जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म — योगी गुरु जी के प्रश्नोत्तर
इस पृष्ठ पर “जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म” विषय से जुड़े 127 प्रश्न हैं, जो जिज्ञासुओं ने सत्संग में योगी गुरु जी से पूछे। किसी प्रश्न पर क्लिक करके योगी गुरु जी का पूरा उत्तर उनके अपने शब्दों में पढ़ें, वीडियो के साथ।
- गुरु जी, एक साल पहले मेरे पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। मेरे दो बच्चे हैं (17 और 20 साल के)। गांव बिहार में है, मैं महाराष्ट्र में अकेले बच्चों के साथ रहती हूं और बहुत घुटन होती है। (P1-0133)
- गुरु जी, कर्ता का भाव जन्म से होता है या बाद में आता है? (P1-0160)
- जब हमने अपनी मर्जी से शादी की है, तो मृत्यु तक अपने परिवार को न छोड़ना हमारी जिम्मेदारी है ना? (P2-0057)
- जन्म से तुलना-ट्रेनिंग मिलती है, बाहरी चीजें बराबर फिर भी खालीपन-उदासी-बोरियत रहती है — बता भी नहीं पाते क्या है। बाहर से गाड़ी-बंगला-कपड़े भर लेते हैं फिर भी काटता है। ये खालीपन क्या है, किससे भरे कि संतुष्टि आए? (P3-0023)
- एक साधिका: मैंने चार दिन तक दृश्य देखा कि विष्णु जी बाहर निकल रहे हैं और उनका सुदर्शन चक्र बहुत तीव्र गति से चल रहा है; मैंने कहा मुझे अपने अंदर कर लो, तो उनका दायरा बढ़ गया और चक्र से मेरी गर्दन कटकर अलग हो गई, मुझे डर लगा। फिर ऊपर बहुत ऊंचाई पर ओम दिखा और तीव्र किरणें निकलीं। इसका अर्थ क्या है? मैंने सोचा कि क्या अंतर्मन में कोई सूक्ष्म विकार — शायद पूर्व जन्म का — था जिसे उन्होंने सुदर्शन चक्र से काट दिया? क्या यह चिंतन सही है? (P3-0089)
- (उसी प्रसंग में) अगर इस जन्म में मुझे ऐसा कोई विकार ध्यान में नहीं, तो फिर विकार कहां से आया — हमें पता ही नहीं चलता? (P3-0090)
- (उसी साधिका का प्रश्न) गर्दन कटते समय मुझे जो डर लगा, वह कहां से था? मुझे लगता है इस जन्म में तो कोई विकार हुआ नहीं, तो सूक्ष्म रूप में विकार कब हुआ? (P3-0093)
- दूसरी योनि में (जैसे जानवर) जो कर्म किया जाता है उसका क्या? और 84 लाख योनियों में घूमकर वापस मनुष्य जन्म किस कर्म की वजह से मिलता है — क्या पूरी 84 लाख योनियां घूमनी पड़ती हैं? (P3-0099)
- (लाइव) क्या गंगा आदि नदियों में स्नान करने से पूर्व में किए हुए पाप-दुष्कर्म नष्ट होते हैं? स्नान के लिए इतनी भीड़ होती है। अगर ऐसा होता तो भीष्म पितामह को इतने जन्मों का पाप क्यों भोगना पड़ा — वे तो गंगा पुत्र थे, उनका पाप क्यों नहीं धुला? (P3-0138)
- (लाइव) अभी आपने कहा कि अच्छे कर्मों का फल भी भोगने आना पड़ेगा, मगर उसके पहले आत्मज्ञान हो जाएगा। तो क्या आत्मज्ञान के बाद भी फिर जन्म लेकर भोगना पड़ेगा? कृपया समझा दीजिए। (P3-0145)
- (लाइव) मैं भी निर्विकार होना चाहता हूं। और क्या पुनर्जन्म होता है? (P3-0166)
- (कुटिया में साधक) जैसे आप बोलते हैं कि जन्म-मृत्यु के चक्कर से निकलना है — तो अगर काम करते-करते निकल गए, तो फिर कहां जाएंगे? (P3-0183)
