आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

अपनों की कुटिया — योगी गुरु जी के प्रश्नोत्तर

इस पृष्ठ पर “अपनों की कुटिया” विषय से जुड़े 181 प्रश्न हैं, जो जिज्ञासुओं ने सत्संग में योगी गुरु जी से पूछे। किसी प्रश्न पर क्लिक करके योगी गुरु जी का पूरा उत्तर उनके अपने शब्दों में पढ़ें, वीडियो के साथ।

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  1. गुरु जी, (कुटिया में) बिजली से संबंधित कोई काम हो तो बताना; इस बहाने मुझे आपके साक्षात दर्शन का सौभाग्य होगा। (P1-0003)
  2. गुरु जी, कभी-कभी अंदर से ऐसी तीव्र भावना (लहर) उठती है कि हमें वहां (कुटिया) जाना ही चाहिए — मैं बड़ा काम छोड़कर ऑटो किराए पर लेकर यहां आया। क्या यह हमारे पहले के कोई कर्म हैं? (P1-0010)
  3. गुरु जी, यहां (हरियाणा की कुटिया की जगह पर) तो यमुना का पानी आ जाता है। (P1-0019)
  4. गुरु जी, मैं दिल्ली में रहता हूं। हरियाणा में (कुटिया) कौन सी जगह है? मैं आपसे आकर मिलना चाहता हूं। (P1-0051)
  5. गुरु जी, अगर (हरियाणा) कुटिया का काम पूरा हो गया हो तो 20 तारीख को आ जाऊं? मैं आपके पास आकर आपके नियम में रहना चाहता हूं। (P1-0075)
  6. गुरु जी, दोनों कुटियाओं (मध्य प्रदेश और हरियाणा) का नियम एक ही रहेगा? (P1-0096)
  7. गुरु जी, यहां (कुटिया) का रास्ता बहुत दुर्गम है, ढूंढने वाले ही पहुंच सकते हैं। (P1-0097)
  8. गुरु जी, क्या आपके यहां (कुटिया में) आकर रह सकते हैं? वहां क्या कर सकते हैं? (P1-0098)
  9. क्या कुटिया में दो दिन के लिए भी रहने आ सकते हैं? (P1-0180)
  10. योगी जी, आप इतनी तेजी से काम कराते हैं — आज (हरियाणा कुटिया का) पांचवां ही दिन है; जो भी काम लेते हो उसके पीछे पड़ जाते हो। बिना आराम किए इतनी स्पीड से कैसे कर लेते हैं? (P1-0184)
  11. अगर मेरे लिए कुटिया आना संभव न हो — जैसे इस पेड़ को पेड़ बनने तक डंडी का सहारा चाहिए — तो संसार में रहते हुए ज्ञान का वह सहारा मुझे कैसे मिले? (P1-0186)
  12. आपने कुटिया इतनी दूर, (गांवों से) इतनी दूरी पर क्यों बनाई? (P1-0188)
  13. गुरु जी, मुझे (कुटिया में आई) वकील दीदी बहुत अच्छी लगती हैं। क्या मैं उनसे बात कर सकती हूं? (P2-0001)
  14. मैं (कुटिया) आने की सोच रही हूं, इसलिए पूछ रही हूं — दिल्ली से हरियाणा कितना दूर है? (P2-0019)
  15. गुरु जी, आप कहते हैं ‘कुछ नहीं चाहिए’, और (कुटिया के लिए) दूसरी जमीन भी खरीद ली — बहुत तरक्की हो रही है! (P2-0021)
  16. गुरु जी, क्या अब साधना के लिए हरियाणा (कुटिया) आ सकते हैं? (P2-0050)
  17. गुरु जी, मैं राजकोट, गुजरात से हूं। मुझे कौन सी कुटिया नजदीक पड़ेगी — आलपुरा वाली या हरियाणा वाली? (P2-0079)
  18. क्या उधर (कुटिया के जंगल में) जंगली जानवर भी हैं? (P2-0087)
  19. गुरु जी, हरियाणा में आश्रम (अपनों की कुटिया) कहां है? (P2-0099)
  20. गुरु जी, (कुटिया में) वाईफाई लगाने वाले ने जो गलत काम किया, उसे लेकर अगर हम दुखी हो रहे हैं, तो क्या यह द्वेष हुआ? (P2-0102)
  21. आप कुटिया में कितने दिन रहेंगे? (P2-0112)
  22. (जया बहन का पत्र:) गुरु जी, न मैं मीरा हूं जो घर में रहकर भजन करूं और गलियों में निकल पड़ूं, न शबरी जो एक जगह कुटिया बनाकर इंतजार करूं। आपका बताया सत्संग, ईमानदारी और सत्कर्म कर रही हूं। जिम्मेदारियों ने घेर लिया है — न अपनों की कुटिया में आ पाती हूं, न घर पर रह पाती हूं; जीना बहुत मुश्किल हो गया है। कर्तव्य कैसे पूरे करूं, कब निकलकर हमेशा के लिए आपके चरणों में आ सकूं? मैं क्या करूं? (P2-0169)
  23. अपनों की कुटिया के नंबर पर ऐसे फोन भी आते हैं कि 90-90 साल के संन्यासी, जो उम्रभर एक मार्ग पर चलते रहे (फिर भी कहीं नहीं पहुंचे) — ऐसा क्यों? (P2-0191)
  24. आपने प्लास्टिक कुटिया से शुरू करके अब बहुत बड़ा प्रोजेक्ट — जमीन, निर्माण, साधकों की व्यवस्था — दिन-रात मेहनत; क्या आपको थकान नहीं होती? (P3-0016)
  25. (कुटिया में, इंदौर से आए 75 वर्षीय साधक) मैं पहले भी अध्यात्म में बहुत चला — साधना करो, यज्ञ-हवन करो, साधना से प्रकाश आएगा, भगवान का दर्शन होगा — पर समझ नहीं आया। 13 दिन से आपके वीडियो दिन-रात सुनकर समझ आया कि प्रत्यक्ष ज्ञान में चार-पांच ही बातें हैं; मैं करूंगा तभी होगा, किसी और के करने से नहीं; मैं ही हूं, कहां जाऊं। इसलिए घर से रोटी बांधकर सीधा चला आया। अंतिम इच्छा यही है कि आप रखो तो यहीं रह जाऊं। गुरुदेव, इससे आगे क्या है? (P3-0174)
  26. (कुटिया में, राजस्थान बारां से आए साधक) मेरी एक आदत है — मैं स्वाद में पड़ा हुआ हूं; पेट भर जाने के बाद भी किचन में जाकर और खा लेता हूं, तृप्ति नहीं होती। छोड़ना चाहता हूं पर छोड़ नहीं पा रहा। यहां की व्यवस्था में स्वाद नहीं मिलेगा, इसलिए आया हूं कि सात दिन में यह आदत छूट जाए; पर रुकना नहीं हो रहा, मैं सुबह ही वापस जा रहा था। (P3-0175)
  27. (कुटिया में साधक भावुक होकर रोने लगा) बाबा, यह क्यों रोती है? (P3-0176)
