आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

गुरु और शिष्य — योगी गुरु जी के प्रश्नोत्तर

इस पृष्ठ पर “गुरु और शिष्य” विषय से जुड़े 178 प्रश्न हैं, जो जिज्ञासुओं ने सत्संग में योगी गुरु जी से पूछे। किसी प्रश्न पर क्लिक करके योगी गुरु जी का पूरा उत्तर उनके अपने शब्दों में पढ़ें, वीडियो के साथ।

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  1. गुरु जी, दीक्षा क्या है? (P1-0040)
  2. योगी जी, हमारी गाड़ी तीन दिन की बारिश से दलदल में फंस गई थी; फिर ट्रैक्टर ने उसे खींचकर निकाला। तो मेरा प्रश्न है — जहां हम कमजोर होते हैं वहां ताकतवर की जरूरत पड़ती है। आध्यात्मिक मार्ग में मुझे पावरफुल गुरु की जरूरत है, यह कैसे जानूं? बहुत लोग गुरु का टैग लगाए घूम रहे हैं, और हमारे प्रश्न भी अक्सर दिखावे के, किसी से सुने हुए होते हैं। मैं अपने आप को कैसे जांचूं कि मेरी अपनी ताकत खत्म हो गई है और अब मुझे ज्यादा ताकतवर की जरूरत है? (P1-0195)
  3. (गाड़ी के उदाहरण के संदर्भ में) गृहस्थी में या संसार में रहते हुए मैं कैसे महसूस करूं कि मैं फंसा हूं और मुझे गुरु की मदद चाहिए? (P1-0196)
  4. महाराज जी, क्या गुरु के नाम पर समर्पण से ऊर्जा मिलती है? (P2-0040)
  5. गुरु जी, प्रणाम। गुरु की सेवा करते हुए नाम जप नहीं हो पाता; उस स्थिति में दोनों का फल एक ही है या फर्क है? (P2-0148)
  6. गृहस्थ में काम-धंधा भी देखना होता है; आजकल किताबें-पत्रिकाएं-सोशल मीडिया में नकली-असली का भ्रम बहुत है। प्रयाग में नागा साधु पैसे मांगते देखे, आईटीन बाबा आदि — फक्कड़-दिगंबर पहचान नहीं आती। गुरु की खोज और शास्त्र कैसे चुनूं कि वैराग्य धूमिल न हो, कोई बेवकूफ न बना दे, और नब्बे साल घूमते रहकर भी न पहुंचूं जैसी हालत न हो? गृहस्थ में वैराग्य की प्रचंडता कैसे बनी रहे? (P3-0003)
  7. गुरु हजारों किलोमीटर दूर हो तो कछुए की तरह मानसिक सेता है — शिष्य भाव कब? गुरु उपस्थिति कैसे फील करें? (P3-0018)
  8. साधक गुरु के प्रेम-ज्ञान से भरकर कुछ अर्पण करना चाहे — कंबल आदि वस्तु या भाव — तो गुरु को क्या दे कि वह भाव पूजा बन जाए? व्यक्तिगत गुरु को क्या चाहिए? (P3-0035)
  9. गुरु मार्ग बताए — क्या गुरु हमें पहुंचा भी देगा? उपलब्धि गुरु के हाथ में? (P3-0039)
  10. गुरुदेव की कृपा / 'कृपा मत करना' — गुरु से प्रार्थना कैसे? कृपा और दाता में अंतर? (P3-0058)
  11. अदृश्य/पुराने गुरु की फोटो-मूर्ति से पूजा — क्या काफ़ी? जीवंत गुरु क्यों चाहिए? (P3-0063)
  12. अध्यात्म मार्ग पर सिर्फ अपना देखना — कुतर्क/दूसरों में फंसना कैसे छोड़ें? दूर बैठे साधक गुरु से कैसे जुड़े? (P3-0076)
  13. (लाइव) क्या गुरु के शरीर त्यागने के बाद भी गुरु के वचनों पर चलने से नया साधक आत्मज्ञान को प्राप्त हो सकता है? (P3-0147)
  14. (कुटिया में साधक) जैसे आप हमारे साथ बोलते हो, वैसे प्रभु या भगवान — अगर कोई होगा — तो मुझसे ऐसे ही बोलेगा ना, तभी तो होगा? क्या वह देहधारी बनकर मुझसे बोलेगा? वैसे तो हर प्राणी में, अलग-अलग रूप में वह हमारी मदद करता ही है, किसी ना किसी के रूप में मिल जाता है — जानवर में, गुरु में, मां में। (P3-0180)
  15. (कुटिया में साधक) आप तो भगवान के पद को प्राप्त हुए; आपने वीडियो में बताया कि उस स्थिति में आने के लिए आपने कितनी मेहनत की। बाकी सबने वेदों के पठन आदि से ज्ञान लिया, पर आपके यहां तो खाली प्रत्यक्ष ज्ञान का मूल — ईमानदारी, सत्कर्म और सत्संग — है। क्या इतने से हो जाएगा, और जीवन में गुरु की कितनी जरूरत है? (P3-0181)
  16. (लाइव) प्रणाम गुरुदेव, मेरा नाम योगेश कुमार है। बहुत पहले आपसे ऑनलाइन जुड़ा था, आपका पुराना शिष्य हूं। पिछले दो साल से आपके पास आने का सोच रहा हूं, पर कभी पहुंच नहीं पा रहा; बहुत दुखी हूं, अब अपराध (बोध) बहुत लग रहा है। (P4-0016)
  17. (कुटिया में सन्यासी महाराज जी के संदर्भ में) क्या गुरु से दूर रहकर भी गुरु की कृपा मिल सकती है? पास रहने और दूर रहने में क्या अंतर है? (P4-0077)
