मोक्ष और मुक्ति — योगी गुरु जी के प्रश्नोत्तर
इस पृष्ठ पर “मोक्ष और मुक्ति” विषय से जुड़े 202 प्रश्न हैं, जो जिज्ञासुओं ने सत्संग में योगी गुरु जी से पूछे। किसी प्रश्न पर क्लिक करके योगी गुरु जी का पूरा उत्तर उनके अपने शब्दों में पढ़ें, वीडियो के साथ।
- गुरु जी, मोक्ष प्राप्ति का मार्ग क्या है? (P1-0038)
- गुरु जी, राग-द्वेष बहुत परेशान करते हैं। इनसे मुक्ति कैसे मिले? (P1-0045)
- गुरु जी, आप कहते हैं चिंतन करना है, चिंता नहीं। क्या चिंतन से भी मुक्त होना है? (P1-0059)
- गुरु जी, विषयों से कैसे मुक्त हों? क्या किसी विधि द्वारा उन्हें छोड़ सकते हैं? (P1-0060)
- गुरु जी, क्या किसी गंदी आदत के बारे में गहराई से चिंतन करने से उस आदत से मुक्त हो सकते हैं? (P1-0063)
- गुरु जी, देह भाव से मुक्ति कैसे मिलेगी? (P1-0103)
- क्या साक्षी भाव ही मोक्ष का द्वार है? और रास्ता क्या है? क्या गृहस्थ के लिए साक्षी भाव संभव है? (P2-0053)
- गुरुदेव, जो लोग भटके हुए मार्ग पर हैं, उन्हें सही मार्ग बताना भी सत्कर्म है क्या? क्या इससे भी हमारी मुक्ति की यात्रा होती है? (P2-0072)
- गुरु जी, रस लेने के लिए नहीं, बल्कि किसी को सुख पहुंचाने के उद्देश्य से बोलना — क्या यह मुक्ति की यात्रा में सहायक है या बाधक? (P2-0075)
- गुरुदेव, मां के साक्षात्कार के लिए क्या मुझे अलग से पूजा-पाठ, कर्मकांड, साधना आदि करने होंगे, जैसे आपने किए? या केवल आपके बताए मार्ग पर चलते रहने से ही मुक्ति हो जाएगी? (P2-0078)
- गुरु जी, राग-द्वेष से कैसे मुक्त हों? (P2-0091)
- मोक्ष के लिए भजन ज्यादा जरूरी है या ईमानदारी-सत्कर्म? (P2-0128)
- जैसे कहते हैं कि वह खुद तर गया तो सात पीढ़ी को तार दिया — मां-बाप का भाव रहता है कि हमने तुम्हारे लिए किया, अब तुम्हारी बारी आई तो तुम मुक्ति की तरफ जा रहे हो, यहां रुको। ऐसे में क्या करें? (P3-0103)
- (लाइव) एक कथावाचक कह रहे हैं कि जो कुंभ (भगदड़) में मर गया उसको मोक्ष हो गया। गुरु जी, मोक्ष की परिभाषा बता दीजिए — क्या कुंभ में मरने से मोक्ष होता है? (P3-0119)
- आपने कहा लेनदेन का हिसाब खत्म होगा तभी मोक्ष होगा। तो अगर ज्यादा पुण्य कर लिए तो भी पार नहीं हो पाएंगे? यह कम-ज्यादा मैं कैसे समझूं? (P3-0136)
- (वही साधक) आपने बताया कि धारणा को भी तोड़ना है, ध्यान से भी मुक्त होना है — धारणा, ध्यान, फिर समाधि, फिर तुम, फिर ब्रह्म। तो समाधि वाली स्थिति में कैसे पहुंचा जा सकता है, वो कब आती है? कितने दिन बाद आती है, कितनी देर रहती है? आत्मज्ञान का अनुभव और समाधि का अनुभव — दोनों अलग होते हैं या एक ही? और समाधि में शरीर का भान रहता है या नहीं? (P3-0191)
- (कुटिया में साधक) मुझे लगता है जीवन की यात्रा अनंत से अनंत है और जीरो उसका सेंटर पॉइंट है (जिसे शांति या समाधि कहते हैं)। अच्छे कर्म करने वाला प्लस साइड — अच्छी जगह, अच्छी विचारधारा के लोगों में — जन्म लेता है; बुरे कर्म वाला माइनस साइड — दूसरी योनियों या वैसी विचारधारा के लोगों में — जाता है; ऐसे ही सर्कल घूमता रहता है। यह सर्कल टूटे कैसे? मुक्त हो गए तो फिर हम कहां होंगे — आत्मा कहीं तो होल्ड करेगी? और धरती पर 9-10 हजार करोड़ लोग जन्म ले चुके, अभी 900 करोड़ जिंदा हैं — बाकी की आत्माएं कहां गईं? (P3-0195)
- (लाइव) गुरु जी प्रणाम। धारणा, ध्यान, समाधि, और जिसे कुछ नहीं चाहिए — क्या इसी से मुक्ति हो जाएगी? (P4-0002)
- (लाइव) प्रणाम योगी जी। परम सत्य या निर्वाण की प्रकृति — परम ज्ञान, मोक्ष या निर्वाण के बाद की अवस्था — को शब्दों में बांधना असंभव माना गया है; इसे हमेशा ‘नेति नेति’ (यह नहीं, यह नहीं) कहकर ही समझाया जाता है, क्योंकि हमारा मन केवल सीमित चीजें ही समझ सकता है। क्या यह सत्य है? (P4-0023)
- (लाइव) गुरु जी प्रणाम। मैं 19 साल का हूं और मैं मुक्त होना चाहता हूं — कैसे होऊं? मेरे ऊपर किसी की जिम्मेदारी भी नहीं है, तो फिर मैं मुक्त क्यों नहीं हो रहा? (P4-0025)