  28. (कुटिया में, तीसरी बार आए साधक) यहां के सिवा वहां कुछ नहीं है; मजबूरी में घर जा रहा हूं क्योंकि परिवार है, लड़का 12 साल का है — आपने बताया कि बच्चों की शादी तक जवाबदारी निभानी है। पर वहां अपने जैसे लोग और माहौल नहीं मिलता, जाने में बहुत तकलीफ होती है; यह मजबूरी बिल्कुल अच्छी नहीं लगती, वहां के लोगों के साथ रहने में बहुत दिक्कत होती है। (P3-0177)
  29. (कुटिया में, 62 वर्षीय साधक) 30-40 साल पूजा-पाठ किया — रोज हनुमान चालीसा, दुर्गा सप्तशती, काली स्तोत्र, चारों धाम घूमा — पर कुछ नहीं मिला। तांत्रिक लाखों रुपए खा गए, कोई झगड़े नहीं सुलझा पाया; 15-20 लाख का कर्जा है, केस चल रहे हैं, बहुओं वाले झगड़ों से घर बिखर गया। हमने जीवन में किसी का बुरा नहीं किया, किसी को परेशान नहीं किया — फिर हमारे साथ ऐसा क्यों हुआ? पत्नी ने ही धक्का देकर यहां भेजा है। (P3-0178)
  30. (कुटिया में साधक) जैसे आप हमारे साथ बोलते हो, वैसे प्रभु या भगवान — अगर कोई होगा — तो मुझसे ऐसे ही बोलेगा ना, तभी तो होगा? क्या वह देहधारी बनकर मुझसे बोलेगा? वैसे तो हर प्राणी में, अलग-अलग रूप में वह हमारी मदद करता ही है, किसी ना किसी के रूप में मिल जाता है — जानवर में, गुरु में, मां में। (P3-0180)
  31. (कुटिया में साधक) आप तो भगवान के पद को प्राप्त हुए; आपने वीडियो में बताया कि उस स्थिति में आने के लिए आपने कितनी मेहनत की। बाकी सबने वेदों के पठन आदि से ज्ञान लिया, पर आपके यहां तो खाली प्रत्यक्ष ज्ञान का मूल — ईमानदारी, सत्कर्म और सत्संग — है। क्या इतने से हो जाएगा, और जीवन में गुरु की कितनी जरूरत है? (P3-0181)
  32. (कुटिया में साधक) आज भ्रष्टाचार शिष्टाचार बन रहा है, (बेईमानों को) पुरस्कार मिल रहे हैं; ईमानदारी से पुलिस की नौकरी करना बहुत तकलीफ में आ रहा है, हम शिक्षकों को भी बहुत तकलीफ हो रही है — हमें दिखाना पड़ता है कि हम ईमानदार हैं। समूह ज्यादा है, बड़े अफसर कहते हैं नीचे से ऊपर तक की व्यवस्था ऐसे ही चलनी चाहिए। ऐसे में क्या करें? (P3-0182)
  33. (कुटिया में साधक) जैसे आप बोलते हैं कि जन्म-मृत्यु के चक्कर से निकलना है — तो अगर काम करते-करते निकल गए, तो फिर कहां जाएंगे? (P3-0183)
  34. (कुटिया में साधक) आप आत्मज्ञान, आत्मचिंतन, आत्मबोध, आत्मा और जीव की बात करते हैं — ये ज्यादा समझ में नहीं आते। आत्मा हम तो हैं, यह समझ में आता है, लेकिन ये आत्मा कहां पर है? इन्हें थोड़ा क्लियर कर दीजिए। क्या मैं ही सब कुछ हूं? और क्या हमें फिर से बच्चे जैसा (सारी जानकारी से खाली) हो जाना है? (P3-0184)
  35. (कुटिया में साधिका) आप कहते हैं कि मुझे यहां तक लाने में अनेक लोगों का बल लगा है। पर मुझे लगता है कि मैं अपनी इच्छा-वासनाओं के कारण खुद ही उनमें घुसी हूं — वे लोग तो सिर्फ उपकरण थे, किसी ने मुझे जबरदस्ती नहीं फंसाया। अगर मैं यह कहूं कि इन लोगों ने मुझे फंसाया, तो मेरी लायबिलिटी कम हो जाती है; अगर पूरी लायबिलिटी खुद पर लूं तो मैं अपने ऊपर ज्यादा काम कर पाऊंगी। और घुसने में मैंने अपनी पूरी ताकत लगा दी, अब मैं निष्क्रिय हो गई हूं, मुझमें दमखम नहीं — अब निकलूं कैसे? क्या यह सोच सही नहीं है? (P3-0185)
  36. (कुटिया में साधक) गुरु जी, कल के सत्संग में आपने बताया कि जो समय चल रहा है, उस समय से पीछे आना है — एक सेकंड, आधा सेकंड पीछे। उसके बारे में थोड़ा बताइए। क्या कुछ नहीं चाहिए में आएंगे तभी होगा, या इसमें कुछ रहस्य है? (P3-0190)
  37. (कुटिया में साधक) गुरु जी, आप परसों बोल रहे थे कि जब ये शरीर छोड़ के जाओगे तो कहां जाओगे, वो सोचो। मान लो मैं समझ लूं कि मैं परमात्मा के पास जाना चाहता हूं? (P3-0192)
  38. (कुटिया में साधक) अगर समाधि अवस्था में ही प्राण निकल जाएं, तो क्या होगा? (P3-0194)
  39. (कुटिया में साधक) मुझे लगता है जीवन की यात्रा अनंत से अनंत है और जीरो उसका सेंटर पॉइंट है (जिसे शांति या समाधि कहते हैं)। अच्छे कर्म करने वाला प्लस साइड — अच्छी जगह, अच्छी विचारधारा के लोगों में — जन्म लेता है; बुरे कर्म वाला माइनस साइड — दूसरी योनियों या वैसी विचारधारा के लोगों में — जाता है; ऐसे ही सर्कल घूमता रहता है। यह सर्कल टूटे कैसे? मुक्त हो गए तो फिर हम कहां होंगे — आत्मा कहीं तो होल्ड करेगी? और धरती पर 9-10 हजार करोड़ लोग जन्म ले चुके, अभी 900 करोड़ जिंदा हैं — बाकी की आत्माएं कहां गईं? (P3-0195)
  40. (कुटिया में साधक) आपने एक सत्संग में बोला था कि अध्यात्म में नर्क मांग लो — नर्क की लाइन में लग गए तो धुलना शुरू हो जाओगे। इसका अर्थ समझाइए। (P3-0196)
  41. (लाइव) नर्मदे हर गुरु जी। मैं बंगाल का हूं और मुस्लिम धर्म से बिलॉन्ग करता हूं। क्या मैं अपनों की कुटिया में रह सकता हूं? (P4-0009)
  42. (लाइव) नर्मदे हर गुरु जी। क्या अपनी कमाई का 10% अपनों की कुटिया में दे सकते हैं? मेरी प्राइवेट नौकरी है, सैलरी लिमिट में है, लेकिन इच्छा है कि मेरे द्वारा कुछ सत्कर्म हो। (P4-0015)
  43. (कुटिया में साधक) भगवान, हम तो आपसे (इतना) ले रहे हैं — हम आपके लायक थोड़ी हैं; क्या यह भी योग्यता से ज्यादा लेना नहीं हुआ? (P4-0018)
