आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

साधना — योगी गुरु जी के प्रश्नोत्तर

इस पृष्ठ पर “साधना” विषय से जुड़े 338 प्रश्न हैं, जो जिज्ञासुओं ने सत्संग में योगी गुरु जी से पूछे। किसी प्रश्न पर क्लिक करके योगी गुरु जी का पूरा उत्तर उनके अपने शब्दों में पढ़ें, वीडियो के साथ।

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  1. संत और योगी की साधना एक है या अलग-अलग? क्या दोनों का अनुभव एक ही होता है? (P1-0008)
  2. गुरु जी, कभी लगता है कि मैं (साधना के लिए) वहां बैठा हूं और मेरी गाड़ी कोई दूसरा चला रहा है, या मेरी कमाई कम हो जाएगी जो किसी के काम आ सकती थी। क्या करूं? (P1-0011)
  3. (साधक:) मेरी (आत्मिक कल्याण की) इच्छा तो काफी है। लग रहा है कि जो रास्ता चाहिए था, वह अब मिल जाए। (P1-0047)
  4. (साधना में) चल तो रहा हूं, लेकिन पता नहीं चल रहा कि कहां तक पहुंचा। (P1-0144)
  5. मैं एक संत से मिला और बताया कि गुरु जी के पास जाकर साधना करूंगा। उन्होंने कहा कि दो मार्ग हैं — पूरी तरह छोड़कर जा सकते हो, या घर में रहकर कर सकते हो; तुम्हारी मां के प्रति आसक्ति और चिंता है, उधर चले गए तो वह चिंता नहीं छोड़ेगी और सिद्धि नहीं मिलेगी, इसलिए कर्तव्य-जिम्मेदारी निभाते हुए आगे बढ़ो। इस पर आप क्या कहेंगे? (P1-0149)
  6. गुरु जी, आपने चिंतन बताया है। उसके अलावा किसी और साधना में बेईमानी, लालच नजर आता है और मैं भ्रमित हो जाता हूं। पर सत्कर्म और ईमानदारी को मूल रखता हूं। (P1-0163)
  7. गुरु जी, क्या अब साधना के लिए हरियाणा (कुटिया) आ सकते हैं? (P2-0050)
  8. गुरुदेव, मां के साक्षात्कार के लिए क्या मुझे अलग से पूजा-पाठ, कर्मकांड, साधना आदि करने होंगे, जैसे आपने किए? या केवल आपके बताए मार्ग पर चलते रहने से ही मुक्ति हो जाएगी? (P2-0078)
  9. गुरु जी, एकांत में रहकर कैसे साधना करें? (P2-0149)
  10. (साधना के कठिन दिनों में) जब आपके कपड़े भी ऐसे (फटे-पुराने) थे, तब आप अपने आप को कैसे संभालते थे, उस समय क्या सोचते थे? दुख तो बहुत होता होगा? (P2-0179)
  11. एक जिज्ञासु, साधक या भक्त — जो शास्त्र पढ़ रहा हो, आत्मचिंतन कर रहा हो या अपनी विधि से कुछ भी कर रहा हो — कैसे जांचे कि वह ऊपर जा रहा है या नीचे? (P2-0194)
  12. जब साधना में कुछ प्रत्यक्ष होने लगे — तंत्र, मंत्र, परिणाम — तो लालच आता है और दौड़ कई गुना बढ़ जाती है। वो गति कैसे बनाए रखें? (P3-0007)
  13. एक साल साधकों को बहुत समय दिया; अब स्पेस कहां — ज्ञान रूपी बीज कहां बोएं कि दरख्त बने? हम अंदर स्पेस/प्रबल जिज्ञासा कैसे बनाएं? (P3-0013)
  14. आपने प्लास्टिक कुटिया से शुरू करके अब बहुत बड़ा प्रोजेक्ट — जमीन, निर्माण, साधकों की व्यवस्था — दिन-रात मेहनत; क्या आपको थकान नहीं होती? (P3-0016)
  15. साधक गुरु के प्रेम-ज्ञान से भरकर कुछ अर्पण करना चाहे — कंबल आदि वस्तु या भाव — तो गुरु को क्या दे कि वह भाव पूजा बन जाए? व्यक्तिगत गुरु को क्या चाहिए? (P3-0035)
  16. एकांत साधना में उदासी-बोरियत-रोना — प्लस है या मानसिक रोग? कैसे जांचें यात्रा हो रही? (P3-0044)
  17. साधना में आप ऊपर वाले से कहते थे — मुझ पर कृपा मत करना, खुद खोज लूंगा। हम छोटी चीजों पर भी भगवान कृपा कर कहते भिखारी क्यों हैं? मार्गदर्शन करें। (P3-0061)
  18. पड़े रहना क्या साधना है? भगवान हमारे कर्म देख रहे? गलतियां कैसे स्वीकारें? (P3-0066)
  19. दूर बैठे साधक गलतियां कैसे स्वीकारें जब गुरु पास न हों? बंधन क्या? (P3-0067)
  20. अध्यात्म मार्ग पर सिर्फ अपना देखना — कुतर्क/दूसरों में फंसना कैसे छोड़ें? दूर बैठे साधक गुरु से कैसे जुड़े? (P3-0076)
  21. एक साधक (एक महीने से आश्रम में): पहले बिजनेस-जॉब की छोटी-छोटी बातों में बहुत व्यस्त रहता, बहुत सोचता था; यहां आकर विचार शांत हो गए, अंदर पवित्रता का एहसास हो रहा है। बेईमानी आदि का खाने-पीने पर कितना असर पड़ता है? आपने तीन गुण बताए — वे कर्म से होते हैं या खाने से? (P3-0105)
  22. एक साधक ने अनुभव बताया: दीपावली पर पूजा के लिए रखी नए नोटों की गड्डी सत्संग सुनकर निकाली और एक जरूरतमंद को नया नोट दिया, तो देने और लेने दोनों में भाव बहुत पवित्र हुए। फिर प्रश्न — घर या आश्रम में जाकर दान लिखवा आते हैं, तो वह सत्कर्म में आता है या किस कर्म में? (हमारा किराने का बिजनेस है, ज्यादातर ऐसी जगह अनाज भेज देते हैं।) (P3-0107)
  23. (लाइव) क्या गुरु के शरीर त्यागने के बाद भी गुरु के वचनों पर चलने से नया साधक आत्मज्ञान को प्राप्त हो सकता है? (P3-0147)
  24. गुरु जी, दो-तीन महीने साधना से लग रहा है कि मैं काम-क्रोध से दूर जा रहा हूं; अकेले में लगता है मैं कंट्रोल कर सकता हूं, लेकिन जैसे ही उस परिस्थिति के बीच आते हैं, कंट्रोल नहीं रहता, हम उसके वश में चले जाते हैं — अपने आप कुछ घटित हो जाता है। उस समय क्या करें? मन (माइंड) को कैसे कंट्रोल करें, और काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह से कैसे छूटें? (P3-0152)
  25. (लाइव) गुरु जी, क्या अपने आप को साधना भी सत्कर्म कह सकते हैं? (P3-0167)
  26. (कुटिया में, इंदौर से आए 75 वर्षीय साधक) मैं पहले भी अध्यात्म में बहुत चला — साधना करो, यज्ञ-हवन करो, साधना से प्रकाश आएगा, भगवान का दर्शन होगा — पर समझ नहीं आया। 13 दिन से आपके वीडियो दिन-रात सुनकर समझ आया कि प्रत्यक्ष ज्ञान में चार-पांच ही बातें हैं; मैं करूंगा तभी होगा, किसी और के करने से नहीं; मैं ही हूं, कहां जाऊं। इसलिए घर से रोटी बांधकर सीधा चला आया। अंतिम इच्छा यही है कि आप रखो तो यहीं रह जाऊं। गुरुदेव, इससे आगे क्या है? (P3-0174)
  27. (कुटिया में, राजस्थान बारां से आए साधक) मेरी एक आदत है — मैं स्वाद में पड़ा हुआ हूं; पेट भर जाने के बाद भी किचन में जाकर और खा लेता हूं, तृप्ति नहीं होती। छोड़ना चाहता हूं पर छोड़ नहीं पा रहा। यहां की व्यवस्था में स्वाद नहीं मिलेगा, इसलिए आया हूं कि सात दिन में यह आदत छूट जाए; पर रुकना नहीं हो रहा, मैं सुबह ही वापस जा रहा था। (P3-0175)
  28. (कुटिया में साधक भावुक होकर रोने लगा) बाबा, यह क्यों रोती है? (P3-0176)
  29. (कुटिया में, तीसरी बार आए साधक) यहां के सिवा वहां कुछ नहीं है; मजबूरी में घर जा रहा हूं क्योंकि परिवार है, लड़का 12 साल का है — आपने बताया कि बच्चों की शादी तक जवाबदारी निभानी है। पर वहां अपने जैसे लोग और माहौल नहीं मिलता, जाने में बहुत तकलीफ होती है; यह मजबूरी बिल्कुल अच्छी नहीं लगती, वहां के लोगों के साथ रहने में बहुत दिक्कत होती है। (P3-0177)
  30. (कुटिया में, 62 वर्षीय साधक) 30-40 साल पूजा-पाठ किया — रोज हनुमान चालीसा, दुर्गा सप्तशती, काली स्तोत्र, चारों धाम घूमा — पर कुछ नहीं मिला। तांत्रिक लाखों रुपए खा गए, कोई झगड़े नहीं सुलझा पाया; 15-20 लाख का कर्जा है, केस चल रहे हैं, बहुओं वाले झगड़ों से घर बिखर गया। हमने जीवन में किसी का बुरा नहीं किया, किसी को परेशान नहीं किया — फिर हमारे साथ ऐसा क्यों हुआ? पत्नी ने ही धक्का देकर यहां भेजा है। (P3-0178)
  31. (वही साधक) मेरी पत्नी अनपढ़ है, कुछ समझती नहीं; लोग उसका अपमान करते हैं कि अनपढ़ है। (P3-0179)
  32. (कुटिया में साधक) जैसे आप हमारे साथ बोलते हो, वैसे प्रभु या भगवान — अगर कोई होगा — तो मुझसे ऐसे ही बोलेगा ना, तभी तो होगा? क्या वह देहधारी बनकर मुझसे बोलेगा? वैसे तो हर प्राणी में, अलग-अलग रूप में वह हमारी मदद करता ही है, किसी ना किसी के रूप में मिल जाता है — जानवर में, गुरु में, मां में। (P3-0180)
  33. (कुटिया में साधक) आप तो भगवान के पद को प्राप्त हुए; आपने वीडियो में बताया कि उस स्थिति में आने के लिए आपने कितनी मेहनत की। बाकी सबने वेदों के पठन आदि से ज्ञान लिया, पर आपके यहां तो खाली प्रत्यक्ष ज्ञान का मूल — ईमानदारी, सत्कर्म और सत्संग — है। क्या इतने से हो जाएगा, और जीवन में गुरु की कितनी जरूरत है? (P3-0181)
  34. (कुटिया में साधक) आज भ्रष्टाचार शिष्टाचार बन रहा है, (बेईमानों को) पुरस्कार मिल रहे हैं; ईमानदारी से पुलिस की नौकरी करना बहुत तकलीफ में आ रहा है, हम शिक्षकों को भी बहुत तकलीफ हो रही है — हमें दिखाना पड़ता है कि हम ईमानदार हैं। समूह ज्यादा है, बड़े अफसर कहते हैं नीचे से ऊपर तक की व्यवस्था ऐसे ही चलनी चाहिए। ऐसे में क्या करें? (P3-0182)