- (लाइव) गुरुदेव प्रणाम। जैसे नाम जप वाले कहते हैं कि पूरे दिन नाम जप करो तो एक दिन परमात्मा से मिलन हो जाएगा — तो गुरु जी, आपका क्या मार्ग है जो पूरे दिन किया जा सके और मुक्ति मिल जाए? (P4-0044)
- (लाइव) गुरु जी प्रणाम। सब कुछ जान लेने की इच्छा क्यों रहती है? क्या आत्मज्ञानी सर्वज्ञ हो जाता है? क्या जानने से मुक्त हो जाता है? (P4-0073)
- (लाइव) प्रणाम गुरु जी। अगर कोई लगातार गलत करता रहे तो बहुत बार न चाहते हुए भी क्रोध आ ही जाता है। उस क्रोध से कैसे मुक्ति पाई जाए? (P4-0102)
- (लाइव) योगी जी प्रणाम। मुझे मुक्ति चाहिए। मुझे क्या करना है? (P4-0109)
- (लाइव) योगी जी प्रणाम। एक समस्या खत्म होती है तो दूसरी शुरू हो जाती है, हमेशा दिमाग में तनाव रहता है। इससे मुक्ति के लिए कोई उपाय बताएं। (P4-0111)
- (लाइव) प्रणाम योगी जी। मुझे मुक्ति कैसे मिल सकती है और समस्याओं से छुटकारा कैसे मिल सकता है? (P4-0120)
- (लाइव) गुरु जी प्रणाम। आपने कहा कि जानने से मुक्त होना है, लेकिन खुद को तो समझना है ना — 'मैं' क्या है, कामना, भय, राग-द्वेष, तुलना — यह सब तो समझना पड़ेगा ना, तभी तो इससे छुटकारा होगा। ऐसा ही है क्या? (P4-0126)
- (वही साधक) गुरुदेव, एक श्लोक में कहा गया है — 'कोटि नाम संसार में, ताते मुक्ति न होय; आदि नाम जो गुप्त जपे, बूझे बिरला कोय।' इसका मतलब — वो आदि नाम क्या है? (P4-0133)
- (लाइव) मां नर्मदे हर गुरु जी। आत्मज्ञान ही पूर्ण मोक्ष है, आत्मा-परमात्मा एक ही हैं — आप भी कहते हो 'एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति'; अद्वैत सिद्धांत दोनों को एक ही मानता है। इसके बारे में कुछ बताएं। (P4-0139)
- (वही साधिका) मैं बहुत सी चीजों से मुक्त हो गई — ईर्ष्या, समाज, रीति-रिवाज, अंधी पूजा-पाठ, मां-बाप का मोह। लेकिन आर्थिक डर पर आकर अटक जाती हूं — अगर मेरे पास पैसे नहीं हुए तो जिंदगी कैसी होगी? ईमानदारी से (ज्ञान के) वीडियो बनाती हूं तो लोग सुनते नहीं, कमाई घट गई है। इस डर को कैसे खत्म करूं? (P4-0189)
- (वही साधिका) मेरे एक मित्र कहते थे कि पत्नी के बिना नहीं रह सकते; पत्नी अचानक मर गई, और शव के पास ही वो पूछ रहे थे कि अब मेरी दूसरी शादी कैसे होगी। (क्या वो आत्मा यह सुनकर मुक्ति की तरफ बढ़ेगी?) और क्या पुनर्जन्म, सूक्ष्म शरीर वगैरह होता है? आचार्य प्रशांत जी कहते हैं कि शरीर मिट्टी से पैदा होकर मिट्टी में मिल जाता है, इसके बाद कुछ नहीं। (P4-0195)
- (कुटिया में एक युवक) आपने कहा था कि शादी जरूरत हो तो करो — मैं खुद को चेक कर रहा हूं। हर एक महीने या 40 दिन में एक बार काम-वासना बहुत तंग करती है, बाकी 39 दिन कुछ नहीं रहता। इसका मतलब मुझे जरूरत है या नहीं, कैसे समझूं? और उससे मुक्त होने के लिए कोई गलत रास्ता न चुन लूं, इसकी जानकारी कैसे हो? (P5-0005)
- (वही साधक) गीता में कृष्ण ने कहा कि दुख से मुक्ति पानी है तो मोह छोड़ो, लालच, कामना छोड़ो। जैसे इन (साधिका) की मम्मी से बात नहीं हो पाती और इन्हें दुख है — तो यह मोह है ना? उम्मीद और मोह में क्या अंतर है? और आप अपनी बहन का दुख सुनकर भी कह देते हैं 'रह अपने दुख में' — आपको उसके दुख से दुख नहीं होता, आपने यह डिटैचमेंट कैसे किया? (P5-0014)
- (वही साधिका) कहते हैं कामना से मुक्त हो जाओ — क्या कामना को पहले प्राप्त कर लो तब मुक्त हो जाएँगे? मैं आर्थिक परेशानी क्लियर करके निडर होकर आना चाहती हूँ; और पीतमपुर का मकान छोड़कर गाँव जाना चाहती हूँ पर डर है कि वहाँ फंस न जाऊँ। (P5-0020)
- मोक्ष क्या है? प्रतिक्रिया देने से राग-द्वेष कैसे? आत्मज्ञान के बाद शरीर-आत्मा? (P5-0043)
- (वृद्ध साधक) अंतिम सांस यहीं बिताने की इच्छा है; मोक्ष के लिए मार्गदर्शन दें। क्या रुक सकते हैं? (P5-0067)
- आप कहते हैं आवागमन के चक्कर से मुक्त हो जाऊं — याद ही नहीं कि इस चक्कर में हूं। पिछले जन्म याद आएं तो क्या? (P5-0073)