  18. (वही साधिका) अब हमें पता कैसे चलेगा कि हम शिष्य हैं कि नहीं? (P4-0158)
  19. (वही साधिका) आपने कहा कि नियमों में रहकर शिष्यत्व की पात्रता अपने आप आ जाती है, फिर गुरु परीक्षा लेता है। जैसे बाबूलाल भाई — वे सेवा में इतने लगे रहते हैं कि साधना में बैठ नहीं पाते, और आपने कहा था कि उन पर विशेष कृपा है, वे इसी ढंग से तर जाएंगे। पहले गुरु 12-12 साल रखते थे; अब तो आदमी की उम्र भी उतनी नहीं। तो क्या यह 12 साल का समय जरूरी है? (P4-0162)
  20. (कुटिया में साधिका ने बुल्ले शाह की कहानी सुनाई — गुरु के आदेश से शादी में गया, गुरु भाई से बात नहीं की, गुरु ने आश्रम में आने से मना कर दिया, और 12 साल बाद किन्नर बनकर नाचते हुए गुरु को रिझाया।) बुल्ले शाह की गलती तो बस इतनी थी कि बात नहीं की — फिर गुरु को उसे वापस अपनाने में 12 साल क्यों लगे? (P4-0163)
  21. (वही साधिका) जो साधक आत्मिक कल्याण के लिए आया हो पर गुरु को जांचने में लग जाए — जैसे गोयल जी ने कहा कि मैं जांचूंगा — उसके बारे में आप क्या कहते हैं? (P4-0168)
  22. (वही साधिका, गोयल जी के प्रसंग पर) आपने गोयल जी को तुरंत क्यों कह दिया कि जितना सुना है उससे ज्यादा है? और एक छोटी सी गलती से (गुरु के प्रति) जो भाव निकल गया, वो लौटने में कितना समय लगेगा? (P4-0169)
  23. (वही साधिका) एक तरफ गोयल जी के पूर्व सत्कर्म इतने रहे कि यहां तक आ गए, 82 साल की उम्र में लग्जरी छोड़कर आए; दूसरी तरफ उसी गुरु को जांचने लग गए। तो क्या यह जीवात्मा खुद के साथ ही खिलवाड़ करती है — क्या यह खुद समझ के कर रही है? (P4-0175)
  24. (वही साधिका) जो लोग इतना पास रहकर, गुरु के हाथ से भोजन पाकर भी इतना बड़ा विश्वासघात करते हैं, उनका क्या होगा? और समाज के जो लोग (सच्चाई न जानकर) उन्हें सपोर्ट कर रहे हैं? (P4-0177)
  25. (वही साधिका) एक आखिरी सवाल — गुरु की जरूरत कब तक पड़ेगी? आपके भी तो कोई गुरु रहे होंगे? और गुरु और सद्गुरु में क्या अंतर है — वीडियो में भी समझ नहीं आया। (P4-0198)
  26. गुरु के पास क्यों जाना चाहिए, और गुरु साधक की धारणाओं के साथ कैसे व्यवहार करता है? (P5-0058)
  27. गुरु आश्रम में रहकर गुरु सेवा कैसे करें? (P5-0128)
  28. गुरु-शिष्य विषय पर — चेयर पर बैठे को गुरु मान लें जबकि नॉलेज कम है? (P6-0010)
  29. गुरु ने जीवन बदला फिर रूप बदल गया — क्या गुरु की स्टेट भी कंप्रोमाइज हो जाती है? (P6-0012)
  30. पांचवां वेद गुरु को बताया — गुरु की महिमा कैसे समझें? (P6-0014)
  31. गुरु कहते प्रकृति का कर्ज चुकाना पड़ेगा — गुरु का कर्ज क्या? (P6-0015)
  32. गुरु से इतना डर क्यों रहता है? गुरु और शिष्य के बीच का दायरा क्या होना चाहिए? कुछ भी पूछना चाहते हैं, खुलकर बोलना चाहते हैं, पर बोल नहीं पाते। चलते हुए भी लगता है कि कहीं कुछ गलत न हो जाए और डांट न सुननी पड़े। यह डर कैसे खत्म हो? मर्यादा कैसी होनी चाहिए? (P6-0064)
  33. जालना, महाराष्ट्र से पूछा गया है कि गुरु से ब्रह्मज्ञान लिया है, पर अभ्यास घर पर नहीं हो पा रहा। अपनों की कुटिया में आना चाहता हूं। क्या मैं आ सकता हूं? (P6-0087)
  34. बिना गुरु के नाम जप सफल होगा कि नहीं? गुरु किया नहीं है, तो पहले यह समझना है कि गुरु आखिर है कौन। मैं गृहस्थ जीवन में हूँ। क्या स्त्री को गुरु दीक्षा और मंत्र की जरूरत है? गुरु किए बिना मंत्र कौन सा लूँ? कृष्ण को जगतगुरु मानती हूँ। क्या ऐसा भी है कि जब कुछ नहीं चाहिए, तभी गुरु मिलता है? (P6-0147)
  35. कामनाओं के लिए गुरु के पास धक्के और गाली सहकर क्यों खड़े रहते हैं? गाली को गुरु का आशीर्वाद कह देते हैं, द्वार पर धक्का भी मिलता है। यह आत्मकल्याण के लिए है या माल के लिए? क्या हमने अपने आप को कुत्ते जैसा नहीं बना लिया? (P6-0148)
  36. ज्योतिर्लिंग और देवताओं में क्या संबंध है? दोनों एक ही श्रेणी में हैं या अलग अलग? दर्शन के बाद लाभ कब होता है, और यहाँ सत्संग या गुरु के शरण में किस हालत में आना चाहिए? (P6-0151)