- (कुटिया में साधक) मुझे लगता है जीवन की यात्रा अनंत से अनंत है और जीरो उसका सेंटर पॉइंट है (जिसे शांति या समाधि कहते हैं)। अच्छे कर्म करने वाला प्लस साइड — अच्छी जगह, अच्छी विचारधारा के लोगों में — जन्म लेता है; बुरे कर्म वाला माइनस साइड — दूसरी योनियों या वैसी विचारधारा के लोगों में — जाता है; ऐसे ही सर्कल घूमता रहता है। यह सर्कल टूटे कैसे? मुक्त हो गए तो फिर हम कहां होंगे — आत्मा कहीं तो होल्ड करेगी? और धरती पर 9-10 हजार करोड़ लोग जन्म ले चुके, अभी 900 करोड़ जिंदा हैं — बाकी की आत्माएं कहां गईं? (P3-0195)
- (कुटिया में साधक) मेरा पहले वाला प्रश्न अधूरा था — जब आदमी निर्विचार-निर्विकार अवस्था में (देह छोड़कर) जाता है, तो आत्मा की बात नहीं, उसकी जो सूक्ष्म बॉडी है, वो फिर कहां होल्ड होती है? कहीं ना कहीं तो जाती होगी; अगर होल्ड नहीं होती तो फिर उसे नया जन्म तो लेना ही पड़ेगा? जैसे कहते हैं कि वह परमात्मा के पास जाती है। (P4-0049)
- (कुटिया में साधक) जब मैं खोज रहा था तो किसी ने कहा एक फकीर बाबा से मिलो। उन्होंने कहा कि कुरान पढ़ो, वही आखिरी किताब है, उससे ज्ञान की प्राप्ति हो जाएगी। मैंने पूछा कि हमारी किताबों में पुनर्जन्म का कांसेप्ट है, कुरान में नहीं — तो उन्होंने कहा कि हम सिर्फ एक ही बार आए हैं, रूहें एक जगह रहती हैं, कयामत के दिन सब जागेंगे। मैं यह जानना चाहता था कि जिस ज्ञान की आप बार-बार बात करते हैं, क्या अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग तरह का ज्ञान मिलता है, या सबको एक ही तरह का ज्ञान मिलता है? (P4-0091)
- (लाइव) गुरु जी प्रणाम। प्रत्यक्ष ज्ञान के अनुसार पूर्व जन्म और पुनर्जन्म होता है, तो शोषणकर्ता को इससे यह सांत्वना मिल जाती है कि अभी तो मजे कर लेता हूं, अगले जन्म में जो होगा देख लेंगे। स्पष्ट करें। (P4-0153)
- (वही साधिका) मैंने गुरु जी से यह कहलवा लिया कि मेरे शरीर की सेवा की जिम्मेदारी भी वे लेंगे — मुझे तो पता भी नहीं था कि मैं ऐसा कर रही हूं। इससे मेरा कौन सा स्तर पता चलता है? और (बीमारी-मौत में) मेरा कौन करेगा? (P4-0164)
- (वही साधिका) मेरे एक मित्र कहते थे कि पत्नी के बिना नहीं रह सकते; पत्नी अचानक मर गई, और शव के पास ही वो पूछ रहे थे कि अब मेरी दूसरी शादी कैसे होगी। (क्या वो आत्मा यह सुनकर मुक्ति की तरफ बढ़ेगी?) और क्या पुनर्जन्म, सूक्ष्म शरीर वगैरह होता है? आचार्य प्रशांत जी कहते हैं कि शरीर मिट्टी से पैदा होकर मिट्टी में मिल जाता है, इसके बाद कुछ नहीं। (P4-0195)
- आत्मज्ञान भी प्रारब्ध के अनुसार होता है क्या? इसी जन्म में संभव है? (P5-0038)
- (लाइव/कुटिया) आत्मज्ञान के बाद प्रश्न हट गए — फिर भी कुछ पूछना रहता है? इस जन्म में हर कोई प्रयास कर सकता है? (P5-0040)