- मोह और लोभ से मुक्ति कैसे मिले? (P5-0114)
- ज्ञान/भगवत् प्राप्ति पर आवागमन मिटे, संसार चले — आत्मा कहां? मुक्ति किसकी जब आत्मा स्वतंत्र? माता-पत्नी झगड़कर अलग — क्या करें? (P5-0131)
- भोग की इच्छा भी है और भोग से मुक्ति की भी — कौन सा रास्ता? शादी करूं या नहीं? (P5-0140)
- एकादशी पर मृत्यु हो तो मोक्ष मिलता है? (P5-0179)
- निर्विकार बहुत ऊंची अवस्था है। विकार है, तो कभी निर्विकार भी रहे होंगे, तभी विकार हटाने का प्रयास है। स्वप्न की बात हो चुकी। उसके बाद कारण अवस्था आती है, जिसमें शरीर को विश्राम मिलता है और मन को विश्राम मिलता है। वह अवस्था क्या है? उसमें जाकर इंसान सब कुछ भूल जाता है, ऐसा लगता है। हम भी उतनी ही जानकारी तक जाकर खड़े हो जाते हैं, जैसे रोबोट मेमोरी के बिंदु तक छूकर लौट आता है। कहने को जागृत है, पर जागृत भी धोखा लगता है। मैं प्रकृति का ही हिस्सा हूं, फिर अपने को और प्रकृति को अलग क्यों समझें? फूल का एक पत्ता समझ में आ जाए तो फूल समझ में आ जाए, पर इसी को समझ नहीं पा रहे। समझ शरीर के माध्यम से ही हुई, जहां जहां गए ज्ञान होता गया, अपनाते गए, सानिध्य में काम किया, समझ भीतर विकसित होती गई। फिर भी कारण अवस्था का उत्तर नहीं मिला, जब ऐसा हो जाता है कि कुछ रहा ही नहीं। क्या कारण से मुक्त होना निर्विकार है? (P6-0044)
- नागपुर से आई मां कहती हैं, धन, गहना और बेटा-बेटी से लगाव छूट गया लगता है। पति की जंजीर थी, उसे छोड़कर आई हूं। मौन मिल गया, काम भी छोड़ दिया। परिवार वापस बुलाता है। इक्कीस दिन का टारगेट है। क्या मैं मुक्त हो गई? जाऊं या यहीं रहूं? आखिरी इच्छा और बेड़ी का क्या संबंध है? गुरु क्यों चाहिए? (P6-0105)
- दुख को कैसे सुलझाएं? दुख से मुक्ति कब और कैसे होगी? (P6-0110)
- रिश्तों में बंधन है। उस बंधन से कैसे मुक्त हों? (P6-0137)
- काशी के बारे में बताइए। क्या काशी में जो मरता है उसे मोक्ष मिलता है? लोग मरने के लिए काशी जाते हैं। क्या वहाँ शंकर तारक मंत्र का उपदेश देकर मुक्त कर देते हैं? (P6-0153)
- सोनिया पूछती हैं, क्या गुरु के बिना मोक्ष मिलता है? (P6-0180)
- राजेंद्र सिंह पूछते हैं, स्त्री गृहस्थ में रहकर बिना गुरु किए क्या स्त्रियों को मुक्त होने की आज्ञा नहीं है? (P6-0181)
- संसार से मुक्ति कैसे हो? (P7-0007)
- रावत पूछते हैं, ब्रह्मा, विष्णु और महेश कौन हैं? क्या इनको भी मोक्ष मिला? ये बताएँगे क्या? (P7-0013)
- मनुष्य अपने कर्मों से कैसे मुक्त हो सकता है? (P7-0036)
- मोक्ष और मुक्ति में अंतर है या नहीं? (P7-0039)
- क्या गृह त्याग से ही मोक्ष मिलेगा, या गृहस्थ में भी मिल सकता है? (P7-0065)
- अच्छा कर्म करना है, ऐसा कहा गया। कर्म भी अच्छा और बुरा होता है, ये बात समझ में आ रही है। लेकिन धर्म और अधर्म क्या होता है? रास्ते में किसी को खाना दे दिया, तो धर्म लग रहा है। अनदेखा कर दिया, तो अधर्म। अगर उसे अच्छा या बुरा मान लिया, तो अटैचमेंट हो जाएगा, फिर मोह हो जाएगा। क्या उसे अपना कर्तव्य मानकर करना चाहिए, न अच्छा मानें न बुरा, ताकि फंसें नहीं? भाव ये है कि अच्छा-अच्छा कहते हुए मैं भोग में न फंस जाऊं। मुझे मुक्ति का मार्ग चाहिए, बंधन नहीं। मैं मानवता और कर्तव्य से काम करूं, पर अच्छा कहकर वहीं न अटक जाऊं। (P7-0080)
- गुरु जी, मोक्ष प्राप्त कैसे होगा? (P7-0124)
- क्या हम वास्तव में जीवित मनुष्य हैं, या हम केवल उस मानसिक पशु के खोल में कैद हैं, जो विवेक से शून्य हो चुका है, और जिसे अब एक शरीर से दूसरे शरीर में जाने का इंतजार है? यदि मुनि भी भ्रष्ट हो जाए, तो मुक्ति का हिसाब कौन करेगा? (P7-0127)
- लेन देन क्या है, जो मोक्ष में बढ़ा देता है? गुरु जी, कृपया इसके बारे में बताएँ। (P7-0133)
- गुरुदेव, मोक्ष और आत्मज्ञान में अंतर है क्या? (P7-0137)
- मुक्त होना क्या है? कृपा करके मार्गदर्शन करें। (P8-0028)
- पाप से मुक्ति कैसे मिले? (P8-0050)