  37. गीता में निष्काम कर्म की शिक्षा है, शास्त्रों में लिखा तो ठीक है, पर हम अपने तरीके से ग्रहण कर रहे हैं। शास्त्र पढ़ें या क्या करें? गुरु के पास अपना पढ़ा हुआ ज्ञान लेकर जाएँ तो क्या होता है? (P6-0155)
  38. आत्मिक कल्याण करना सबसे आसान है या कठिन? गुरु के नाम पर इतनी विधियाँ क्यों दे दी गईं कि यह जटिल हो गया? (P6-0165)
  39. सोनिया पूछती हैं, क्या गुरु के बिना मोक्ष मिलता है? (P6-0180)
  40. गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरा, साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः। इसमें गुरु को परमात्मा क्यों कहा गया है? परमात्मा किसे कहते हैं? (P6-0189)
  41. कविता कुमारी पूछती हैं, एक गुरु धारण करने के बाद किसी दूसरे गुरु से कुछ सीखना, क्या अपने पुराने गुरु से दगा होता है? नाम और दर्शन किसका करें? (P7-0001)
  42. किस साधना से आत्मसाक्षात्कार हुआ? क्या ध्यान किया है? बताइए। गुरु से ज्ञान लो और आगे बढ़ो, इसका मतलब क्या है? (P7-0003)
  43. गृहस्थ आश्रम में जो भी मिलता है वह अपोजिट क्यों मिलता है? थोड़ा अंतर तो होना चाहिए, पर इतना अंतर क्यों मिला? मैं बचपन से गुरु के घर जाने वाली थी। इन्होंने साफ कह दिया था कि हम खाते पीते प्राणी हैं, और मैं लहसुन प्याज न खाने वालों में से थी। गुरु को छोड़ना नहीं चाहती थी, क्योंकि छोड़ती तो विवाह के लिए कहीं और जाना पड़ता। बड़ों की सहमति से, गुरु के कारण, इन्हीं से किया। अब रोती क्यों हूं? (P7-0103)
  44. गुरु जी, असली गुरु की पहचान क्या है? कृपा करके बता दीजिए। (P7-0122)
  45. हम दुष्कर्म और अंदर आने वाले विचारों से निकलना चाहते हैं, पर पैर-पैर पर गिरते हैं। ग्रंथों में पढ़ा है कि गुरु हमारे किए हुए सारे कर्म काट देगा और हमें सच्चे मार्ग पर चलाएगा। हमसे बन नहीं पा रहा, इसीलिए गुरु की जरूरत है। हम क्या करें, जब हमसे हो ही नहीं रहा? गुरु किसे मानें, शरीर को या शब्द को? और जब गलत काम होने लगता है, तो क्या वहां गुरु अपनी पावर से हमें हटा लेगा? रस में ऐसे लिप्त हो जाते हैं कि लगता है बुद्धि काम ही नहीं करती। (P7-0142)
  46. दूसरा संदेह यह है कि आपने मिस्त्री को डांटा। डांटने से मेरे अंदर संदेह पैदा हो गया कि गुरु ऐसे डांटते हैं। वह अच्छा नहीं लगा। गुरु को ऐसा क्रोध क्यों करना पड़ता है? (P7-0146)
  47. गुरु से बंधन में फंस गया हूं। अपने आप को कैसे निकालूं? बंधन हाथ के विकारों में है। (P7-0199)
  48. शिष्य के मुख्य गुण कौन से हैं? (P8-0008)
  49. शिष्य का गुरु के प्रति जितना समर्पण होता है, क्या गुरु का समय और ध्यान भी उसके प्रति उतना अधिक हो जाता है? ऐसे में अन्य साधक, जो गुरु के प्रति कम लगाव रखते हैं, उनके मन में ऐसी भावना पैदा हो जाती है। (P8-0091)
  50. सालों पहले मुझे और मेरी मां को एक गुरु जी की दीक्षा मिली थी। मां को कुछ महसूस होता है, पर मुझे कुछ महसूस नहीं होता। क्या मुझे फिर भी उसी का अभ्यास करना चाहिए, या आगे बढ़ना चाहिए? (P8-0103)
  51. मैं पैसों का योगदान नहीं कर सकती। क्या मैं आपका चैनल बनाकर आपके ज्ञान को लोगों तक पहुंचाकर अपने गुरु का साथ दे सकती हूं? क्या यह मेरा सत्कर्म होगा? (P8-0139)
  52. कृष्ण के साथ बहुत लोग रहते थे, उनको आत्मज्ञान नहीं हुआ। सिर्फ अर्जुन को हो गया। मतलब जो पूरी तरह गुरु के शब्द में चलेगा, तभी होगा? (P8-0167)
  53. गुरु के साथ नहीं रह पा रहा, और न गुरु से अलग हो सकूंगा। न गुरु वचन को जी पा रहा हूं, न गुरु वचनों से दूर जा पा रहा हूं। मैं इस फंसन में कैसे बचूं? (P9-0059)
  54. गुरु जी, मैं तो खुशी के मारे अब क्या करूं? गुरु का मिलना चमत्कार है। (P9-0194)
  55. मैं जब अपनी समझ से कुछ भी सेवा, दया आदि करता हूं तो बार-बार गिर जाता हूं। फिर वापस ईमानदारी को पकड़ लेता हूं और पीड़ा के बाद उठने लगता हूं। कब तक (गुरु की) समझ से चलना चाहिए और कब अपनी समझ से भी चल सकते हैं? (P10-0067)
