ध्यान — योगी गुरु जी के प्रश्नोत्तर
इस पृष्ठ पर “ध्यान” विषय से जुड़े 193 प्रश्न हैं, जो जिज्ञासुओं ने सत्संग में योगी गुरु जी से पूछे। किसी प्रश्न पर क्लिक करके योगी गुरु जी का पूरा उत्तर उनके अपने शब्दों में पढ़ें, वीडियो के साथ।
- जब अपने आप में (ध्यान में) होता हूं तो दिमाग में बहुत सारे ख्याल आते हैं और मैं डिस्टर्ब होता हूं। उन्हें कैसे कंट्रोल करें? (P1-0078)
- गुरुदेव, प्रणाम। ध्यान के लिए क्या करना होगा? (P2-0127)
- प्रणाम योगी जी। क्या ध्यान का अभ्यास करना चाहिए, या ईमानदारी, सत्कर्म और सत्संग ही मूल है और फिर ध्यान अपने आप घटने लगेगा? (P2-0130)
- तो चलने में, बैठने में — इनमें मैं कैसे ध्यान रखूं (आत्मनिरीक्षण करूं)? (P2-0160)
- बहुत लोग सच्ची जिज्ञासा होते हुए भी आसान रास्ता खोजते हैं — रातभर कीर्तन, भजन, परिक्रमा — और जहां भीड़ दिखी, वहीं चले जाते हैं। इतनी दुकानें, इतनी किताबें हैं कि आदमी भटकता है: कहीं ध्यान सीखा, ऊर्जा तीसरे नेत्र पर अटक गई, सिरदर्द हो गया, अवसाद आ गया; न घर के रहे न घाट के, कोई कहता है मुझे आत्मज्ञान हो गया। ऐसा व्यक्ति कैसे जल्दी पहचाने कि दिशा गलत पकड़ ली है, वह कल्पना में जा रहा है? (P2-0167)
- (उसी प्रसंग में) अगर इस जन्म में मुझे ऐसा कोई विकार ध्यान में नहीं, तो फिर विकार कहां से आया — हमें पता ही नहीं चलता? (P3-0090)
- (लाइव) ध्यान में सूक्ष्म शरीर का पता चलता है, यह पता चला कि मैं शरीर नहीं हूं। अब आत्म साक्षात्कार के लिए क्या करूं, गुरु जी? (P3-0142)
- जब सब तुम में ही है तो क्या चाहिए? अगर मैं सीधा अपने आप में आ सकता हूं तो इतनी विधियां क्यों? और एक व्यक्ति रोज दो घंटे ध्यान-पूजा-पाठ करता है, दूसरा ईमानदारी से कर्म करते हुए वे दो घंटे जरूरतमंद की सेवा में लगाता है — दोनों ईमानदार हैं, तो पहले कौन पहुंचेगा? (P3-0153)
- (वही साधक) आपने बताया कि धारणा को भी तोड़ना है, ध्यान से भी मुक्त होना है — धारणा, ध्यान, फिर समाधि, फिर तुम, फिर ब्रह्म। तो समाधि वाली स्थिति में कैसे पहुंचा जा सकता है, वो कब आती है? कितने दिन बाद आती है, कितनी देर रहती है? आत्मज्ञान का अनुभव और समाधि का अनुभव — दोनों अलग होते हैं या एक ही? और समाधि में शरीर का भान रहता है या नहीं? (P3-0191)
- (लाइव) गुरु जी प्रणाम। धारणा, ध्यान, समाधि, और जिसे कुछ नहीं चाहिए — क्या इसी से मुक्ति हो जाएगी? (P4-0002)
- (लाइव) प्रणाम योगी जी। क्या ध्यान-साधना किसी पेड़ — पीपल, बरगद — के नीचे करने से दुगना फायदा होगा? (P4-0113)
- (लाइव) प्रणाम योगी जी। करियर पर ध्यान के साथ-साथ आत्मज्ञान (के लिए काम) करना गलत है क्या? (P4-0118)
- (कुटिया में साधक) आत्म चिंतन में, ध्यान लगा के बैठते हैं तो अतीत के विचार नहीं आते, लेकिन अभी जो कुछ हो रहा है — जैसे कोई आवाज आ गई, कुछ गिर गया — तो उसका विचार आता है, ध्यान वहां चला जाता है। क्या करें? (P4-0131)
- (वही साधक, पेंशनर) मैंने निरंतर नाम जाप भी किया, 18–20 घंटे सीताराम जपता था, फिर भी विचार नहीं बदले। फिर किसी के सत्संग से सांस पर ध्यान करना सीखा — वो कुछ समय के लिए काम करता है, शरीर के विकार भी सुधरते हैं, लेकिन परमानेंट नहीं। और आत्मिक चिंतन में आंख बंद करके क्या करना है? (P4-0134)
- (लाइव) योगी जी प्रणाम। आपके मिलने से पहले ही मैं आपके जैसे गुरु खोज रही थी। जब आप मिल गए तो मैं पूरी तरीके से उसमें जी नहीं पा रही हूं, क्योंकि गृहस्थी में हूं, छोटे बच्चे हैं, उनका भी ध्यान रखना होता है। कैसे मैनेज करूं? (P4-0150)
- (वही साधिका) बहुत से थॉट्स आते हैं — कुछ बनना है, कुछ करना है — तो फैमिली का थॉट आता है कि इन्हें छोड़कर जाएंगे तो पीछे इनका ध्यान कौन रखेगा; बाहर निकल भी जाते हैं तो लगता है वहां ठीक नहीं चल रहा, और टारगेट रुक-रुक जाता है। मदर का केयर करना मेरी प्रायोरिटी है, पर फिर आवाज आती है कि आत्मा की भूख का क्या हुआ। जिम्मेदारी लेना चाहते हैं पर हैंड-ओवर नहीं की जा रही, और जो (परिवार का) शिप चला रहा है वो अच्छे से नहीं चला रहा — तो क्या किया जाए? (P5-0009)