  44. (कुटिया में साधक) मेरा पहले वाला प्रश्न अधूरा था — जब आदमी निर्विचार-निर्विकार अवस्था में (देह छोड़कर) जाता है, तो आत्मा की बात नहीं, उसकी जो सूक्ष्म बॉडी है, वो फिर कहां होल्ड होती है? कहीं ना कहीं तो जाती होगी; अगर होल्ड नहीं होती तो फिर उसे नया जन्म तो लेना ही पड़ेगा? जैसे कहते हैं कि वह परमात्मा के पास जाती है। (P4-0049)
  45. (कुटिया में साधक) श्री कृष्णा गुरु जी। आपने एक प्रसंग में बोला था कि आत्मज्ञान के बाद फिर परमात्मा की यात्रा शुरू हुई; हम तो अभी तक यही समझते थे कि आत्मज्ञान के बाद सब खत्म हो जाता है। (ओशो ने भी एक सत्संग में यह बोला है।) क्या इसका भी कोई टाइम पीरियड है? (P4-0050)
  46. (कुटिया में साधक) किसी को 5 से 10 मिनट के लिए समाधि लगेगी, आत्मज्ञान कब होगा पता नहीं — बीच के उस समय को क्या कहेंगे? क्या वह समय के पार हो गया है? क्या विचार है तो समय है? (P4-0051)
  47. (कुटिया में, जबलपुर से आए साधक, जो पहले भी दो-तीन बार आ चुके थे) मुझे लगा कि ज्यादा बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है; यात्रा निरंतर बनी रहती है। बस (अपने आप में) होना है। (P4-0052)
  48. (कुटिया में साधक) बातें गहरी हैं; चार लोगों के सामने बातें कर लेना आसान होता है। मुझे लगता है, अगर मरने से पहले तक वो अनुभूति नहीं हुई, तो सब समय बर्बाद ही किया। तो क्या अनुभूति के बाद (आगे का) रास्ता शुरू होगा? (P4-0053)
  49. (कुटिया में साधक) जैसे नदियों का पानी समुद्र में जाता है, वैसे हम (ऊर्जा) मूल में जाते हैं — पर समुद्र का पानी बरसात बनकर फिर नदी में आ जाता है, तो यह चलता ही रहता है। और सूरज से सुबह से शाम तक जो रोशनी (ऊर्जा) निकली, वह यहीं यूज़ हो गई; सूरज चाहकर भी उसे वापस नहीं ले सकता, और वह भी चाहकर सूरज तक नहीं जा सकती। तो क्या यह उदाहरण यहां सेट नहीं होता? (P4-0059)
  50. (कुटिया में साधक) गुरु जी, अपने आप में ओंकार का नाद (ओंकार-सतनाम की ध्वनि) — यह कब (सुनाई देती है)? क्या ओंकार की ध्वनि आत्मज्ञान के पहले सुनाई देती है या आत्मज्ञान के बाद? वह तो खुद-ब-खुद बजता है, उसे अनाहत कहते हैं। (P4-0060)
  51. (कुटिया में साधक) आज का युवा — जो यूपीएससी या कोई बड़ी तैयारी कर रहा है, या कॉर्पोरेट में जॉब कर रहा है — उसमें एक ट्रेंड देख रहा हूं कि अपने कर्तव्यों को छोड़कर कहीं एकांत में, या किसी की शरण में भाग जाता है; और जानने-समझने के बाद भी वापस नहीं आता। अगर किसान खेती छोड़ दे, सब ऐसे अकर्मण्य हो जाएं, तो व्यवस्था कैसे चलेगी? वे भटक रहे हैं; आप उन्हें कुछ मार्गदर्शन देंगे? (P4-0061)
  52. (कुटिया में साधक) आश्रम की आर्थिक व्यवस्थाएं कैसे चलती हैं? (P4-0062)
  53. (कुटिया में साधक) (आपने) कुत्ते क्यों पाले हैं? (P4-0063)
  54. (कुटिया में साधक) कोई तो भगवान रूप लेता है — जैसे दस अवतार बोलते हैं, वे सब यहां अवतरित हुए। तो अवतार क्या है? (P4-0064)
  55. (कुटिया में साधक) मैं एक मां को गले लगा रहा हूं, एक पत्नी को गले लगा रहा हूं — दोनों में भाव का अंतर रहता है। तो ये भाव कैसे प्रकट होता है? (P4-0065)
  56. (कुटिया में साधक) हम जो ऑक्सीजन लेते हैं, वह किस तरह से पैदा हुआ? हम सोच रहे थे — बीज से वृक्ष, वृक्ष से बीज — बीज कहां से आया, वृक्ष कहां से आया? (P4-0066)
  57. (कुटिया में, एक शिक्षक साधक) आप (किसी शहर में) तीन दिन — रोज दो घंटा — सत्संग के लिए आ सकते हैं? (गोयल जी ने 6 लाख देकर सत्संग कराया था।) मन तो है कि मैं भी करवाऊं, लेकिन इतनी ताकत नहीं — 1 लाख पगार है, पर साथ में 10 लाख का कर्जा है। और हम (घर-परिवार से) अलग में हैं, इसलिए भगवान का भाग निकालना समझ में आता है। (P4-0067)
  58. (कुटिया में साधक) जो आपका वीडियो चलता है, अगर हम रोज देखते हैं, तो क्या हमें (चैनल को) कुछ देना चाहिए? क्या कोई सब्सक्रिप्शन/मेंबरशिप है, जिससे लाइव देखने पर आपको पैसे मिलते हैं? एक लड़का (चैनल पर) सुपर थैंक्स लगाता है — क्या वह आपको मिलता है? (P4-0068)
  59. (कुटिया में सन्यासी महाराज जी के संदर्भ में) सन्यासी के भेष (गेरुआ वस्त्र) में क्या ताकत है? जिसने भेष धारण किया है, उसे अपने आप से क्या देखना है? (P4-0074)
  60. (कुटिया में सन्यासी महाराज जी के संदर्भ में) क्या गुरु से दूर रहकर भी गुरु की कृपा मिल सकती है? पास रहने और दूर रहने में क्या अंतर है? (P4-0077)
  61. (कुटिया में साधक) गुरु जी, आप कुछ बोल रहे थे — वो मैं जानना चाह रहा था कि आसन में कैसे नहीं बैठते? मतलब बैठने में हम क्या गलती कर देते हैं? (P4-0078)
  62. (कुटिया में साधक, उज्जैन से) मैं 2017 में घर से एक साल के लिए निकल गया था। ओशो की विधियां (डायनामिक मेडिटेशन आदि) बहुत ऊर्जा देती थीं, उसमें मैं घबरा गया, एकांत में डर भी लगता था, फिर वापस संसार में लौटा — ना संसार का रहा, ना सन्यास का। बेचैनी, चिंता, तनाव, अनिद्रा, फिर सिगरेट-शराब भी लगी; डॉक्टर की दवाइयों के बाद मेरा दिमाग सुन्न हो गया। बहुत प्रयास किए, कई जगह पूछा। अब दिमाग सुन्न पड़ा है, कोई भावना ही नहीं उठती, शरीर में ताकत भी नहीं बची — अब क्या करूं? (P4-0079)