- आप कहते हैं आवागमन के चक्कर से मुक्त हो जाऊं — याद ही नहीं कि इस चक्कर में हूं। पिछले जन्म याद आएं तो क्या? (P5-0073)
- मरने के बाद मनुष्य जन्म दोबारा मिलता है — किस स्थिति में? (P5-0177)
- एकादशी पर मृत्यु हो तो मोक्ष मिलता है? (P5-0179)
- यहां व्यवस्था मिली फिर भी रुक नहीं पा रहा — कमी क्या है? पिछले जन्मों के कर्म या अभी कुछ खराब? (P5-0187)
- मां-बाप/रिश्तेदार/कलीग से लेन-देन — इस जन्म या पिछले का हिसाब? पीड़ा में ईमानदारी क्या? (P6-0018)
- शरीर की तीन अवस्थाएं बताई जाती हैं, जागृत, स्वप्न और सुषुप्ति। इस समय हम जागृत अवस्था में हैं, ऐसा कहा जाता है। जब स्वप्न में होते हैं तो उसे सच मान लेते हैं, पता ही नहीं रहता कि स्वप्न चल रहा है, जागृत की तरह लगता है। स्वप्न टूटते ही लगता है कि वह कुछ और था और अब कुछ और है। उसको अनुभव करने वाला कौन है? कई जगह जाकर सुना कि आत्मा है। अगर आत्मा का अनुभव एक बार हो गया, उस बिंदु को छू लिया, तो फिर दूसरों के दर जाने की क्या जरूरत? इससे तो लगता है कि आत्मा है ही नहीं। क्या हम रोबोट की तरह हैं, जिसमें मेमोरी फिट कर दी गई है, इनपुट डाल दिया गया है, और टेक्नोलॉजी से ऊपर का अनावश्यक ज्ञान दिया जा रहा है? इसे उदाहरण से स्पष्ट करें, ताकि सरलता से समझ आए और जीवन भर उस पर चला जा सके। स्वप्न तो ऐसे भी आते हैं जो इस जन्म की कामना नहीं लगते, ऐसे दृश्य, लोग और रूप जिनकी कल्पना भी नहीं हो सकती। (P6-0039)
- साधना में पहले लगा कि कोई बहुत ऊपर ले जा रहा है। फिर दो दिन एक साया दिखा। फिर ईसा मसीह स्पष्ट दिखे और देर तक प्रकाश देते रहे। असीम शांति हुई। सनातन, कुरान और गुरु ग्रंथ साहिब पढ़े हैं, ईसाई धर्म इस जन्म में नहीं पढ़ा। ईसा मसीह कैसे दर्शन दे गए? परिवार का कोई आ जाए तो क्या करूं? (P6-0106)
- जब से हम जीवात्मा बने हैं, तब से मन हमारे साथ है। मन इस शरीर में रहा है, चाहे हम इंसान में रहे हों या किसी दूसरे जीव-जानवर में। क्या मन जन्म-जन्म से हमारे साथ है? (P6-0136)
- राधेश्याम पूछते हैं, ईमानदारी से चलने पर मृत्यु का डर कम लगेगा क्या? (P6-0173)
- भगवान, देवता और पुनर्जन्म क्या असल में होते हैं? (P7-0029)
- आत्मा मृत्यु लोक में भगवान को पाने का प्रण लेकर आती है, पर विषयों को चुनती है। तो क्या यह धोखा ही है? (P7-0037)
- एक आदमी अमीर के घर जन्म लेता है और एक गरीब के घर। इसका क्या कारण है? (P7-0049)
- अपनी जिंदगी की क्लैरिटी क्यों नहीं हो पा रही? अंदर गुणों की ताकत नहीं है, शारीरिक बल नहीं है, अधूरापन है, कमियां हैं। जिन पर काम नहीं करना चाहता, उन्हें ढक रहा हूं। भाई कवर कर ले, इधर से कुछ मिल जाए। जहां कमी है, वहां पचहत्तर बार नमस्ते करूंगा, घरवालों की चापलूसी करनी पड़ती है। आज परिवार के साथ, कल पति-पत्नी के साथ, फिर बच्चों के साथ, दादा-दादी बनने तक वही कमजोरी रह जाएगी। जन्म-जन्म डर-डर कर क्यों जी रहे हैं? मैं आपसे डर रही हूं, आप मुझसे डर रहे हो, बात ही नहीं हो रही। कोई किसी को डरा क्यों रहा है? (P7-0083)