- ध्यान में ध्यान का क्या मतलब? मंदबुद्धि को कैसे समझाएँ? (P5-0047)
- क्या हर इच्छा को जाँचना ही ध्यान है? कैसे पता करें हम ध्यान में हैं? (P5-0051)
- ध्यान में धारणा किसकी? ईमानदारी विस्तृत में क्या है? (P5-0120)
- युवा उम्र में ध्यान जाना चाहिए? पैसे के साथ साधना कैसे? आलस साधना में कैसे रुकावट? (P5-0124)
- ध्यान में ध्यान कैसे? रात को ध्यान? झटके लगते हैं? ईश्वर की परिभाषा? (P5-0130)
- आत्मिक कल्याण चाहने वालों को विशेष क्या ध्यान देना चाहिए? (P5-0132)
- प्रपंच में रहकर प्रत्यक्ष ज्ञान/आत्मज्ञान कैसे? पुस्तक है? नाम-दम लिया पर आपका सत्संग अच्छा — रास्ता? सांस/मंत्र ही ध्यान? (P5-0143)
- ध्यान के लिए शरीर की पवित्रता जरूरी है? (P5-0151)
- ध्यान में सूक्ष्म शरीर बाहर निकलता है, दिल की धड़कन बढ़ती है, ऊंचाई से डर लगता है, आंखें खुल जाती हैं — मिटने का भय है। क्या करें? (P5-0156)
- ध्यान-शाकाहारी की बात पर लोग मजाक बनाएं तो क्या उन्हें त्याग दें? (P5-0171)
- आंतरिक शक्ति घर में ध्यान से बढ़ाई जा सकती है? कुंडलिनी कैसे दिखती है? (P5-0174)
- ध्यान लगने लगे तो क्या-क्या बदलाव नजर आते हैं? (P5-0199)
- घंटों ध्यान बैठने से आचरण बदलेगा? कर्म तो कर ही रहे हैं। (P6-0023)
- जीवात्मा का नाम इसलिए पड़ गया कि आत्मा ने जीव शरीर ग्रहण किया। कोई हृदय चक्र को आत्मा का निवास कहता है, कोई और जगह ध्यान करवाता है, कोई कपाल में बताता है। एक योगी का प्रैक्टिकल यह था कि आत्मा का शरीर में निवास स्थान नहीं है, सूरज की किरण की तरह केवल एक किरण पड़ रही है और शरीर क्रिया कर रहा है, आत्मा शरीर में है ही नहीं। इतनी बातें सुनकर उथल पुथल मचती है। असल में आत्मा कहां है? जब नाम ही नहीं दिया जा सकता तो मान लो क्यों कहा जाता है? मानना और जानना में मैं किस प्रक्रिया में हूं? मानने की अवधि कितनी है, और मांग के हिसाब से समय कितना लगता है? (P6-0041)
- स्वप्न, जागृत और सुषुप्ति ये तीन अवस्थाएं हैं। जो आत्मज्ञानी पुरुष हैं, क्या उन्हें भी वैसे ही स्वप्न आते हैं जैसे हमें दिन भर की क्रियाओं से, या पहले कभी हुई बातों से आते हैं? किसी और के सानिध्य में सुना है कि स्वप्न आते ही नहीं। यहां आने से पहले मैं किसी और से जुड़ा था, अभी भी जुड़ा हूं, और उनका कहना यही है। तुलना करता घूम रहा हूं। ध्यान और साधना का मार्ग वे बताते हैं, विचार जहां फंसे हैं वहां टीवी स्क्रीन की तरह चित्र चलता है। इस प्रश्न का उत्तर चाहिए, नहीं तो भीतर प्रश्नचिह्न बना रहता है। (P6-0045)
- आपने एक संकल्प कहा है कि निर्विकार होना है। निर्विकार कैसे होऊंगा, और विकार बन कैसे रहे हैं? बेईमानी छोड़ दूं तो आगे बनना बंद होगा, पर पिछला जो जमा किया है वह कैसे खटेगा? बेईमानी से श्राप मिला, तो सत्कर्म और जरूरतमंद की सेवा से क्या मिलेगा? प्रतिदिन जो विकार हो रहे हैं, उन पर हर क्षण कैसे ध्यान रखूं? प्रश्न पर प्रश्न मन उठाता रहता है, उन्हें ज्यादा नहीं उठने देना है या नहीं? (P6-0048)
- प्रश्न पूछते पूछते जब उत्तर मिल चुके तो ध्यान एक पत्ते पर चला गया। हाथ पत्ता छूने लगा। लगा कि प्रकृति ने यह उदाहरण खुद खड़ा कर दिया, नहीं तो यह समझ पैदा ही नहीं होती। उस समय विचार नहीं उठा, आंख ने देखा और हाथ उधर चला गया। प्रतिदिन खाना खाते समय भी हाथ का निवाला अपने आप मुंह तक चला जाता है, शरीर से अपने आप। क्या बिना विचार के यह क्रिया हो जाती है? (P6-0052)
- जो परिवार छोड़कर केवल ध्यान लगाता है, आकाशवृत्ति से रहता है, धन नहीं जोड़ता, उसे गाली और मार भी मिलती है। उसका क्या होता है? कृष्ण ने अर्जुन को आत्मभाव में टिकने के लिए भी कहा था, तो कर्म का सिद्धांत क्यों बताया? अर्जुन आत्म तत्व में कैसे स्थिर हुए? और क्या मैं शुद्ध आत्मा हूं कहना भी एक विधि है, जिससे कल्याण नहीं होता? (P6-0077)
- हमें अपनी जमीन के लिए लड़ना चाहिए या नहीं लड़ना चाहिए? क्योंकि आत्मकल्याण करना है। नहीं लड़े तो ध्यान उसी जमीन में ही रहेगा। (P6-0088)