  56. योगी जी, मैंने संत रामपाल जी महाराज से दीक्षा ली है। वे कहते हैं कि आत्म साक्षात्कार से बात नहीं बनती, परमात्मा का ज्ञान भी होना चाहिए। (P10-0099)
  57. गुरु जी, क्या नाम दीक्षा के बिना आत्मज्ञान नहीं हो सकता? (P10-0138)
  58. गुरु जी, अगर शिष्य पूर्ण रूप से गुरु की आज्ञा में हो, तो कब तक शिष्य आत्मज्ञान प्राप्त कर सकता है? (P10-0180)
  59. डॉक्टर या शिक्षक को अपने काम का कुछ मूल्य मिलता है। गुरु को तो कुछ नहीं चाहिए, फिर वह दिन-रात एक पागल की तरह इतनी मेहनत क्यों करता है? उसे क्या मिलता है? (P11-0062)
  60. जब हम नियम तोड़कर यहां से भाग जाते हैं, तो क्या गुरु को दुख होता है? (P11-0063)
  61. भक्ति मार्ग में गुरु को रिझाने की बात आती है। शिष्य गुरु को कैसे रिझाए — क्या बस इतना कि उसके बताए नियमों में पूरी तरह उतर जाए? (P11-0064)
  62. इस रास्ते पर चलते-चलते अगर प्राण छूट जाएं या गुरु का साथ छूट जाए, तो फिर क्या होगा? और बुद्ध ने तो पुनर्जन्म को मना किया था। (P11-0087)
  63. कई संस्थाओं में गुरु के जाने के बाद उनके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। अगर ऐसा हो, तो क्या करना चाहिए? (P11-0088)
  64. क्या बिना गुरु के, खुद से स्वाध्याय करके — शास्त्र, महापुरुषों की जीवनी, उपनिषद पढ़कर — आत्मज्ञान नहीं हो सकता? (P11-0109)
  65. पहले गुरु ज्ञान देने से पहले शिष्य से 12 साल सेवा करवाते थे; आज गुरुओं ने लंगर लगा रखा है, कहते हैं पहले ज्ञान ले लो, सेवा बाद में कर लेना। इसमें क्या अंतर है? (P11-0150)
  66. मैं 30 साल से गुरु के आश्रम में हूं, फिर भी अंदर से अनुभव होता है कि गुरु कभी खुश हैं, कभी नाराज। शिष्य को सबसे बड़ी क्या साधना करनी चाहिए? (P11-0176)
  67. अगर हम गुरु के पास रह रहे हैं और पढ़ते-पढ़ते किसी चीज से खेलने लग जाएं, तो उसके सानिध्य में तो भटकने के चांस कम हो जाते होंगे ना? गुरु हमारी कमी क्यों नहीं बताता? (P12-0006)
  68. अगर गुरु कमी नहीं बताता, तो उसके पास रहते-रहते शिष्य की क्षमता कैसे बढ़ती है? (P12-0007)
  69. आश्रम में रहने वालों की तो आप सेवा कराकर समझ खोल देते हैं; पर गृहस्थ तो निरंतर उसी दलदल और माहौल में रहते हैं, जल्दी आ भी नहीं पाते। वे बहुत ईमानदार रहने की कोशिश करते हैं, फिर भी गिर जाते हैं। लोग गुरु की फोटो टांग लेते हैं, पूजा-पाठ करते हैं कि गुरु जी पास हैं — तो वे कैसे समझें कि गिर रहे हैं या उनसे कमी हो रही है, और कैसे सुलझें? (P12-0008)
  70. गुरु को दर्पण क्यों कहा गया है? (P12-0092)
  71. आज के समाज में बहुत से सिद्ध साधु-संत अपने शिष्यों को आशीर्वाद देते हैं कि आपकी मनोकामनाएं और जरूरतें पूरी हों — तो क्या वो पूरी होती हैं? क्या उनके आशीर्वाद से वास्तव में साधक का कल्याण होता है? (P12-0147)
  72. इस आंतरिक मार्ग में गुरु की जरूरत कहां पड़ेगी? (P12-0155)
  73. गुरु जी, क्या गुरु के आशीर्वाद से किसी के दुख-तकलीफ ठीक हो जाते हैं? (P13-0031)
  74. गुरु जी, ज्यादातर हमारे रिश्ते "कुछ चाहिए" में ही होते हैं। ऐसा कौन सा रिश्ता है जिसमें कुछ नहीं चाहिए — एक गुरु-शिष्य का ही? (P13-0187)
  75. गुरु जी, ऊर्जा का ट्रांसफर हर किसी से हो सकता है, या केवल गुरु से ही? (P13-0194)
  76. गुरु जी, बहुत लोग गुरु की फोटो रख के घर पे पूजा करते हैं, उसका क्या? (P13-0195)
  77. गुरु जी, पहले धार्मिकता में, कीर्तन सुनने में रस आता था — गुरु के नियम का पालन, पाठ करना। अब वो सब छूट गया, कीर्तन में रस नहीं आता, खाली बैठे हैं। अब हम आगे के रास्ते में गए कि पीछे चले गए? (P13-0199)
  78. गुरु जी, इंसान को अपने जन्म का उद्देश्य कैसे मालूम पड़े कि मेरा जन्म क्यों हुआ है? अगर वह किसी संत या गुरु के चरणों में नहीं पहुंचा, तो क्या उसका जन्म सिद्ध नहीं होता? (P14-0047)
  79. गुरु जी, ये ज्ञान लेने के लिए गुरु के पास जाना चाहिए या अपने आप सत्संग सुनते रहें? (P14-0072)