- आत्मज्ञान के बाद मृत्यु होने पर मोक्ष हो जाता है? (P8-0063)
- लोभ से कैसे मुक्त हो जाऊं? ईमानदारी को जब से पकड़ा, तब से रिश्ते, दोस्त, बहुत सी आदतें खत्म हो रही हैं। क्या यह सही हो रहा है? (P8-0166)
- लोभ का गुरु कौन है? इससे मुक्त कैसे हो जाऊं? (P8-0175)
- शरीर भाव से कैसे मुक्त हों? (P9-0005)
- जिसके साथ मैं हूं, उसके अंदर मुझे संभालने का डर है। मैं उस पर इतना आश्रित हूं कि वह जीवन में कुछ नहीं कर पाता। गुलामी से मैं कैसे मुक्त होऊं? (P9-0014)
- प्रणाम गुरुदेव। सारे बंधनों से कैसे मुक्त हों? (P9-0052)
- इच्छा से कैसे मुक्त हो जाएं? (P9-0068)
- महाजीवन क्या है? यह कहा गया है कि तू ही सबका दृष्टा है और सदा मुक्त है, और तेरा बंधन यही है कि तू अपने को छोड़कर दूसरे को दृष्टा देखता है। इसी बात को सरल भाषा में समझाइए। (P9-0087)
- मुक्ति कुछ या किसी को पाकर नहीं मिलेगी, खुद को पाकर मिलेगी। मुक्ति ईमानदारी करके मिलेगी। क्या यह बात सही है? (P9-0090)
- गुरु जी, आपका कहना है कि उम्मीद से मुक्त होना है, उम्मीद ही भटकाव है। फिर आपके सत्संग के द्वारा आत्मज्ञान की उम्मीद भी तो एक उम्मीद है। कृपया मार्गदर्शन करें। (P9-0128)
- नेपाल में मेरा चित्त बहुत जाता है, पर मन इधर ही है, क्योंकि यहां बैठने से आत्मसमझ बढ़ रही है। नेपाल की याद आती है। वहां जाकर मुक्त होकर इधर आकर बैठूं, या वहीं रहकर रोज उसका सामना करूं, कौन अच्छा है? दोनों तरफ खिंचाव है, विचार बहुत आते हैं, तबीयत भी खराब होती है, फिर भी लगता है समझ बढ़ रही है। (P9-0183)
- गुरु जी, कामना से कैसे मुक्त हुआ जाए? (P10-0017)
- मुझे मोक्ष पाने के लिए ब्रह्मचर्य के पालन की क्या जरूरत है? (P10-0061)
- गुरु जी, क्या आप जैसे मुक्त पुरुषों को भी काम, क्रोध, लोभ सताते हैं? (P10-0076)
- मानसिक बंधन से पूरी तरह मुक्ति नहीं मिली है, लेकिन ऐसा लगता है कि 70% हट गया हूं। आपके सत्संग का असर है गुरु जी। बस अब संसार और उसके बंधनों से मुक्त होना है। (P10-0095)
- गुरु जी, समझना कब तक है और कब समझने से मुक्त होना है? (P10-0106)
- गुरु जी, ऐसा कौन सा काम है जो 24 घंटे किया जा सकता है और जो मुक्ति पक्की कर दे? (P10-0111)
- क्या समाज सेवा ही मोक्ष है? (P10-0118)
- गुरु जी, कभी-कभी जीते-जीते थक जाते हैं। लगता है कि हमसे ना हो पाएगा, मैं इस भव बंधन से मुक्त नहीं हो पाऊंगा। (P10-0125)
- क्या 100% मोह से मुक्त होने पर ही आत्मज्ञान होता है? (P10-0130)
- गुरु जी, दिमाग या काम ऊर्जा को मुक्ति की तरफ ले जाने के लिए कैसे उपयोग करें? (P10-0135)
- जब आपको सब कुछ नहीं पता, तो जन्म-मृत्यु से आप मोक्ष कैसे करवा रहे हैं? (P10-0159)
- गुरुदेव, अगर कोई छल-कपट से मुक्ति के लिए प्रयास कर रहा है, तो क्या उसे सांसारिक चीजें छोड़नी हैं? मेरा लाइफ स्टाइल बिल्कुल अलग है — मैं दोस्तों के साथ भी रहता हूं, सिनेमा भी देखता हूं। क्या यह गलत है? (P10-0166)
- गुरुदेव, माया के जगत में रहकर, माया से संयुक्त होकर मुक्ति कैसे संभव है? तीन लोक में जो भी दृश्यमान है, वह सब माया है। तो क्या आत्मसंयम, ईमानदारी — ये सब भी सांसारिक वस्तुएं हैं? (P10-0183)
- मैं सभी लेनदेन और वासनाओं से मुक्त होना चाहता हूं, लेकिन अंदर से भोग और भोजन को भोगने की प्रबल इच्छा बनी हुई है। मेरे लिए क्या आज्ञा है? (P11-0045)
- (कुटिया में साधक) हमें पता नहीं कि आत्मज्ञान, निर्वाण, मोक्ष क्या है। आत्मज्ञान से हमें क्या हासिल होगा, और उसके बाद जीवन कैसा होगा? सरल भाषा में बताइए। (P11-0049)
- इसका क्या पैमाना है कि हमें पता चले कि अब हम राग-द्वेष से मुक्त हो गए? (P11-0052)
- रसों से हमेशा के लिए मुक्त कैसे हों? (P11-0076)
- मुक्त व्यक्ति की क्या अवस्था होती है? (P11-0079)
- आत्मज्ञानी तो सबसे मुक्त हो गया, उसे कुछ नहीं चाहिए; फिर वह किस आधार पर संसार में रहता है? (P11-0093)
- कुछ गुरु धन, विद्या, मंत्र देते हैं, कथा-स्तोत्र से मोक्ष की बात करते हैं; क्या सिर्फ सत्कर्म से ही आत्मज्ञान हो जाएगा? (P11-0121)
- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष क्या है? (P11-0136)
- जन्म-मरण से मुक्त कैसे हों, और अंदर की प्यास और तड़प कैसे शांत हो? (P11-0137)
- क्या अपने ही स्वरूप को जान लेना मुक्ति है? क्या अपने स्वरूप को जानने के बाद कोई प्रयास नहीं करना पड़ता? (P12-0028)
- जिससे हम मुक्त होने वाले होते हैं, क्या वह अंत में पीड़ा देता है — चाहे कोई वस्तु हो, व्यक्ति हो, मन हो या शरीर? क्या यह बात ठीक है या मेरा भ्रम है? (P12-0035)
- सत्य कैसे मिले, और मुझे मुक्ति कैसे मिले? (P12-0065)
- "वही करता है" या "मैं ही करने वाला हूं" — क्या ये दोनों ही भाव मुक्ति की ओर ले जा सकते हैं? (P12-0075)
- शुभ कर्मों से शुभ कर्म बनता है और अशुभ से अशुभ; तो ईमानदारी-सत्कर्म से मुक्ति कैसे होगी? इससे भी तो प्रारब्ध बनेगा — क्या यह भी बंधन नहीं हो जाएगा? (P12-0078)
- किस एक चीज को निकाल देने पर सब कुछ धराशायी हो जाता है — जैसे बिल्डिंग की नींव खोदने पर पूरी बिल्डिंग गिर जाती है? क्या मुक्ति के मार्ग में ऐसा कुछ होता है? (P12-0084)
- पत्नी को हर वक्त डर रहता है कि पति झोला उठाकर चल ना दे। यह भी तो एक प्राणी को कष्ट देना हुआ; क्या ऐसे कोई मोक्ष या मुक्ति पा सकता है? (P12-0107)
- गुरुदेव, क्या यह आवश्यक है कि अध्यात्म या स्वयं की यात्रा में उस परम सत्ता का दीदार हो — या उससे भी मुक्त होना है, उसकी भी उम्मीद ना रखें? (P12-0193)
- गुरु जी, मुक्ति के लिए जप जरूरी है क्या? (P12-0195)
- मोक्ष कैसे होगा? और लेनदेन पूरा हो रहा है, यह कैसे पता चलेगा? (P13-0023)
- स्वामी जी, आपका ज्ञान एकदम आसान है — इंसान अगर समझ ले, तो उसके लिए जीते-जी मोक्ष है। (P13-0045)
- महाराज जी, मैंने आपका एक वीडियो देखा था जिसमें आपने कहा था कि राजा को पकड़ लो — सहस्रार चक्र को — और सबको छोड़ दो। मुझे लगा कि 'मैं' से बंधन है और 'मैं' से ही मुक्ति है। जब अपने 'मैं' को हटा देते हैं और परमात्मा का भाव आ जाता है, तो शुरू-शुरू में थोड़ा अनकंफर्टेबल फील होता है। जब उस तत्व पर, उस परमात्मा वाले में पहुंच जाते हैं, तो क्या उसके बाद नाम जप, मंत्र जप या किसी चीज की जरूरत होती है? (P13-0057)
- कहा जाता है सब स्वप्न है, ना ये सच है ना वो सच — तो फिर छल-कपट-छिद्र कहां से आ गए? और मुक्ति से पहले इस वाणी को ले लें तो क्या? (P13-0094)
- जो मुक्त आप हैं, हम क्यों नहीं? (P13-0097)
- क्या घर छोड़ने पर ही आपको मोक्ष तत्व सार सिद्ध हुआ? (P13-0098)
- योगी जी, मुक्ति और मोक्ष कैसे हो? (P13-0104)
- क्या आपकी जीवन-मुक्ति भक्ति के द्वारा ही सिद्ध हुई? (P13-0107)
- गुरु जी, मनुष्य का जन्म सिर्फ मोक्ष पाने के लिए ही हुआ है, या संसार की वस्तुओं को भोगते हुए जीवन जीने के लिए? (P13-0168)
- गुरु जी, माता-पिता का अपने बच्चों के प्रति जो प्रेम होता है, उसे क्या कहेंगे? और बच्चों के मोह से मुक्त कैसे हों, उनसे भी प्रेम कैसे करें? (P13-0188)
- गुरु जी, बाहर के पिंडों से मुक्त होने पर आत्मज्ञान होगा, और अपने शरीर से आसक्ति हटने पर ब्रह्मज्ञान — ये सही समझा? (P14-0041)
- गुरु जी, बेईमानी के कई प्रकार हैं। अगर एक भी बचा रह गया तो फिर भी नहीं पहुंचेंगे? पूरी तरह कौन मुक्त हुआ है? (P14-0052)
- गुरु जी, मुक्ति भी कुछ होती है? लोग मर जाते हैं तो परिवार वाले उन्हें मुक्त करवाते हैं — ये क्या है? और क्या कोई विशेष मुक्ति होती है? (P14-0061)
- गुरु जी, जो फंसे हैं क्या यह भी अस्तित्व की इच्छा है, या विकास-क्रम चल रहा है? मुक्ति तो निश्चित है, पर मुक्ति के बाद फिर यह चक्र शुरू होगा — फिर यह लीला क्यों? (P14-0093)
- गुरु जी, कर्म-बंधनों से मुक्त कैसे हों? (P14-0102)
- आत्मा को जानना ही मोक्ष है क्या? (P15-0003)
- मुक्ति किस नाम से मिलेगी? (P15-0102)