- नागपुर से आई मां पूछती हैं, घर का कमरा छोटा है, सब लोग उसी में रहते हैं, नीचे बैठने की जगह नहीं। क्या पलंग पर बैठकर ध्यान कर सकती हूं? घर पर मौन भी नहीं हो पाता। (P6-0102)
- ध्यान में जब हम आंख बंद करते हैं, तो अंधेरा हो जाता है। उस समय क्या होगा? जहां हम ध्यान करें, वहां क्या रखना चाहिए? (P6-0146)
- रिश्तेदार हमेशा हमारे परिवार की बर्बादी की सोचते हैं। मैं तेईस साल का हूँ। उनकी नकारात्मकता से कैसे बचकर रहूँ? क्या योग और ध्यान काफी है? (P6-0159)
- शिवाजी पूछते हैं, जीवन में सफल होने के लिए ध्यान करें या नाम स्मरण? (P6-0170)
- प्रियंका गुप्ता पूछती हैं, जब आपने ज्ञान पाया तो क्या ध्यान और साधना की थी? कारोबार में सौ प्रतिशत झूठ बोलना पड़ता है, सत्कर्म नहीं हो पाता। क्या ध्यान परमात्मा को पाने का मार्ग नहीं है? (P6-0188)
- आदित्य डेनमार्क से पूछते हैं, ध्यान करने के लिए सिद्धासन में बैठना जरूरी है क्या? काफी कमर दर्द है, और लंबे समय तक बैठना नहीं होता। (P6-0197)
- किस साधना से आत्मसाक्षात्कार हुआ? क्या ध्यान किया है? बताइए। गुरु से ज्ञान लो और आगे बढ़ो, इसका मतलब क्या है? (P7-0003)
- आप ध्यान को छोड़ने के लिए कहते हो। बिना किसी विधि के कैसे आगे बढ़ सकते हैं? (P7-0010)
- नाम जप एक प्रकार का ध्यान ही है। इसे क्यों करना चाहिए? (P7-0048)
- निवेदन है। ध्यान में आपका प्रवचन सरस होता है, फिर यहां से वहां अचानक पैर पड़ता है, खड़ा नहीं रहा जाता। जब ध्यान में बैठते हैं, तो क्या श्वास के साथ ओम की ध्वनि करनी चाहिए? क्या मानसिक ओम जाप करना चाहिए? और ये पैर पड़ना किस कारण हो रहा है, पहले नहीं पड़ता था? (P7-0090)
- कभी-कभी ध्यान होता है, तो कोई कहती है कि आंख खोल लेती हूं तो अपनी ऊर्जा बाहर निकल जाती है। क्या ध्यान में आंख खुलने से ऊर्जा चली जाती है? (P7-0155)
- मैं इस कुटिया को अपनी मानता हूं। छोटी-छोटी बिगड़ने वाली चीजें, जो औरों को नहीं दिखतीं, उन पर ध्यान रखता हूं। पहले लगता था लोग मेरे तरीके से नहीं कर रहे, गलत लगता था। अब समझ आया कि सबकी समझ अपनी है। खाना बनाने में मन लगता है। सारा छोड़ दूं तो कमजोरी आ जाएगी, इसलिए अपना काम भी करता रहता हूं। बोलचाल में गलती हो जाती है। यह कुटिया किसकी है, और यहां कैसे रहें? (P7-0161)
- ध्यान में क्या रखना चाहिए? हम बैठे-बैठे सोचते नहीं। आत्मिक चिंतन किसे कहें? (P7-0185)
- आपका सत्संग सुनता हूं, तो आत्मज्ञान का अनुभव होने लगा है। आपके बताए अनुसार ध्यान में कुछ समय बैठने के बाद अलग-अलग क्रियाएं धीरे-धीरे खुलने लगती हैं। तब क्या करें? अगर बर्दाश्त नहीं हो रहा, तो? (P7-0188)
- ध्यान करता हूं। मेरा आज्ञा चक्र पकड़ जाता है। क्या करूं? (P8-0020)
- बैठे-बैठे आत्मचिंतन करने पर ऐसी स्थिति भी होती है कि खुद का ध्यान ही नहीं कर पाते। क्या करें? (P8-0024)
- शिष्य का गुरु के प्रति जितना समर्पण होता है, क्या गुरु का समय और ध्यान भी उसके प्रति उतना अधिक हो जाता है? ऐसे में अन्य साधक, जो गुरु के प्रति कम लगाव रखते हैं, उनके मन में ऐसी भावना पैदा हो जाती है। (P8-0091)
- आप कौन सा ध्यान करते हो? (P8-0117)
- आप लोग कौन सा ध्यान करते हो? बैठकर जो किया जाता है, क्या वही ध्यान है? (P8-0124)
- ध्यान करने का मन होता है, पर एक अजीब सा भय बना रहता है, लगता है कोई है, सर्प है। क्या करें? (P8-0156)
- ध्यान करने का मन होता है। एक अजीब भाव रहता है। कहते हैं करो, लेकिन चुनाव करते समय कर्ता फिर खड़ा हो जाता है। कर्ता का भाव कैसे न रहे? (P8-0165)
- ध्यान करता हूं, लेकिन ध्यान में जी नहीं लगता। पूजा-भक्ति में भी जी नहीं लगता। अच्छा कर्म करने में जी लगता है। तो इससे क्या आत्मज्ञान हो जाएगा? (P8-0186)
- ध्यान में बहुत ताकत हो तो ध्यान में क्या करना चाहिए? कहते हैं गौतम बुद्ध ने ध्यान लगाया तो तर गए, हनुमान जी ने ध्यान लगाया तो तर गए। ध्यान में क्या होना चाहिए? (P8-0189)
- धारणा, ध्यान और समाधि। धारणा, ध्यान, समाधि, तुम और ब्रह्म। इसका क्या अर्थ है? आत्मज्ञान और ब्रह्मज्ञान में क्या फर्क है? (P8-0190)