  80. गुरु जी, संतों ने कहा है कि इतनी तपस्या करो कि गुरु को ढूंढने की जरूरत ना पड़े, वो खुद मिल जाएंगे — पर कैसे पता चलेगा कि वो खुद मिलने आए हैं? (P14-0103)
  81. क्या गुरु को आकर्षण की आवश्यकता होती है? (P14-0146)
  82. सच्चे गुरु की पहचान क्या है? (P15-0010)
  83. पहले मैंने गुरुओं से नाम-दीक्षा ली, वो ज्ञान भी देते थे, पर पूरा नहीं लगा, इसलिए आपके पास आया हूँ। (P15-0019)
  84. गुरु के पास आकर एकदम रिलैक्स हो गया — क्या गुरु की यही पहचान है? अगर रिलैक्स नहीं हो रहे तो गुरु में कमी है या शिष्य में? (P15-0026)
  85. क्या बिना जीवित गुरु के आत्मज्ञान हो सकता है? (P15-0057)
  86. क्या संसार और शास्त्रों के सहारे, बिना जीवित गुरु के, आत्मज्ञान नहीं हो सकता? (P15-0060)
  87. जहाँ हम पहले गए, वहाँ बिना गुरु-दीक्षा लिए कोई भाव ही नहीं देता था — आज जिस तरीके से दीक्षा दी जा रही है, उसके बारे में क्या कहेंगे? (P15-0061)
  88. मैंने संन्यास लिया, पर उसके बाद अंदर उदासीपन आ गया, वहाँ रुक नहीं सका; अब गुरु के दूसरे आश्रमों में जाने का मन ही नहीं करता। (P15-0063)
  89. कौन सा शिष्य योग्य है, कौन अयोग्य — ये गुरु द्वारा कैसे तय किया जाता है? शिष्य गुरु चुनता है या गुरु शिष्य? (P15-0068)
  90. बचपन से मन में बैठा दिया गया कि दो गुरु नहीं कर सकते, एक ही गुरु से नाम लिया तो उसे बदल नहीं सकते। (P15-0099)
  91. गुरु को कैसे ढूंढें, और यही हमारा गुरु है — यह कैसे समझें? (P15-0130)
  92. गुरु जी, पत्नी को दीक्षा क्यों नहीं लेनी चाहिए? (P15-0136)
  93. गुरु को कैसे प्राप्त करें या ढूंढें? कृपया मार्गदर्शन करें। (P16-0096)
  94. गुरुदेव, मैंने ऐसा पढ़ा है कि पात्र शिष्य को गुरु स्वयं खोजते हैं। क्या यह सही है? (P16-0098)
  95. योगी जी, प्रोफेसर साहब ने विवेकानंद जी और निवेदिता की कहानी सुनाई — वह सब कुछ छोड़कर आई, अपमान सहा, फिर भी टिकी रही और आखिर में विवेकानंद जी ने अपना पूरा ज्ञान उसे दे दिया। जैसे गोयल साहब 82 साल की उम्र में सब कुछ छोड़कर आपके सानिध्य में आए हैं। तो क्या ये चीजें आखिरी क्षणों में हमारी पात्रता पर निर्भर करती हैं या गुरु की कृपा पर? (P16-0100)
  96. आपका कहना था कि गुरु के प्रति हो जाए, लेकिन हमें तो शुरू में पता नहीं चलेगा ना कि कौन आत्मज्ञानी हो गया? (P16-0104)
  97. बाबा, अभी तो गुरु भी नहीं मिला; हम तो मनमुखी आदमी हैं। गुरु के बिना क्या करें? (P16-0138)
  98. (लाइव) गुरुदेव, क्या हम खुद ईश्वर तक पहुंच सकते हैं? क्या उसके लिए गुरु जी का होना आवश्यक है? (एक और प्रश्न: क्या बिना गुरु के भी आत्मज्ञान हो सकता है?) (P16-0160)
  99. भक्ति मार्ग हो या ज्ञान मार्ग, मैंने अपनी लाइफ में भी देखा है कि लोग रिश्तों वाली आसक्ति उठाकर किसी "गुरु" पर शिफ्ट कर देते हैं, और जिसे गुरु समझा वो उस स्थिति में था ही नहीं — इससे कई जिंदगियों से खिलवाड़ हुआ, जीवन और बखेड़ा हो गया। तो विवेक कैसे रखें कि मैं वहां न फंस जाऊं, कि वो अपनी कामना के लिए मुझे मोहरा तो नहीं बना रहा — गुरु को कैसे पहचानें? (P17-0017)
  100. गुरु जी, यह कहा जाता है कि पकड़ना है तो एक गुरु को पकड़ो, वही तुम्हें पार करा देगा; यदि गुरु बदलते ही रहे तो कहीं नहीं पहुंचोगे — इस पर क्या कहेंगे? (P17-0034)
  101. गुरु जी, आईने में अपना चेहरा तो शरीर का दर्शन है — असली आत्मदर्शन कैसे हो, उसका सरल मार्ग बताइए। इसमें गुरु की क्या भूमिका है? (P17-0105)
  102. गुरु जी, क्या संत भगवान किसी भी प्रकार का नाम या दीक्षा नहीं देते? (P17-0125)
  103. गुरु जी, क्या आपको अंतरात्मा से गुरु मान सकते हैं? अगर आप शिष्य नहीं मानते, तो क्या आपको सुनते-सुनते आत्मकल्याण हो जाएगा? (P17-0199)
  104. गुरु जी, आज अध्यात्म में भी "मेरा गुरु ठीक, उसका गुरु खराब" — एक-दूसरे की निंदा होती है, और कहीं-कहीं गुरु के पांव धोकर पानी पिलाया जाता है। गुरु क्या है? (P18-0004)