- ईमानदारी मुक्ति, बेईमानी बंधन — ये सब जान लेने के बावजूद भी, जब तक सत्कर्म नहीं करोगे, ताला खुलेगा नहीं? (P15-0104)
- गुरुदेव, अगर किसी का आखिरी समय आ गया हो तो उसमें मुक्त होने के लिए क्या करना चाहिए? कृपया मार्गदर्शन करें। (P15-0126)
- गुरु जी, क्या मरते टाइम भगवान का नाम लेने से मुक्ति मिलती है, अगला जन्म नहीं होता — जैसा शास्त्रों में बताया है कि "अंत मति सो गति"? (P15-0157)
- गुरु जी, क्या डर से मुक्त होने के लिए जिस काम से डर लगता है, वो काम बार-बार करना चाहिए? (P15-0160)
- क्या एक बार मोक्ष प्राप्त करने के बाद, सृष्टि के प्रलय के बाद जब परमात्मा अपना विस्तार फिर से करेंगे, तो क्या हम अपने स्वरूप में फिर से आ जाएंगे? (P16-0053)
- श्रावक बनकर, दुनियादारी में रहकर मुक्ति संभव है, या साधना जरूरी है? (P16-0090)
- गुरु जी, मोक्ष कैसे मिलता है? (P17-0052)
- गुरु जी, सबको प्रभु ही चाहिए — किसी को माल के लिए, किसी को मोक्ष के लिए। तो प्रभु सबको मोक्ष क्यों नहीं दे देता? प्रभु है क्या? (P17-0097)
- गुरु जी, आत्मज्ञान होने के बाद क्या व्यक्ति दोबारा उस बोध से वंचित हो सकता है, या फिर से इच्छाओं के कारण संसार के बंधन में फंस सकता है — जैसे पहली बार मूल से अलग हुआ था? और अगर फिर फंस सकते हैं तो ऐसी मुक्ति का क्या फायदा? (P17-0168)
- गुरु जी, "मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः" — मन ही बंधन और मोक्ष का कारण है। मन पर इंद्रियजीत कैसे हों — क्या प्रैक्टिस से अनुशासन बने कि मन बाधक न बने? (P18-0029)
- गुरु जी, ज्ञान कैसे प्राप्त होता है, मुक्ति कैसे होती है और वैराग्य कैसे जगता है? (P18-0068)
- गुरु जी, क्या भागवत कथा करवाने से पितरों को मुक्ति मिलती है? (P18-0069)
- गुरु जी, आप कहते हैं जो पाया है वह छोड़ दो — पर गृहस्थ जीवन में तो सब चाहिए, फिर क्या छोड़ें? और "चाहिए" वाले ध्यान से मुक्त हो गए तो दैनिक कार्य कैसे करेंगे? (P18-0095)
- गुरु जी, क्या मुक्ति संभव है, और वह कौन सी मुक्ति है? (P18-0099)
- गुरु जी, मैं मन के विचारों से परेशान हूं, मुझे मन से मुक्ति चाहिए। (P18-0107)
- गुरु जी, इस युग में जीवन का लक्ष्य कैसे चुनें? क्या अपनी इच्छाओं की पूर्ति करना गलत है? क्या भगवद गीता में कहे नियम में जीने से मोक्ष मिल सकता है? (P18-0108)
- गुरु जी, अगर हम खान-पान पर ध्यान न दें और सिर्फ लोगों से व्यवहार पर ध्यान दें तो क्या मोक्ष मिल सकता है? (P18-0161)
- गुरु जी, घर वाले शादी के लिए जिद कर रहे हैं, पर मुझे शादी नहीं करनी, खुलकर जिंदगी जीनी है और मुक्ति पानी है — मार्गदर्शन करें। (P18-0162)
- गुरु जी, गीता के गूढ़ शब्द आम आदमी समझ नहीं पाता — पूरी गीता पढ़कर भी समझ नहीं आता कि "मेरा" और कर्ता से मुक्त कैसे हों। तो क्या करें? (P18-0166)
- गुरु जी, सत्संगों में सत्कर्म के पीछे मुक्ति या मोक्ष जोड़ दिया जाता है — तो मुक्ति के लिए देना भी तो एक भावना/कामना हुई? (P18-0182)
- गुरु जी, सारे महापुरुषों ने मूल रूप से क्या सिखाया? जीते जी मुक्ति और मोक्ष कैसे होता है? (P19-0009)
- गुरु जी, कुछ सत्संगों में कहा जाता है कि अर्जुन को ज्ञान/विराट दर्शन तो हुआ पर मोक्ष नहीं हुआ — क्या यह सही है? (P19-0010)
- गुरु जी, सुना है परमात्मा फ्रीडम और भय से मुक्त होने से मिलता है — तो आपकी कुटिया में नियम, बंधन और भय क्यों? (P19-0026)
- गुरु जी, जब परमात्मा की ओर दृष्टि जाती है कि हमें मुक्त होना है, तो वहां भी तो मन ही लेकर जाता है? और परमात्मा में मन उतनी ही देर लगता है जितनी देर संसार में, फिर हट जाता है — क्यों? (P19-0030)
- गुरु जी, आत्मज्ञान होने के बाद भी जवाब देना पड़ता है — क्या इसका मतलब यात्रा आत्मज्ञान के बाद भी गिर सकती है? मुक्ति-मोक्ष की स्थिति में जा रहे हैं और वापस भी गिर सकते हैं? (P19-0057)
- गुरु जी, अब मुक्ति-मोक्ष दे दो — जवानी में ऊर्जा गंवा दी, शरीर की ताकत नहीं। (P19-0081)