- क्या ध्यान ही दृष्टा है? (P8-0196)
- क्या कोई व्यक्ति सदैव ध्यानमग्न हो सकता है? (P9-0002)
- गुरुदेव, गृहस्थ में रहते हुए साधना कैसे की जाए? ध्यान और साधना कैसे करें? (P9-0130)
- गुरु जी, मैं नेपाल से हूं। क्या मैं कुछ हफ्ते अपनी वैयक्तिक समस्या सुलझाने आपके सानिध्य में आकर गहन साधना और ध्यान में रह सकता हूं? (P9-0176)
- जिन गुरु ने आरंभ में ध्यान का मार्गदर्शन दिया था, उन्होंने कहा था कि न आत्मा का ध्यान करना है, न परमात्मा का ध्यान करना है। यह बात क्लियर नहीं हुई। ऋषिकेश, गंगोत्री, फिर कोरोना, वेदांत श्रवण के बीच साधना बिगड़ गई। पहले तीन-तीन घंटे एक आसन में बैठ लेता था, पद्मासन भी सिद्ध हो गया, फिर मन डिस्टर्ब हो गया। ना आत्मा का ध्यान, ना परमात्मा का ध्यान, इसका क्या अर्थ है? और आसन सिद्ध करने से क्या होता है? (P9-0180)
- साक्षी की स्थिति सदा नहीं रहती। कभी-कभी आती है, कभी नहीं। मन चाहता है सब ओर भागना। उसे बार-बार थामने से साधना में भी ऊब पैदा होती है। यह क्या है? कैसे छुटकारा हो? एक तरफ ध्यान नहीं हो पा रहा हूं। क्या करूं? (P10-0012)
- मुझे आप जैसा मेहनती बनना है। ध्यान इधर-उधर जाएगा। क्या मन एक समय सिर्फ एक काम कर सकता है? मन पांच इंद्रियों से जुड़ा है, इसलिए क्या धारणा भी एक साथ कई हो सकती है? (P10-0029)
- कुछ छोटे-छोटे प्रयोग बता दीजिए, जिससे ध्यान प्रकट हो जाए। (P10-0035)
- क्या आपके भरण-पोषण का ध्यान भगवान रखते हैं? (P10-0160)
- गुरु जी, मैं तीन साल से ध्यान करती हूं, परंतु फिर भी दुखी हूं। घर से निकल नहीं पाती। मैं इस दलदल से निकलना चाहती हूं। कृपया मार्गदर्शन करें। (P10-0179)
- गुरुदेव, मैं एक महीने से नियमित साधना और ध्यान कर रहा हूं। इस दौरान मेरी रीढ़ की हड्डी में बिजली जैसी गर्माहट और शरीर में चींटियां चलने का निरंतर अनुभव हो रहा है। कृपया मार्गदर्शन करें। (P10-0190)
- गुरु जी, आज्ञा चक्र जागृत होने की स्थिति में मुझे क्या सावधानी बरतनी चाहिए और किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए? (P10-0191)
- मैं अकेले में विचार देख रहा था, तो देखा कि मैं खुद ही गलत विचार कर रहा था। पता चलते ही मैंने नाम जप किया और ध्यान डायवर्ट हो गया। क्या यह नॉर्मल है? (P11-0132)
- सब कहते हैं ध्यान में जो विचार आएं उन्हें देखो, दृष्टा बनो — पर दृष्टा बना नहीं जा रहा। 15 साल से एक बात (चोट) है जो जा ही नहीं रही; सात समुंदर पार भागा, फिर भी पीछा नहीं छोड़ा। क्या करूं? (P11-0168)
- ध्यान से आनंद की ओर कैसे बढ़ूं? (P11-0199)
- ध्यान करते समय मन बोलता है कि यह सब करने से क्या फायदा? यह बात सुनकर भी हम ध्यान कैसे कर सकते हैं? (P12-0032)
- ध्यान करने और चिंतन करने में क्या अंतर है? क्या ध्यान करना लाभदायक नहीं है? (P12-0044)
- ध्यान में क्या अनुभव हुआ, वह याद नहीं रहता। (P12-0046)
- "ध्यान में ध्यान" का मतलब क्या होता है? (P12-0060)
- सत्कर्म-ईमानदारी करते हैं, आपके सत्संग सुनते हैं, ध्यान में बैठते हैं — तो क्या गुरु मंत्र जपना जरूरी है? (P12-0080)
- सेवा से समय मिलने पर अपने स्वरूप में ध्यान करना हो, तो शरीर में किस स्थान पर ध्यान करना चाहिए — हृदय, आज्ञा चक्र, सहस्रार आदि? (P12-0087)
- मैं ओशो की वीडियो सुनते-सुनते ध्यान मार्ग पर चल पड़ा और ध्यान करते-करते मुझे बहुत गहरा आनंद अनुभव हुआ। अब सबसे बड़ा कष्ट यह है कि वह आनंद मैं सबको बताना चाहता हूं, पर बता नहीं पा रहा — ताकि लोग जो आनंद नशे में खोज रहे हैं, वह योग में खोजें। मार्गदर्शन करें। (P12-0100)
- (एक साधक जो विपासना सेंटर भी जा चुके थे) गुरु जी, ध्यान को लगाया कैसे जाए, उसे कंटिन्यू कैसे रखा जाए? मैं दिमागी शांति के लिए ध्यान करना चाहता हूं। (P12-0143)
- आत्म-उत्थान के लिए हम और क्या कर सकते हैं? अपने अंदर ऐसा क्या बदलाव करूं कि मुझे उसकी एक झलक मिल जाए, या मैं ध्यान में प्रवेश कर पाऊं — मैंने अब तक बहुत प्रयास किए, पर ध्यान में प्रवेश ही नहीं होता। (P12-0151)