  35. (कुटिया में साधक) जैसे आप बोलते हैं कि जन्म-मृत्यु के चक्कर से निकलना है — तो अगर काम करते-करते निकल गए, तो फिर कहां जाएंगे? (P3-0183)
  36. (कुटिया में साधक) आप आत्मज्ञान, आत्मचिंतन, आत्मबोध, आत्मा और जीव की बात करते हैं — ये ज्यादा समझ में नहीं आते। आत्मा हम तो हैं, यह समझ में आता है, लेकिन ये आत्मा कहां पर है? इन्हें थोड़ा क्लियर कर दीजिए। क्या मैं ही सब कुछ हूं? और क्या हमें फिर से बच्चे जैसा (सारी जानकारी से खाली) हो जाना है? (P3-0184)
  37. (कुटिया में साधक) गुरु जी, कल के सत्संग में आपने बताया कि जो समय चल रहा है, उस समय से पीछे आना है — एक सेकंड, आधा सेकंड पीछे। उसके बारे में थोड़ा बताइए। क्या कुछ नहीं चाहिए में आएंगे तभी होगा, या इसमें कुछ रहस्य है? (P3-0190)
  38. (वही साधक) आपने बताया कि धारणा को भी तोड़ना है, ध्यान से भी मुक्त होना है — धारणा, ध्यान, फिर समाधि, फिर तुम, फिर ब्रह्म। तो समाधि वाली स्थिति में कैसे पहुंचा जा सकता है, वो कब आती है? कितने दिन बाद आती है, कितनी देर रहती है? आत्मज्ञान का अनुभव और समाधि का अनुभव — दोनों अलग होते हैं या एक ही? और समाधि में शरीर का भान रहता है या नहीं? (P3-0191)
  39. (कुटिया में साधक) गुरु जी, आप परसों बोल रहे थे कि जब ये शरीर छोड़ के जाओगे तो कहां जाओगे, वो सोचो। मान लो मैं समझ लूं कि मैं परमात्मा के पास जाना चाहता हूं? (P3-0192)
  40. (कुटिया में साधक) अगर समाधि अवस्था में ही प्राण निकल जाएं, तो क्या होगा? (P3-0194)
  41. (कुटिया में साधक) मुझे लगता है जीवन की यात्रा अनंत से अनंत है और जीरो उसका सेंटर पॉइंट है (जिसे शांति या समाधि कहते हैं)। अच्छे कर्म करने वाला प्लस साइड — अच्छी जगह, अच्छी विचारधारा के लोगों में — जन्म लेता है; बुरे कर्म वाला माइनस साइड — दूसरी योनियों या वैसी विचारधारा के लोगों में — जाता है; ऐसे ही सर्कल घूमता रहता है। यह सर्कल टूटे कैसे? मुक्त हो गए तो फिर हम कहां होंगे — आत्मा कहीं तो होल्ड करेगी? और धरती पर 9-10 हजार करोड़ लोग जन्म ले चुके, अभी 900 करोड़ जिंदा हैं — बाकी की आत्माएं कहां गईं? (P3-0195)
  42. (कुटिया में साधक) आपने एक सत्संग में बोला था कि अध्यात्म में नर्क मांग लो — नर्क की लाइन में लग गए तो धुलना शुरू हो जाओगे। इसका अर्थ समझाइए। (P3-0196)
  43. (लाइव) नर्मदे हर गुरु जी। अपने आप में होने के लिए साधना कैसे करें? मार्गदर्शन करें। (P3-0197)
  44. (कुटिया में साधक) भगवान, हम तो आपसे (इतना) ले रहे हैं — हम आपके लायक थोड़ी हैं; क्या यह भी योग्यता से ज्यादा लेना नहीं हुआ? (P4-0018)
  45. (कुटिया में साधक) मेरा पहले वाला प्रश्न अधूरा था — जब आदमी निर्विचार-निर्विकार अवस्था में (देह छोड़कर) जाता है, तो आत्मा की बात नहीं, उसकी जो सूक्ष्म बॉडी है, वो फिर कहां होल्ड होती है? कहीं ना कहीं तो जाती होगी; अगर होल्ड नहीं होती तो फिर उसे नया जन्म तो लेना ही पड़ेगा? जैसे कहते हैं कि वह परमात्मा के पास जाती है। (P4-0049)
  46. (कुटिया में साधक) श्री कृष्णा गुरु जी। आपने एक प्रसंग में बोला था कि आत्मज्ञान के बाद फिर परमात्मा की यात्रा शुरू हुई; हम तो अभी तक यही समझते थे कि आत्मज्ञान के बाद सब खत्म हो जाता है। (ओशो ने भी एक सत्संग में यह बोला है।) क्या इसका भी कोई टाइम पीरियड है? (P4-0050)
  47. (कुटिया में साधक) किसी को 5 से 10 मिनट के लिए समाधि लगेगी, आत्मज्ञान कब होगा पता नहीं — बीच के उस समय को क्या कहेंगे? क्या वह समय के पार हो गया है? क्या विचार है तो समय है? (P4-0051)
  48. (कुटिया में, जबलपुर से आए साधक, जो पहले भी दो-तीन बार आ चुके थे) मुझे लगा कि ज्यादा बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है; यात्रा निरंतर बनी रहती है। बस (अपने आप में) होना है। (P4-0052)
  49. (कुटिया में साधक) बातें गहरी हैं; चार लोगों के सामने बातें कर लेना आसान होता है। मुझे लगता है, अगर मरने से पहले तक वो अनुभूति नहीं हुई, तो सब समय बर्बाद ही किया। तो क्या अनुभूति के बाद (आगे का) रास्ता शुरू होगा? (P4-0053)
  50. (वही साधक) ये विचार कितने खेल खेलते हैं — अनुभूति को भी हम ‘अनुभूति’ बोलकर खराब कर देते हैं। तो क्या मौन रहें? (P4-0054)
  51. (लाइव) महात्मा जी प्रणाम। अगर रोग आए, तो चुपचाप अपना कर्म समझकर सह लेना चाहिए, या रोग के इलाज के लिए दूसरों से हाथ जोड़ना चाहिए? (और एक साधक का प्रश्न) परमात्मा के शरणागत होने के बाद क्या रोग परमात्मा पर ही छोड़ देना चाहिए? (P4-0056)
  52. (कुटिया में साधक) जैसे नदियों का पानी समुद्र में जाता है, वैसे हम (ऊर्जा) मूल में जाते हैं — पर समुद्र का पानी बरसात बनकर फिर नदी में आ जाता है, तो यह चलता ही रहता है। और सूरज से सुबह से शाम तक जो रोशनी (ऊर्जा) निकली, वह यहीं यूज़ हो गई; सूरज चाहकर भी उसे वापस नहीं ले सकता, और वह भी चाहकर सूरज तक नहीं जा सकती। तो क्या यह उदाहरण यहां सेट नहीं होता? (P4-0059)
  53. (कुटिया में साधक) गुरु जी, अपने आप में ओंकार का नाद (ओंकार-सतनाम की ध्वनि) — यह कब (सुनाई देती है)? क्या ओंकार की ध्वनि आत्मज्ञान के पहले सुनाई देती है या आत्मज्ञान के बाद? वह तो खुद-ब-खुद बजता है, उसे अनाहत कहते हैं। (P4-0060)
  54. (कुटिया में साधक) आज का युवा — जो यूपीएससी या कोई बड़ी तैयारी कर रहा है, या कॉर्पोरेट में जॉब कर रहा है — उसमें एक ट्रेंड देख रहा हूं कि अपने कर्तव्यों को छोड़कर कहीं एकांत में, या किसी की शरण में भाग जाता है; और जानने-समझने के बाद भी वापस नहीं आता। अगर किसान खेती छोड़ दे, सब ऐसे अकर्मण्य हो जाएं, तो व्यवस्था कैसे चलेगी? वे भटक रहे हैं; आप उन्हें कुछ मार्गदर्शन देंगे? (P4-0061)
  55. (कुटिया में साधक) आश्रम की आर्थिक व्यवस्थाएं कैसे चलती हैं? (P4-0062)
  56. (कुटिया में साधक) (आपने) कुत्ते क्यों पाले हैं? (P4-0063)
  57. (कुटिया में साधक) कोई तो भगवान रूप लेता है — जैसे दस अवतार बोलते हैं, वे सब यहां अवतरित हुए। तो अवतार क्या है? (P4-0064)
  58. (कुटिया में साधक) मैं एक मां को गले लगा रहा हूं, एक पत्नी को गले लगा रहा हूं — दोनों में भाव का अंतर रहता है। तो ये भाव कैसे प्रकट होता है? (P4-0065)
  59. (कुटिया में साधक) हम जो ऑक्सीजन लेते हैं, वह किस तरह से पैदा हुआ? हम सोच रहे थे — बीज से वृक्ष, वृक्ष से बीज — बीज कहां से आया, वृक्ष कहां से आया? (P4-0066)
  60. (कुटिया में, एक शिक्षक साधक) आप (किसी शहर में) तीन दिन — रोज दो घंटा — सत्संग के लिए आ सकते हैं? (गोयल जी ने 6 लाख देकर सत्संग कराया था।) मन तो है कि मैं भी करवाऊं, लेकिन इतनी ताकत नहीं — 1 लाख पगार है, पर साथ में 10 लाख का कर्जा है। और हम (घर-परिवार से) अलग में हैं, इसलिए भगवान का भाग निकालना समझ में आता है। (P4-0067)
  61. (कुटिया में साधक) जो आपका वीडियो चलता है, अगर हम रोज देखते हैं, तो क्या हमें (चैनल को) कुछ देना चाहिए? क्या कोई सब्सक्रिप्शन/मेंबरशिप है, जिससे लाइव देखने पर आपको पैसे मिलते हैं? एक लड़का (चैनल पर) सुपर थैंक्स लगाता है — क्या वह आपको मिलता है? (P4-0068)
  62. (कुटिया में साधक) गुरु जी, आप कुछ बोल रहे थे — वो मैं जानना चाह रहा था कि आसन में कैसे नहीं बैठते? मतलब बैठने में हम क्या गलती कर देते हैं? (P4-0078)
  63. (कुटिया में साधक, उज्जैन से) मैं 2017 में घर से एक साल के लिए निकल गया था। ओशो की विधियां (डायनामिक मेडिटेशन आदि) बहुत ऊर्जा देती थीं, उसमें मैं घबरा गया, एकांत में डर भी लगता था, फिर वापस संसार में लौटा — ना संसार का रहा, ना सन्यास का। बेचैनी, चिंता, तनाव, अनिद्रा, फिर सिगरेट-शराब भी लगी; डॉक्टर की दवाइयों के बाद मेरा दिमाग सुन्न हो गया। बहुत प्रयास किए, कई जगह पूछा। अब दिमाग सुन्न पड़ा है, कोई भावना ही नहीं उठती, शरीर में ताकत भी नहीं बची — अब क्या करूं? (P4-0079)
  64. (कुटिया में साधक) जब मैं खोज रहा था तो किसी ने कहा एक फकीर बाबा से मिलो। उन्होंने कहा कि कुरान पढ़ो, वही आखिरी किताब है, उससे ज्ञान की प्राप्ति हो जाएगी। मैंने पूछा कि हमारी किताबों में पुनर्जन्म का कांसेप्ट है, कुरान में नहीं — तो उन्होंने कहा कि हम सिर्फ एक ही बार आए हैं, रूहें एक जगह रहती हैं, कयामत के दिन सब जागेंगे। मैं यह जानना चाहता था कि जिस ज्ञान की आप बार-बार बात करते हैं, क्या अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग तरह का ज्ञान मिलता है, या सबको एक ही तरह का ज्ञान मिलता है? (P4-0091)