  63. (लाइव) गुरु जी प्रणाम। कुटिया में रहने वाले जिज्ञासु को जब उसकी गलती के लिए आप बोलते हो, तो उसकी गलत आदत नहीं निकलती और वही कुटिया से निकल जाता है। कुटिया में बने रहकर सधने के लिए उसे क्या करना चाहिए? (P4-0082)
  64. (लाइव) गुरु जी प्रणाम। जब आप कुटिया में रहने वाले व्यक्ति के किसी कार्य की सराहना करते हो या उसकी कोई गलती बताते हो, तो क्या उस व्यक्ति के भीतर उस गुण के साथ अहम भाव खड़े होने की संभावना हो सकती है? इससे वह कैसे उभरे? (P4-0086)
  65. (कुटिया में साधक) जब मैं खोज रहा था तो किसी ने कहा एक फकीर बाबा से मिलो। उन्होंने कहा कि कुरान पढ़ो, वही आखिरी किताब है, उससे ज्ञान की प्राप्ति हो जाएगी। मैंने पूछा कि हमारी किताबों में पुनर्जन्म का कांसेप्ट है, कुरान में नहीं — तो उन्होंने कहा कि हम सिर्फ एक ही बार आए हैं, रूहें एक जगह रहती हैं, कयामत के दिन सब जागेंगे। मैं यह जानना चाहता था कि जिस ज्ञान की आप बार-बार बात करते हैं, क्या अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग तरह का ज्ञान मिलता है, या सबको एक ही तरह का ज्ञान मिलता है? (P4-0091)
  66. (कुटिया में साधक) योगी जी, हमने इतनी भारी जानकारियां इकट्ठी कर ली हैं और उसी से हम परेशान हैं। तो क्या एक अबोध बच्चे को हम भारी जानकारी ना दें — ये एक्सपेरिमेंट करें कि इसको कोई जानकारी मत दो — तो क्या हमारी अपेक्षा उस बच्चे की यात्रा जल्दी होगी? (P4-0095)
  67. (कुटिया में साधक) आत्म चिंतन में, ध्यान लगा के बैठते हैं तो अतीत के विचार नहीं आते, लेकिन अभी जो कुछ हो रहा है — जैसे कोई आवाज आ गई, कुछ गिर गया — तो उसका विचार आता है, ध्यान वहां चला जाता है। क्या करें? (P4-0131)
  68. (कुटिया में साधक, पेंशनर) मैं जहां रहता था वहां धन से सेवा करता था — खाने-पीने के अलावा बाकी पैसे मैं रखता नहीं था, सेवा-सत्संग में लगा देता था। परिवार से विवाद हुआ तो निकल गया, आठ महीने बागेश्वर में रहा, वहीं आपका वीडियो मिला और तुरंत सब समझ में आ गया। अब यहां आ गया तो मेरा पैसा किसी काम में नहीं आ रहा; परिवार वाले उसे खा जाएंगे। मैं चाहता हूं कि वह पैसा यहां सेवा में लगा दूं — किसको, कैसे दूं? (P4-0132)
  69. (कुटिया में साधक) गुरु जी, लोग ईमानदारी से कुछ करना चाहते हैं लेकिन दिखाना चाहते हैं कि हमने ईमानदारी से किया; सत्कर्म करते हैं तो नोटिस कराना चाहते हैं — जैसे भूखे को खाना खिलाते हुए वीडियो बना के स्टेटस पर लगाते हैं। बिहार में सरकार ने कहा कि एक्सीडेंट वाले को हॉस्पिटल पहुंचाओ तो 5000 इनाम मिलेगा, तो कई इलाकों में एक्सीडेंट के केस बढ़ गए। लोग सत्कर्म का तुरंत रिजल्ट चाहते हैं। इस बारे में क्या कहेंगे? (P4-0135)
  70. (कुटिया में सन्यासी महाराज जी) गुरु जी, कल आप सिद्धेश्वर गए, वीडियो में देखा। आपने कहा था कि आपकी खोज की आखिरी जगह वहां थी — क्या उपलब्धि उस स्थान पर हुई? क्या वह स्थान उस पल का साक्षी है? (P4-0140)
  71. (लाइव) गुरु जी नमन। अपनों की कुटिया में कोई सेवा नहीं है, तो सुबह साधक को अपनी शुरुआत कैसे करनी चाहिए? और वहां सत्कर्म क्या होगा? (P4-0145)
  72. (कुटिया में साधिका) योगी जी, आप कहते हो कि सारी समस्या उम्मीद पर टिकी है, उम्मीद छोड़ दो। लेकिन मुझे तो किसी से कोई उम्मीद दिखाई ही नहीं देती, बचपन से मैंने अपने बलबूते पे किया है। मेरा भय यह है कि कभी शरीर में कोई बड़ी बीमारी आ जाए, बुद्धि काम ना करे, या प्रारब्ध इतना तगड़ा हो कि मेरी यात्रा ही ना हो पाए। तो मेरी सूक्ष्म से सूक्ष्म उम्मीद मुझे कैसे पता चले? मुझे तुरंत वाला मार्ग बता दो (वाल्मीकि की तरह बैठ जाऊं), ताकि जब तक मैं स्वस्थ हूं, समय बर्बाद ना हो। (P4-0155)
  73. (कुटिया में साधिका ने बुल्ले शाह की कहानी सुनाई — गुरु के आदेश से शादी में गया, गुरु भाई से बात नहीं की, गुरु ने आश्रम में आने से मना कर दिया, और 12 साल बाद किन्नर बनकर नाचते हुए गुरु को रिझाया।) बुल्ले शाह की गलती तो बस इतनी थी कि बात नहीं की — फिर गुरु को उसे वापस अपनाने में 12 साल क्यों लगे? (P4-0163)
  74. (कुटिया में) बाबूलाल भाई ने फॉर्म में 'आत्म कल्याण होने तक यहां रुकूंगा' लिखवा दिया; फिर कहा कि मेरा भाव यह नहीं था, पर काटिए मत — गुरु जी मेरा भाव समझ जाएंगे। इसमें क्या गहराई है? और आपने उनकी पूरी जिम्मेदारी पहले ही क्यों घोषित कर दी, इस शर्त के साथ कि अगर वो (घर) नहीं गए तो? (P4-0171)
  75. (कुटिया में चार दिन रहे एक साधक-शिक्षक ने अपना अनुभव बताया) यहां इतने कम संसाधनों में भी साधक सुखी रहते हैं, आवश्यकता में जीते हैं; और हम आवश्यकता से अधिक में जीकर भी बेचैन रहते हैं। यहां की व्यवस्था के बारे में आप क्या कहेंगे? (P4-0172)
  76. (कुटिया में एक युवा साधक) गुरु जी, मैं चीजें ठीक से समझ नहीं पाया। पहली बार वीडियो देखते ही भाव आया था कि यही गुरु है; नर्मदा पर भाव बना कि गुरु जी गले लगाएं और आपने गले लगाया। फिर घर गया तो घुटन-परेशानी रही, वापस आया, पर इस बार मन में संदेह था कि गुरु जी रखेंगे या नहीं, और कई गलतियां हुईं। मैं अब ठीक से पकड़ नहीं पा रहा — मदद कीजिए कि मैं अपने आप को इनसे निकाल पाऊं। (P4-0173)