- मेरे अंदर एक आवाज आती है, सपने जैसी — ध्यान में कुछ बजता हुआ सुनाई देता है। (पहले जो ध्यान करता था, वो भी अब छोड़ दिया, अब बस बैठा रहता हूं; एक बार हेडफोन लगाया तब नोटिस हुआ कि कुछ बज रहा है।) इसका क्या करूं? (P12-0152)
- (गीता का हवाला देकर) गीता में तो भगवान ने अर्जुन को ध्यान करने की बात कही है — तो? (P12-0157)
- पहले मैं ध्यान यहां-वहां सब लगाता था। अब बस बैठा रहता हूं, तो पैर पूरा सुन्न हो जाता है, कान में गुंजन सुनाई देता है — ये अनुभव मैं देखता नहीं, पर होते हैं। इनका क्या? (P12-0159)
- योगी जी, मैं ध्यान में तरक्की करूं, कृपया आशीर्वाद दीजिए। (P13-0011)
- गुरुदेव, ध्यान में ध्यान कैसे करना है? जब से मैं यहां आया हूं और आपने मुझे बताया, तब से ध्यान में ध्यान हो नहीं पा रहा; पहले विधियां करता था, उनसे कोई लाभ नहीं मिला। (P13-0060)
- ध्यान की विधियां करने से झटके आने लगे, कान में झींगुर जैसी आवाज आती है, पीठ पर चींटी रेंगने जैसा लगता है, कंधे में कुछ रेंगता लगता है — यह सब क्या है, और इसका समाधान क्या है? (P13-0061)
- साक्षी ध्यान भी इसी को बोलते हैं? (P13-0062)
- कहते हैं ध्यान लगाओ, ध्यान लगाओ — ध्यान लगाएं कैसे? ध्यान क्या है? (P13-0063)
- (उड़ीसा से आए एक साधक) बाबा जी, हम कौन हैं, यह समझना है; और रोज अपने अस्तित्व की उस स्थिति में हमेशा कंटिन्यू रहना है और गहरे ध्यान में उतरना है। ध्यान क्या है, और किस तरह करना चाहिए? (P13-0067)
- गुरु जी, आप बोलते हैं कि ध्यान में ध्यान करते चलो — क्या छोड़ना है? (P13-0109)
- क्या बिना ध्यान के हम खुद से मिल सकते हैं? (P13-0127)
- गुरु जी, क्रिया योग ध्यान के बारे में मार्गदर्शन कीजिए। (P14-0027)
- गुरु जी, जैसे-जैसे ऊंचाई पर चढ़ते हैं गिरने का खतरा बढ़ता है। हम गिरें ना, इसके लिए क्या ध्यान रखें? (P14-0036)
- गुरु जी, ध्यान में बैठे हुए क्या परमात्मा की इच्छा भी खत्म करनी है? परमात्मा का ध्यान कैसे करें? (P14-0038)
- गुरु जी, कुछ गुरु कहते हैं ध्यान में बैठो, अंदर प्रकाश दिखेगा या कुछ सुनाई देगा, उसमें ध्यान लगाओ, फिर बुराइयां छोड़ दो तो निर्विकार हो जाओगे — क्या ऐसा होता है? (P14-0040)
- गुरु जी, ध्यान में निर्विचार होना — क्या ये सही है? कभी बैठते हैं तो कोई विचार नहीं, बड़ा गजब का आनंद होता है, उठने का भी मन नहीं करता। (P14-0042)
- गुरु जी, ध्यान क्या चीज है? क्या ध्यान की कोई विशेष विधि है, कुछ देर बैठना है? (P14-0074)
- गुरु जी, ध्यान 24 घंटे का है, पर बुद्ध जैसे लोगों ने तो कुछ घंटे बैठ कर ध्यान किया, तो उपलब्धि हुई? (P14-0075)
- गुरु जी, ध्यान कौन करता है — मन, शरीर या जीव? (P14-0088)
- ध्यान में ब्रह्मचर्य का क्या महत्व है? (P14-0160)
- अष्टावक्र जी ने जनक जी से कहा कि तू संग-रहित है, निष्क्रिय है, स्वयं-प्रकाशित है, सभी दोषों से परे है — ऐसा ध्यान करता हुआ जो समाधिस्थ हो रहा है, यही तेरे बंधन का कारण है। कृपया समझाइए। (P14-0169)
- गुरु जी, आप दिन में कितने समय ध्यान करते हैं? (P14-0175)
- ध्यान शुरू करते ही ऐसा लगता है जैसे धरती घूमने लगी है, ऐसा क्यों? (P15-0006)
- मुझे आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाते समय घबराहट होने लगी, इसलिए मैंने ध्यान करना बंद कर दिया है। (P15-0013)
- कैसे पता करें कि ध्यान सही हो रहा है? (P15-0014)
- कंफर्ट ज़ोन में रहकर क्या ध्यान हो सकता है — स्थान सुरक्षित भी रहे, भंग भी ना हो और ध्यान भी हो जाए? (P15-0030)
- ध्यान में मौत का डर लगता है, छूटने का भय बना रहता है — मार्गदर्शन करें। (P15-0050)
- ध्यान कैसे करें? (P15-0058)
- ध्यान में कंपन, हाथ-पाँव में झटके या वाइब्रेशन होते हैं — कृपया स्पष्ट करें। (P15-0088)
- क्या ज्ञान पाने के बाद भी ध्यान मार्ग जरूरी है? (P15-0105)
- आप कहते हैं ज्ञान होने के बाद कोई ध्यान करने की जरूरत नहीं, पर शिव जी तो हमेशा ध्यान में ही रहते हैं? (P15-0111)