  65. (लाइव) योगी जी प्रणाम। बहुत से साधक आध्यात्मिक मार्ग में कल्पनाओं में जीते हैं। क्या वास्तव में हमारा कल्याण केवल दुख के नाश से होगा, ना कि किसी चमत्कार से? (P4-0092)
  66. (कुटिया में साधक) योगी जी, हमने इतनी भारी जानकारियां इकट्ठी कर ली हैं और उसी से हम परेशान हैं। तो क्या एक अबोध बच्चे को हम भारी जानकारी ना दें — ये एक्सपेरिमेंट करें कि इसको कोई जानकारी मत दो — तो क्या हमारी अपेक्षा उस बच्चे की यात्रा जल्दी होगी? (P4-0095)
  67. (लाइव) प्रणाम योगी जी। क्या ध्यान-साधना किसी पेड़ — पीपल, बरगद — के नीचे करने से दुगना फायदा होगा? (P4-0113)
  68. (कुटिया में साधक) आत्म चिंतन में, ध्यान लगा के बैठते हैं तो अतीत के विचार नहीं आते, लेकिन अभी जो कुछ हो रहा है — जैसे कोई आवाज आ गई, कुछ गिर गया — तो उसका विचार आता है, ध्यान वहां चला जाता है। क्या करें? (P4-0131)
  69. (कुटिया में साधक, पेंशनर) मैं जहां रहता था वहां धन से सेवा करता था — खाने-पीने के अलावा बाकी पैसे मैं रखता नहीं था, सेवा-सत्संग में लगा देता था। परिवार से विवाद हुआ तो निकल गया, आठ महीने बागेश्वर में रहा, वहीं आपका वीडियो मिला और तुरंत सब समझ में आ गया। अब यहां आ गया तो मेरा पैसा किसी काम में नहीं आ रहा; परिवार वाले उसे खा जाएंगे। मैं चाहता हूं कि वह पैसा यहां सेवा में लगा दूं — किसको, कैसे दूं? (P4-0132)
  70. (वही साधक) गुरुदेव, एक श्लोक में कहा गया है — 'कोटि नाम संसार में, ताते मुक्ति न होय; आदि नाम जो गुप्त जपे, बूझे बिरला कोय।' इसका मतलब — वो आदि नाम क्या है? (P4-0133)
  71. (वही साधक, पेंशनर) मैंने निरंतर नाम जाप भी किया, 18–20 घंटे सीताराम जपता था, फिर भी विचार नहीं बदले। फिर किसी के सत्संग से सांस पर ध्यान करना सीखा — वो कुछ समय के लिए काम करता है, शरीर के विकार भी सुधरते हैं, लेकिन परमानेंट नहीं। और आत्मिक चिंतन में आंख बंद करके क्या करना है? (P4-0134)
  72. (कुटिया में साधक) गुरु जी, लोग ईमानदारी से कुछ करना चाहते हैं लेकिन दिखाना चाहते हैं कि हमने ईमानदारी से किया; सत्कर्म करते हैं तो नोटिस कराना चाहते हैं — जैसे भूखे को खाना खिलाते हुए वीडियो बना के स्टेटस पर लगाते हैं। बिहार में सरकार ने कहा कि एक्सीडेंट वाले को हॉस्पिटल पहुंचाओ तो 5000 इनाम मिलेगा, तो कई इलाकों में एक्सीडेंट के केस बढ़ गए। लोग सत्कर्म का तुरंत रिजल्ट चाहते हैं। इस बारे में क्या कहेंगे? (P4-0135)
  73. (वही साधक, पेंशनर) जैसे ही ईमानदारी का नाम लो, लोग ऐसे हट जाते हैं जैसे सांप ने डस लिया हो; उन्हें बस रंग वाली चीजें चाहिए जहां नाच-गान चले। बागेश्वर धाम में लोग 'जय श्री राम' करके खूब चला रहे हैं — मैंने कहा, आप गुरु हो, जिस विद्या से दूसरों को ठीक करते हो, वो विद्या किसी को देते क्यों नहीं? कम से कम एक को तो अपने जैसा बनाओ। इस पर आप क्या कहेंगे? (P4-0136)
  74. (वही साधक, पेंशनर) इस सत्संग को जब हम दूसरों को देते हैं तो वो भाग निकलते हैं, क्योंकि इसमें रस है ही नहीं। तो क्या हम लोग इसका प्रचार कर सकते हैं — लोगों को कह सकते हैं कि चलिए वहां? (P4-0141)
  75. (लाइव) गुरु जी नमन। अपनों की कुटिया में कोई सेवा नहीं है, तो सुबह साधक को अपनी शुरुआत कैसे करनी चाहिए? और वहां सत्कर्म क्या होगा? (P4-0145)
  76. (लाइव) नमन योगी जी। साधक को शुरुआत कहां से करनी चाहिए? और ईमानदारी क्या है? (P4-0154)
  77. (वही साधिका) 2011 में आपका यह क्वेश्चन था — तो 2010 से पहले यह क्वेश्चन आपने कहां से उठा लिया था? हम तो इतनी साधना किए नहीं, तो 'आत्मज्ञान चाहिए' कहना हमें बकवास जैसा लगता है। (P4-0161)
  78. (वही साधिका) आपने कहा कि नियमों में रहकर शिष्यत्व की पात्रता अपने आप आ जाती है, फिर गुरु परीक्षा लेता है। जैसे बाबूलाल भाई — वे सेवा में इतने लगे रहते हैं कि साधना में बैठ नहीं पाते, और आपने कहा था कि उन पर विशेष कृपा है, वे इसी ढंग से तर जाएंगे। पहले गुरु 12-12 साल रखते थे; अब तो आदमी की उम्र भी उतनी नहीं। तो क्या यह 12 साल का समय जरूरी है? (P4-0162)
  79. (वही साधिका) जो साधक आत्मिक कल्याण के लिए आया हो पर गुरु को जांचने में लग जाए — जैसे गोयल जी ने कहा कि मैं जांचूंगा — उसके बारे में आप क्या कहते हैं? (P4-0168)
  80. (कुटिया में चार दिन रहे एक साधक-शिक्षक ने अपना अनुभव बताया) यहां इतने कम संसाधनों में भी साधक सुखी रहते हैं, आवश्यकता में जीते हैं; और हम आवश्यकता से अधिक में जीकर भी बेचैन रहते हैं। यहां की व्यवस्था के बारे में आप क्या कहेंगे? (P4-0172)
  81. (कुटिया में एक युवा साधक) गुरु जी, मैं चीजें ठीक से समझ नहीं पाया। पहली बार वीडियो देखते ही भाव आया था कि यही गुरु है; नर्मदा पर भाव बना कि गुरु जी गले लगाएं और आपने गले लगाया। फिर घर गया तो घुटन-परेशानी रही, वापस आया, पर इस बार मन में संदेह था कि गुरु जी रखेंगे या नहीं, और कई गलतियां हुईं। मैं अब ठीक से पकड़ नहीं पा रहा — मदद कीजिए कि मैं अपने आप को इनसे निकाल पाऊं। (P4-0173)
  82. (कुटिया में) जो साधक कोई भाव बनाकर आता है — जैसे 'मैं शिशु बनकर आया हूं' — उसकी जांच यहां कैसे होती है? (P4-0180)
  83. (कुटिया में युवा साधक) क्या मैं घर वालों को फोन करके बता दूं कि अब मैं नहीं आऊंगा? या जाकर बताना चाहिए? (P4-0183)
  84. (कुटिया में एक साधक) हम महात्माओं की बहुत सी किताबें पढ़ते हैं, कहानियां अच्छी लगती हैं, पर उनमें क्या खोज करना है यह नहीं सोचते। कोई कहता है किताब पढ़ना छोड़ दो — किताब में बारिश का वर्णन है, पर किताब निचोड़ने से बारिश नहीं होती। क्या यहां आने के बाद भी किताबें पढ़ सकते हैं? जिज्ञासु बनने के लिए कुछ आधार तो चाहिए। (P4-0187)
  85. (वही साधिका) क्या हम (आपकी साधना की) कॉपी कर सकते हैं? (P5-0012)
  86. (कुटिया में एक साधक) हम अपनी क्षमता खुद नहीं जानते — कंपटीशन में, सामने वाले को देखकर हम ज्यादा कर पाते हैं, जैसे जिम में ज्यादा वेट उठा लेते हैं। तो क्या ऐसे अपनी क्षमता बढ़ाना सही नहीं है? (P5-0013)
  87. (वही साधक) गीता में कृष्ण ने कहा कि दुख से मुक्ति पानी है तो मोह छोड़ो, लालच, कामना छोड़ो। जैसे इन (साधिका) की मम्मी से बात नहीं हो पाती और इन्हें दुख है — तो यह मोह है ना? उम्मीद और मोह में क्या अंतर है? और आप अपनी बहन का दुख सुनकर भी कह देते हैं 'रह अपने दुख में' — आपको उसके दुख से दुख नहीं होता, आपने यह डिटैचमेंट कैसे किया? (P5-0014)
  88. (वही साधक) अगर लोग हमें स्वार्थी या कुछ भी कहें — हमें स्वीकार कर लेने की हिम्मत रखनी चाहिए ना? दुनिया के हर एक बंदे से हम कैरेक्टर सर्टिफिकेट कैसे ले सकते हैं? (P5-0015)
  89. (कुटिया में साधक) कुत्तों को अंदर बंद क्यों रखा है? हम खुले में हैं तो हमारे ऊपर तेंदुआ आदि का खतरा नहीं? (P5-0022)
  90. (कुटिया में साधिका) यहाँ व्यवस्था कैसे चलती है जब साधकों से पैसे नहीं लेते? बाहर से डोनेशन? नकली चैनल / नंबर से कैसे पहचानें असली? (P5-0026)
  91. (कुटिया में साधक) हम अपने आप पर विश्वास कैसे करें — जो कर रहे हैं सही है या गलत? अध्यात्म / आत्मचिंतन कैसे शुरू करें? चिड़िया-गिलहरी को अपना खाना डालना सत्कर्म है? (P5-0027)
  92. (राजीव दुबे) आपके साथ कोई भी साधक स्थाई रूप से क्यों नहीं रह पाता? (P5-0044)
  93. यहाँ क्या करें — साधना या विश्राम? लोगों को आराम की जरूरत क्यों? (P5-0055)
  94. गुरु के पास क्यों जाना चाहिए, और गुरु साधक की धारणाओं के साथ कैसे व्यवहार करता है? (P5-0058)
  95. गुरु जी की डांट के पीछे क्या होता है? साधना में घास-कचरा उखाड़ने का मतलब? (P5-0066)
  96. (वृद्ध साधक) अंतिम सांस यहीं बिताने की इच्छा है; मोक्ष के लिए मार्गदर्शन दें। क्या रुक सकते हैं? (P5-0067)
  97. साधक के लिए सबसे जरूरी बात क्या है? अपनों की कुटिया में रहने के नियम क्या हैं? (P5-0093)
  98. घर पर साधना नहीं हो सकती क्या? (P5-0095)
  99. आप कहते हो कुछ नहीं करना है — फिर साधक करते क्या हैं? (P5-0097)