- गुरु जी, क्या आत्मज्ञान के बाद व्यक्ति को अपने पूर्व जन्म का ज्ञान भी हो जाता है? क्या आप अपने पूर्व जन्म को देख पाते हो? (P7-0118)
- दवाई को अंतिम अवस्था तक ले जाने से पहले खरगोश, बंदर जैसे जीवों पर प्रयोग होते हैं, और उनकी मौत बड़ी दर्दनाक होती है। फिर वही दवाई बाजार में आकर हम भी खाते हैं। क्या उसका दोष हमें भी लगता है? यह आधुनिक बात है, शास्त्रों में नहीं मिलती। आदमी करे क्या? (P7-0151)
- एक श्रोता लिखता है कि चेतना, जिसके द्वारा हम जागृत अवस्था का अनुभव करते हैं, वह भी मृत्यु के बाद चली जाती है, इसलिए वह भी अस्थायी हुई, असत्य हुई। इस प्रकार सत्य अव्यक्त हुआ। गुरु जी, इस पर क्या कहना है? और अगर आज तक जो किया वह गलत था, तो आगे रहना मुश्किल हो जाएगा? (P8-0013)
- आत्मज्ञान के बाद मृत्यु होने पर मोक्ष हो जाता है? (P8-0063)
- मनुष्य जन्म किन कारणों से मिलता है? कर्म से मिलता है या कृपा से? (P8-0067)
- मौत का डर क्यों लगता है? (P9-0033)
- मेरा जन्म क्यों हुआ? मेरा क्या कार्य है? इस जन्म में मैं कौन हूं? मैं क्यों आया हूं इस जीवन में? (P9-0039)
- मेरे मन में हमेशा यह प्रश्न आता है कि मैं कौन हूं। मुझे लगने लगा है कि मैं चुनी हुई आत्मा हूं, और जिन्हें परमात्मा चुनता है उनका जन्म टॉक्सिक परिवार में होता है। क्या यह सही है? (P9-0060)
- क्या यह पहले से तय है कि आत्मज्ञान कौन से जन्म में होगा? अगर यह पहले से तय हो, तो क्या करें? (P9-0101)
- जब कोई नया कार्य सीखते हैं तब कर्ता का भाव जन्म नहीं ले पाता। क्या आपकी बातें समझने की कोशिश में भी कर्ता नहीं होता? (P9-0145)
- प्रभु जी, सच में इस एक जन्म में आत्मज्ञान हो जाएगा? (P9-0191)
- गुरु जी, श्रद्धा क्या है और श्रद्धा कैसे जन्मती है? (P10-0121)
- कल्याण में लगभग कितने जन्म लग जाते हैं? (P10-0153)
- जब आपको सब कुछ नहीं पता, तो जन्म-मृत्यु से आप मोक्ष कैसे करवा रहे हैं? (P10-0159)
- इस जन्म में चाहे जितना भी बुरा कर्म हुआ हो, क्या मेरा कल्याण संभव है? (P11-0032)
- इस रास्ते पर चलते-चलते अगर प्राण छूट जाएं या गुरु का साथ छूट जाए, तो फिर क्या होगा? और बुद्ध ने तो पुनर्जन्म को मना किया था। (P11-0087)
- जन्म-मरण से मुक्त कैसे हों, और अंदर की प्यास और तड़प कैसे शांत हो? (P11-0137)
- एक जन्म से दूसरे जन्म तक कर्म का सिद्धांत कैसे काम करता है? (P11-0159)
- यदि जन्म किसी कर्म के परिणाम से हुआ है, तो जन्म के पहले कर्म कैसे हुआ? (P11-0165)
- महात्मा कहते हैं कि पत्नी-बच्चे पिछले जन्म के कर्मों के अनुसार मिलते हैं, जिम्मेदारी पूरी करते हुए नाम जप करते रहो। आपका मार्गदर्शन? (P11-0191)
- लाश के ऊपर कफ़न डालना क्या सत्कर्म या पुण्य है? पड़ोस में किसी की मृत्यु हो जाए तो लोग उस पर कफ़न डालना अपना पुण्य समझते हैं। (P12-0070)