- गुरु जी, जो राग-द्वेष से मुक्त हैं क्या वे सभी भगवान हैं? और हम कृष्ण-राम को ही क्यों पकड़ लेते हैं? (P19-0087)
- गुरु जी, मेरा और कर्ता के भाव से कैसे मुक्त हों, अच्छे से समझाइए। (P19-0127)
- गुरु जी, मुक्ति के बाद क्या है? (P19-0187)
- गुरु जी, परमात्मा को पाने के लिए क्या करें, और द्वंद्व से मुक्त होने का उपाय क्या है? (P19-0192)
- गुरु जी, क्या पाप-पुण्य का पूरा भोग लेना ही मोक्ष है? (P20-0014)
- गुरु जी, मुझे संसार से मुक्त होना है — सबको दुखी छोड़कर आनंद कैसे करूं? (P20-0058)
- गुरु जी, घर में रहते हुए मुक्त कैसे हो सकते हैं, और क्या एकांत जरूरी है? (P20-0101)
- क्या आप सेवा करने वाले को पुण्य या मुक्ति का आश्वासन देते हैं? (P20-0124)
- घर में बिना मेरी गलती के अपमान होता है, दिल पर ठेस लगती है, भोजन भी जहर लगता है, न वह जगह छोड़ पाती हूं न मुक्त हो पाती हूं — ऐसे में क्या करूं? (P20-0146)
- स्व को जाने बिना मोक्ष पद नहीं मिलता — यही मेरा अनुरोध था? (P21-0020)
- गुरु जी, आपने कहा था ध्यान करना नहीं है, ध्यान से मुक्त होना है — पर जो चीज पूरी नहीं हुई, ध्यान तो बार-बार उधर ही जाएगा ना? (P21-0107)
- गुरु जी, आत्मा से कैसे मिलें, अंदरूनी स्थिति को कैसे बदलें, बाहरी भौतिक चीजों से कैसे मुक्त हों और आत्मा का अनुभव कैसे करें? (P21-0144)
- गुरु जी, मुक्ति और मोक्ष दो अलग चीजें हैं या एक ही? मुक्ति के लिए हम कैसे साधना करें? (P21-0166)
- गुरु जी, मोक्ष क्या है, मोक्ष का मतलब क्या है? (P21-0197)
- गुरु जी, मुक्ति गुरु मिलने से ही मिलेगी, या मैं अपने आप को खुद ढूंढ सकता हूं? (P22-0003)
- गुरु जी, मुक्ति पाने के लिए हम विष्णु सहस्रनाम और कुछ मंत्र बोलते रहते हैं — क्या उससे हम मुक्ति पाते हैं, ये सही है या नहीं? (P22-0004)
- महात्मा जी, मैं जब भी परमात्मा का नाम जप करता हूं या ध्यान में होता हूं तो मुझे अपने गुरु के प्रति बुरे विचार आते हैं; ऐसा बार-बार होता है। ऐसा क्यों होता है? मैं इससे मुक्त होना चाहता हूं। (P22-0021)
- गुरु जी, जिन महापुरुषों ने ब्रह्मानंद पाया, क्या वे वृद्धावस्था और बीमारी से होने वाली पीड़ा से मुक्त हो पाए? (P22-0031)
- गुरु जी, मैं एक साल से रोज 13,000 नाम जप कर रहा हूं; अपना कल्याण कैसे करूं? मुझे मोक्ष प्राप्त करना है, कैसे करूं? (P22-0074)
- गुरु जी, अल्टीमेट तो ध्यान से भी मुक्त होना है, लेकिन हर काम के लिए ध्यान जरूरी है — तो यह कैसे होगा? (P22-0117)
- महाराज जी, दर्शन करना है तो मुक्त हुए का करना है — लेकिन हमको कैसे पता चलेगा कि कौन मुक्त हुआ है? (P22-0197)
- गुरुदेव, अगर हम देखें तो लगभग 90 प्रतिशत मनुष्य अपना कल्याण ही चाहता है और मुक्त होना चाहता है, लेकिन फिर भी देखने में यह आता है कि अध्यात्म और सच्चाई पर कुछ दूर ही चल पाता है — ऐसा क्यों? (P23-0019)
- गुरु जी, मैं कामनाओं से मुक्त होना चाहता हूं, उसके लिए क्या करना है? (P23-0020)
- गुरु जी, उपलब्धि के बाद भी लोगों ने भोजन मांगा — भूख लगी, भूख का विचार आया, तभी भोजन मांगा। तो विचार से मुक्त कैसे होते हैं? (P23-0022)
- गुरुदेव, आपका कथन सही है कि व्यक्ति कामनाओं, मोह और उनके बंधनों में फंसा हुआ है। तो जो व्यक्ति दिन भर ईमानदारी से मजदूरी करके अपने परिवार का पेट भरता है, क्या वह मुक्त है, या कुछ और मार्गदर्शन करें? (P23-0028)
- गुरु जी, गृहस्थ में रहकर मुक्ति पाने के लिए कोई सरल उपाय बताइए। (P23-0052)
- गुरु जी, क्या मौन ही परम है? क्या मौन में बैठे रहने से जीवन-मुक्ति और मोक्ष सिद्ध होगा? (P23-0131)
- गुरु जी, लोग बहुत लालची हो गए हैं, पैसों के लिए मानवता भी बेच देते हैं। जीवन है तो रोजाना कई लोगों से लेनदेन भी होता है। ऐसे लालची लोगों से स्वयं को कैसे निकालें, इस राग-द्वेष से कैसे मुक्त हों? (P23-0132)
- गुरु जी, उम्मीद से कैसे मुक्त हुआ जाए? आत्मज्ञान भी तो एक उम्मीद है। (P23-0137)