  105. गुरु जी, किसी ने अपनी बात अधूरी या इधर-उधर कह दी तो आप उसे पूरा करके साफ कर देते हैं — गुरु का कर्तव्य क्या होता है? (P18-0089)
  106. गुरु जी, काम में (बॉस या गुरु के रोल में) कई बार ईगो धारण करनी पड़ती है; सालों तक धारण करते-करते वह स्वभाव बन जाती है। रोल भी निभाना है और वह स्वभाव भी न बने — यह कैसे करें? (P18-0113)
  107. गुरु जी, आपने अपने गुरु से पूछा था कि 41 दिन में क्या मैं जीवित भी रहूंगा — तो क्या उन महाराज जी को भी आपसे यही पूछना चाहिए था? क्या कोई आत्मज्ञान का समय दे सकता है? (P18-0126)
  108. गुरु जी, आपने यह ज्ञान कैसे पाया? क्या ज्ञान बिना गुरु के पाया जा सकता है, और जो गुरु ज्ञान देता है उस पर यकीन कैसे करें? (P18-0140)
  109. गुरु जी, पशु सीख नहीं सकता, हम सीख सकते हैं — क्या गुरु से ज्ञान लेकर बुराई छोड़ सकते हैं? हमारे बिगड़ने का कारण क्या है? (P18-0153)
  110. गुरु जी, अभाव, कुभाव और स्वभाव वाले साधक कौन होते हैं और किस तरह के गुरु के पास जाते हैं? (P18-0193)
  111. गुरु जी, कई जगह संतों की वाणी के नाम पर अपनी बातें मिला दी जाती हैं, और गुरु के पैर धोकर चरणामृत पिलाया जाता है — क्या यह सही है? (P19-0003)
  112. गुरु जी, आप शिष्य क्यों नहीं बनाते? कई संस्थाएं कहती हैं देहधारी गुरु नहीं, शब्द गुरु है — फिर भी जीवंत गुरु क्यों जरूरी है? (P19-0016)
  113. गुरु जी, कबीर साहब के लाखों शिष्य थे, फिर भी बहुत कम क्यों पहुंचे? क्या कोई गुरु हमें पहुंचा सकता है? (P19-0020)
  114. गुरु जी, आपने कहा "गुरु शब्द है" — इसे खोलकर समझाएं। जिनके गुरु का शरीर नहीं रहा या जो गुरु से मिल नहीं पा रहे, वे क्या करें? (P19-0044)
  115. गुरु जी, आत्मज्ञानी गुरु को हम भगवान की पदवी दे देते हैं — उस स्टेज पर भी माइंडफुलनेस में रहना है क्या? भगवान से क्या गलती होगी? (P19-0059)
  116. गुरु जी, गुरु से संयोग-वियोग कैसे? (P19-0063)
  117. गुरु जी, भक्त और भगवान के बीच गुरु की क्या आवश्यकता है? (P19-0092)
  118. गुरु जी, आपके गुरु कौन हैं? आपको दीक्षा कैसे मिली, और उन्होंने आपको सद्गुरु ढूंढने क्यों भेजा? (P19-0132)
  119. गुरु जी, क्या गुरु की शरण में रहकर बिना भटके उपलब्ध हुआ जा सकता है? (P19-0173)
  120. गुरु जी, योग्य गुरु और बने हुए गुरु में क्या फर्क है — कौन किसकी सफाई की बात करता है? (P19-0198)
  121. गुरु जी, क्या योग्य गुरु के पास हमारा बैकग्राउंड या अमीरी-गरीबी काम करती है? (P19-0199)
  122. गुरु जी, क्या भगवत प्राप्ति के लिए भगवत-प्राप्त गुरु से दीक्षा होनी चाहिए? (P20-0051)
  123. गुरु जी, मैंने किसी गुरु से मंत्र दीक्षा ली थी, पर कुछ सालों से जाप छूट गया और आत्मज्ञान में रुचि हो गई है; अब ऑनलाइन और शास्त्रों से सुनती हूं — क्या करूं? (P20-0060)
  124. गुरु जी, गुरु के सामने सत्संग में बैठकर क्या करना चाहिए? (P20-0096)
  125. गुरु के जितना नजदीक जाएंगे उतनी परीक्षा बढ़ेगी — परीक्षा से डर लगता है, क्या करें? (P20-0104)
  126. क्या गुरु के सान्निध्य में रहने वाले की भी गुरु इसी तरह परीक्षा लेता है? (P20-0108)
  127. "तुम्हारे जैसे कितने आए और कितने जाएंगे" — यह सुनकर डर लगता है, पसीना आ जाता है कि गुरु को मेरी जरूरत ही नहीं, तो मेरा कल्याण कहां होगा? (P20-0125)
  128. अगर कभी सूक्ष्म अहंकार आ जाए तो क्या करें — गुरु के दर पर कैसे टिके रहें? (P20-0131)
  129. मैंने गुरु के मन को कितना दर्द दिया होगा — क्या ज्ञानी को हमारी गलती से दर्द होता है? (P20-0142)
  130. कोई सोचे कि मुझे गुरु नहीं बनाना, मैं भी आपकी तरह 12 साल अपनी व्यवस्था (सेविंग) करके भ्रमण करूंगा और खुद ठहर जाऊंगा — उसकी तुलना में गुरु के सानिध्य में रहने वाले साधक का क्या? (P21-0028)
  131. गुरु जी, बुद्ध ने कहा कुछ चीजें बिना भोगे बोध से भी समझ आती हैं। अगर इस मार्ग में सबके साथ यही हो रहा है, तो इससे अच्छा क्या यह नहीं कि संसार की जिम्मेदारी छोड़कर गुरु से ही जूते खा लें? (P21-0062)