  77. (कुटिया में गोयल जी, जिन्होंने रात 2 बजे प्रार्थना की थी कि मुझे सेवक रूप में स्वीकार करो, और जिन्हें उनके पहले गुरु ने यहां भेजा था) — इतने भाव के बाद भी मेरी स्थिति गड़बड़ क्यों हो गई? मेरी जीवात्मा कहां अटकी है, कैसे निकले? (P4-0174)
  78. (कुटिया में गोयल जी) कभी संभल जाते हैं, कभी गलती हो जाती है, कभी भटक जाते हैं — क्या करें? (P4-0176)
  79. (कुटिया में) जो साधक कोई भाव बनाकर आता है — जैसे 'मैं शिशु बनकर आया हूं' — उसकी जांच यहां कैसे होती है? (P4-0180)
  80. (कुटिया में युवा साधक) क्या मैं घर वालों को फोन करके बता दूं कि अब मैं नहीं आऊंगा? या जाकर बताना चाहिए? (P4-0183)
  81. (कुटिया में साधिका) मुझे द्वंद्व आ रहा है कि भगवान का अपना खुद का कोई अस्तित्व नहीं है — भक्तों ने ही उसे पॉपुलर किया। जैसे मीरा ने पूरी जिंदगी दी, तो हम मीरा को देखकर उस सुप्रीम को देख पाते हैं। अगर बीच में भक्त ना हो, तो भगवान को कौन जानेगा? क्या भगवान भक्त पर निर्भर है? (P4-0184)
  82. (कुटिया में एक साधक) हम महात्माओं की बहुत सी किताबें पढ़ते हैं, कहानियां अच्छी लगती हैं, पर उनमें क्या खोज करना है यह नहीं सोचते। कोई कहता है किताब पढ़ना छोड़ दो — किताब में बारिश का वर्णन है, पर किताब निचोड़ने से बारिश नहीं होती। क्या यहां आने के बाद भी किताबें पढ़ सकते हैं? जिज्ञासु बनने के लिए कुछ आधार तो चाहिए। (P4-0187)
  83. (कुटिया में आई एक साधिका, जो चार साल से इस रास्ते पर है) मैंने पढ़ा कि आत्मा को ना जाना जा सकता, ना देखा-सुना जा सकता, तो उसके बारे में बात करना व्यर्थ है; बात तो इस अहम की करनी है जो 'मैं' और 'मेरा' कहता है। जब तक यह शरीर है, अहम भी साथ है — तो इस अहम से कैसे बाहर निकलें? (P4-0188)
  84. (कुटिया में एक और साधिका, जिनका भी बाल विवाह हुआ; पति बहुत परिवार-प्रेमी हैं, अब फिजिकल रिलेशन भी नहीं चाहते, पर कहते हैं कहीं भी जाओ, बस वापस घर आ जाना) — उन्हें क्या कहूं? (P4-0194)
  85. (कुटिया में एक युवक) आपने कहा था कि शादी जरूरत हो तो करो — मैं खुद को चेक कर रहा हूं। हर एक महीने या 40 दिन में एक बार काम-वासना बहुत तंग करती है, बाकी 39 दिन कुछ नहीं रहता। इसका मतलब मुझे जरूरत है या नहीं, कैसे समझूं? और उससे मुक्त होने के लिए कोई गलत रास्ता न चुन लूं, इसकी जानकारी कैसे हो? (P5-0005)
  86. (कुटिया में एक साधिका, जो प्रोफेसर रही हैं, युवक के प्रश्न पर) — हो सकता है शादी न करने वाले भी वो काम कर लेते हों; पर जरूरी तो नहीं हर कोई कर रहा होगा, अपवाद भी तो होता है। कोई कहता है 80% हो रहा है, कोई कहता है 1% — इसमें सही क्या है? (P5-0006)
  87. (कुटिया में एक साधक) हम अपनी क्षमता खुद नहीं जानते — कंपटीशन में, सामने वाले को देखकर हम ज्यादा कर पाते हैं, जैसे जिम में ज्यादा वेट उठा लेते हैं। तो क्या ऐसे अपनी क्षमता बढ़ाना सही नहीं है? (P5-0013)
  88. (कुटिया में एक युवक) किताबों में पढ़ते हैं कि दूसरों के अनुभव से सीख लो; गीता में श्री कृष्ण ने बताया कि ये काम करो, ये मत करो — पर सुनकर, ज्ञान और समझ होते हुए भी मन नहीं मानता, कहता है एक बार करके देखते हैं। आपने भी कहा था कि आप हर जगह गए, यह देखने के लिए कि वहां कुछ नहीं है। तो जब कृष्ण ने कह दिया कि भगवान बाहर नहीं है, फिर भी मन मानता नहीं — मन को कैसे मनाऊं? किसकी बात सही मानूं? (P5-0016)
  89. (कुटिया में साधिका) उस (युवक) में समझ तो है, बस वो चल नहीं रहा — हम कैसे निर्णय कर सकते हैं, हो सकता है वो पहुंच ही गया हो और ऐसे ही सबको खींच रहा हो, परीक्षा ले रहा हो? और वैसे हमारी स्थिति का कोई शायद अनुमान भी नहीं लगा पाएगा। (P5-0017)
  90. (कुटिया में बालक, जिन्हें पहले भगाया गया था) आपको तो आना मना था, आपने भगा दिया था — फिर आए क्यों? और उस दिन रात को माँ के साथ क्यों चले गए? (P5-0018)
  91. (कुटिया में साधिका) गलतियाँ होती रहेंगी — हम गिरे ही हुए हैं; यहाँ आकर गलतियाँ ज्यादा निकलती हैं। अगर आप हमारे लिए दरवाजा बंद कर दोगे तो ठिकाना नहीं रहेगा। अपराधी की तरह अंतिम विकल्प भी तो होना चाहिए — क्या दंड काटकर फिर आने का अधिकार नहीं? (P5-0019)
  92. (कुटिया में साधिका) मुझे भजन आता है; संतों ने कहा कथा सीखो — क्या कथा सीखूँ? भजन-कथा का पैसा आए तो लेना चाहिए? इस लाइन में जाना है या नहीं? (P5-0021)
  93. (कुटिया में साधक) कुत्तों को अंदर बंद क्यों रखा है? हम खुले में हैं तो हमारे ऊपर तेंदुआ आदि का खतरा नहीं? (P5-0022)
  94. (कुटिया में साधिका) क्या पहले आत्मज्ञान / आत्मिक कल्याण लेना है, बाद में बाकी काम? प्रबल इच्छा का मतलब क्या? (P5-0023)
  95. (कुटिया में साधिका) यहाँ व्यवस्था कैसे चलती है जब साधकों से पैसे नहीं लेते? बाहर से डोनेशन? नकली चैनल / नंबर से कैसे पहचानें असली? (P5-0026)
  96. (कुटिया में साधक) हम अपने आप पर विश्वास कैसे करें — जो कर रहे हैं सही है या गलत? अध्यात्म / आत्मचिंतन कैसे शुरू करें? चिड़िया-गिलहरी को अपना खाना डालना सत्कर्म है? (P5-0027)