  100. मलिन विचार आते हैं, साधना-पूजा में तकलीफ — क्या करें? डर का सामना, क्रोध निवारण, प्रेम कैसे आए? (P5-0098)
  101. कुटिया के नियम क्या हैं — मोबाइल, भोजन, साधना? (P5-0100)
  102. साधना के लिए घर छोड़ने वाले के माता-पिता की सहायता कैसे होती है? (P5-0107)
  103. आत्मज्ञान के बाद भी कर्म/पाप-पुण्य भोग बाकी रहता है क्या? ईमानदारी क्या है कैसे करें? साधना कैसे करें? योग्यता से अधिक का मतलब? (P5-0117)
  104. युवा उम्र में ध्यान जाना चाहिए? पैसे के साथ साधना कैसे? आलस साधना में कैसे रुकावट? (P5-0124)
  105. कार्य शुरू करने का भय कैसे दूर करें? मन साधना में लगता है पर पारिवारिक कर्तव्य रुकावट — क्या करें? (P5-0129)
  106. सांसारिक कार्य होते आत्मज्ञान हो सकता है? गृहस्थ में आगे बढ़ रहे हैं कैसे जांचें? आपकी साधना चल रही? खाली समय में क्या सोचें? लेनदेन कितना बाकी? (P5-0147)
  107. अचेतन मन क्या है कैसे साफ करें? साधना क्या है? (P5-0148)
  108. स्वप्न, जागृत और सुषुप्ति ये तीन अवस्थाएं हैं। जो आत्मज्ञानी पुरुष हैं, क्या उन्हें भी वैसे ही स्वप्न आते हैं जैसे हमें दिन भर की क्रियाओं से, या पहले कभी हुई बातों से आते हैं? किसी और के सानिध्य में सुना है कि स्वप्न आते ही नहीं। यहां आने से पहले मैं किसी और से जुड़ा था, अभी भी जुड़ा हूं, और उनका कहना यही है। तुलना करता घूम रहा हूं। ध्यान और साधना का मार्ग वे बताते हैं, विचार जहां फंसे हैं वहां टीवी स्क्रीन की तरह चित्र चलता है। इस प्रश्न का उत्तर चाहिए, नहीं तो भीतर प्रश्नचिह्न बना रहता है। (P6-0045)
  109. जब साधक आत्मचिंतन के लिए बैठता है, तो क्या चिंतन करे, क्या मनन करे, क्या सोच-विचार करे, जिससे आत्मचिंतन हो, आगे उन्नति हो, आत्मकल्याण हो और तत्व का अनुभव हो जाए? वीडियो बीच में कट जाते हैं, इसलिए जो सोलह बातें बताई जाती हैं, उनका एक छोटा पैंफलेट या पुस्तक हो, जिसे जेब में रखकर बार-बार देख सकूं, तो ज्यादा लाभ हो। मैं झुंझुनू के पास से आया हूं। आज सोलहवां दिन है। ग्रंथों में पढ़ा है कि आत्मा है, पूर्ण है, पर वह ज्ञान अनुभव में कैसे उतरे? घर और संबंधों का चिंतन चलता रहता है। बैठकर ऐसा क्या सोचूं, क्या मनन करूं, कि मूल की ओर बढ़ूं और अनुभव हो जाए? (P6-0062)
  110. साधक आत्मिक रास्ते पर यह कैसे समझे कि वह सही रास्ते पर जा रहा है? कैसे पता चले कि हम अध्यात्म में हैं या नहीं? आए हुए सात दिन हुए हैं। बोलने से मना था, फिर भी बोल दिया। नियम पूरी तरह नहीं निभा। (P6-0065)
  111. अनुकूल परिस्थितियों के बाद जब विपरीत परिस्थितियां आएं, तो साधक को क्या करना चाहिए? परीक्षा कब और कैसे होती है? भवसागर से निकलने का भाव बना लेने के बाद प्रकृति क्या करती है? (P6-0080)
  112. साधना काल में ऐसी कौन सी परीक्षाएं आती हैं, जिनका पहले से अनुमान नहीं हो सकता? जगह से निकाल दिया जाए, तौलिया चुराने का इल्जाम लग जाए, या धन और आश्रम का लालच दिया जाए, तब साधक कैसे रहे? (P6-0081)
  113. सात्विक, राजसी और तामसी, तीनों गुणों में रहते हुए हर जगह युद्ध क्यों बना रहता है? परिवार में रोज इल्जाम लगते हों, तो साधक को क्या करना चाहिए? (P6-0083)
  114. क्या आत्मज्ञान के रास्ते में प्रत्येक साधक की स्थिति और परिस्थितियां एक जैसी होती हैं, या अलग-अलग होती हैं? (P6-0090)
  115. हरियाणा से आई बहन साधना में लगातार बैठने से पैर और शरीर के दर्द में बहुत परेशान थी। कहा गया था, या तो बैठो या चली जाओ, उसके बाद दर्द चला गया। साधना में दर्द और पीड़ा को कैसे देखें? गुरु कठोर क्यों होता है? शरीर, धन और समझ की ताकत को संचित करें या कहां लगाएं? (P6-0101)
  116. साधना में पहले लगा कि कोई बहुत ऊपर ले जा रहा है। फिर दो दिन एक साया दिखा। फिर ईसा मसीह स्पष्ट दिखे और देर तक प्रकाश देते रहे। असीम शांति हुई। सनातन, कुरान और गुरु ग्रंथ साहिब पढ़े हैं, ईसाई धर्म इस जन्म में नहीं पढ़ा। ईसा मसीह कैसे दर्शन दे गए? परिवार का कोई आ जाए तो क्या करूं? (P6-0106)
  117. जैन साधु और उनकी साधना पर आपका क्या मत है? यात्रा में क्या आप उन्हें मिले हैं? (P6-0112)
  118. विचार, चित्त और चेतना में क्या फर्क है? और साधना में हमें क्या प्रधानता देनी है? (P6-0125)
  119. मन और दिमाग, या ब्रेन, में क्या फर्क है? हमें बताया गया कि ब्रेन से हम शरीर को फील करते हैं और ब्रेन में सिग्नल जाते हैं। क्या मन केवल शरीर की जरूरत बताता है या स्मृति का भी सहायक है? क्या मन नौकर है या सहायक? शरीर के इशारों के साथ साधक को क्या करना चाहिए? (P6-0129)
  120. मैं अपने भीतर आना चाहता हूं, लेकिन एक मिनट में बाहर चला जाता हूं और उलझ जाता हूं। सत्संग सुनने के लिए कुछ समय अंदर आया था, फिर बाहर चला जाता हूं। चाबी अपने पास रखूं या महापुरुष को दे दूं? साधक और सेवक में क्या फर्क है? जिसे चाबी देनी है, उसकी जांच कैसे करें? (P6-0144)
  121. प्रकृति में जो इंद्रियों द्वारा मिलता है, उसे क्या कहेंगे? क्या उसे भी रसपान कहेंगे? जो अकेले एकांत में प्रकृति से मिलता है, वह रसपान है या जरूरत? अघोरी साधना और श्मशान का क्या मतलब है? (P6-0152)
  122. प्रियंका गुप्ता पूछती हैं, गृहस्थ जीवन में साधना कैसे करें, अपने को कैसे सुधारें? (P6-0161)
  123. कानपुर से एक साधक आए हैं। नर्मदा परिक्रमा वाले वचन से प्रभावित हुए, कि जहाँ से चले थे वहीं पहुँच जाओ, यही परिक्रमा है। सीमेंट, सरिया और मौरंग का काम है, जिसमें झूठ बोलना पड़ता है। कुछ चाहिए में निकले थे। कुछ नहीं चाहिए को जीवन में कैसे धारण करें, कैसे उतारें? (P6-0162)
  124. हरियाणा से आए साधक लगभग दो सौ दो दिन से सुन रहे हैं। मूल मंत्र जानने आए हैं। जीवन का मूल मंत्र क्या है? (P6-0163)
  125. आप पंद्रह मई के बाद, सोलह मई के बाद यहाँ से निकल जाएँगे, ऐसा बता रहे हैं। फिर जो साधक आना चाहे, उसका क्या होगा? व्यवस्था रहेगी क्या? (P6-0171)
  126. सुमन पूछती हैं, जब दृष्टा ही बचता है तो साधक कौन सी स्थिति में होता है? मार्गदर्शन करें। (P6-0172)
  127. प्रियंका गुप्ता पूछती हैं, जब आपने ज्ञान पाया तो क्या ध्यान और साधना की थी? कारोबार में सौ प्रतिशत झूठ बोलना पड़ता है, सत्कर्म नहीं हो पाता। क्या ध्यान परमात्मा को पाने का मार्ग नहीं है? (P6-0188)
  128. किस साधना से आत्मसाक्षात्कार हुआ? क्या ध्यान किया है? बताइए। गुरु से ज्ञान लो और आगे बढ़ो, इसका मतलब क्या है? (P7-0003)
  129. कुँवारी बेटियाँ भी कुटिया में रहकर साधना कर सकती हैं क्या? मार्गदर्शन करें। (P7-0053)
  130. समय खराब आ गया है, साधना करनी है। कैसे करें? मार्गदर्शन करें। (P7-0068)
  131. साधना में विधान क्या है? (P7-0069)
  132. घर गृहस्थी में रहते हुए साधना कैसे हो सकती है? साधना का मतलब अपने आप को सुधारना है क्या? शेड्यूल इतना व्यस्त है कि अपने लिए थोड़ा समय नहीं निकलता। अभी रिटायर हुई हूं, पहले टीचर थी। (P7-0094)
  133. अशोक कुमार पूछते हैं, साधना का मतलब क्या है? क्या साधना स्वयं पर नियंत्रण करना है? (P7-0105)
  134. गुरु जी, प्रोफेसर जी के लालच के विषय में क्या अनुभव हुआ? कृपा करके हम साधकों को बताएँ। (P7-0123)
  135. गुरु जी, हमने यहाँ दस एकड़ खेती वाली जमीन कर लीजिए। उसमें हम हर साल चालीस से पचास लाख कमा सकते हैं, आश्रम के लिए। और साधकों को प्रकृति से जोड़कर काम करने को भी मिलेगा। (P7-0129)
  136. पिछली वीडियो, जिसमें ईमानदारी और सत्कर्म के बारे में था, डिलीट कर दी गईं। उन पर आप एक विस्तार से वीडियो बनाएँ। नए और पुराने साधक की मदद होगी। (P7-0131)
  137. संत कबीर दास, दादू दयाल और गुरु नानक ने कहा है कि अपने जीवन में जीते जी मरना चाहिए। साधक के लिए जीते जी मरना क्या है? (P7-0143)
  138. नाम जप साधक के लिए क्या काम करता है? मैंने पढ़ा है, अनुभव नहीं है। क्या नाम जप गलत कामों से बचाता है? संतों ने कहा है कि आत्मा नीचे धंसी पड़ी है, ऊपर आकर तीसरे तिल, आज्ञा चक्र पर आती है, और वहां परमात्मा में लीन हो जाते हैं। गुरु नानक देव जी बार-बार नाम जपने को कहते हैं। नाम, शब्द क्या है? (P7-0144)
  139. यहां सात दिन ऐसे ही साधना होती है, या कोई और विधि भी है? (P7-0149)
  140. कब तक प्रयास करना चाहिए, और कब प्रयास छूट जाता है, समर्पण हो जाता है? साधक को कैसे पता चले? (P7-0165)