- क्या व्यक्ति जन्म से ही बंधनों में पैदा होता है, या बाद में अपने कर्म में फंस जाता है? (P12-0083)
- हमारा जन्म पिछले बंधनों को काटने के लिए हुआ — तो पहले कर्म हुआ या पहले जन्म हुआ? (P12-0096)
- क्या जन्म लेने का चुनाव हमने किया है? (P12-0102)
- चंडीगढ़ से एक प्रोफेसर ने फोन किया कि उनके एक नजदीकी रिश्तेदार की मृत्यु के बाद कोई डिप्रेशन का शिकार है, और वो उसे योगी जी के सामने लाना चाहती हैं कि योगी जी की दृष्टि उस पर पड़ेगी तो वो शायद बाहर आ जाएगी। क्या ऐसा होता है? (P12-0123)
- जन्मों-जन्मों के संस्कार ही मेरा बेसिक नेचर बन गए हैं, लोग कहते हैं ये नहीं बदलने वाला। अध्यात्म की यात्रा में भी मैं उसी संस्कार को बार-बार पोषण दे रहा हूं — वही लोभ-लालच, मान का चक्कर, छल-कपट — उसी लूप में घूम रहा हूं। तो क्या प्रत्यक्ष ज्ञान यह कहता है कि उस पुरानी जड़ता को मिटाने के लिए मैं उसे पोषण ही ना दूं और नई आदत बनाता रहूं — और इसी का नाम साधना है? (P12-0135)
- गुरु जी, मैं कृपा की बात नहीं कर रहा, लेकिन इतने समय से मेरे अंदर बहुत तीव्र इच्छा हो रही है कि अब मैंने और जन्म नहीं लेना — मुझे यह यात्रा बहुत तेज करनी है। इसके लिए क्या करूं? (P12-0141)
- गुरु जी, जैसा आप बोलते हैं कि शरीर छूटेगा तब पता चलेगा — मुझे तो कभी-कभी मौत का इंतजार हो जाता है कि जिस दिन मौत आएगी उस दिन पता तो चलेगा कि सच में सब कुछ होता है या हम ऐसे ही (जी रहे हैं)। (P12-0170)
- गुरुदेव, भूख-प्यास, शोक-मोह, जीवन-मृत्यु — इनसे कैसे ऊपर उठें? (P12-0171)
- गुरुदेव, हमारा जन्म भी 1984 का है और हम भी 15-20 सालों से उसकी खोज में हैं; अब आपको देखकर इच्छा पूरी सी लगती है, और अब थोड़ा-थोड़ा समझ आने लगा है कि सत्य क्या है। (P12-0198)
- गुरु जी, आपको इतना ज्ञान है — क्या यह आपके पिछले जन्म की यात्रा है? (P13-0029)
- गुरु जी, कई बार विचार आता है कि कोई बात नहीं, धीरे-धीरे पार उतर जाएंगे। पूरी ईमानदारी से जीवन जीने में घर-परिवार का भरण-पोषण भी मुश्किल से होगा, दुनियावी तकलीफें सहनी पड़ेंगी, तो मन पीछे हो जाता है कि एक-दो-चार जन्म और लग जाएंगे; ज्ञान तो आ ही गया, ईमानदारी-सत्कर्म-सत्संग पर चलते रहेंगे, धीरे-धीरे कल्याण हो जाएगा। (P13-0042)
- शरीर की मृत्यु के बाद आत्मा कहां और कैसे रहेगी? (P13-0052)
- गुरु जी, जन्म से कोई ब्रह्मचर्य का पालन करता है तो कोई संसार के भोग भोगता है — तो किसको आत्मज्ञान होता है? (P13-0167)
- गुरु जी, मनुष्य का जन्म सिर्फ मोक्ष पाने के लिए ही हुआ है, या संसार की वस्तुओं को भोगते हुए जीवन जीने के लिए? (P13-0168)
- गुरु जी, जैसे कबीर जी ने कहा — जन्म-जन्म की मन को मैल लगी है, काला हो गया मन। साधना से यही निकलेगी ना? इस जन्म की तो इतनी ज्यादा नहीं हो सकती। (P13-0198)
- गुरु जी, इंसान को अपने जन्म का उद्देश्य कैसे मालूम पड़े कि मेरा जन्म क्यों हुआ है? अगर वह किसी संत या गुरु के चरणों में नहीं पहुंचा, तो क्या उसका जन्म सिद्ध नहीं होता? (P14-0047)