  97. (संदर्भ: कुटिया निर्माण) इतने जीव मरते हुए दिख रहे थे फिर भी कुटिया क्यों बनाई? (P5-0036)
  98. (लाइव/कुटिया) आत्मज्ञान के बाद प्रश्न हट गए — फिर भी कुछ पूछना रहता है? इस जन्म में हर कोई प्रयास कर सकता है? (P5-0040)
  99. साधक के लिए सबसे जरूरी बात क्या है? अपनों की कुटिया में रहने के नियम क्या हैं? (P5-0093)
  100. कुटिया के नियम क्या हैं — मोबाइल, भोजन, साधना? (P5-0100)
  101. जगह बदलने से स्थिति नहीं बदलती कहते हो — पर घर छोड़कर ही ज्ञान हुआ? कुटिया नियम हर कोई नहीं पाल सकता? (P5-0142)
  102. योगी जी नमन। पंजाब से एक बहन है, छह महीने पहले शादी हुई। डेढ़ साल पहले भाई को वीडियो मिली, उनकी रुचि थी, बहन का यह मार्ग नहीं था। कुटिया आने से पहले बहन कहती थी कि मैं बहुत बातें करती हूं, मैं यहां रह नहीं पाऊंगी। फिर भी नियम ऐसे सहज स्वीकार हो गए कि नियम लगे ही नहीं। बैठने का कोई काम नहीं, फिर भी पूरे समय सहज बैठी रहती है, किसी को देखती नहीं। भाई की ओवरथिंकिंग छूट गई, बहन वीडियो कम सुनती है, और दोनों निरंतर नियम में हैं। जिज्ञासा यह है कि एक जीवात्मा अपनी यात्रा के लिए इतनी उत्सुक कैसे हो जाती है? किस मोड़ से अपने आप को निकालना चाहती है? प्रत्यक्ष ज्ञान निमित्त बना, शादी हुई, और ऐसी जगह आना जैसे यह बहुत आवश्यक हो। यह संभव कैसे हो पाया? क्या वह कोरे कागज की तरह समझ रही है? और जो पहले कुछ पढ़कर या कोई प्रक्रिया करके आता है, उसका मन तुलना में लग जाता है, यहां ऐसा क्यों नहीं, वैसा क्यों नहीं, कुछ हो नहीं रहा, इतने दिन हो गए, तो क्या पिछला छोड़कर यहीं समझना चाहिए? (P6-0054)
  103. खोज के दौरान एक संत ने कहा था कि एक करोड़ रुपये में आश्रम हो जाएगा। आपने उस समय मना कर दिया। क्या तब यह पता नहीं चला था कि आगे चलकर अपनों की कुटिया का निर्माण करना है? (P6-0067)
  104. अपनों की कुटिया की तरफ से पुकार हो रही है, फिर भी लोग नहीं आते। यह पुकार कब तक रहेगी? और जब आपको कहीं ठिकाना नहीं मिलता था, रात-दिन का भरोसा नहीं था, तब आपको अध्यात्म की ओर कौन बुला रहा था? (P6-0084)
  105. जालना, महाराष्ट्र से पूछा गया है कि गुरु से ब्रह्मज्ञान लिया है, पर अभ्यास घर पर नहीं हो पा रहा। अपनों की कुटिया में आना चाहता हूं। क्या मैं आ सकता हूं? (P6-0087)
  106. आपका आश्रम, सत्संग कुटिया, कौन से गाँव में है? कृपा करके बताना। (P6-0192)
  107. कुँवारी बेटियाँ भी कुटिया में रहकर साधना कर सकती हैं क्या? मार्गदर्शन करें। (P7-0053)
  108. मैं इस कुटिया को अपनी मानता हूं। छोटी-छोटी बिगड़ने वाली चीजें, जो औरों को नहीं दिखतीं, उन पर ध्यान रखता हूं। पहले लगता था लोग मेरे तरीके से नहीं कर रहे, गलत लगता था। अब समझ आया कि सबकी समझ अपनी है। खाना बनाने में मन लगता है। सारा छोड़ दूं तो कमजोरी आ जाएगी, इसलिए अपना काम भी करता रहता हूं। बोलचाल में गलती हो जाती है। यह कुटिया किसकी है, और यहां कैसे रहें? (P7-0161)
  109. कुटिया में पहुंचने के बाद क्या बात कर सकते हैं, फोन कर सकते हैं? (P7-0175)
  110. आपकी कुटिया के नियमों को मैं घर पर ही पालन करने की पूरी कोशिश करती हूं। क्या घर पर भी मेरी उन्नति हो सकती है? (P8-0099)
  111. जो नियम कुटिया में रहते हुए थे, क्या वही नियम घर पर भी अपनाने होंगे तभी आत्मज्ञान होगा? (P8-0106)
  112. हमें ब्रह्म ज्ञान हो गया है, हम कुटिया में आना चाहते हैं। क्या ब्रह्मज्ञानी को कुटिया में जगह है? (P9-0092)
  113. जैसे आप लाइव आते हैं, तो क्या कुटिया में रहने वाले सारे साधक सामने बैठते हैं? सुनने का मौका क्या सब रहने वालों को रोज मिलता है? (P9-0096)
  114. आप कहते हैं कि आपको फक्कड़ की तरह घूमना ज्यादा अच्छा लगता है। तो क्या कुटिया में रहना आपको बंधन लगता है? (P9-0163)
  115. पुराने वीडियो में यह बात बैठ गई कि जितना खाया-पिया, उसका बिल चुकाओ और एकदम निकल लो। मैं उसे गहराई से उतारना चाहता हूं। अपने हिसाब से मैं कुटिया के नियम में हूं, लेकिन शायद आपके हिसाब से नहीं। ऊपर से नियम पालता दिखूं और अंदर घुटन हो, तो क्या सच में नियम में हूं? (P9-0179)
  116. गुरु जी, आपका सत्संग हर बार सुनने पर अलग तरीके से समझ में क्यों आता है? अपनों की कुटिया में आपको देखकर बहुत खुशी हुई। (P9-0189)
  117. अपनों की कुटिया में कब तक हो? मिलने आना है। दो साल से ऊपर हो गए, मिलना नहीं हो पाया। आप यहां हो या कहां हो? (P10-0008)
  118. क्या अपनों की कुटिया में सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक निरंतर आत्मचिंतन करना होता है? (P10-0057)
  119. गुरु जी, क्या मैं (कुटिया में) तीन दिन के लिए भी आ सकता हूं? (P10-0066)
  120. गुरु जी, एक कुटिया नर्मदा किनारे बनी है और यह दूसरी कुटिया बन रही है। वह कौन सी जगह है? साधकों के लिए बताएं। (P10-0070)
  121. गुरु जी, मैं काम नहीं कर सकता। क्या मैं (अपनों की कुटिया में) आ सकता हूं? (P10-0109)
