए सत्य वचन से भयग्रस्त होते हैं? (P17-0171)
  83. गुरु जी, जब आप कहते हैं कि पढ़ाई-करियर छोड़ दो, तो डर लगता है। (P17-0190)
  84. गुरु जी, आज मां-बाप को बच्चों से डरकर बात करनी पड़ती है और वृद्धाश्रम बढ़ते जा रहे हैं — इसका कारण क्या है? (P18-0003)
  85. गुरु जी, केदारनाथ की पैदल यात्रा में डर और दर्द के बीच आपने क्या समझा? (P18-0015)
  86. गुरु जी, जो शरीर से, बुद्धि से या पैसे से बलवान है, उससे हमें भय क्यों लगता है? (P18-0158)
  87. गुरु जी, सुना है परमात्मा फ्रीडम और भय से मुक्त होने से मिलता है — तो आपकी कुटिया में नियम, बंधन और भय क्यों? (P19-0026)
  88. गुरु जी, चित्त कभी-कभी स्वयं में लीन होकर आनंद से निःशब्द हो जाता है, पर डर लगता है कि कहीं खो न जाऊं — यह क्या है? (P20-0016)
  89. गुरु जी, क्या सभी भय की गहराई में मृत्यु का भय ही है? (P20-0039)
  90. गुरु जी, सब छोड़कर अकेले अध्यात्म में आगे बढ़ने में डर लगता है — क्या करें? (P20-0094)
  91. गुरु के जितना नजदीक जाएंगे उतनी परीक्षा बढ़ेगी — परीक्षा से डर लगता है, क्या करें? (P20-0104)
  92. मेरी ईमानदारी की कमाई 10 लाख है, उसमें से 5 लाख ज्ञान प्रसारण में लगाना चाहूं तो मन डरता है — कल अस्पताल की जरूरत पड़ी तो? इस डर से कैसे निकलें? (P20-0114)
  93. क्या आपको केदारनाथ और उस भूखी रात में मौत से डर नहीं लगा? (P20-0115)
  94. "तुम्हारे जैसे कितने आए और कितने जाएंगे" — यह सुनकर डर लगता है, पसीना आ जाता है कि गुरु को मेरी जरूरत ही नहीं, तो मेरा कल्याण कहां होगा? (P20-0125)
  95. मैं ईमानदारी से काम करती हूं, पर बॉस बुलाते थे तो डर लगता था कि निकाल न दें — नौकरी में डर कैसे जाए? (P20-0152)
  96. गुरु जी, शरीर को मरने के बाद जला देते हैं, आत्मा तो निरंतर है। बचपन से हमें डराया गया कि यमराज ले जाएगा — तो यमराज किसको ले जाता है? मुझे लगा कि वो हमारे कर्मों को ले जाता है, भगवान के सामने बताता है, और उसी से अगला जन्म होता है — क्या ये सही है? (P22-0005)
  97. गुरु जी, भय क्यों होता है, और उसे कैसे हटाएं? क्या इसके अलावा भी कुछ किया जा सकता है? (P22-0032)
  98. गुरु जी, एक वैरागी भूख और रोग का भय या चिंता सदैव के लिए कैसे खत्म करे? (P22-0060)
  99. गुरु जी, बहुत लोग अकेले होने से डरते हैं — काम के बाद, वीकेंड पर भी फुर्सत नहीं; गैजेट्स की स्लेवरी बन गए हैं, किसी घर में चार-पांच कंप्यूटर, काम का फोन, पर्सनल फोन... (P22-0152)
  100. गुरु जी, डर फेक है कि रियल? रात को डर लगता है तो मेरे लिए तो रियल है। (P22-0155)
  101. गुरु जी, रात को ऑफिस से आए तो ऑटो वाला भी यहां तक आने में डर रहा था कि वापस कैसे जाएगा; हमें भी उसके प्रति अजीब लगा, हमने कहा "भैया, ध्यान से जाना" — क्या इसे भी राग कहेंगे? (P22-0161)
  102. गुरु जी, जीव अपने नाश होने से भी डरता है और ब्रह्म से मिलना भी चाहता है — दोनों करना चाहता है। तो क्या जीव का नाश गुरु के सानिध्य में हो जाता है? (P23-0120)
  103. गुरु जी, जब हम अपने आप में होने के लिए बैठते हैं तो बहुत चिंता आती है, थोड़ी देर बाद बोर हो जाते हैं, कभी-कभी डर भी लगता है। क्या करें? (P23-0169)
  104. गुरु जी, कभी-कभी बड़े अधिकारी दबाव डालते हैं, डराते-धमकाते हैं, पर मैं नहीं झुकता — उनका सामना करने की यह शक्ति कैसे और बढ़े? (P24-0018)
  105. गुरु जी, पहले डर आता है या भ्रम? (P24-0115)
  106. गुरु जी, मैं ईमानदारी, सत्कर्म, प्रार्थना कर रहा हूं, रोज खुद को देख रहा हूं। पर अभी भी मेरे अंदर डर है — आंख बंद करके किसी स्थिति को देखता हूं तो भय आता है, ध्यान में अंधेरा दिखे तो भी भयभीत हो जाता हूं। इस भय से कैसे निकलें? (P24-0129)
  107. गुरु जी, मुझे करोड़ों मिल भी जाएं, तो मैं उतना ही खाऊंगी, उतना ही पहनूंगी। मान-इज्जत मिलेगी, अहंकार पोषित होगा, और साथ में भय भी — चोर, इनकम टैक्स, दुश्मन। ये दोनों चीजें मुझे दिख रही हैं, वहां मैं रह भी नहीं पा रही। फिर भी जन्मों-जन्मों का अभ्यास है — उसका क्या करूं? (P24-0193)
  108. गुरु जी, डर यह भी तो हो सकता है कि किसी को खोने का डर हो? (P25-0007)
  109. गुरु जी, 'लोग क्या कहेंगे' — यह डर कैसे दूर करूं? (P25-0011)
  110. गुरु जी, डर को जड़-मूल से कैसे खत्म करें? (P25-0080)
  111. आत्मचिंतन के दौरान विचारों के प्रति प्रतिक्रिया ना देने पर अंदर से खालीपन का एहसास होता है, डर भी लगता है और घबराहट भी होती है — तो क्या करें? (P26-0010)
  112. गुरु जी, हर समय डर लगा रहता है। क्या करूं? (P26-0019)