- गुरु जी, बहुत कोशिश करने के बाद भी ध्यान लगाता हूं तो आंखें बंद करने पर अंधेरा ही दिखता है। ध्यान की सही विधि बताइए, कैसे ध्यान सही होगा? (P15-0182)
- ध्यान की ऊर्जा को कैसे बढ़ाएं? (P15-0183)
- गुरु जी, आत्म ध्यान और परम ध्यान में क्या अंतर है? (P15-0184)
- ना चाहते हुए भी विचार में गड़बड़ होती रहती है। जो चीज आज तक सीखी है उसे छोड़ना चाहते हैं, पर बार-बार आदत से वही आ जाती है — जैसे स्वास पर नाम का सुमिरन मिला था, अब ध्यान में बैठता हूं तो वह अपने आप चालू हो जाता है। यह छूटेगा कैसे? (P15-0190)
- गुरु जी, मेरा मन काम में नहीं लगता — सिलाई करने में, खाना बनाने में। मंत्र जाप करती हूं, ध्यान करती हूं; जिन गुरु जी ने मंत्र दिया उन्होंने कहा था सब ठीक होगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। क्या करूं? (P16-0012)
- गुरु जी, ध्यान क्या है? (P16-0095)
- बीड़ी-चिलम पीने से ध्यान एक जगह एकत्रित हो जाता है; उसके इंतजार में यह एक सहारा है। बीड़ी छोड़नी जरूरी है क्या? (P16-0140)
- (लाइव) ध्यान करते हैं तो माथे पर कुछ आता है; क्या आता है, मालूम नहीं पड़ता। (P16-0164)
- (लाइव) कुंडलिनी शक्ति जागृत करने के लिए चक्र-ध्यान कैसे करें? आत्मज्ञान की स्थिति कहां पर बनती है? कहा गया है कि आज्ञा चक्र के बाद जब सहस्रार खुलता है तब आत्मज्ञान होता है। (P16-0172)
- गुरु जी, ध्यान करने पर मैं शून्य में नहीं पहुंच पाता। जागने पर विचार कम आते हैं, मगर ध्यान करने बैठूं तो एक विचार जाता है तो दूसरा आ जाता है — ध्यान में विचारहीन कैसे हों? (P17-0031)
- गुरु जी, जो ध्यान मार्ग से साधना करते हैं, उनको पूर्व पापों को काटने के लिए क्या नाम या मंत्र जाप करना आवश्यक है? (P17-0033)
- गुरु जी, गृहस्थ जीवन में भोजन कैसा रहे? गलत खाने की आदत कैसे छोड़ें? (खाने में बहुत ध्यान जाता है।) (P17-0038)
- गुरु जी, ध्यान कैसे करें? (P17-0040)
- गुरु जी, मैंने एक बार ध्यान में ओम की साउंड और वाइब्रेशन सुना, अब दोबारा नहीं सुन पाता — मार्गदर्शन करें। (P17-0045)
- गुरु जी, आप जो ध्यान की प्रक्रिया अपने आश्रम में कराते हैं, उसे घर पर कैसे कर सकते हैं? कृपया बताने की कृपा करें। (P17-0048)
- गुरु जी, अब तक माला-जप, ध्यान सब किया, ऋषिकेश, बनारस, अयोध्या, द्वारका, उज्जैन सब तीर्थ और आश्रम घूमे, पर मन नहीं लगा। अब क्या करना है? (P17-0110)
- गुरु जी, यहां आकर जो आनंद मिला है, वह छिन ना जाए — जहां भी रहें, किस बात का ध्यान रखें? (P17-0111)
- गुरु जी, योग किसे कहते हैं? ज्ञान, भक्ति, योग, ध्यान — किस मार्ग से जाएं? (P17-0117)
- गुरु जी, भ्रमण में भोजन और ठहरने के बारे में क्या ध्यान रखना चाहिए? (P17-0156)
- गुरु जी, आज कई जगह फीस भरकर 10 दिन में आत्मज्ञान या ध्यान कराने की बात होती है — इसे कैसे देखें? (P18-0005)
- गुरु जी, भक्ति, ध्यान, योग और ज्ञान — इनमें से किस मार्ग से जाएं? (P18-0025)
- गुरु जी, मैं ध्यान हटाकर सिर्फ नाम पर केंद्रित होकर निरंतर नाम जप कर रहा हूं और सोच को रोक रहा हूं — क्या यह सही है? इसका क्या परिणाम होगा, या यह भटकाव है? (P18-0046)
- गुरु जी, ध्यान विधि करने से काम वासना बहुत बढ़ गई है — इसे नियंत्रित कैसे करें? (P18-0073)
- गुरु जी, मैं अपना ध्यान कैसे लगाऊं और कैसे पहचानूं कि मैं कौन हूं? (P18-0086)
- गुरु जी, मन भटकता रहता है — क्या कल्पना करना और फिर उस कल्पना को बार-बार देखकर सही निर्णय लेना ही ध्यान है? (P18-0087)
- गुरु जी, ध्यान में ध्यान करते हुए क्या करना है, परम ध्यान में क्या करना है, और साधना में परीक्षा कब होती है? (P18-0088)
- गुरु जी, ध्यान करते वक्त मन में परेशानी और घबराहट होती है — मन इतने विचार क्यों देता है, और स्थिरता कैसे बने? (P18-0094)
- गुरु जी, आप कहते हैं जो पाया है वह छोड़ दो — पर गृहस्थ जीवन में तो सब चाहिए, फिर क्या छोड़ें? और "चाहिए" वाले ध्यान से मुक्त हो गए तो दैनिक कार्य कैसे करेंगे? (P18-0095)