  141. चंडीगढ़ से एक साधक चार-पाँच महीने से ईमानदारी और सत्कर्म सुनकर प्रभावित होकर आया। कहता है कि सभी बताते हैं, पर आप इस पर अलग से जोर देते हैं, इसलिए हृदय में बैठ गया कि इसे अपनाना ही चाहिए। अभी से शुरू किया है। सुबह की सैर में रोज़ दस-बीस रुपये के कुत्तों को खिलाता है। सैर के बाद घर से बाहर नहीं निकलता, इसलिए मनुष्य कम मिलता है, मिल जाए तो उसकी भी सेवा करता है। ईमानदारी कैसे पूरी तरह अपनाएँ, और सत्कर्म किसे-किसे करें? (P7-0190)
  142. एक साधक दो-तीन महीने पहले वीडियो देखकर आया। पहले और लोगों के प्रवचन जंच नहीं रहे थे। आपका वीडियो पहले अटपटा लगा, फटे वस्त्र में बैठे किसी को सवाल पूछते देखा, आगे निकल गया, फिर लौटकर पूरा सुना तो लगा यही आत्मकल्याण का रास्ता है। पत्नी रोकती थी, बच्चों की शादी के बाद साथ चलने की बात हुई। दादी की गति देखकर लगा कि बच्चों के लिए कमाते रहने के बाद भी वही गति हो सकती है। संसार सबको लात मारता है, फिर भी लोग संसार के लिए पागल हैं। वह पूछता है, संसार में रहते हुए कर्म कैसे करें कि जीवन आत्मकल्याण की ओर जाए? (P7-0191)
  143. एक साधक कहता है, मैं सोचता हूं आपके पास आना है, पर होता ही नहीं। क्या करूं? (P7-0195)
  144. आप अपनी व्यवस्था अलग बनाना चाहते हैं। फिर क्यों नहीं सरकारी व्यवस्था में शामिल होते, किसी राजनीतिक पार्टी में? आपकी योग्यता ज्यादा रहेगी तो साधकों को ज्यादा लाभ होगा। (P7-0200)
  145. यहां मौजूद साधक कहता है, मेरा तन ठीक नहीं रहता। भोजन के बाद और खड़े होने में दिक्कत होती है। क्या करूं? (P8-0012)
  146. एक साधक पूछता है, पिछले सत्संग सुनकर लगता है कहीं मैं भगोड़ा तो नहीं हूं। माता-पिता अस्सी के ऊपर हैं, पैतृक संपत्ति अभी अपने जिम्मे रखी है, हमें कुछ नहीं दिया। चार भाई हैं, दो बड़े भाइयों को कुछ नहीं दिया, छोटे भाइयों को दिया है। मेरे दो बेटे और एक बेटी हैं, सबसे छोटा पच्चीस पार कर गया, पढ़े-लिखे हैं, बड़े बेटे की नौकरी और शादी हो गई, दो की शादी बाकी है। पत्नी, छोटा बेटा और बेटी कहते हैं जब तक शादी ना हो जाए तब तक मत जाओ। नौ साल कमाई मां को दी। क्या मैं भगोड़ा हूं? (P8-0014)
  147. शिष्य का गुरु के प्रति जितना समर्पण होता है, क्या गुरु का समय और ध्यान भी उसके प्रति उतना अधिक हो जाता है? ऐसे में अन्य साधक, जो गुरु के प्रति कम लगाव रखते हैं, उनके मन में ऐसी भावना पैदा हो जाती है। (P8-0091)
  148. साधना को ईमानदारी से करना भी तो ईमानदारी है न? और क्या किसी पर भरोसा करके मार्ग पर चलना चाहिए, जबकि बताने वाला खुद नहीं पहुंचा? (P8-0095)
  149. क्या बिना साधना के परमात्मा नहीं मिलते? साधना की जरूरत किसलिए है? (P8-0120)
  150. यहां साधना के लिए आना है। क्या पैसे लगेंगे? (P8-0174)
  151. काफी साल से साधना में हूं। मेरे मार्ग में मेरी मां मेरे साथ सौतेला व्यवहार करती है। गुरु जी, अगर यह मेरा कर्म है, तो मुझे इस बंधन से छुटकारा कैसे मिलेगा? (P9-0012)
  152. मेरी जरूरत में जीते हुए, दूसरों की जरूरत में जीना ही साधना है। क्या यही बात है? (P9-0024)
  153. जैसे आप लाइव आते हैं, तो क्या कुटिया में रहने वाले सारे साधक सामने बैठते हैं? सुनने का मौका क्या सब रहने वालों को रोज मिलता है? (P9-0096)
  154. क्या कोई इस धरती पर आपके समान साधना और तप कर सकता है? आपके समान कोई मिला क्या, या आगे मिलेगा? (P9-0098)
  155. गुरुदेव, गृहस्थ में रहते हुए साधना कैसे की जाए? ध्यान और साधना कैसे करें? (P9-0130)
  156. गुरुदेव, आप किसकी साधना करवाते हैं? (P9-0137)
  157. गुरु जी, क्या जरूरत में जीना और जरूरतमंद की सेवा करना ही साधना है? (P9-0146)
  158. गुरुदेव, एक साधक को कैसे रहना चाहिए? यदि किसी जगह कुछ गलत हो रहा हो तो बोलना ठीक है या नहीं? (P9-0172)
  159. गुरु जी, मैं नेपाल से हूं। क्या मैं कुछ हफ्ते अपनी वैयक्तिक समस्या सुलझाने आपके सानिध्य में आकर गहन साधना और ध्यान में रह सकता हूं? (P9-0176)
  160. गुरु जी, साधक दूर बैठे होने की वजह से हमें प्रश्न की आवाज पूरी तरह समझ में नहीं आती। कृपया उन्हें आगे बैठाया करें। (P9-0177)
  161. जिन गुरु ने आरंभ में ध्यान का मार्गदर्शन दिया था, उन्होंने कहा था कि न आत्मा का ध्यान करना है, न परमात्मा का ध्यान करना है। यह बात क्लियर नहीं हुई। ऋषिकेश, गंगोत्री, फिर कोरोना, वेदांत श्रवण के बीच साधना बिगड़ गई। पहले तीन-तीन घंटे एक आसन में बैठ लेता था, पद्मासन भी सिद्ध हो गया, फिर मन डिस्टर्ब हो गया। ना आत्मा का ध्यान, ना परमात्मा का ध्यान, इसका क्या अर्थ है? और आसन सिद्ध करने से क्या होता है? (P9-0180)
  162. गुलबर्गा के सत्संग में लोग कह रहे थे कि दो घंटे आप ही बोलिए। आप बीस मिनट से ज्यादा एक बात पर नहीं बोलते, बाकी समय साधकों से बात करते हो। लगातार दो घंटे प्रवचन क्यों नहीं देते? (P9-0184)
  163. साधक और जिज्ञासु एक बार में साधना में नहीं बैठते। जब बैठते हैं तो शरीर खुजलाने लगता है, रीढ़ और कमर दुखने लगती है, और कहते हैं कि मैं विचलित हो रहा हूं, घुटन हो रही है, बेचैनी हो रही है, समझ नहीं आ रहा। जब प्रपंच और रसपान में रहते हैं तब कोई दिक्कत नहीं होती। यह क्या हाल है? (P10-0006)
  164. साक्षी की स्थिति सदा नहीं रहती। कभी-कभी आती है, कभी नहीं। मन चाहता है सब ओर भागना। उसे बार-बार थामने से साधना में भी ऊब पैदा होती है। यह क्या है? कैसे छुटकारा हो? एक तरफ ध्यान नहीं हो पा रहा हूं। क्या करूं? (P10-0012)
  165. मेरी जिज्ञासा बढ़ रही है। साधकों को देखना है कि वहां सब कैसे रहते हैं। खाना बनाते समय दिखाइए। (P10-0037)
  166. साधना करते वक्त विचार आएंगे। विचारों को देखना है या जाने देना है? (P10-0040)
  167. आपके वहां बहुत प्राकृतिक है। क्या नदी के पास बैठकर साधना कर सकते हैं? (P10-0041)
  168. सर, वहां पर कोई लड़का-लड़की साधना करने आएं और उन दोनों को प्यार हो जाए, तो वे क्या करेंगे? हम क्या करेंगे? (P10-0064)
  169. गुरु जी, एक कुटिया नर्मदा किनारे बनी है और यह दूसरी कुटिया बन रही है। वह कौन सी जगह है? साधकों के लिए बताएं। (P10-0070)
  170. हमारे यहां नवरात्रि का समय चल रहा है। इस समय कोई साधना कर सकते हैं क्या? कृपया मार्गदर्शन करें। (P10-0071)
  171. गुरु जी, साधक को क्या साधना है? कृपया बताएं। (P10-0131)
  172. बिना साधना के भव (सागर) से क्यों नहीं तर पाएंगे? (P10-0133)
  173. गुरु जी, ऐसा क्या करूं कि मैं 24 घंटे (साधना) करूं? (P10-0152)
  174. गुरु जी, एक साधक को असली एक्सपीरियंस कब होना शुरू होता है? (P10-0154)
  175. (एक साधक की ओर से) सत्संग समझ में आ जाने के बाद अब घर पर मन नहीं लगता। क्या करें? (P10-0168)
  176. (कुटिया में नए साधक) मैं अभी नया आया हूं, मुझे यहां के बारे में कुछ पता नहीं। काम के लिए पूछना हो तो क्या मैं किसी एक व्यक्ति से बात कर सकता हूं? (P10-0177)
  177. (कुटिया में साधक) कल मेरे मन में भाव आ रहा था कि मैं (नर्मदा) परिक्रमा कर लूं। पर लगता है यह जगह, आपका सान्निध्य छूट जाएगा। (P10-0187)
  178. गुरुदेव, मैं एक महीने से नियमित साधना और ध्यान कर रहा हूं। इस दौरान मेरी रीढ़ की हड्डी में बिजली जैसी गर्माहट और शरीर में चींटियां चलने का निरंतर अनुभव हो रहा है। कृपया मार्गदर्शन करें। (P10-0190)
  179. (कुटिया में साधक) घर पर जो पुरानी आदत थी, उसके विचार यहां तीन-चार दिन से नहीं आ रहे, बस सपने में आते हैं; घर पर वह विचार खींच लेता था। ऐसा क्यों? और वहां जाकर कैसे बचूं? (P10-0195)
  180. मेरी उम्र 32 साल है और मुझे साधना के अलावा किसी और चीज में रुचि नहीं दिखती। मेरी फीलिंग जीरो हो गई है, किसी बात की फीलिंग नहीं आती। कभी-कभी लगता है कि मैं जिंदा हूं या नहीं। मुझे क्या करना होगा? (P10-0197)
  181. 2005 से साधना कर रही हूं। अब मैं अपने आप में संतुष्ट और स्थित कैसे रहूं? अंदर से सब समझती हूं। (P11-0004)
  182. (कुटिया में साधक) सात दिन बाद मैं अपने संसार में चला जाऊंगा। वहां रहकर साधना करूं, तो मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरी स्थिति कहां तक पहुंची है? (P11-0007)
  183. (साधक बीच में बात काटकर बोलने लगे, तब गुरु जी ने सुनने के बारे में समझाया।) सत्संग में कैसे सुनें? (P11-0014)