- मनुष्य की मृत्यु होने के बाद उस आत्मा का क्या होता है? (P14-0141)
- संचित कर्म की वजह से इस जन्म में तकलीफ हो तो कैसे समझा जाए? (P14-0158)
- ध्यान में मौत का डर लगता है, छूटने का भय बना रहता है — मार्गदर्शन करें। (P15-0050)
- क्या जन्म-पत्रिका या राशि में जो लिखा होता है वो सच होता है, या जो होता है सब समय का खेल है? (P15-0071)
- अगर कोई बच्चा जन्म से ही अंधा या लंगड़ा पैदा हुआ है, उसने तो कोई कर्म नहीं किया, फिर ये परिणाम क्यों मिला? (P15-0074)
- गुरु जी, क्या मरते टाइम भगवान का नाम लेने से मुक्ति मिलती है, अगला जन्म नहीं होता — जैसा शास्त्रों में बताया है कि "अंत मति सो गति"? (P15-0157)
- गुरु जी, इस मन की कुछ आदतें होती हैं; इसको अच्छी आदतें कैसे लगाएं? और ये आदतें क्या पूर्व जन्म के संस्कार से हैं? (P15-0158)
- गुरु जी, अगला जन्म किस आधार पर होता है — प्रवृत्ति, भाव, इच्छा-अपेक्षा, या कोई और कारण है? (P15-0174)
- गुरु जी, क्या इस जन्म में अपने आप को जान पाऊंगा? (P16-0002)
- बाबा जी, अगर इस जन्म में कोई पाप हुआ हो तो उसका कर्मफल कर्म-विधान से इसी जन्म में चुकाना पड़ता है; फिर क्या अगले जन्म में पीछे के बुरे कर्म का प्रभाव पड़ता है? (P16-0008)
- (साधिका ने महात्मा बुद्ध के उस भिक्षु की कहानी सुनाई जो गाली, थप्पड़, डंडे, यहां तक कि मृत्यु सहने को भी तैयार था, ताकि ज्ञान फैला सके।) अगर हम उसकी जगह होते तो मैं भी यही करती, क्योंकि मैं खुद आई हूं, किसी ने बुलाया नहीं। फिर निवेदिता अपमान से क्यों टूट गई? (P16-0101)
- हर जीव अपने प्राण क्यों बचाना चाहता है? बहुत लोग 100 वर्ष के ऊपर चले जाते हैं; एक बूढ़ी अम्मा कह रही थीं कि अब तो सिर्फ मौत का इंतजार है, बस शरीर जल्दी छूटे और दर्द ना हो — फिर भी मौत का डर है। एक चींटी को भी मारूं तो वह भी प्राणों की रक्षा करती है। आखिर यह डर किस चीज का है? (P16-0135)
- अगर किसी मानव के अंदर तामसिक और राजसिक ऊर्जा जन्म-जन्मांतर के कर्मों से पहले से इकट्ठी होकर आ रही है, तो क्या उसे खत्म किया जा सकता है? (P16-0145)
- (लाइव) मुझे जीने का मन नहीं करता, और मौत भी नहीं आती। क्या करूं? (P16-0162)
- (लाइव) गुरुदेव, इस जन्म में आत्म-साक्षात्कार हो जाएगा? तबीयत थोड़ी खराब होती जा रही है, ऐसा लगता है मुझे। (P17-0002)
- गुरु जी, घर में किसी की मृत्यु होती है तो खुद को दोषी क्यों महसूस होता है? (P17-0181)
- गुरु जी, आत्मज्ञान के बाद इस धरा पर और कितने जन्म होंगे? (P17-0192)
- गुरु जी, हमारे शरीर में और दुनिया में रोज करोड़ों जन्म-मृत्यु हो रहे हैं, पर हमें फिक्र सिर्फ अपने लोगों की होती है — ऐसा क्यों? अपने बेटे के लिए सब लगा देते हैं, पड़ोसी के बेटे के लिए नहीं। (P18-0143)
- गुरु जी, ऋषि-मुनि और सत्संग कहते हैं कि यह जग मिथ्या है, दुखालय है, मृत्युलोक है, यहां से जल्दी निकलो — तो क्या यह सही है? (P18-0188)