- गुरु जी, मुझे पहले आत्मज्ञान जैसा अनुभव होता था — प्रश्न उठते ही अंदर से उत्तर मिल जाता था — लेकिन यहां (कुटिया) आने के बाद वह अनुभव खत्म हो गया; ध्यान में भी नहीं मिलता। वह कहां चला गया? (P18-0120)
- गुरु जी, अगर हम खान-पान पर ध्यान न दें और सिर्फ लोगों से व्यवहार पर ध्यान दें तो क्या मोक्ष मिल सकता है? (P18-0161)
- गुरु जी, कभी-कभी ध्यान में ऐसी चीज की कल्पना आती है जिसे हमने कभी देखा ही नहीं — वह तो स्टोर नहीं थी, फिर कैसे आई? (P18-0173)
- गुरु जी, ध्यान में कान दबाकर या बिना कानों के जो अंदर की धुन (अनहद) सुनाई देती है, वह क्या है? (P19-0004)
- गुरु जी, क्या कबीर जी ने कभी किसी को ध्यान करवाया? आज उनके नाम पर ध्यान क्यों करवाया जाता है? (P19-0008)
- गुरु जी, मैं तो मानता हूं कि बाजार में बैठकर भी ध्यान हो सकता है; फिर सत्संग में कोई उठे तो क्या फर्क पड़ता है? (P19-0109)
- गुरु जी, आप साधकों से घंटों ध्यान या कोई साधना क्यों नहीं करवाते? क्या सिर्फ सत्संग से आत्मज्ञान हो सकता है? (P19-0150)
- गुरु जी, ध्यान में ध्यान करते हुए जब अच्छाई-बुराई कुछ न मिले, तो ध्यान कहां केंद्रित करें? (P19-0177)
- गुरु जी, ध्यान में मन प्रभु की तरफ नहीं लगता, दैनिक कार्यों की तरफ चला जाता है; घर-परिवार में रहते हुए गहरा ध्यान कैसे करें? (P19-0178)
- गुरु जी, ध्यान में शिव जी और माता पार्वती की प्रतिमा दिखती है — इसे क्या समझूं? (P19-0179)
- गुरु जी, ध्यान करने के बाद मैं पहले जैसा ही हो जाता हूं और न करूं तो दुख होता है — क्या करूं? (P19-0189)
- गुरु जी, कुटिया या आश्रम में रहते हुए साधक को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? (P19-0200)
- गुरु जी, किसी से वाद-विवाद हो जाए तो ध्यान बार-बार उसी पर जाता है — वहां से कैसे हटाएं? (P20-0015)
- गुरु जी, मैंने निश्चय कर लिया है कि मुझे छूटना है — आगे क्या करूं? ध्यान खुली आंखों से करूं या बंद? (P20-0031)
- गुरु जी, बहुत गुरु कहते हैं भीतर जाओ — भीतर जाने का असली अर्थ क्या है? ध्यान शरीर के भीतर लगाना है या बाहर? (P20-0044)
- गुरु जी, हंसने, रोने, गुस्से में हॉर्मोन रिलीज होते हैं — ध्यान में बिना कुछ किए जो गहरा नशा-सा, सिर्फ "हूं" का एहसास होता है, क्या वह भी हॉर्मोन या माइंड का गेम है? (P20-0154)
- गुरु जी, आपका "ध्यान तो हर समय घट रहा है" वाला प्रवचन सुनकर आया हूं, बातें समझ में आ रही हैं — अब आगे क्या करना है? (P20-0174)
- गुरु जी, थोड़ा ध्यान करवाने का समय मिल सकता है? (P21-0051)
- गुरु जी, जब ईश्वर एक है तो सभी महापुरुषों का ज्ञान भिन्न क्यों है — जैसे नाम दान, ब्रह्म ज्ञान, आत्म ज्ञान और सांसों का ध्यान? (P21-0073)
- गुरु जी, आपने कहा था ध्यान करना नहीं है, ध्यान से मुक्त होना है — पर जो चीज पूरी नहीं हुई, ध्यान तो बार-बार उधर ही जाएगा ना? (P21-0107)
- गुरु जी, मैं समझा हूं कि बीज में वृक्ष की तरह मेरा कल्याण भी ईमानदारी (100%), सत्कर्म और सत्संग से शुरू होगा, फिर ध्यान और समाधि घटित होंगे — तो धारणा-ध्यान-समाधि कैसे होती है, और सत्य और शिव की स्थिति अलग है या एक? (P21-0108)
- गुरु जी, भक्ति, ज्ञान और ध्यान — इन तीनों में किसे महत्व देना चाहिए? इनमें क्या डिफरेंस है? (P21-0128)
- महात्मा जी, मैं जब भी परमात्मा का नाम जप करता हूं या ध्यान में होता हूं तो मुझे अपने गुरु के प्रति बुरे विचार आते हैं; ऐसा बार-बार होता है। ऐसा क्यों होता है? मैं इससे मुक्त होना चाहता हूं। (P22-0021)
- गुरु जी, धारणा, ध्यान, समाधि क्या है? (P22-0051)
- गुरु जी, यहां से घर जाने के बाद हमारी दिनचर्या कैसी होनी चाहिए — कम खाना, भोजन, ध्यान, घर पे क्या करना है? थोड़ा इस पर भी प्रकाश डालिए। (P22-0096)
- गुरु जी, अल्टीमेट तो ध्यान से भी मुक्त होना है, लेकिन हर काम के लिए ध्यान जरूरी है — तो यह कैसे होगा? (P22-0117)
- गुरु जी, रात को ऑफिस से आए तो ऑटो वाला भी यहां तक आने में डर रहा था कि वापस कैसे जाएगा; हमें भी उसके प्रति अजीब लगा, हमने कहा "भैया, ध्यान से जाना" — क्या इसे भी राग कहेंगे? (P22-0161)