  132. गुरु जी, कहते हैं गुरु को मनाना मुश्किल है और भगवान को मनाना आसान — क्या गुरु को मान की इच्छा ज्यादा होती है? (P21-0091)
  133. गुरु जी, हमारे पहले गुरु जी कहते थे कि गुरु के पास पूरी ताकत है, वो बड़ी से बड़ी बला (सूली को सूई पर) टाल देते हैं; पर आपका ज्ञान कहता है कि आपके सत्कर्म ही बला टालेंगे, गुरु नहीं — इसमें सच क्या है? (P21-0103)
  134. गुरु जी, साधना के लिए आप कैसा मार्गदर्शन देते हैं — आश्रम में आएं तो आप किस तरह की दीक्षा देते हैं, क्या साधन है कि मैं पहुंच जाऊं? (P21-0160)
  135. गुरु जी, ब्रह्म ज्ञान पाने के लिए क्या करें, कौन सी दीक्षा चाहिए? (P21-0161)
  136. गुरु जी, हमने आज तक पढ़ा है कि गुरु के मुख से सुनो, मनन करो, नित्य अभ्यास करो; लेकिन आप कह रहे हो कि बेईमानी छोड़ दूं, ईमानदारी अपना लूं और सत्कर्म करूं — क्या केवल इससे आत्म साक्षात्कार संभव है, इसके अलावा कोई दीक्षा नहीं चाहिए? (P21-0163)
  137. गुरु जी, बाहरी दुनिया में बहुत सारी साधनाएं होती हैं — जप, दीक्षा देकर साधना पथ पर चलाना। ईमानदारी और सत्कर्म से साधना कैसे हो सकती है, ये मेरी समझ में नहीं आ रहा — साधना और सत्कर्म दोनों कैसे हैं? (P21-0177)
  138. गुरु जी, हर चीज नई बन जाती है, हर क्षण बदलाव आता है — तो क्या गुरु की उंगली पकड़ के चलना कभी छोड़ ही नहीं पाएंगे? (P21-0192)
  139. गुरु जी, गुरु की पहचान कैसे करें? जो रास्ता ढूंढ रहा है वो तो अज्ञानी है, वो कैसे पहचानेगा? (P21-0193)
  140. गुरु जी, ऐसा सुना है कि शिष्य गुरु को ढूंढता है — या गुरु शिष्य को ढूंढता है? (P21-0194)
  141. महात्मा जी, मैं जब भी परमात्मा का नाम जप करता हूं या ध्यान में होता हूं तो मुझे अपने गुरु के प्रति बुरे विचार आते हैं; ऐसा बार-बार होता है। ऐसा क्यों होता है? मैं इससे मुक्त होना चाहता हूं। (P22-0021)
  142. गुरु जी, इसमें साधक और गुरु के संबंध का भी असर पड़ता है क्या? (P22-0037)
  143. गुरु जी, क्या साधक को भी आखिर में गुरु को छोड़ना पड़ता है? (P22-0038)
  144. गुरु जी, जैसे माता-पिता से जीव जन्म और गर्भ के साथ जुड़ा होता है और लंबे संसर्ग के कारण उन पर निर्भर रहता है, वैसे ही गुरु के सानिध्य में शिष्य जाता है — जो पहले से तृप्त और सिद्ध है उसके संपर्क में; क्या यह संपर्क भी उसी तरह निरंतर रहना आवश्यक है? (P22-0039)
  145. गुरु जी, गुरु की वाणी, उनकी शिक्षा को अगर हम फॉलो ना करें तो? (P22-0041)
  146. गुरु जी, कहते हैं गुरु के पास रहना सबसे कठिन है — ऐसा क्यों? (P22-0043)
  147. गुरु जी, कभी-कभी मन में बहुत लड़ाई — इंटरनल वॉर — होती है; जाना इस तरफ है पर उस तरफ खींचता है, इतना कन्फ्यूजन होता है कि समझ नहीं आता क्या करूं, तो मैं बहुत चिल्लाती हूं; कभी-कभी गुरु से भी गुस्सा आता है। फिर थोड़ी देर बाद अपने को ऑब्जर्व करती हूं तो समाधान मिल जाता है — यह क्या है? (P22-0046)
  148. गुरु जी, मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव — मां हमेशा ज्यादा खिलाती है; गुरु के पास कोई कमी नहीं, फिर भी वह भरपेट खाने नहीं देता, एक थाली में कम देता है, जबकि उसके यहां जानवर भरपेट खाते हैं — ऐसा क्यों? (P22-0106)
  149. गुरु जी, हमने किसी गुरु से मंत्र लिया है और अब हम खाली होना चाहते हैं, सब छोड़ना चाहते हैं; लेकिन मंत्र ऑटोमेटिक चालू हो जाता है — सोते समय, चलते समय, बहुत दिन का अभ्यास है। मंत्र छोड़ने से हमें दोष तो नहीं लगेगा? (P22-0164)
  150. गुरु जी, आप कहते हैं कि माता-पिता और गुरु का ऋण नहीं होता; लेकिन एक साधक या परिक्रमा करने वाला जब मार्ग में किसी से ठहरने और भोजन की व्यवस्था स्वीकार करता है, तो क्या ये ऋण नहीं है? (P22-0170)
  151. गुरु जी, आपसे दीक्षा कैसे लें? (P22-0171)
  152. गुरु जी, क्या जीवन में गुरु दीक्षा एक बार ही लेनी चाहिए, एक बार ही गुरु मंत्र लेना चाहिए? (P23-0030)