- गुरु जी, क्या आप अपनी पारिवारिक-सामाजिक पहचानों और बंधनों से मुक्त हो? (P23-0155)
- गुरु जी, क्या विवाह करके भी कोई मुक्त हो सकता है? (P24-0050)
- गुरु जी, मुक्ति और मोक्ष में डिफरेंस क्या है? (P24-0055)
- गुरु जी, एक स्टूपिड सा क्वेश्चन — क्या आप किसी को देख के बता सकते हैं कि ये मुक्त हो जाएगा या नहीं होगा? (P24-0056)
- गुरुदेव, ध्यान में सांसों पर ध्यान करते हैं, बोलते हैं इसी से मुक्ति मिलेगी — गौतम बुद्ध को भी इसी से मिली थी। क्या ये सही है? (P24-0059)
- गुरुजी, क्या एकाकार और मोक्ष एक ही हुआ? (P24-0068)
- गुरु जी, एक भोग की इच्छा बाकी है और एक जिम्मेदारी है, उसके अलावा संसार नहीं चाहिए। तो क्या भोग और भोग से मुक्ति — ये दोनों यात्राएं एक साथ चल सकती हैं? कृपया मार्गदर्शन कीजिए। (P24-0097)
- गुरु जी, सेवा करके हमें मुक्त होना है, या मुक्त होकर सेवा करनी है? (P24-0100)
- गुरु जी, मैं हमेशा यही बोलती हूं कि मुझे अब शरीर नहीं चाहिए, मुझे मुक्ति चाहिए। तो क्या ऐसा कहने से दोबारा शरीर नहीं मिलेगा? (P24-0120)
- गुरु जी, मोक्ष मार्ग पर 99% साधक क्यों फेल होते हैं? (P25-0002)
- गुरु जी, सामर्थ्यवान आदमी यदि मोक्ष मार्ग पर चलना चाहता है, तो निर्विकार होने में कितने साल लग जाएंगे? (P25-0003)
- गुरु जी, क्या बिना गुरु के मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है? (P25-0024)
- गुरु जी, क्या ईमानदारी और सत्कर्म से हम मोक्ष, परमात्मा तक अवश्य पहुंच जाएंगे, या साधना में चलते-चलते धीरे-धीरे पता चलेगा? कृपया विस्तार से समझाएं। (P25-0031)
- गुरु जी, मुझे कुछ नहीं चाहिए — पर क्या मुक्ति की कामना करना भी गलत है? क्या मुक्ति की चाहना भी कामना में आती है? (P25-0033)
- गुरु जी, मुक्ति कैसे मिलेगी? (P25-0037)
- गुरु जी, बच्चा जब पैदा होता है तो अबोध होता है, उसमें कोई वासना नहीं होती। फिर जो वासनाएं आती हैं, क्या वे प्रकृति की हैं — क्या प्रकृति ने हमें ऐसा बनाया कि वासनाएं हों और फिर हम उनसे मुक्त हों? (P25-0053)
- स्वामी जी, क्या मुक्ति ईमानदारी से ही होती है? तो क्या ईमानदारी से बंधन नहीं होगा? (P25-0057)
- गुरु जी, एक तरफ आप कहते हैं कि कर्मों का बंधन है, जो किया उसे भोगना पड़ेगा; दूसरी तरफ कहते हैं कि उम्मीद से मुक्त हो जाओ तो अभी मुक्त हो सकते हो। तो वह बंधन कहां जाएगा? ये दोनों बातें विरोधी नहीं हैं? (P25-0062)
- गुरु जी, यह सिर्फ बौद्धिक बात तो नहीं है? आप सभी को बोलते हो कि उम्मीदों से, वासनाओं से अपने आप को मुक्त करा लो। (P25-0063)
- गुरु जी, मन के नेगेटिव विचारों से मुक्ति कैसे पाऊं? (P25-0066)
- गुरु जी, मैं समझ से पैसे और बिजनेस से मुक्त हो गया हूं, अब उसमें मेरा कोई अटैचमेंट नहीं रहा। उससे जो भी पैसा आ रहा है, मुझे वह नहीं चाहिए। क्या फिर भी कोई भरपाई बाकी है? (P25-0095)
- गुरु जी, समझ से मैं पैसे और बिजनेस से मुक्त हो गया — ना कोई अटैचमेंट है, ना कोई जरूरत। पर शारीरिक संबंधों में, काम वासना में या बच्चों के मोह में यह चीज सिर्फ समझ से पूरी नहीं हो रही। क्या करूं? (P25-0096)
- गुरु जी, मुझे इस संसार से हमेशा के लिए मुक्त होना है, खुद में रहना है। सबसे जल्दी वाला रास्ता बताओ। (P25-0127)
- गुरु जी, कोई आदमी 60-70 साल के बाद समझे और समर्पण कर दे, जितना पद से कमाया वो सत्कर्म में लगा दे और बोलचाल में ईमानदार रहे — क्या वो इसी जन्म में मुक्त हो सकता है? (P25-0142)
- गुरु जी, मोक्ष के तीन सोपान — विदेह (जैसे राजा जनक), प्रकृति-लय और ब्रह्म-लय — इनमें श्रेष्ठ कौन सा है? ब्रह्म में लय होने के बाद क्या जीव का अस्तित्व रहता है? (P26-0046)
- गुरु जी, क्या मोक्ष के बाद जीव वापस जन्म-मरण में आएगा? कभी तो हम उसके पास थे, तभी तो आए। (P26-0047)
- गुरु जी, यदि जीवन में कोई बड़ा पाप हो गया हो, तो उससे कैसे पाप-मुक्त हों? (P26-0090)
- गुरु जी, जन्म और मृत्यु से कैसे मुक्त होते हैं? (P26-0101)