- गुरु जी, ध्यान के बारे में मेरा प्रश्न है — जैसे गौतम बुद्ध ने ध्यान की विधि की और उस विधि से तर गए; और बैठते हैं तो विचार ही चलते रहते हैं। (P22-0165)
- गुरु जी, जब बात शुरू हो रही थी तो मुझे लगा था कि आप साधना आदि का पूरी तरह निषेध कर रहे हैं, लेकिन अब लग रहा है कि निषेध सिर्फ इसलिए था कि अपरिपक्व व्यक्ति वैसा ना करे। दूसरा, आपने ध्यान का उदाहरण लेकर कहा था कि ध्यान करने वाला और जिसका ध्यान किया जा रहा है, वह बाहरी चीज हो गई; लेकिन वाल्मीकि जी 'मरा मरा' के रूप में ध्यान तो कर ही रहे थे — तो सहायता के लिए उसका उपयोग किया जा सकता है? (P23-0005)
- गुरु जी, एकांत में खान-पान का भी विशेष ध्यान देना पड़ता है क्या? क्या पेट भर भोजन नहीं करना चाहिए? (P23-0050)
- गुरु जी, क्या सिमरन और ध्यान एक हैं? हम जिस गुरु की शरण में हैं उन्होंने ध्यान करने से मना किया है, केवल सिमरन बताया है — क्या यह सही है? (P23-0070)
- गुरु जी, एकांत में शांति से अपनी चटाई लेकर बैठते हैं; अभी तक तो हम ध्यान करते थे — अब ध्यान नहीं करना है, तो अब क्या करें? केवल चुपचाप बैठें? अपने आप में ही आनंद है, तो अपने आप को कैसे सोचें? (P23-0086)
- गुरु जी, जैसे आंख बंद करके बैठते हैं, तो क्या इसको ध्यान नहीं बोला जा सकता? शुरुआती दौर में लोग मूर्ति का या मंत्र का सहारा लेते हैं, लेकिन एक स्थिति होती है जब किसी का सहारा नहीं लिया जाता, अपने आप में रहना होता है — उसको ध्यान बोलना ठीक नहीं रहेगा? (P23-0117)
- गुरु जी, हमें आत्मज्ञान के जो रास्ते पता थे — ध्यान, नाम जाप और मंत्र जाप — आपने उन्हें गलत बता दिया, इससे प्रॉब्लम और बड़ी हो गई है, कोई रास्ता नहीं बचा। क्या अब परमात्मा को खोजना छोड़ दूं? (P23-0173)
- गुरु जी, जनता की सेवा के लिए तो मैं आधी रात को भी एक पांव पर खड़ा हूं — सेवा करते हुए किस बात का ध्यान रखूं? (P24-0019)
- गुरु जी, क्या अपने आप में बैठना ध्यान नहीं है? (P24-0026)
- गुरु जी, ध्यान और आत्म-चिंतन में क्या फर्क है? (P24-0027)
- गुरुदेव, ध्यान कितनी देर करना चाहिए? (P24-0037)
- गुरुदेव, ध्यान में सांसों पर ध्यान करते हैं, बोलते हैं इसी से मुक्ति मिलेगी — गौतम बुद्ध को भी इसी से मिली थी। क्या ये सही है? (P24-0059)
- गुरु जी, आपने ध्यान के बारे में इतना अच्छा समझाया है। अब मैं पहले की तरह घंटों नहीं बैठती, बस अपने में रहती हूं — क्या यही ध्यान है? (P24-0106)
- गुरु जी, मैं ईमानदारी, सत्कर्म, प्रार्थना कर रहा हूं, रोज खुद को देख रहा हूं। पर अभी भी मेरे अंदर डर है — आंख बंद करके किसी स्थिति को देखता हूं तो भय आता है, ध्यान में अंधेरा दिखे तो भी भयभीत हो जाता हूं। इस भय से कैसे निकलें? (P24-0129)
- गुरु जी, आपने बताया कि लगातार ध्यान रखना है कि ये मेरा टारगेट है। बहिर्मुख में बार-बार अभ्यास से मुझमें परफेक्शन आई, वहां मैंने समय, मेहनत, रातों की नींद दी। तो अब मुझे बाहर का सारा अटैचमेंट, हर चीज छोड़ के अंतर्मुखी हो जाना है — क्या पड़े रहने का मतलब अपने अंदर ही रहना और सारी चीजें छोड़ देना है? (P24-0188)
- गुरु जी, शरीर तो साधन मात्र है — तो इसे कौन चलाता है? हम ध्यान में बैठने जाते हैं तो कौन बैठा हुआ है? (P25-0078)
- गुरु जी, खराब कर्म करेंगे तो ध्यान लगेगा ही नहीं ना? बेईमानी में ध्यान नहीं लगता? (P25-0114)
- गुरु जी, तो खाते वक्त क्या ध्यान दें — स्वाद आ रहा है कि नहीं आ रहा? (P25-0119)
- महाराज जी, भगवान का एक चित ध्यान का अभ्यास कैसे करें? कृपया मार्गदर्शन करें। (P26-0002)
- गुरु जी, ध्यान कैसे लगाएं? बताइए। (P26-0062)
- गुरु जी, प्राणायाम, ध्यान, जाप करना चाहिए या नहीं? (P26-0065)
- गुरु जी, जब हम 'कुछ नहीं' का ध्यान करते हैं, तब एक बिंदु-सा आता है जो शांत नहीं होने देता। उसके आगे कैसे जाएं? (P26-0089)
- गुरु जी, ध्यान जरूरी है क्या — आत्मज्ञान के पहले या बाद? या चिंतन ही काफी है? (P26-0103)
- गुरु जी, ध्यान लगता नहीं, क्या करें? (P26-0115)