  122. क्या अपने जीवन को एक कुटिया या आश्रम में नष्ट कर देना समझदारी है? क्या 24 वर्ष की अवस्था में संन्यासी होना चाहिए, या दुनिया को और समझना और जानना चाहिए? (P10-0127)
  123. मैं (कुटिया में) आने का इच्छुक हूं, पर मुझे घुटने की दिक्कत है, शुगर-बीपी है। क्या आ जाऊं? (P10-0147)
  124. गुरु जी, हम सामान्य व्यक्ति हैं, हमें कुछ ना कुछ लालसा होती है। आपको भी लगता है कि आपकी बढ़िया कुटिया हो। तो हमारी और आपकी लालसा में क्या अंतर है? (P10-0158)
  125. गुरु जी, राजस्थान में हमारे मंदिर की छोटी जमीन है। वहां भी आप अपनी कुटिया बना सकते हैं। (P10-0162)
  126. योगी जी, मैंने तीन दिन बाद की टिकट करवाई है। मुझे नहीं पता था कि कुटिया में 7 दिन रहना जरूरी है। क्या मैं तीन दिन के लिए आ सकती हूं? (P10-0172)
  127. (कुटिया में नए साधक) मैं अभी नया आया हूं, मुझे यहां के बारे में कुछ पता नहीं। काम के लिए पूछना हो तो क्या मैं किसी एक व्यक्ति से बात कर सकता हूं? (P10-0177)
  128. (कुटिया में साधक) कल मेरे मन में भाव आ रहा था कि मैं (नर्मदा) परिक्रमा कर लूं। पर लगता है यह जगह, आपका सान्निध्य छूट जाएगा। (P10-0187)
  129. (कुटिया में साधक) घर पर जो पुरानी आदत थी, उसके विचार यहां तीन-चार दिन से नहीं आ रहे, बस सपने में आते हैं; घर पर वह विचार खींच लेता था। ऐसा क्यों? और वहां जाकर कैसे बचूं? (P10-0195)
  130. (कुटिया में साधिका) मैंने आपकी वीडियो में सुना था कि ब्रह्म परमात्मा की यात्रा करेगा। तो क्या आत्मा ब्रह्म है? (P11-0001)
  131. (कुटिया में साधक) सात दिन बाद मैं अपने संसार में चला जाऊंगा। वहां रहकर साधना करूं, तो मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरी स्थिति कहां तक पहुंची है? (P11-0007)
  132. घर पे मन नहीं लगता, यहां (कुटिया) आने का मन करता है; और यहां आकर फिर भागने का मन करता है। (P11-0017)
  133. मैंने घर वालों से कहा है कि मेरे लिए किसी प्लॉट में एक कुटिया बनवा दो, उसमें रहकर साधना करूंगी। (P11-0024)
  134. कितने उम्र तक के बच्चे यहां (कुटिया में) आ सकते हैं? मेरे बच्चे 13-14 साल के हैं, उनकी छुट्टियां हैं। (P11-0025)
  135. (कुटिया में साधक) मैंने एक साथी साधक को सलाह दी थी कि आंख थोड़ा बंद करके बैठा करो, ताकि बाहर से रसपान कम हो। क्या यह गलत था? (P11-0026)
  136. मेरा शरीर विकलांग है, इसलिए (कुटिया) आ नहीं सकती, पर आने का बहुत भाव है। कृपा कर दीजिए। (P11-0037)
  137. (कुटिया में साधक) हमें पता नहीं कि आत्मज्ञान, निर्वाण, मोक्ष क्या है। आत्मज्ञान से हमें क्या हासिल होगा, और उसके बाद जीवन कैसा होगा? सरल भाषा में बताइए। (P11-0049)
  138. मैं आपके बताए शब्दों में जी रही हूं, लेकिन कुटिया की कुछ घटनाओं के कारण भ्रमित हो गई हूं। स्पष्ट करना चाहूं, तो क्या आपको बुरा लगेगा? (P11-0069)
  139. (कुटिया में सेवक) मुझे अब कोई घुटन, बेचैनी नहीं; बस तब दुखी होता हूं जब मेरी वजह से आपको चिल्लाना पड़ता है — जैसे कल रात कुत्तों के लिए गेट नहीं खोला। मुझे पहले से लग रहा था कि आप बोलने वाले हैं, फिर भी नहीं उठा। (P11-0118)
  140. आपकी कुटिया में आजीवन रहने के लिए क्या केवल एक नियम में ढील मिल सकती है? (P11-0145)
  141. घर पर बेड-गद्दे पर इतना आलस है; और यहां (कुटिया में) ऐसी नींद आती है, जैसे गद्दे पर बैठे हों। ऐसा क्यों? (P11-0153)
  142. अपनों की कुटिया में किसी भी साधक से कोई सेवा नहीं ली जाती; तो क्या यहां रहकर व्यक्ति आलसी तो नहीं बन जाएगा? (P12-0020)
  143. अपनों की कुटिया में आजीवन रहने वाला जिज्ञासु क्या आत्मचिंतन द्वारा ही अपना कल्याण कर लेगा, या उसे भी सत्कर्म करना होगा? कुटिया में रहते सत्कर्म कैसे होगा? (P12-0054)
  144. आपने कुटिया के आश्रमवासियों से कहा कि जो भी आए उसे अच्छे से खिलाओ-पिलाओ, ताकि देने का स्वभाव आए। तो हम संसार में या आपके साथ भी बांटने लग जाते हैं कि योगी जी खुश होंगे, और फिर आप कहते हो कि तुम अपना मान खड़ा कर रहे हो। इसे मैं कहां तक सही मानूं? (P12-0110)
  145. गुरु जी, अपनों की कुटिया में आने पर क्या काम करना पड़ता है? (P13-0012)
  146. गुरुदेव, एक सत्य बताइए — हम दो दिन के लिए आपकी कुटिया में आए, तो ऐसा अनुभव हुआ कि आपके द्वारा वहां आए साधकों को कुछ आंतरिक ऊर्जा प्रदान की जाती है। (P13-0017)
  147. गुरुदेव, कुटिया में साधना के लिए रह रहे हैं, और बहुत बढ़िया लगने लगा है। लेकिन कुटिया के कार्य में अगर कुछ ऊंच-नीच हो रहा है, तो क्या मैं उसमें सजेशन देने के योग्य हूं या नहीं? क्योंकि बोलने में द्वेष पैदा हो जाता है। (P13-0069)
  148. (कुटिया का जंगल देखकर) मेरी भी आंखों में पानी आया, क्या करूं? (P13-0145)
  149. गुरु जी, बुद्ध, महावीर और आपने भ्रमण करके आत्मज्ञान प्राप्त किया। हम तो यहां आपकी कुटिया में रुक गए — क्या यहां आत्मज्ञान की प्राप्ति हो जाएगी? (P14-0032)
  150. गुरु जी, कुटिया में केवल तप होगा तो सेवा नहीं हो पाएगी? (P14-0037)
  151. प्रभु, कुटिया साधक के लिए है, तो कोई साधना है जो आप यहाँ करने के लिए बताते हो? (P14-0138)