  184. कोई साधक पहले सब कुछ ठीक से समझकर यहां आया, फिर भी बाद में भ्रमित क्यों होता है? क्या उसके पाप कर्म हैं, या वह अभी कुछ गलत कर रहा है? (P11-0020)
  185. मैंने घर वालों से कहा है कि मेरे लिए किसी प्लॉट में एक कुटिया बनवा दो, उसमें रहकर साधना करूंगी। (P11-0024)
  186. (कुटिया में साधक) मैंने एक साथी साधक को सलाह दी थी कि आंख थोड़ा बंद करके बैठा करो, ताकि बाहर से रसपान कम हो। क्या यह गलत था? (P11-0026)
  187. "कुछ नहीं चाहिए" वाले साधक की स्थिति क्या होती है? (P11-0030)
  188. मैं परमात्मा से एक होना चाहता हूं। विचार, अपेक्षा और वासना में क्या अंतर है, और एकांत में साधना करते हुए इनका कैसे उपयोग करूं? (P11-0040)
  189. (कुटिया में साधक) हमें पता नहीं कि आत्मज्ञान, निर्वाण, मोक्ष क्या है। आत्मज्ञान से हमें क्या हासिल होगा, और उसके बाद जीवन कैसा होगा? सरल भाषा में बताइए। (P11-0049)
  190. गुरु जी को कैसे पता चलता है कि साधक (मानसिक रूप से) कहां है, सही है या चालाकी कर रहा है? (P11-0065)
  191. कभी-कभी साधना में मन निराश होता है; तब अंदर से आवाज आती है, "चिंता मत करो, मैं यहां हूं।" इसे मैं ब्रह्म का संकेत मानता हूं। सही मार्ग दिखाइए। (P11-0074)
  192. विचार, वासना और कल्पना में क्या अंतर है, और एकांत में साधना में इनका कैसे सदुपयोग करें? (P11-0077)
  193. क्या सभी साधकों की आत्मज्ञान तक पहुंचने की यात्रा एक जैसी ही रहेगी? (P11-0133)
  194. (एक साधक) धन की कमी नहीं, पर पत्नी नहीं रही, बच्चे विदेश में हैं, घर भूत बंगला लगता है। अध्यात्म में भी भ्रम ही भ्रम दिखता है; जिसके पास गया, उसने लूट लिया। और बच्चे कहते हैं धन भी मत खर्च करो। जीने का आधार ही नहीं है, क्या करूं? (P11-0139)
  195. (वही साधक) आज धन-वैभव खूब है, फिर भी घुटन क्यों है? और मेरे बच्चे मेरी इज्जत क्यों नहीं करते? (P11-0152)
  196. मैं 30 साल से गुरु के आश्रम में हूं, फिर भी अंदर से अनुभव होता है कि गुरु कभी खुश हैं, कभी नाराज। शिष्य को सबसे बड़ी क्या साधना करनी चाहिए? (P11-0176)
  197. आप कौन-सी साधना करते थे? क्या आप बस खाते और सोते रहते थे? (P12-0019)
  198. अपनों की कुटिया में किसी भी साधक से कोई सेवा नहीं ली जाती; तो क्या यहां रहकर व्यक्ति आलसी तो नहीं बन जाएगा? (P12-0020)
  199. गायत्री मंत्र से साधना करने से आत्म कल्याण हो सकता है क्या? (P12-0021)
  200. हम साधना के मार्ग पर आ गए हैं, लेकिन पुराने संस्कार बहुत बारीकी से काम करते हैं। कभी-कभी लगता है कि मैं पागल या मंदबुद्धि तो नहीं हो गई — दिमाग ही नहीं चल रहा, लिखना-पढ़ना भी छूट गया, बेचैनी और छटपटाहट टिकने नहीं देती। इसके लिए मुझे क्या करना चाहिए? (P12-0108)
  201. मैं बहिर्मुखता से रोज अपने को भर रही थी, अहम या दिखावे से अपने को स्थापित करके लगता था कि मैं जिंदा हूं। आज वैसा नहीं लग रहा, कुछ होता हुआ भी नहीं दिखता, पागल जैसा लगता है — तो क्या साधना के मार्ग में यह शुभ लक्षण है? और जब ऐसा डाउट आए तब मुझे क्या देखना चाहिए? (P12-0117)
  202. बहुत से साधक कहते हैं कि जब हम आपके सामने बैठते हैं या आपको सुनते हैं तो एनर्जेटिक फील करते हैं, और आपसे दूर जाते हैं तो फिर लो हो जाते हैं, डांवाडोल की स्थिति आ जाती है। तो क्या ये आपका असर है, या मेरे कर्मों के फल पर उस समय तक के लिए जैसे कोई शेड लग गई — ये क्या जादू है? (P12-0122)
  203. योगी जी, आप जो कह रहे हो वो समझ में आ रहा है कि हम अपने आप को स्थापित करना चाह रहे हैं। लेकिन बचपन से हमें सिखाया गया कि बांटकर खाओ, सामने वाले के मांगने से पहले ही ऑफर कर दो। तो क्या एक साधक-जिज्ञासु के रूप में मुझे ये सारे पैटर्न बदलने पड़ेंगे? (P12-0128)
  204. शरीर को तो मैं रोक लूंगी कि नहीं जाऊंगी — सुबह तेज याद आई, शाम तक ढल गई, क्या पता रात को सपने में आ जाए। तो क्या आपका बस यही कहना है कि तुम कहीं हिलो मत; खाली साधना-स्थली में बैठे भी रहोगे तो भी वो कम हो रहा है? क्या अपने आप को रोक रखना भी साधना है? (P12-0132)
  205. जन्मों-जन्मों के संस्कार ही मेरा बेसिक नेचर बन गए हैं, लोग कहते हैं ये नहीं बदलने वाला। अध्यात्म की यात्रा में भी मैं उसी संस्कार को बार-बार पोषण दे रहा हूं — वही लोभ-लालच, मान का चक्कर, छल-कपट — उसी लूप में घूम रहा हूं। तो क्या प्रत्यक्ष ज्ञान यह कहता है कि उस पुरानी जड़ता को मिटाने के लिए मैं उसे पोषण ही ना दूं और नई आदत बनाता रहूं — और इसी का नाम साधना है? (P12-0135)
  206. (एक साधक) गुरु जी, इस मार्ग पर लाखों-करोड़ों चलते हैं पर पहुंचता कोई एक है — मैं वही एक होना चाहता हूं। (P12-0142)
  207. (एक साधक जो विपासना सेंटर भी जा चुके थे) गुरु जी, ध्यान को लगाया कैसे जाए, उसे कंटिन्यू कैसे रखा जाए? मैं दिमागी शांति के लिए ध्यान करना चाहता हूं। (P12-0143)
  208. आज के समाज में बहुत से सिद्ध साधु-संत अपने शिष्यों को आशीर्वाद देते हैं कि आपकी मनोकामनाएं और जरूरतें पूरी हों — तो क्या वो पूरी होती हैं? क्या उनके आशीर्वाद से वास्तव में साधक का कल्याण होता है? (P12-0147)
  209. (लाइव में) मां नर्मदे हर, प्रणाम गुरु जी — मैं आपका पुराना साधक हूं, पंजाब से। (P12-0163)
  210. गुरुदेव, एक सत्य बताइए — हम दो दिन के लिए आपकी कुटिया में आए, तो ऐसा अनुभव हुआ कि आपके द्वारा वहां आए साधकों को कुछ आंतरिक ऊर्जा प्रदान की जाती है। (P13-0017)
  211. (उड़ीसा से आए एक साधक) बाबा जी, हम कौन हैं, यह समझना है; और रोज अपने अस्तित्व की उस स्थिति में हमेशा कंटिन्यू रहना है और गहरे ध्यान में उतरना है। ध्यान क्या है, और किस तरह करना चाहिए? (P13-0067)
  212. (एक साधक, परिवार के साथ) गुरु जी, मैं सत्संग भी समझता हूं, और गुटखा का सेवन भी करता हूं — यही चूक हो रही है। (पत्नी:) हम दो-तीन साल से बोल रहे थे पर बात नहीं सुनते थे; ज्यादा बोला तो गुस्सा करते थे, इसलिए छह महीने से यह टॉपिक ही बंद कर दिया। (P13-0068)
  213. गुरुदेव, कुटिया में साधना के लिए रह रहे हैं, और बहुत बढ़िया लगने लगा है। लेकिन कुटिया के कार्य में अगर कुछ ऊंच-नीच हो रहा है, तो क्या मैं उसमें सजेशन देने के योग्य हूं या नहीं? क्योंकि बोलने में द्वेष पैदा हो जाता है। (P13-0069)
  214. मेरा ओवरऑल प्रश्न यह है कि मन, वचन और कर्म — तीनों से जो भी कर्म मेरे द्वारा हो रहा है, उसमें एक साधक के रूप में टोटल मिलाकर क्या भाव रखूं? क्या उसे साक्षी भाव से चेक करूं? और राग-द्वेष छोड़ने के अलावा अपने आप को क्या टारगेट दूं? (P13-0075)
  215. साधना करने वाले व्यक्ति का दिनचर्या कैसा होना चाहिए, और उसका खान-पान व रहन-सहन कैसा होना चाहिए? (P13-0081)
  216. कई साधु खाए-पिए बिना रह लेते हैं और साधना करते रहते हैं, जबकि गृहस्थों के लिए एक दिन भी बिना खाए मुश्किल हो जाता है — उनमें कौन सी शक्ति है? (P13-0082)
  217. घर में घुटन थी इसलिए मैं मौन रहता था; यहां आजादी है तो हंसी आ जाती है, मुस्कुरा लेता हूं। फिर लगता है कहीं इससे साधकों की साधना में बाधा तो नहीं। कैसे रहना है — मौन, मुस्कुराना, बातचीत — कुछ समझ में नहीं आ रहा, तो सोचा शायद घर चला जाऊं। (P13-0160)
  218. गुरु जी, जैसे कबीर जी ने कहा — जन्म-जन्म की मन को मैल लगी है, काला हो गया मन। साधना से यही निकलेगी ना? इस जन्म की तो इतनी ज्यादा नहीं हो सकती। (P13-0198)
  219. गुरु जी, आत्मज्ञानी बहुत सारी बातें छुपाता क्यों है? गहराई में जाते-जाते कहीं-कहीं बोल देते हैं 'चलो छोड़ो अब' — इससे साधक का नुकसान है क्या? (P14-0069)
  220. अपनी-अपनी साधना है, बड़ी कठिन है डगर पनघट की? (P14-0136)
  221. प्रभु, कुटिया साधक के लिए है, तो कोई साधना है जो आप यहाँ करने के लिए बताते हो? (P14-0138)
  222. साधक की सुबह से शाम तक दिनचर्या क्या है? (P14-0161)
  223. नशे में मुझे जिंदगी के बहुत रहस्य पता पड़े; अब मैं वो नहीं करता। होश में रहते हुए ऐसी क्या साधना करूँ जिससे आत्मा से मिलूँ? (P14-0162)
  224. साधना के बारे में कुछ बोलिए गुरु जी। (P15-0107)
  225. गुरु जी, जैसे मैं मन के द्वारा कंप्यूटर में सही फाइल खुलवाऊं — सही जगह क्लिक हो — उसके लिए क्या साधना या क्या विधि है? (P15-0122)
  226. गुरु जी, साधना करने के कौन-कौन से चरण हैं? (P15-0128)