- गुरु जी, क्या बेईमानी पिछले कई जन्मों के कर्मों-संस्कारों के साथ आती है, कि प्रारब्ध भुगतते समय हम बेहोशी में कुछ भी कर बैठते हैं? (P19-0017)
- गुरु जी, कर्मों की सजा कैसे मिलती है? क्या मृत्यु के बाद ही फैसला होता है कि कौन सी योनि मिलेगी? (P19-0018)
- गुरु जी, आपने कहा आत्मज्ञान के बाद ही असली यात्रा शुरू होती है। तो अगर आत्मज्ञान के बाद शरीर छूट गया, तो क्या उस यात्रा के लिए दूसरा जन्म होगा? (P19-0100)
- गुरु जी, नवजात शिशु की चार दिन में मृत्यु हो जाए तो उसका कौन सा कर्म है? (P20-0032)
- गुरु जी, पूर्व जन्म के कर्म कैसे कटते हैं? (P20-0033)
- गुरु जी, क्या सभी भय की गहराई में मृत्यु का भय ही है? (P20-0039)
- गुरु जी, ऐसा क्या करें कि अगले जन्म में भी मनुष्य बनें और आध्यात्मिक मार्ग पर ही रहें? (P20-0088)
- क्या आपको केदारनाथ और उस भूखी रात में मौत से डर नहीं लगा? (P20-0115)
- श्वास का भीतर-बाहर आना-जाना तो कुदरती है, उसमें कोई अपेक्षा नहीं — फिर मृत्यु क्यों हो जाती है? (P20-0194)
- गुरु जी, मानव जन्म में हम बुरा ही ज्यादा क्यों सोचते हैं, अच्छा क्यों नहीं सोचते? (P21-0132)
- गुरु जी, पुनर्जन्म है या नहीं — इसे कैसे सिद्ध करोगे? (P21-0154)
- गुरु जी, मेरे इस शरीर से जो अच्छे-बुरे कर्म हो गए हैं, इन कर्मों का आत्मा के साथ कोई संबंध है? आत्मा तो ना मरने वाली है, परमात्मा का अंश है — तो क्या ये कर्म अगले जन्म में आत्मा के साथ जाते हैं? और चलाने वाला तो परमात्मा ही है ना? (P21-0198)
- गुरु जी, शरीर को मरने के बाद जला देते हैं, आत्मा तो निरंतर है। बचपन से हमें डराया गया कि यमराज ले जाएगा — तो यमराज किसको ले जाता है? मुझे लगा कि वो हमारे कर्मों को ले जाता है, भगवान के सामने बताता है, और उसी से अगला जन्म होता है — क्या ये सही है? (P22-0005)
- गुरु जी, जीवात्मा में ऊर्जा कहां से आती है और मृत्यु के बाद वह ऊर्जा कहां चली जाती है? आत्मज्ञान से यह आपको मालूम हुआ है, कृपया बताएं। (P22-0024)
- गुरु जी, एक जन्म के किए गए कर्म की सजा दूसरे जन्म में क्यों मिलती है? (P22-0025)
- गुरु जी, जैसे माता-पिता से जीव जन्म और गर्भ के साथ जुड़ा होता है और लंबे संसर्ग के कारण उन पर निर्भर रहता है, वैसे ही गुरु के सानिध्य में शिष्य जाता है — जो पहले से तृप्त और सिद्ध है उसके संपर्क में; क्या यह संपर्क भी उसी तरह निरंतर रहना आवश्यक है? (P22-0039)
- प्रभु जी, अब आपको आत्मज्ञान हो गया है — क्या आपका जन्म-मरण आपके हाथ में है, या अब आपका जन्म कभी नहीं होगा? (P22-0072)
- गुरु जी, खत्म क्यों करना है अपने आपको? इस जन्म में आया हूं, तो कर्म के बिना तो रह नहीं सकते। (P23-0044)
- गुरु जी, आपने अभी शब्द बोला था कि मालिक बनने के चक्कर में उस मालिक से दूर हुए। यह मालिकपन का भाव कहीं पहले जन्म से तो आया होगा ना? यह इतना गहरा हो गया है कि छूट नहीं रहा। (P23-0097)