  153. गुरु जी, क्या सिमरन और ध्यान एक हैं? हम जिस गुरु की शरण में हैं उन्होंने ध्यान करने से मना किया है, केवल सिमरन बताया है — क्या यह सही है? (P23-0070)
  154. गुरु जी, मान लीजिए एक बंदा शैतान है और वह गुरु के पास आ गया — तो फिर उस गुरु का क्या रोल है? (P23-0080)
  155. गुरु जी, जीव अपने नाश होने से भी डरता है और ब्रह्म से मिलना भी चाहता है — दोनों करना चाहता है। तो क्या जीव का नाश गुरु के सानिध्य में हो जाता है? (P23-0120)
  156. गुरु जी, एक व्यक्ति का माता-पिता के प्रति और गुरु के प्रति क्या कर्तव्य हो? (P23-0134)
  157. गुरु जी, गुरु किसे बनाएं और गुरु की पहचान कैसे हो? (P23-0182)
  158. गुरु जी, जो आदमी सच में निकलना चाहता है, उसकी आप कितनी मदद करते हैं? और क्या गुरु के बगैर भी कोई निकल सकता है? (P24-0087)
  159. गुरु जी, अगर कोई शिष्य भटकना चाहे, तो क्या गुरु उसे रोक सकता है कि तू भटक रहा है, सीधे रास्ते पर चल? (P24-0088)
  160. गुरु जी, मैं 2003 से इस लाइन में हूं, दीक्षा ली, गुरु मंत्र लिया, अब ज्ञान का मार्ग पकड़ा है। लेकिन अभी भी हम एक पैर उस नाव में और एक पैर इस नाव में रख रहे हैं, तो गिरना ही संभव लगता है। आपके जैसी स्थिति कब और कैसे आएगी? (P24-0105)
  161. गुरु जी, सेवा में तो दिखता है कि हम कुछ कर रहे हैं — खुद को भी लगता है और गुरु की नजरों में भी रहता है। साधना में तो दिखता ही नहीं, और साधना में अहम नहीं आ जाएगा? (P24-0110)
  162. गुरु जी, क्या गुरु की पहचान इस भाव से होती है कि जिसे मिट्टी का ढेला और सोना-धन एक समान नजर आता है? (P24-0161)
  163. गुरु जी, 'ॐ नमः शिवाय' का जाप बिना गुरु के कर सकते हैं या नहीं? बिना गुरु के यह मंत्र कहीं अपराध तो नहीं? (P25-0008)
  164. गुरु जी, क्या गुरु को सरल होना चाहिए? (P25-0015)
  165. गुरु जी, आपका वेशभूषा नहीं है तो कहीं-कहीं आपका अनादर होता है — हम गुरु का अनादर होते हुए नहीं देख सकते, क्या करें? (P25-0017)
  166. गुरु जी, क्या बिना गुरु के मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है? (P25-0024)
  167. गुरु जी, शिष्य को गुरु की खोज में निकलना चाहिए या गुरु को शिष्य की खोज करनी चाहिए? क्या गुरु की भी तमन्ना नहीं होती कि शिष्य को खोज करके उसका सफर आसान कराए? (P25-0101)
  168. गुरु जी, गुरु और शिष्य की बातचीत में कोई बात हमें समझ में न भी आए, फिर भी क्या गुरु-शिष्य के बीच शब्दों के अलावा भी कुछ होता है, जिससे विचार बदलते हैं? (P25-0104)
  169. महाराज जी, मैंने भगवद गीता में पढ़ा था कि जब इंसान को किसी दुविधा में कोई रास्ता न दिखे, तो सिर्फ श्री कृष्ण ही सही रास्ता दे सकते हैं, क्योंकि उनसे बड़ा गुरु कोई नहीं है। क्या यह सही है? (P25-0111)
  170. गुरु जी, पता नहीं कौन सी योनि में जाएंगे — बस आखिर में मालिक पार कर दे, या गुरु की इतनी दया हो जाए? (P25-0113)
  171. गुरु जी, ज्ञान मार्ग से उपलब्धि प्राप्त करने वाले गुरु और भक्ति मार्ग से उपलब्धि प्राप्त करने वाले गुरु की बातें क्या अलग-अलग होती हैं? (P25-0128)
  172. गुरुदेव, आप जीवित गुरु की बात कहते हैं, पर मेरे दीक्षा गुरु तो मेरी 8-10 वर्ष की उम्र में ही शरीर रूपी चोला छोड़कर चले गए। तो मुझे अब आध्यात्मिक मार्गदर्शन किससे प्राप्त करना चाहिए? (P25-0183)
  173. क्या बिना गुरु के परमात्मा मिल सकते हैं? बताएं गुरु जी। (P26-0005)
  174. एक वीडियो में आपने कहा है कि परमात्मा को पाने के लिए गुरु की आवश्यकता नहीं होती है — इसे समझाइए। (P26-0008)
  175. गुरु जी, कुछ नहीं चाहिए — क्या गुरु को अर्पण, सेवा के उद्देश्य से जाप कर सकते हैं? (P26-0009)
  176. सच्चे और ढोंगी गुरु की पहचान कैसे करें? (P26-0014)
  177. अगर गुरु मात्र सहारा है, तो यदि शिष्य गुरु की बातों को बिना तर्क के स्वीकार करता है, तो क्या वह अहंकार का नाश कर रहा है या केवल अपने विवेक को गुरु के हवाले कर रहा है? (P26-0025)
  178. गुरु जी, गुरु का आशीर्वाद क्या है? विस्तार से बताइए। (P26-0109)