  227. आप कहते हैं कि यहां रहना ही साधना है। पर यहां तो कुछ नहीं कर रहे — फिर कौन सी साधना बन रही है? कुछ मिल रहा है क्या, ऐसा करने से फायदा क्या है? (P15-0196)
  228. गुरु जी, आप जो बता रहे हो उस तरीके से साधना कर रहे हैं। अब इस स्तर को धीरे-धीरे ऊपर कैसे उठाएं? (P15-0198)
  229. गुरुदेव, क्या साधना काल में तीन घंटे से ज्यादा नहीं सोना चाहिए? (P16-0007)
  230. गुरु जी, क्या साधना एकांत में ही उचित है? कृपया प्रकाश डालें। (P16-0010)
  231. गुरुदेव, फिर यहां पे हम लोगों का सत्कर्म कैसे बन रहा है? आप कहते हैं यहां रहना ही साधना है — सिर्फ रहना, यह समझ में नहीं आया। (P16-0029)
  232. श्रावक बनकर, दुनियादारी में रहकर मुक्ति संभव है, या साधना जरूरी है? (P16-0090)
  233. गुरुदेव, आपके जीवन की कोई ऐसी सीख बताइए जो साधकों को राह दिखाए। (P16-0091)
  234. अपनों की कुटिया में रहकर साधना करने पर आगे के प्रारब्ध नहीं बनेंगे, पर पुराने कैसे कटते हैं? कृपया मार्गदर्शन करें। (P16-0092)
  235. गुरु जी, साधना कैसे करें? (P17-0028)
  236. गुरु जी, साधक की दिनचर्या कैसी होनी चाहिए? (P17-0030)
  237. गुरु जी, जो ध्यान मार्ग से साधना करते हैं, उनको पूर्व पापों को काटने के लिए क्या नाम या मंत्र जाप करना आवश्यक है? (P17-0033)
  238. गुरु जी, ईमानदारी से जगत-व्यवहार करना, दृष्टा भाव में रहना, कर्तापन से दूर, ईश्वर में श्रद्धा, "कुछ नहीं चाहिए" में रहना — इस साधना पथ पर जीने से कब तक आत्म-सत्य का दर्शन होगा, और तब क्या अनुभव होगा? मार्गदर्शन दें। (P17-0049)
  239. गुरु जी, क्या मंत्र साधना से ईश्वर प्राप्ति होती है? (P17-0057)
  240. गुरु जी, क्या साधक सिद्धि में अटक जाता है? (P17-0059)
  241. गुरु जी, साधक कितने तरह के होते हैं? और आत्मज्ञानी के पास जाने की पहचान क्या है? (P17-0077)
  242. गुरु जी, आत्मज्ञान होने के बाद व्यक्ति स्व में स्थित हो जाता है — क्या साधक को इस स्थिति की झलकियां आत्मचिंतन के दौरान महसूस होने लगती हैं? (P17-0126)
  243. गुरु जी, साधना करते दो-चार महीने, एक साल बीत गया, कुछ हो नहीं रहा — ऐसा क्यों? (P17-0130)
  244. गुरु जी, आप कहते हैं दर्शन से कुछ मतलब नहीं — तो साधना में जो दर्शन और अनुभव होते हैं, वे कौन देता है? क्या वे हमारी कल्पना हैं, या रास्ते से भटकाने के लिए होते हैं? (P17-0150)
  245. गुरु जी, आप कहते हैं कि साधना काल में पूजा-पाठ पर खर्च करते थे और अपने लिए दवाई तक नहीं ली, सभी तीर्थों पर गए — क्या इसी कारण आत्मज्ञान मिला? और क्या अब भी पूजा-पाठ करते हैं? (P17-0164)
  246. गुरु जी, नियम और पूर्ण स्वतंत्रता एक साथ कैसे चल सकते हैं? क्या नियम भी साधक के लिए एक नई जंजीर नहीं है? (P17-0180)
  247. गुरु जी, साधना के दौरान जब खाने और दवा तक का अभाव हो गया, तब आपने क्या किया? (P18-0014)
  248. गुरु जी, आपकी इष्ट मां काली रहीं — आपका देवी साधना से क्या संबंध है? (P18-0017)
  249. गुरु जी, माया का प्रसार समुद्र जैसा है, समाज रुकने नहीं देता, साधना पर चलते ही विघ्न आते हैं और मन बहाने बना देता है। वह कृपा कैसे प्राप्त हो कि व्यक्ति एकनिष्ठ होकर साधन पथ पर चल पाए और पार हो जाए? (P18-0019)
  250. गुरु जी, आपकी साधना का क्रम क्या था — कितने घंटे, कौन-सी साधना, कोई अनुशासन या क्रम था? (P18-0036)
  251. गुरु जी, जब तक मेरे सारे प्रश्नों का समाधान न हो जाए, क्या मैं यहां रुक सकता हूं? और यहां साधकों को सहायता कैसे मिलती है? (P18-0063)
  252. गुरु जी, आपके आश्रम (कुटिया) में महिलाओं और साधकों के लिए क्या नियम हैं? (P18-0081)
  253. गुरु जी, ध्यान में ध्यान करते हुए क्या करना है, परम ध्यान में क्या करना है, और साधना में परीक्षा कब होती है? (P18-0088)
  254. गुरु जी, साधना का सरल मार्ग क्या है? (P18-0102)
  255. गुरु जी, क्या सांसारिक पढ़ाई करना साधना मार्ग में सहयोगी है? (P18-0110)
  256. गुरु जी, आपके अंदर प्रेम है तो आप किसी को मना नहीं करते, अपने भोजन का समय भी दे देते हैं — अगर आपको अपने किसी प्रिय साधक को ना कहना हो तो कैसे कहेंगे? (P18-0123)
  257. गुरु जी, गृहस्थी मेंटेन करते हुए साधक साधना कैसे करे? (P18-0136)
  258. गुरु जी, अभाव, कुभाव और स्वभाव वाले साधक कौन होते हैं और किस तरह के गुरु के पास जाते हैं? (P18-0193)
  259. गुरु जी, कुटिया के निर्माण के लिए आप दान कैसे लेते हैं? साधकों से क्यों नहीं लेते और लाखों रुपये तक मना क्यों कर दिए? (P19-0014)
  260. गुरु जी, नौकरी/पोस्ट छोड़कर साधना करूं? जरूरत कभी पूरी नहीं होती। (P19-0075)
  261. गुरु जी, साधकों की यही शिकायत रहती है कि कुछ होता नहीं। ऐसा क्यों? (P19-0107)
  262. गुरु जी, आप खुद को मतलबी कहते हो, फिर साधकों के लिए इतना क्यों करते हो? और क्या आप पक्का कह सकते हो कि साधना से परमात्मा मिलेगा? (P19-0108)
  263. गुरु जी, क्या साधक बनना, खोजी बनना कठिन है? (P19-0114)
  264. गुरु जी, कोई साधक नाराज होकर जाने लगे तो आप उसे रोकते क्यों नहीं? (P19-0124)
  265. गुरु जी, साक्षी भाव या दृष्टा भाव की साधना तो प्रयास हुआ; शुरुआत में तो हर साधक को प्रयास ही करना पड़ता है ना? (P19-0148)
  266. गुरु जी, आप साधकों से घंटों ध्यान या कोई साधना क्यों नहीं करवाते? क्या सिर्फ सत्संग से आत्मज्ञान हो सकता है? (P19-0150)
  267. गुरु जी, साधना में आनंद या मूल कैसा होगा, क्या यह सोचना चाहिए? (P19-0155)
  268. गुरु जी, कर्म खत्म होने के बाद साधना का क्रम क्या होता है? (P19-0170)
  269. गुरु जी, कुछ समय सत्संग में रहकर साधक को लगता है कि उसे बिना भटके आसानी से मिल गया — क्या ऐसा कहना उचित है? (P19-0172)
  270. गुरु जी, कुछ साधक हुक्का पीते हैं और कई दिन खाना नहीं खाते — क्या उन्हें संत कह सकते हैं? (P19-0182)
  271. गुरु जी, साधक के लिए क्या-क्या पात्रता होना जरूरी है? (P19-0193)
  272. गुरु जी, कुटिया या आश्रम में रहते हुए साधक को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? (P19-0200)
  273. गुरु जी, कुटिया में साधना इतनी तेजी से क्यों होती है? (P20-0003)
  274. गुरु जी, साधना के बाद लोग मुझसे दूर होने लगे हैं, मुझे बुलाना बंद कर रहे हैं — क्या यह ठीक है? (P20-0005)
  275. गुरु जी, सत्संग में आने वाले साधक कितने प्रकार के होते हैं? (P20-0023)
  276. गुरु जी, अभी साधक की यात्रा किस चरण में है? (P20-0026)
  277. गुरु जी, "कुछ नहीं चाहिए" कहते हैं, पर साधक साधना करेगा तो उसे कुछ तो चाहिए? (P20-0042)
  278. गुरु जी, साधना में अपने मार्ग के साथियों का साथ क्यों जरूरी है? (P20-0082)
  279. गुरु जी, अलग मार्ग वाले लोगों के साथ रहने से साधक गिर सकता है क्या? (P20-0083)
  280. गुरु जी, आपकी साधना काल में परीक्षाएं कैसी हुईं? (P20-0106)
  281. क्या आप हर दिन संकल्प करके निकलते थे कि आज खाना या पैसा नहीं लेना? साधना में आपने कौन से नियम बनाए? (P20-0113)
  282. साधक फिसलता किस बात में है और उससे कैसे बचे? (P20-0120)
  283. आत्मज्ञानी के साथ चलने वाले साधक कहां पहुंचते हैं — नदी और सागर का उदाहरण क्या है? (P20-0139)
  284. साधना में सबसे खतरनाक बंधन कौन सा है? (P20-0168)
  285. कोई सोचे कि मुझे गुरु नहीं बनाना, मैं भी आपकी तरह 12 साल अपनी व्यवस्था (सेविंग) करके भ्रमण करूंगा और खुद ठहर जाऊंगा — उसकी तुलना में गुरु के सानिध्य में रहने वाले साधक का क्या? (P21-0028)
  286. गुरु जी, आपके मार्गदर्शन में साधना कैसे करें कि आत्म साक्षात्कार हो जाए? (P21-0130)
  287. गुरु जी, (इनके) भाई-बहन काम के लिए मां को छोड़कर चले गए, बड़े भाई की शादी हुई पर उसका बोझ भी इन पर है; मां इन्हें नहीं छोड़ रही, इसलिए ये कहीं नहीं जा सकते — पर वहीं बैठकर साधना क्या है, आध्यात्म क्या है, यह समझना चाहते हैं और वह भी नहीं हो रहा। इससे कैसे बाहर आएं? (P21-0134)
  288. गुरु जी, जब आप हमारी तरह साधक थे, तब क्या आपको लगता था कि आपको आत्मज्ञान हो जाएगा? (P21-0137)
  289. गुरु जी, मेरा परिवार है, विवाह कर लिया है, उनकी जिम्मेदारी है — मैं परिवार और घर में रह के साधना करना चाहता हूं, तो कैसे करूं? (P21-0138)
  290. गुरु जी, साधना के लिए आप कैसा मार्गदर्शन देते हैं — आश्रम में आएं तो आप किस तरह की दीक्षा देते हैं, क्या साधन है कि मैं पहुंच जाऊं? (P21-0160)