- गुरु जी, कल 12 मार्च आपका जन्म दिवस है — क्या इसे 'प्रत्यक्ष ज्ञान दिवस' के रूप में मना सकते हैं? (P23-0196)
- गुरु जी, क्या आपका कोई पूर्व जन्म का अनुभव है जिससे आप बचपन से ही माया की तरफ नहीं गए और रिश्तों को मतलब का समझते रहे? (P24-0020)
- गुरु जी, पुनर्जन्म — अगला-पिछला जन्म होता है या नहीं? हमारे मजहब में तो ये माना नहीं जाता। क्या इसे जानना जरूरी है? (P24-0052)
- गुरु जी, जितने बुरे कर्म हमने पिछले जन्म में किए हैं, उन्हें सही करने के लिए ईमानदारी-सत्कर्म करें — तो क्या उन्हें भोगना भी पड़ेगा? (P24-0054)
- गुरु जी, अगर कोई पिछला जन्म जानने पर ऊर्जा लगाना चाहे तो क्या उसकी कोई विधि है? (P24-0057)
- गुरु जी, योग्यता जन्मजात होती है क्या? (P24-0076)
- गुरु जी, आपने कल बोला था कि यहां से छोड़ोगे तो अगला वही मिलेगा। अगर मैं वापस उन्हीं लोगों के बीच जाकर उनमें लग गई और शरीर छूट गया, तो अगला जन्म कहां होगा? (P24-0119)
- गुरु जी, मैं शाकाहारी हूं। ईश्वर ना करे, पर अगर कभी ऐसी स्थिति आ जाए कि भूख के कारण मैं मृत्यु के निकट हो जाऊं और सामने केवल मांस हो, तो क्या करूं? (P24-0164)
- गुरु जी, तो फिर अगर मेरी ऐसी स्थिति हो जाए, तो क्या अगले जन्म में मैं वही कैरी ऑन करके ले जाऊंगी? (P24-0190)
- गुरु जी, मुझे करोड़ों मिल भी जाएं, तो मैं उतना ही खाऊंगी, उतना ही पहनूंगी। मान-इज्जत मिलेगी, अहंकार पोषित होगा, और साथ में भय भी — चोर, इनकम टैक्स, दुश्मन। ये दोनों चीजें मुझे दिख रही हैं, वहां मैं रह भी नहीं पा रही। फिर भी जन्मों-जन्मों का अभ्यास है — उसका क्या करूं? (P24-0193)
- प्रभु, पुनर्जन्म के बारे में विस्तार से समझाने की कृपा करें — क्या पुनर्जन्म होता है? (P25-0045)
- गुरु जी, मनुष्य जीवन में ऐसा क्या करें कि दोबारा धरती पर जन्म ना लेना पड़े, जीवन चक्र समाप्त हो जाए? (P25-0058)
- गुरु जी, अगर पिछले जन्मों से यह जीवन ऐसा है, तो सबसे पहले जो इंसान आया उसका तो कोई पिछला कर्म था ही नहीं — फिर उसको क्यों भोगना पड़ा या जन्म लेना पड़ा? (P25-0060)
- गुरु जी, कोई आदमी 60-70 साल के बाद समझे और समर्पण कर दे, जितना पद से कमाया वो सत्कर्म में लगा दे और बोलचाल में ईमानदार रहे — क्या वो इसी जन्म में मुक्त हो सकता है? (P25-0142)
- गुरुदेव, लोग आत्मज्ञान के साधक होकर भी दुनियादारी की ज्यादा बातें करते हैं और आनंद ढूंढते रहते हैं। ऐसा क्यों होता है? क्या हम जन्म-जन्मांतरों के संस्कारों में लिपटे हुए हैं? (P25-0176)
- गुरु जी, जन्म-मरण के फंदे से कैसे बाहर निकलें? (P26-0034)
- गुरु जी, इस संसार में जन्म लेकर संसार से विरक्त रहना सही है? (P26-0040)
- गुरु जी, क्या मोक्ष के बाद जीव वापस जन्म-मरण में आएगा? कभी तो हम उसके पास थे, तभी तो आए। (P26-0047)
- गुरु जी, जन्म और मृत्यु से कैसे मुक्त होते हैं? (P26-0101)