  152. अपनों की कुटिया में रहकर साधना करने पर आगे के प्रारब्ध नहीं बनेंगे, पर पुराने कैसे कटते हैं? कृपया मार्गदर्शन करें। (P16-0092)
  153. आपने बताया कि कुटिया से पहले लोग आपको लाखों देना चाहते थे पर आपने नहीं लिया। मैंने तो पैसे को इतनी वैल्यू दी क्योंकि वो शरीर को सुख-सुविधा देता है और मेरा मान बढ़ाता है — पेट भर जाए तो बचे में मान खड़ा कर लूं। और आप 15-16 साल की उम्र में घर से निकले, एक कपड़े में फक्कड़ संन्यासी की तरह रहे, आपका कोई गुरु भी नहीं रहा। तो मैं ये बात अपने स्वभाव में लाना चाहूं तो शुरुआत कैसे करूं — क्या मैं भी सब कुछ छोड़ के एक कपड़े में रहूं? (P17-0022)
  154. गुरु जी, यहां (कुटिया में) आकर यह तो पता चल रहा है कि नया नहीं भर रहा, पर जो पहले से भरा है वह खाली हो रहा है या नहीं — यह कैसे पता चलेगा? (P17-0134)
  155. गुरु जी, "अपनों की कुटिया" बनाने का भाव क्या है? (P18-0010)
  156. गुरु जी, आपके आश्रम (कुटिया) में महिलाओं और साधकों के लिए क्या नियम हैं? (P18-0081)
  157. गुरु जी, कुटिया में एक महीना रहकर घर लौटे; एक दिन अच्छा लगा, फिर व्यवहार में प्रतिक्रिया न देने से घुटन होने लगी — क्या संसार में रहना ही बेईमानी है? (P18-0085)
  158. गुरु जी, मुझे पहले आत्मज्ञान जैसा अनुभव होता था — प्रश्न उठते ही अंदर से उत्तर मिल जाता था — लेकिन यहां (कुटिया) आने के बाद वह अनुभव खत्म हो गया; ध्यान में भी नहीं मिलता। वह कहां चला गया? (P18-0120)
  159. गुरु जी, इस कुटिया (आश्रम) का निर्माण किस भाव से हो रहा है — क्या कोई भी यहां आकर रह सकता है? (P18-0177)
  160. गुरु जी, आपने अपनों की कुटिया नर्मदा तट के इसी क्षेत्र में क्यों बनाई? (P19-0012)
  161. गुरु जी, कुटिया के निर्माण के लिए आप दान कैसे लेते हैं? साधकों से क्यों नहीं लेते और लाखों रुपये तक मना क्यों कर दिए? (P19-0014)
  162. गुरु जी, आप फोन पर बात क्यों नहीं करते? लाइव सुनने और कुटिया पर प्रत्यक्ष आने में क्या फर्क है? (P19-0015)
  163. गुरु जी, सुना है परमात्मा फ्रीडम और भय से मुक्त होने से मिलता है — तो आपकी कुटिया में नियम, बंधन और भय क्यों? (P19-0026)
  164. गुरु जी, कुटिया के नियम निभाने में मुझे शारीरिक दिक्कत थी, पर मैंने पहले नहीं बताया। अब क्या करूं? (P19-0106)
  165. गुरु जी, कुटिया में बाहर से मंत्र बोलने, पाठ करने या किताब पढ़ने की मनाही क्यों है? (P19-0144)
  166. गुरु जी, मैं कुटिया आना चाहता हूं, पर मुझे जल्दी सोने और जल्दी उठने की आदत है। क्या उसका कुछ हो सकता है? (P19-0145)
  167. गुरु जी, कुटिया का इतना साधारण जीवन आपको कष्टमय क्यों नहीं लगता? (P19-0175)
  168. गुरु जी, कुटिया या आश्रम में रहते हुए साधक को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? (P19-0200)
  169. गुरु जी, कुटिया में साधना इतनी तेजी से क्यों होती है? (P20-0003)
  170. गुरु जी, कुटिया में सब समझ आता है, पर बाहर की दुनिया में जरूरतें और भटकाव बढ़ जाते हैं — क्या करें? (P20-0004)
  171. कुटिया के सेवा नंबर पर नाम पूछना, गुड मॉर्निंग या निजी बातें करना क्यों मना है? (P20-0140)
  172. कुटिया में लिखी पंक्ति "बेमतलब से आना नहीं, मतलब है तो आना नहीं" का क्या अर्थ है? (P20-0171)
  173. गुरु जी, मैं सोचती हूं यह घर छोड़कर कुटिया चली जाऊं और वहां सत्संग-सेवा करूं; पर वहां अपनी मेहनत का नहीं, दूसरों के दिए अन्न का खाऊंगी और पैरों तले जीव भी मरते हैं — क्या इससे मेरा बंधन बनेगा? आत्म-कल्याण के लिए घर पर रहूं या कुटिया जाऊं? (P21-0099)
  174. गुरु जी, कुटिया के निर्माण में मैं कुछ-कुछ करता रहता हूं, लेकिन सच कहूं तो थोड़ा शैडो में, छिपकर करना चाहता हूं — खुले में नहीं। क्या यह ठीक है? (P21-0106)
  175. गुरु जी, आप जो सात दिन कुटिया में रहने का बता रहे थे — वहां क्या चर्चा होती है, कोई पाठ्यक्रम होता है क्या? (P21-0121)
  176. गुरु जी, मेरे घर में परमिशन नहीं है — मेरी मां और मेरे हस्बैंड अपनों की कुटिया आने की परमिशन नहीं देते। मैं क्या करूं? (P21-0173)
  177. गुरु जी, आपको कैसे लगा कि कुटिया यहीं बनानी है, यही वह जगह है? (P22-0150)
  178. प्रणाम प्रभु जी, मैं और मेरी पत्नी आपके यहां आने के लिए मुंबई से निकलेंगे। मेरी पत्नी का सवाल है — पीरियड के समय अपनों की कुटिया में क्या नियम से रहना होगा? (P23-0026)
  179. गुरु जी, कुटिया में काम करते-करते शरीर एकदम थक गया और बीमार हो गया, तो रात को मैंने निर्णय कर लिया कि काम बीच में छोड़कर घर चली जाऊं ताकि आप मुझे बीमार देखकर और परेशान न हों; सुबह थोड़ा ठीक लगा तो निर्णय किया कि मैदान छोड़कर नहीं जाना। उस समय मेरी जीवात्मा का क्या हाल था — मैंने किसको महत्व दिया? (P23-0123)
  180. गुरु जी, दुनिया में इतने गुरु हैं। आपने उनका सहयोग करने की क्यों नहीं सोची, और अपना अलग मार्ग, अपनी अलग कुटिया क्यों खोली? (P23-0136)
  181. गुरु जी, अपनों की कुटिया से जाने के बाद साधक की घर में दिनचर्या कैसी होनी चाहिए, और लोगों से व्यवहार कैसा हो? (P23-0165)