  291. गुरु जी, मुक्ति और मोक्ष दो अलग चीजें हैं या एक ही? मुक्ति के लिए हम कैसे साधना करें? (P21-0166)
  292. गुरु जी, बाहरी दुनिया में बहुत सारी साधनाएं होती हैं — जप, दीक्षा देकर साधना पथ पर चलाना। ईमानदारी और सत्कर्म से साधना कैसे हो सकती है, ये मेरी समझ में नहीं आ रहा — साधना और सत्कर्म दोनों कैसे हैं? (P21-0177)
  293. गुरु जी, साधना कैसे करनी चाहिए? (P21-0196)
  294. गुरु जी, मैं अपने गुरु जी के पास रहती हूं, साधना करती हूं; अचानक आपका सत्संग सुना। मुझे कुछ नहीं चाहिए, पर आपकी सेवा में — आपके भ्रमण के लिए — कुछ देना चाहती हूं। (P22-0018)
  295. गुरु जी, किसी को जीवन भर का दर्द हो तो वह क्या करे? क्या साधना से शरीर-जनित दुख का अंत हो सकता है? (P22-0030)
  296. गुरु जी, इसमें साधक और गुरु के संबंध का भी असर पड़ता है क्या? (P22-0037)
  297. गुरु जी, क्या साधक को भी आखिर में गुरु को छोड़ना पड़ता है? (P22-0038)
  298. गुरु जी, क्या केवल सुनते-सुनते भी साधक उस स्थिति तक पहुंच सकता है? (P22-0042)
  299. गुरु जी, आप इतने सारे साधकों के भोजन की व्यवस्था कैसे कर पाते हैं? क्या ईमानदारी में इतनी शक्ति है? (P22-0061)
  300. गुरु जी, चुप रहने से क्या लाभ है? साधना में इस पर प्रकाश डालें। (P22-0090)
  301. गुरु जी, शनिवार-रविवार की छुट्टी रहती है — उसमें एक बार अपने लिए (साधना) कर लें? (P22-0104)
  302. गुरु जी, जब साधक अपने आप में जाता है तो एक साथ तो घटना घटती नहीं होगी — थोड़ा अंदर गया, फिर बाहर आ गया, झलक आती है। तो जब वह थोड़े क्षण के लिए भी अंदर जाता है तो उस वक्त क्या फीलिंग होती है? और वह क्षण भर ही क्यों रहता है — क्या उस टाइम को बढ़ाया जा सकता है? (P22-0133)
  303. गुरु जी, आप कहते हैं कि माता-पिता और गुरु का ऋण नहीं होता; लेकिन एक साधक या परिक्रमा करने वाला जब मार्ग में किसी से ठहरने और भोजन की व्यवस्था स्वीकार करता है, तो क्या ये ऋण नहीं है? (P22-0170)
  304. गुरु जी, साधना का कोई रूप होता है? (P22-0173)
  305. महाराज जी, अपने सुधार के लिए जो परिवर्तन है, वो अपने भीतर ही, छोड़-छोड़ के ही करना पड़ेगा। लेकिन साधना आदि की बात इसलिए उठती है कि व्यवहार जगत में परिवर्तन वाले रास्ते में व्यक्ति को समझ में नहीं आता कि यह रास्ता कितना लंबा होगा, जबकि साधना वाले तरीके एक प्रॉमिस देते हैं कि आप उसको फास्ट कर सकते हैं, जो भीतर है उसको खत्म कर सकते हैं। (P22-0200)
  306. गुरु जी, जब बात शुरू हो रही थी तो मुझे लगा था कि आप साधना आदि का पूरी तरह निषेध कर रहे हैं, लेकिन अब लग रहा है कि निषेध सिर्फ इसलिए था कि अपरिपक्व व्यक्ति वैसा ना करे। दूसरा, आपने ध्यान का उदाहरण लेकर कहा था कि ध्यान करने वाला और जिसका ध्यान किया जा रहा है, वह बाहरी चीज हो गई; लेकिन वाल्मीकि जी 'मरा मरा' के रूप में ध्यान तो कर ही रहे थे — तो सहायता के लिए उसका उपयोग किया जा सकता है? (P23-0005)
  307. गुरु जी, आप साधक को समझाकर कहां पर पहुंचाना चाहते हो? (P23-0013)
  308. गुरु जी, ये साधनाएं, विधियां तो स्वयं को जानने के लिए करते हैं — मूल प्रश्न तो यही रहता है कि स्वयं को जानें। (P23-0023)
  309. गुरु जी, पहले भाव बनता है कि एकांत में जाएं, वहां हम अपनी साधना अच्छी तरह से कर पाएंगे; लेकिन जब एकांत मिलता है, सानिध्य मिलता है, तो वहां व्याकुलता होती है, भागने का मन होता है। ऐसा क्यों? हम एकांत को बर्दाश्त क्यों नहीं कर पाते? (P23-0046)
  310. गुरु जी, कोई साधक लंबी यात्रा करके, बहुत मशक्कत करके 99 पर पहुंचा है और वहां से भी एक कदम पीछे लौट आता है, क्योंकि उसे पता नहीं चलता कि वह कहां तक पहुंचा। गुरु तो उसी रास्ते से गुजरा है और उस पर पूरा काम कर रहा है — तो क्या 99 पर गुरु उसे संभाल नहीं सकता, थोड़ा आराम करवा दे, समझा दे, या धक्का मार दे, जैसे लोग किसी की बुरी घड़ी टलने तक उसे रोक लेते हैं? (P23-0129)
  311. गुरु जी, साधक क्यों बार-बार फिसलकर माया-नरक में गिर जाता है? (P23-0143)
  312. गुरु जी, अपनों की कुटिया से जाने के बाद साधक की घर में दिनचर्या कैसी होनी चाहिए, और लोगों से व्यवहार कैसा हो? (P23-0165)
  313. गुरु जी, साधक का आत्मबल न टूटे, इसके लिए कोई दृढ़ संकल्प बताइए। (P23-0170)
  314. गुरु जी, आपने कौन-कौन सी साधना करके आत्म-अनुभूति पाई है? कृपया बताइए। (P23-0176)
  315. गुरु जी, आपने कहा कि साधना 'तेरा' में होती है, 'मेरा' में नहीं — इसका क्या मतलब है? (P23-0186)
  316. योगी जी, अगर साधना से आदमी के अंदर सामर्थ्य भी आ रहा है, बल भी आ गया, और उसकी दबी हुई इच्छाएं भी उजागर हो रही हैं — तो अगर वो साधना भी करता रहे और अपनी इच्छाओं की पूर्ति भी करता रहे, तो इससे क्या होगा? (P24-0089)
  317. गुरु जी, जो सेवा कर रहा है, क्या उसे साधना की जरूरत है? (P24-0109)
  318. गुरु जी, सेवा में तो दिखता है कि हम कुछ कर रहे हैं — खुद को भी लगता है और गुरु की नजरों में भी रहता है। साधना में तो दिखता ही नहीं, और साधना में अहम नहीं आ जाएगा? (P24-0110)
  319. गुरु जी, सेवा करते हुए साधना नहीं हो सकती क्या? (P24-0111)
  320. गुरु जी, साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है? (P24-0128)
  321. गुरु जी, कल आपने बोला था कि नसीब से सत्कर्म मिलता है। यहां जो साधक अपने आत्मिक कल्याण के लिए आया है, उसे अपने हाथों से भोजन (प्रसादी) कराना क्या सत्कर्म है? और कोई बार-बार दरवाजे पर खाने आए तो? (P24-0141)
  322. गुरु जी, मोक्ष मार्ग पर 99% साधक क्यों फेल होते हैं? (P25-0002)
  323. गुरु जी, क्या सेवा और साधना ही मार्ग है? 12 साल वही करना है? (P25-0005)
  324. प्रभु, मैंने आपसे जो भी प्रश्न किए, उनमें मुझसे जो भी गलती हुई हो, आप और सुनने वाले सभी साधक मुझे माफ करने की कृपा करें। (P25-0027)
  325. गुरु जी, क्या ईमानदारी और सत्कर्म से हम मोक्ष, परमात्मा तक अवश्य पहुंच जाएंगे, या साधना में चलते-चलते धीरे-धीरे पता चलेगा? कृपया विस्तार से समझाएं। (P25-0031)
  326. गुरुदेव, हमारा सोने-जागने का कोई नियम नहीं है। जब सोते हैं तो पूरी तरह सोते हैं, और जब कार्य, साधना या सत्कर्म में लगते हैं तो वहां भी पूरी तरह लगते हैं। क्या यह गलत है? (P25-0067)
  327. गुरुदेव, क्या केवल नाम साधना करनी है? मार्गदर्शन करें। (P25-0074)
  328. गुरु जी, जैसे-जैसे मैं साधना बढ़ाना चाहती हूं, चारों तरफ से संकट घेर लेते हैं। क्या प्रकृति मेरी परीक्षा ले रही है? (P25-0082)
  329. गुरु जी, सेवा और साधना से क्या धुलेगा? (P25-0094)
  330. गुरु जी, जब हम साधना में बैठते हैं तो जो विचार आते हैं, हम फिर उनकी जड़ में जाते हैं कि उसके पीछे राग है या द्वेष है या और कोई दोष है — क्या उसका ऐसे पता लगाना पड़ता है? (P25-0123)
  331. गुरुदेव, लोग आत्मज्ञान के साधक होकर भी दुनियादारी की ज्यादा बातें करते हैं और आनंद ढूंढते रहते हैं। ऐसा क्यों होता है? क्या हम जन्म-जन्मांतरों के संस्कारों में लिपटे हुए हैं? (P25-0176)
  332. बहुत दिन से जरूरत में जी रहे हैं। उसके बाद अब साधना कैसे करें? (P25-0188)
  333. किसी आश्रम में साधना के लिए बड़ा योगदान (शुल्क) देना पड़ता है और हम उतना नहीं दे पाएं, तो क्या करें? (P25-0193)
  334. गुरुदेव, एक साधक में हठ योग की स्थिति कब उत्पन्न होती है? (P25-0198)
  335. गुरु जी, मैं 9:00 बजे खाना खा लेता हूं। उसके बाद मैं साधना नहीं कर पाता, मुझे तुरंत नींद आ जाती है। क्या करूं — खाना खाऊं या नहीं? (P26-0001)
  336. गुरु जी, जब साधक सत्संग में बैठते हैं तो अपने शरीर पर कैसे नियंत्रण रखें? सत्संग चलते समय शरीर में हलचल होती है — कहीं पैर दुखता है, कहीं खुजलाहट होती है — जिससे बाजू वाले भी डिस्टर्ब होते हैं। (P26-0028)
  337. गुरु जी, आपने पहले बोला था कि (साधना के लिए निकलने से पहले) घर से परमिशन चाहिए होती है — उसका क्या मतलब है? (P26-0057)
  338. गुरु जी, बुरे कर्मों का फल तो किसी भी साधक या मनुष्य के लिए भोगना जरूरी है, वरना प्राप्ति में दूरी हो सकती है? सोच यह भी रहती है कि माला जपेंगे, पूजा-पाठ करेंगे तो जो जोर का पड़ने वाला है वह धीमा पड़ेगा। (P26-0075)